# Bazm e Shayari :: बज़्म ए शायरी -Hindi / Urdu Poetry, Ghazals, Shayari > A huge collection of selected Ghazals of famous Hindi and Urdu poets. ## Posts - [मैंने तुम्हे कितना सोचा ज़रीन कभी सोचा तुमने..](https://bazmeshayari.com/maine-tumhe-kitna-socha/): इश्क़ सहरा है कि दरियाँ कभी सोचा तुमनेतुझसे क्या है मेरा नाता कभी सोचा तुमने ? हाँ मैं - [हम शज़र से नहीं साये से वफ़ा करते है...](https://bazmeshayari.com/shazar-se-nahi-saye-se/): हम शज़र से नहीं साये से वफ़ा करते हैयही है वजह कि हम लोग दगा करते है, हम - [वो दौर और था वो महबूबा और थी...](https://bazmeshayari.com/wo-daur-aur-tha/): वो दौर और था वो महबूबा और थीजिनके आशिको को इश्क़ में मुक़ाम मिला है ये दौर और - [कल यूँ ही तेरा तज़किरा निकला...](https://bazmeshayari.com/kal-yun-hi-jo-tera/): कल यूँ ही तेरा तज़किरा निकलाफिर जो यादो का सिलसिला निकलालोग कब कब के आशना निकलेवक़्त कितना गुरेज़ - [आँख से फिर न बहेगा दिल ए बर्बाद का दुःख...](https://bazmeshayari.com/aankh-se-fir-na-bahega/): आँख से फिर न बहेगा दिल ए बर्बाद का दुःखजब परीजाद समझ लेगी अनाज़ाद का दुःख याद करता - [लम्हे लम्हे के सियासत पर नज़र रखते है](https://bazmeshayari.com/lamhe-lamhe-ke-siyasat/): लम्हे लम्हे के सियासत पर नज़र रखते हैहमसे दीवाने भी दुनियाँ की ख़बर रखते है इतने नादान भी - [बहुत रोया वो हमको याद कर के...](https://bazmeshayari.com/bahut-roya-wo-hamko/): बहुत रोया वो हमको याद कर केहमारी ज़िन्दगी बर्बाद कर के, पलट कर फिर यही आ जाएँगे हमवो - [तलाश अपना मैं नाम करूँ...](https://bazmeshayari.com/talash-apna-main-naam/): किसी रोज़ शाम के वक़्तसूरज के आराम के वक़्तमिल जाए जो साथ तेराहाथ में ले कर हाथ तेरादूर - [ख़ुदा गारत करे ऐसे वतन के दुश्मन को...](https://bazmeshayari.com/khuda-garat-kare-aise/): जिसको देखो वही इक्तिदार चाहता हैयार चाहता है प्रोटोकॉल मर्ज़ी का, हर कोई चाहता है बनना सियासतदाँसियासत की - [जो मैं भी रूठा तो सुबह तक तू सजी सजाई पड़ी रहेगी](https://bazmeshayari.com/jo-main-rutha-to/): ये लाल डिबिया में जो पड़ी है वो मुँह दिखाई पड़ी रहेगीजो मैं भी रूठा तो सुबह तक - [तेरे उकताते हुए लम्स से महसूस हुआ...](https://bazmeshayari.com/bichhadne-ka-waqt-hua/): तेरे उकताते हुए लम्स से महसूस हुआअब बिछड़ने का तेरे वक़्त हुआ चाहता है, अजनबियत तेरे लहज़े की - [इससे पहले कि कोई इनको चुरा ले](https://bazmeshayari.com/isse-pahle-ki-koi/): इससे पहले कि कोई इनको चुरा ले, गिन लोतुमने जो दर्द किये मेरे हवाले, गिन लो चल के - [किसी ने ज़िस्म, किसी ने ज़मीर बेचा है](https://bazmeshayari.com/kisi-ne-jism-kisi-ne-zamir/): हरीस दिल ने ज़माना कसीर बेचा हैकिसी ने ज़िस्म, किसी ने ज़मीर बेचा है, नहीं रही बशरियत की - [मेरा नहीं तो वो अपना ही कुछ ख्याल करे](https://bazmeshayari.com/mera-nahi-to-apna-hi/): मेरा नहीं तो वो अपना ही कुछ ख्याल करेउसे कहो कि ताअल्लुक़ को फिर बहाल करे मिले तो - [मुझे ख़बर नहीं कितने ख़सारे रखे गए](https://bazmeshayari.com/mujhe-khabar-nahi-kitne-sahare/): मुझे ख़बर नहीं कितने ख़सारे रखे गएमेरे नसीब में सब गम तुम्हारे रखे गए हमारे साथ मुहब्बत में - [हाँ, ये ही मुहब्बत है , मुहब्बत एक हकीक़त है...](https://bazmeshayari.com/haan-ye-hi-muhabbat-hai/): मैं रूठा था मुहब्बत सेकि मुहब्बत कुछ नहीं होती, मुहब्बत तो फ़क़त दिखवा हैकि मुहब्बत झूठ है लोगो, - [मेरी हो के भी तुम मेरी नहीं....](https://bazmeshayari.com/meri-ho-ke-bhi-tum-meri-nahi/): मेरी हो के भी तुम मेरी नहींगिला तो नहीं पर ये मलाल है, अगरचे मेरे पास तुम नहीं - [जिनकी सूरत पे तुम्हारा सारा शहर मरता है...](https://bazmeshayari.com/shayri-on-surat-in-hindi/): ये जो बात बात में उन हसीन आँखों की बात करते होवो उन आँखों में हमारा अक्स रखते - [ताअज्ज़ुब है अँधे आईना दिखा रहे है...](https://bazmeshayari.com/andhe-aaina-dikha-rahe-hai-shayri-in-hindi/): मुझ में है खामियाँ मुज़रिम बता रहे हैताअज्ज़ुब है अँधे आईना दिखा रहे है, ज़ुल्म तो ये है - [तू कर ले नज़र अंदाज़ अभी अपने अंदाज़ में](https://bazmeshayari.com/kar-le-nazar-andaz/): तू कर ले नज़र अंदाज़ अभी अपने अंदाज़ मेंहम हँसते हुए तेरे ज़ुल्म ओ सितम सह जाएँगे, मगर - [जब मुझको सब क़ुबूल था, तुम क्यों चले गए ?](https://bazmeshayari.com/jab-sab-qubool-tha/): ये भी कोई उसूल था ? तुम क्यों चले गए ?जब मुझको सब क़ुबूल था, तुम क्यों चले - [हसीन रुत में...उदास क्यों हो ?](https://bazmeshayari.com/shayri-udas-kyo-ho/): हसीन रुत में गुलाब चेहरोंमुझे बताओ उदास क्यों हो ? दिलो पे बीती हुई कहानीमुझे सुनाओ उदास क्यों - [सवाल है कि उसको ऐतबार क्यों नहीं रहा ?](https://bazmeshayari.com/shayri-on-aetbar-in-hind/): सवाल ये नहीं कि वो पुकार क्यों नहीं रहासवाल है कि उसको ऐतबार क्यों नहीं रहा ? ये - [शायद समझ ही न पाए ज़माना मुहब्बत..](https://bazmeshayari.com/shayad-samjh-hi-na-paye/): हकीक़त है या फ़साना मुहब्बतपतंगे का ख़ुद को जलाना मुहब्बत जो तारीफ़ ए फ़रहाद शिरीन से पूछेतो बोली - [जवाब उसका नहीं है कोई लाज़वाब है वो](https://bazmeshayari.com/khubsurati-shayri-in-hindi/): ग़ज़ल का हुस्न और गीत का शबाब है वोनशा है जिसमे सुखन का वही शराब है वो उसे - [ऐसा कोई लम्हा होता जिसमे तन्हा होते हम !](https://bazmeshayari.com/aisa-koi-lamha-hota/): ऐसा कोई लम्हा होता जिसमे तन्हा होते हमचुपके चुपके करते बातें यूँ न रुसवा होते हम, पूरा हर - [हजारो बार सोचोगे हमें तहरीर करने तक](https://bazmeshayari.com/shayri-on-tahrir/): हमें दरियाफ़त करने से हमें तसखीर करने तकबहुत है मरहले बाक़ी, हमें जंज़ीर करने तक, हमारे हिज़्र के - [दोस्तों को आँसूओ का तोहफ़ा मत देना](https://bazmeshayari.com/dosti-shayri-in-hindi/): गर करो जहाँ में किसी से भी दोस्तीतो फिर ताउम्र उसको धोखा मत देना, खिला कर लबो पर - [गैरो में तुमने मुझको अपना कहा शुक्रिया](https://bazmeshayari.com/shayri-on-dosti-in-hindi-3/): दुनियाँ के फ़िक्र ओ गम से आज़ाद किया शुक्रियाऐ दोस्त ! तेरा और तेरी दोस्ती का शुक्रिया , - [ऐ दोस्त ! तूने दोस्ती का हक़ अदा किया](https://bazmeshayari.com/shayri-on-dosti-in-hindi-2/): ऐ दोस्त तूने दोस्ती का हक़ अदा कियाअपनी ख़ुशी लुटा कर मेरा गम घटा दिया, कहने को तो - [मुहब्बत सीप का मोती, बहर की पैकरानी है](https://bazmeshayari.com/muhabbat-shayri-in-hindi/): कौन कहता है मुहब्बत बस एक कहानी हैमुहब्बत तो सहीफ़ा है, मुहब्बत आसमानी है, मुहब्बत को खुदारा तुम - [हमारे मुल्क में तमाशे अज़ीब हो रहे है](https://bazmeshayari.com/siyasat-shayri-in-hindi/): हमारे मुल्क में तमाशे अज़ीब हो रहे हैअमीर और अमीर, ग़रीब और ग़रीब हो रहे है, मुल्क की - [दोस्ती में कहाँ कोई उसूल होता है](https://bazmeshayari.com/shayri-on-dosti-in-hindi/): सच्ची दोस्ती में कहाँ कोई उसूल होता हैयार गरीब हो या अमीर बेशक़ क़ुबूल होता है गरज़ नहीं - [वक़्त काटना उससे पूछो हिज़्र में जिसकी गुज़री है](https://bazmeshayari.com/hizr-me-jiski-guzri-hai/): दर्द ए दिल के कम होने का तन्हा कुछ सामान हुआहम भी अब कुछ दिन जी लेंगे इसका - [समंदर और साहिल प्यास की ज़िन्दा अलामत है](https://bazmeshayari.com/samandar-aur-sahil/): तुम्हारा मुन्तज़िर हूँ तो हज़ारों घर बनाता हूँवो रस्ते बनते जाते है कुछ इतने दर बनाता हूँ, जो - [ऐसा शज़र ए बख्त सूख ही जाए तो बेहतर है,](https://bazmeshayari.com/shayri-on-bewafai-in-hindi-2/): सेहरा में साया तलक ना दे सके मुसाफ़िर को ऐसा शज़र ए बख्त सूख ही जाए तो बेहतर - [तेरे शहर वाले मेरा मौज़ू ए सुखन जानते है](https://bazmeshayari.com/mauzu-e-sukhan/): तू गज़ल ओढ़ के निकले कि धनक ओट छुपेलोग जिस रूप में देखे तुझे पहचानते है, यार तो - [कोई रब से नहीं माँगता](https://bazmeshayari.com/shayari-on-life-in-hindi/): है आशना भी अज़नबीनफरतो की आड़ में, सब की ज़िन्दगी है रवां दवांख़ुदगर्ज़ियो के मदार में, कोई मंज़िलो - [मैं अक्सर भूल जाता हूँ](https://bazmeshayari.com/hindi-shayri-on-main-aksar-bhool-jata-hoo/): मैं अक्सर भूल जाता हूँ…. कहाँ ख़ामोश रहना थाकहाँ शिकवा न करना थाकहाँ ज़ुमला न कसना थाकहाँ हरगिज़ - [समुंदरों के लिए सीपियाँ बनाते थे](https://bazmeshayari.com/shayari-on-humanity-in-hindi/): अजीब लोग थे वो तितलियाँ बनाते थेसमुंदरों के लिए सीपियाँ बनाते थे वही बनाते थे लोहे को तोड़ - [वो जानता ही नहीं है कि मुफ़्लिसी क्या है ?](https://bazmeshayari.com/hindi-shayari-on-muflisi/): वो जानता ही नहीं है कि मुफ़्लिसी क्या है ?गुज़र रही है जो मुश्किल से ज़िन्दगी क्या है - [तू मेरी रूह का हिस्सा है, तू ही जान मेरी](https://bazmeshayari.com/shayari-on-love-in-hindi/): जब भी सोचा कभी अपना तो हमारा सोचा क्या मिला और हुआ कितना ख़सारा सोचा ?बाद मुद्दत के - [तुझे भूलने की दुआ करूँ](https://bazmeshayari.com/hindi-shayri-on-shikayat/): तुझे इस क़दर है शिकायतेंकभी सुन ले मेरी हिकायते, तुझे गर न कोई मलाल होमैं भी एक तुझसे - [ख़रीद कर जो परिंदे उड़ाए जाते है](https://bazmeshayari.com/shayari-on-parinde-in-hindi/): ख़रीद कर जो परिंदे उड़ाए जाते हैंहमारे शहर में कसरत से पाए जाते है, मैं देख आया हूँ - [ये इत्तेफ़ाक थोड़ी है](https://bazmeshayari.com/bazm-e-shayri-shayari-in-hindi/): मिल के तुमको छोड़ दे कोई मज़ाक थोड़ी है हम दोनों जो मिले हैये इत्तेफ़ाक थोड़ी है, मिल - [बड़े बेमुरौत होते है ये हुस्न वाले](https://bazmeshayari.com/hindi-shayri-shayari-in-hindi/): कही दिल लगाने की कोशिश न करना मुहब्बत की झूठी अदाओं पे साहबजवानी लुटाने की कोशिश न करना, - [किसी की आँखों में ऐसा कभी ख़ुमार न था](https://bazmeshayari.com/hazaro-log-the-kahne/): किसी की आँखों में ऐसा कभी ख़ुमार न थाकि जिसका सारे जहाँ में कोई उतार न था, न - [मोहब्बत क्या करेंगे वो जो जाँ देने से डरते हैं](https://bazmeshayari.com/shayri-in-hindi-3/): मुसाफ़िर भी सफ़र में इम्तिहाँ देने से डरते हैंमोहब्बत क्या करेंगे वो जो जाँ देने से डरते हैं - [दो चार क़दम चलने को चलना नहीं कहते](https://bazmeshayari.com/shayri-in-hindi-2/): मंज़िल पे न पहुँचे उसे रस्ता नहीं कहतेदो चार क़दम चलने को चलना नहीं कहते इक हम हैं - [किसी चिड़ियाँ के बच्चे की](https://bazmeshayari.com/shayri-in-hindi/): मुझे गुमनाम रहने काकुछ ऐसा शौक है हमदमकिसी बेनाम सहरा मेंभटकती रूह हो जैसे, जहाँ साये तरसते होकिसी - [Inspirational Quotes](https://bazmeshayari.com/inspirational-quotes-2/): जैसे कोयल की खूबसूरती उसके आवाज़ में हैवैसे ही एक औरत की खूबसूरती उसका अपनेपरिवार के प्रति समर्पण - [इख़्तियार ए संजीदगी
अक्सर जवानी उजाड़ देती है](https://bazmeshayari.com/shayari/): इख़्तियार ए संजीदगीअक्सर जवानी उजाड़ देती है रवानी ए ज़िन्दगी कोवहशत उजाड़ देती है, एक छोटी सी गलती - [किसी का दिखावे का प्यार नहीं](https://bazmeshayari.com/belaus-muflisi-bhi-hai/): बेलौस मुफ़्लिसी भी है क़ुबूल मुझेमगर अमीर ए शहर बदकार नहीं, दुश्मन ए बदतर से भी निभा लूँगामगर - [लम्हा भर वो भी तड़पती होगी](https://bazmeshayari.com/%e0%a4%b2%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a5%8b-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80/): तड़पता हूँ मैं लैल ओ नहारलम्हा भर वो भी तड़पती होगी दुआओं में वो भी ख़ुदा सेकोई फ़रियाद - [बेलौस प्यार कहाँ करते है लोग ?](https://bazmeshayari.com/%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%8c%e0%a4%b8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b2/): रूबरू हो कर भी इस ज़माने मेंकिसी पे ऐतबार कहाँ करते है लोग ? मतलबपरस्तो की इस दुनियाँ - [इन्सान हूँ इंसानियत की तलब है](https://bazmeshayari.com/insan-hoon-insaniyat-ki/): इन्सान हूँ इंसानियत की तलब हैकिसी खुदाई का तलबगार नहीं हूँ, ख़ुमारी ए दौलत ना शोहरत का नशाअबतक - [अपनी खताओ पे शर्मिन्दा भी हो जाता हूँ](https://bazmeshayari.com/apni-khataao-pe-sharminda/): अपनी खताओ पे शर्मिन्दा भी हो जाता हूँमुझे तुम्हारी तरह बहाने बनाना नहीं आता, गर हूँ ख़तावार तो - [पहले मगफिरत की दुआ कीजिए](https://bazmeshayari.com/shayri-on-magfirat-in-hindi/): चाहते है इज्ज़त ओ मुक़ाम ए बलंदी तोसर को खालिक़ के आगे झुका लीजिए, गर है ख्वाहिश पाने - [फूँक मार कर बुझाने में लगे है](https://bazmeshayari.com/shayri-on-naari-in-hindi/): कइयो ने कोशिश कर लीकई और मिटाने में लगे है, सदियों से ज़ालिम ज़माने वालेनारियो को गिराने में - [इल्ज़ाम फक़त ख्यालात पे क्यों आता है??](https://bazmeshayari.com/ilzam-shayri-in-hindi/): हसरत ए दीद ओ वस्ल लिए ख्याल मेरातेरे हुस्न ए ख्वाबीदा से जब टकराता है, ख्वाहिश ए जानाँ - [आते ही चुनाव तुमको हमारा ख्याल आता है](https://bazmeshayari.com/shayri-on-election-in-hindi/): वाह ! रे सियासत ए हिंदुस्तानतुझे दाँव पेच का खेल क्या कमाल आता है, यूँ तो रहा करते - [ख़ुदा की नज़र में एक सा हर बशर होता है](https://bazmeshayari.com/shayri-on-khuda-in-hindi/): मुफ़्लिस हो कि रईसए शहरकोईख़ुदा की नज़र में एक सा हर बशर होता है, इबादत हो के प्रार्थना - [परिंदा समझ कर शिकार कर गई](https://bazmeshayari.com/shayri-on-bewafai-in-hindi/): वो माहिर थी फन ए अय्यारी मेंअपने इश्क़ में मुझे बीमार कर गई, अनाड़ी सी शख्सियत थी अपनीवो - [बहाना गरीबो को अधिकार दिलाना रहेगा](https://bazmeshayari.com/bahana-shayri-in-hindi/): मौसम ए सर्दी में बारिश ए ख़ास चल रहा है हमारी गलियों में मेढको का आना जाना रहेगा, - [अमीर ए मुल्क के नसीब है उरूज़ पे](https://bazmeshayari.com/amir-e-mulq-ke/): अमीर ए मुल्क के नसीब है उरूज़ पे हम गरीबो के हिस्से ज़वाल आ रहे है, मुल्क में - [अब जो लौटे हो इतने सालों में...](https://bazmeshayari.com/ab-jo-laute-ho-itne-saalo-me/): अब जो लौटे हो इतने सालों मेंधूप उतरी हुई है बालों में, तुम मिरी आँख के समुंदर मेंतुम - [आँखों से मिरी इस लिए लाली नहीं जाती...](https://bazmeshayari.com/aankho-se-mere-is-liye-lali-nahi-jati/): आँखों से मिरी इस लिए लाली नहीं जातीयादों से कोई रात जो ख़ाली नहीं जाती, अब उम्र न - [बाँध ले हाथ पे सीने पे सजा ले तुमको...](https://bazmeshayari.com/baandh-le-haath-pe/): बाँध ले हाथ पे सीने पे सजा ले तुमकोजी में आता है कि ताबीज़ बना ले तुमको, फिर - [तुम मेरी ख्वाहिश नहीं हो....](https://bazmeshayari.com/tum-meri-khwahish-nahi-ho/): तुम मेरी ख्वाहिश नहीं होख्वाहिश पूरी हो जाए तो तलब नहीं रहती, तुम मेरी आदत भी नहीं होआदत - [जो रहता है दिल के क़रीब...](https://bazmeshayari.com/jo-rahta-hai-dil-ke-qarib/): जो रहता है दिल के क़रीबअक्सर वही दूर हुआ करता है, जो नहीं हो मयस्सर हमकोवही मतलूब हुआ - [संभाला होश है जबसे मुक़द्दर सख्त तर निकला...](https://bazmeshayari.com/sambhala-hosh-hai-jabse/): संभाला होश है जबसेमुक़द्दर सख्त तर निकलाबड़ा है वास्ता जिससेवही ज़ेर ओ ज़बर निकला, सबक़ देता रहा मुझकोसदा - [तुम्हे बहार की कलियाँ जवाँ पुकारती है...](https://bazmeshayari.com/tumhe-bahaar-ki-kaliyan-javaan/): तुम्हे बहार की कलियाँ जवाँ पुकारती हैकहती मरहबा ! सब तितलियाँ पुकारती है, न बोसा प्यार का अंबर - [होश में रह के बे हवास फिर रहे है आज....](https://bazmeshayari.com/hosh-me-rah-ke-be-hawaas-fir-rahe-hai/): होश में रह के बे हवास फिर रहे है आजतेरे नगर में हम उदास फिर रहे है आज, - [कहे दुनियाँ उसे ऐसे ही बेकार न आये...](https://bazmeshayari.com/kahe-duniyan-use-aise-hi-bekar-naa-aaye/): कहे दुनियाँ उसे ऐसे ही बेकार न आयेक़िस्मत का मेरी बन के ख़रीदार न आये, इस बार मुलाक़ात - [कर के सारी हदों को पार चला....](https://bazmeshayari.com/kar-ke-saari-hado-ko-paar-chala/): कर के सारी हदों को पार चलाआज फिर से मैं कु ए यार चला, उसने वायदा किया था - [पलकों को तेरी शर्म से झुकता हुआ मैं देखूँ...](https://bazmeshayari.com/palko-ko-teri-sharm-se-jhukta-hua/): पलकों को तेरी शर्म से झुकता हुआ मैं देखूँधड़कन को अपने दिल की रुकता हुआ मैं देखूँ, पीने - [रुख से नक़ाब उनके जो हटती चली गई...](https://bazmeshayari.com/rukh-se-naqab-unke/): रुख से नक़ाब उनके जो हटती चली गईचादर सी एक नूर की बिछती चली गई, आये वो मेरे - [हर नाला तिरे दर्द से अब और ही कुछ है....](https://bazmeshayari.com/har-nala-tere-dard-se-ab-aur-hi-kuch-hai/): हर नाला तिरे दर्द से अब और ही कुछ हैहर नग़्मा सर-ए-बज़्म-ए-तरब और ही कुछ है, अरबाब-ए-वफ़ा जान - [आरज़ू मैं ने कोई की ही नहीं....](https://bazmeshayari.com/charkh-se-kuchh-ummid-thi-hi-nahi/): चर्ख़ से कुछ उमीद थी ही नहींआरज़ू मैं ने कोई की ही नहीं, मज़हबी बहस मैं ने की - [जिन्हें कर सका न क़ुबूल मैं...](https://bazmeshayari.com/jinhe-kar-saka-n-qubul-main/): जिन्हें कर सका न क़ुबूल मैंवो शरीक़ राह ए सफ़र हुए, जो मेरी तलब मेरी आस थेवही लोग - [अभी क्या कहे अभी क्या सुने ?](https://bazmeshayari.com/abhi-kya-kahe-abhi-kya/): अभी क्या कहे अभी क्या सुने? कि सर ए फसील ए सकूत ए जाँकफ़ ए रोज़ ओ शब - [कभी ऐसा भी होता है ?](https://bazmeshayari.com/kabhi-aisa-bhi-hota-hai-ki/): कभी ऐसा भी होता है ?कि जिसको हमसफ़र जानेकि जो शरीक़ ए दर्द होवही हमसे बिछड़ जाए, कभी - [दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के...](https://bazmeshayari.com/do-jahan-teri-muhabbat-me-haar-ke/): दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार केवो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के, वीराँ है मय-कदा ख़ुम-ओ-साग़र - [ये मिस्रा नहीं है वज़ीफ़ा मिरा है...](https://bazmeshayari.com/ye-misra-nahi-wazifa-mera-hai/): ये मिस्रा नहीं है वज़ीफ़ा मिरा हैख़ुदा है मोहब्बत मोहब्बत ख़ुदा है, कहूँ किस तरह मैं कि वो - [वो सिवा याद आए भुलाने के बा'द...](https://bazmeshayari.com/wo-siwa-yaad-aaye-bhulane-ke-baad/): वो सिवा याद आए भुलाने के बा’दज़िंदगी बढ़ गई ज़हर खाने के बा’द, दिल सुलगता रहा आशियाने के - [वो हमें जिस क़दर आज़माते रहे...](https://bazmeshayari.com/wo-hame-jis-kadar-aazmate-rahe/): वो हमें जिस क़दर आज़माते रहेअपनी ही मुश्किलों को बढ़ाते रहे, वो अकेले में भी जो लजाते रहेहो - [ज़िन्दगी खाक़ न थी बस खाक़ उड़ाते गुज़री...](https://bazmeshayari.com/zindagi-khaaq-thi-khaaq-udate-guzri/): ज़िन्दगी खाक़ न थी बस खाक़ उड़ाते गुज़रीतुझसे क्या कहते, तेरे पास जो आते गुज़री, दिन जो गुज़रा - [गुरेज़ कर के मुसाफ़िर कोई गुज़र भी गया...](https://bazmeshayari.com/gurez-kar-ke-musafir-koi/): गुरेज़ कर के मुसाफ़िर कोई गुज़र भी गयान जाने कैसे मेरी रूह में उतर भी गया, ये ज़ख्म - [ज़रा सी देर ठहर कर सवाल करते है...](https://bazmeshayari.com/zara-see-der-thahar-kar/): ज़रा सी देर ठहर कर सवाल करते हैसफ़र से आये हुओ का ख्याल करते है, मैं जानता हूँ - [महफिले लूट गई जज़्बात ने दम तोड़ दिया...](https://bazmeshayari.com/mahfil-e-loot-gai/): महफिले लूट गई जज़्बात ने दम तोड़ दियासाज़ ख़ामोश है नगमात ने दम तोड़ दिया, अनगिनत महफिले महरूम - [दिल मेरा मिस्र का बाज़ार भी हो सकता है...](https://bazmeshayari.com/dil-mera-misr-ka-baazar-bhi/): दिल मेरा मिस्र का बाज़ार भी हो सकता हैकोई धड़कन का ख़रीदार भी हो सकता है, कोई हो - [नख्ल ए ममनूअ के रुख दोबारा गया](https://bazmeshayari.com/nakhl-e-mamnooa-ke/): नख्ल ए ममनूअ के रुख दोबारा गया, मैं तो मारा गयाअर्श से फ़र्श पर क्यूँ उतारा गया ? - [उस ने सुकूत-ए-शब में भी अपना पयाम रख दिया..](https://bazmeshayari.com/sukut-e-shab-me-bhi/): उस ने सुकूत-ए-शब में भी अपना पयाम रख दियाहिज्र की रात बाम पर माह-ए-तमाम रख दिया, आमद-ए-दोस्त की - [उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ...](https://bazmeshayari.com/usko-juda-hue-zamana/): उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआअब क्या कहें ये क़िस्सा पुराना बहुत हुआ, ढलती न थी - [मैं तुझको भूल के ज़िंदा रहूँ ख़ुदा न करे...](https://bazmeshayari.com/tujhko-bhool-ke-zinda-rahoo/): वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करेमैं तुझको भूल के ज़िंदा रहूँ ख़ुदा न - [दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती...](https://bazmeshayari.com/naa-ho-jurrat-to-muhabbat-nahi-milti/): दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलतीख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती , कुछ लोग - [धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो...](https://bazmeshayari.com/dhoop-me-niklo-ghataaon/): धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखोज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो, सिर्फ़ आँखों से - [ख़िर्द-मंदों से क्या पूछूँ कि मेरी इब्तिदा क्या है...](https://bazmeshayari.com/teri-raza-kya-hai/): ख़िर्द-मंदों से क्या पूछूँ कि मेरी इब्तिदा क्या हैकि मैं इस फ़िक्र में रहता हूँ मेरी इंतिहा क्या - [तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ....](https://bazmeshayari.com/tere-ishq-ki-inteha/): तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँमिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ, सितम हो कि हो वादा-ए-बे-हिजाबीकोई बात सब्र-आज़मा - [सितारों से आगे जहाँ और भी हैं...](https://bazmeshayari.com/sitaro-se-aage-jahan/): सितारों से आगे जहाँ और भी हैंअभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं, तही ज़िंदगी से नहीं ये - [लिखना नहीं आता तो मेरी जान पढ़ा कर...](https://bazmeshayari.com/likhna-nahi-aata-to/): लिखना नहीं आता तो मेरी जान पढ़ा करहो जाएगी तेरी मुश्किल आसान पढ़ा कर, पढ़ने के लिए अगर - [कुछ दूर हमारे साथ चलो दिल की कहानी कह देंगे](https://bazmeshayari.com/kuch-door-hamare-saath-chalo/): कुछ दूर हमारे साथ चलोहम दिल की कहानी कह देंगे, समझे न जिसे तुम आँखों सेवो बात ज़ुबानी - [वतन से दूर आ कर जो बड़ी दौलत कमाते है...](https://bazmeshayari.com/watan-se-door-aakar-jo/): वतन से दूर आ कर जो बड़ी दौलत कमाते हैकभी आओ हमें देखो कि गम कितना उठाते है, - [यूँ ही हर बात पे हँसने का बहाना आये...](https://bazmeshayari.com/yun-hi-har-baat-pe-hansne-ka-bahana/): यूँ ही हर बात पे हँसने का बहाना आयेफिर वो मासूम सा बचपन का ज़माना आये, काश ! - [अहल ए उल्फ़त के हवालो पे हँसी आती है...](https://bazmeshayari.com/ahle-ulfat-ke-hawalo-pe-hansi-aati-hai/): अहल ए उल्फ़त के हवालो पे हँसी आती हैलैला मज़नू की मिसालो पे हँसी आती है, जब भी - [ज़ी चाहता है फ़लक पे जाऊँ....](https://bazmeshayari.com/jee-chahta-hai-falaq-pe-jaaoon/): ज़ी चाहता है फ़लक पे जाऊँसूरज को गुरूब से बचाऊँ, बस मेरा चले जो गर्दिशो परदिन को भी - [अब तो शहरों से ख़बर आती है दीवानों की...](https://bazmeshayari.com/shaharo-se-khabar-aati-hai/): अब तो शहरों से ख़बर आती है दीवानों कीकोई पहचान ही बाक़ी नहीं वीरानो की, दिल में वो - [अंदाज़ हू ब हू तेरी आवाज़ ए पा का था...](https://bazmeshayari.com/andaz-hoo-ba-hoo/): अंदाज़ हू ब हू तेरी आवाज़ ए पा का थादेखा निकल के घर से तो झोंका हवा का - [जब तेरा हुक्म मिला तर्क ए मुहब्बत कर दी...](https://bazmeshayari.com/jab-tera-huqm-mila/): जब तेरा हुक्म मिला तर्क ए मुहब्बत कर दीदिल मगर उसपे वो धड़का कि क़यामत कर दी, तुझसे - [तलाशने सुकून को चला था एक रोज़ को...](https://bazmeshayari.com/talashne-chala-tha-sukun-ko/): तलाशने सुकून को चला था एक रोज़ कोनफ्स के पीछे चला था एक रोज़ वो, उसे ख़बर नहीं - [अब पहन लीजिये नक़ाबो को....](https://bazmeshayari.com/ab-pahan-lijiye-naqabo-ko/): अब पहन लीजिये नक़ाबो कोआने दीजिये ना इन्क़लाबो को, तोड़ कर ख़ुशबू लीजिये एक बारऔर मसल दीजिये गुलाबो - [किस तरह ये दिल हुआ तुम पर फ़िदा, लिख जाऊँगा](https://bazmeshayari.com/kis-tarah-ye-dil-hua-tum-pe-fida/): किस तरह ये दिल हुआ तुम पर फ़िदा, लिख जाऊँगाअपनी पेशानी पे अपनी हर खता लिख जाऊँगा, नेक - [शिद्दत से हो रहा है दिल बेक़रार आ जा...](https://bazmeshayari.com/shiddat-se-ho-raha-hai-dil-beqarar/): शिद्दत से हो रहा है दिल बेक़रार आ जामुमकिन नहीं है मुझसे अब इंतज़ार आ जा, इस बार - [वो दिखी थी आज ख़्वाब में मुझे....](https://bazmeshayari.com/wo-dikhi-thi-aaj/): वो दिखी थी आज ख़्वाब में मुझेचेहरा उनका गुलाब जैसा था, पड़ी जो नज़र तो झुकी न पलकवो - [कुछ लफ्ज़ अगर मुझे मिल जाएँ....](https://bazmeshayari.com/kuch-lafz-agar-mil-jaayen/): कुछ लफ्ज़ अगर मुझे मिल जाएँमैं उनमे तुझे तहरीर करूँ, अपनी ज़ात के रंग तुझमे भर करतुझे फिर - [धनक के रंग चुरा ले हमारा बस जो चले...](https://bazmeshayari.com/dhanak-ke-rang-chura-le/): धनक के रंग चुरा ले हमारा बस जो चलेतेरी हथेली में डाले हमारा बस जो चले, बना के - [चलो मंज़ूर है मुझको, मुझे कुछ भी सजा दे दो...](https://bazmeshayari.com/chalo-manzoor-hai-mujhko/): चलो मंज़ूर है मुझकोमुझे कुछ भी सजा दे दोसुनो ! गर मिल नहीं पाएतो एक दूजे से कहते - [जब से या रब मैं तेरे इस जहान में हूँ...](https://bazmeshayari.com/jabse-yaa-rab-main/): एक मुसलसल से इम्तिहान में हूँजबसे या रब मैं तेरे इस जहान में हूँ, सिर्फ़ इतना सा है - [ऐसा न हो कि हर एक शय में मुझे तेरा गुमाँ होने लगे](https://bazmeshayari.com/aisa-na-ho-ki-mujhe/): ये तो इस पर है कि कब और कहाँ होने लगेये तमाशा वो जहाँ चाहे वहाँ होने लगे, - [ग़ज़ल को फिर सजा के सूरत ए महबूब लाया हूँ...](https://bazmeshayari.com/gazal-ko-fir-saja-ke-surat-e-mahbub/): ग़ज़ल को फिर सजा के सूरत ए महबूब लाया हूँसुनो अहल ए सुखन ! मैं फिर नया असलूब - [दिल ए गुमशुदा ! कभी मिल ज़रा...](https://bazmeshayari.com/dil-e-gumshuda-kabhi-mil-zara/): दिल ए गुमशुदा ! कभी मिल ज़राकिसी ख़ुश्क खाक़ के ढेर परया किसी मकान की मुंडेर पर, दिल - [शिक़स्त ए ख़्वाब के अब मुझमे हौसले भी नहीं..](https://bazmeshayari.com/shikast-e-khwab-ke-ab-mujh-me/): आँखों में नींदों के सिलसिले भी नहींशिक़स्त ए ख़्वाब के अब मुझमे हौसले भी नहीं, नहीं नहीं ! - [यूँ ही उम्मीद दिलाते है ज़माने वाले...](https://bazmeshayari.com/yun-hi-ummid-dilate-hai/): यूँ ही उम्मीद दिलाते है ज़माने वालेकब पलटते है भला छोड़ के जाने वाले, तू कभी देख झुलसते - [कागज़ पर तहरीर दिलचस्प दास्तान हूँ मैं...](https://bazmeshayari.com/hasraton-se-bhara-qabristan/): हसरतों से भरा क़ब्रिस्तान हूँ मैंआबाद कर मुझे कि वीरान हूँ मैं, तसल्ली दे मुझको कि तू है - [तरसती आँखे, उदास चेहरा, नहीफ़ लहज़ा, बगैर तेरे...](https://bazmeshayari.com/tarasti-aankhe-udas-chehra/): तरसती आँखे, उदास चेहरा, नहीफ़ लहज़ा, बगैर तेरेबिखरी ज़ुल्फे, लिबास उजड़ा, वज़ूद ख़स्ता, बगैर तेरे, अमीक़ जंगल, घप - [मेरे जैसा बन जाओगे, जब इश्क़ तुम्हे हो जाएगा...](https://bazmeshayari.com/jab-ishq-tumhe-ho-jayega/): मेरे जैसा बन जाओगे, जब इश्क़ तुम्हे हो जाएगादीवारों से टकराओगे, जब इश्क़ तुम्हे हो जाएगा, हर बात - [दर्द का शहर बसाते हुए रो पड़ता हूँ...](https://bazmeshayari.com/dard-ka-shahar-basaate-hue-ro-padta-hoo/): दर्द का शहर बसाते हुए रो पड़ता हूँरोज़ घर लौट के आते हुए रो पड़ता हूँ जाने क्या - [बहुत सलीक़े से चीख ओ पुकार करते रहे...](https://bazmeshayari.com/bahut-salike-se-chikh-o-pukar/): बहुत सलीक़े से चीख ओ पुकार करते रहेहम अपने दर्द के मरकज़ पे वार करते रहे ज्यादा उम्र - [तुझसे मंसूब रहूँ तेरी कही जाऊँ पिया...](https://bazmeshayari.com/tujhse-mansub-rahoo/): तुझसे मंसूब रहूँ तेरी कही जाऊँ पियातेरी निस्बत से लिखी और पढ़ी जाऊँ पिया झूमती फिरती हवाओ की - [दर्द से यादो से अश्को से शनासाई है...](https://bazmeshayari.com/dard-se-yaado-se-ashko-se/): दर्द से यादो से अश्को से शनासाई हैकितना आबाद मेरा गोशा ए तन्हाई है, ख़ार तो ख़ार है - [हवा ए शाम ! ज़रा सा क़याम होगा न ?](https://bazmeshayari.com/hawa-e-shaam/): हवा ए शाम ! ज़रा सा क़याम होगा न ?चिराग़ ए जाँ को जलाओ, क़लाम होगा न ? - [अब तेरी याद से वहशत नहीं होती मुझ को...](https://bazmeshayari.com/ab-teri-yaad-se-wahshat-nahi/): अब तेरी याद से वहशत नहीं होती मुझ कोज़ख़्म खुलते हैं अज़िय्यत नहीं होती मुझ को, अब कोई - [जाते जाते वो हमको रुला कर चला गया...](https://bazmeshayari.com/jaate-jaate-wo-humko/): जाते जाते वो हमको रुला कर चला गयागम की आँधी से सामना कर कर चला गया, वो हमेशा - [कोई सिपाही नहीं बच सका निशानों से...](https://bazmeshayari.com/koi-sipahi-nahi-bach-saka/): कोई सिपाही नहीं बच सका निशानों सेगली में तीर बरसते रहे मकानों से, ये बर्बादी अचानक से थोड़ी - [उल्फ़त की नज़र से हमें एक बार तो देखो...](https://bazmeshayari.com/ulfat-ki-nazar-se-hame/): उल्फ़त की नज़र से हमें एक बार तो देखोकरते है क्या क्या तुम पे निसार तो देखो, जज़्बे - [जान ओ दिल हम उन्ही पे निसार करते है...](https://bazmeshayari.com/jaan-o-dil-unhi-pe-nisar/): जान ओ दिल हम उन्ही पे निसार करते हैहाँ है इक़रार सिर्फ उन्हें ही प्यार करते है, बंद - [भाइयो में फ़साद क्या करूँ मैं...??](https://bazmeshayari.com/bhaiyo-me-fasad-kya-karoo-main/): भाइयो में फ़साद क्या करूँ मैंबाप की ज़ायदाद क्या करूँ मैं, जिन में चुप रहने की नसीहत होऐसे - [मेरे दिल में मुहब्बत ज़रा देखिए...](https://bazmeshayari.com/mere-dil-me-muhabbat-zara/): मेरे दिल में मुहब्बत ज़रा देखिएचश्म ए पुरनम से मेरी वफ़ा देखिए, छोड़ जाएँगे मुझको ये एहसास हैजाते - [जाने कितने रकीब रहते है...](https://bazmeshayari.com/jaane-kitne-raqib-rahte-hai/): जाने कितने रकीब रहते हैज़िन्दगी के क़रीब रहते है, मेरी सोचो के आस्तां से परेमेरे अपने हबीब रहते - [ग़ज़ल की शक्ल में एक बात है सुनाने की...](https://bazmeshayari.com/gazal-ke-shakl-me-ek-baat/): ग़ज़ल की शक्ल में एक बात है सुनाने कीएक उसका नाम है वजह मुस्कुराने की, इस तरह राब्ता - [नहीं ऐसे किसी को तड़पाना चाहिए...](https://bazmeshayari.com/nahi-aise-kisi-ko-tadpana/): भूल पाते हम नहीं गुज़रा ज़माना चाहकर भीया खुदा नहीं ऐसे किसी को तड़पाना चाहिए, संगदिलो में भी - [रहा हूँ दुश्मनों में ख़ुश हमेशा....](https://bazmeshayari.com/raha-hoo-dushmano-me/): मुझे अपनों में उलझन ही रही हैरहा हूँ दुश्मनों में ख़ुश हमेशा, है इनकी इस अदा पे जान - [फ़ासले क़ुर्ब की पहचान हुआ करते है...](https://bazmeshayari.com/fasle-qurb-ki-pahchan/): फ़ासले क़ुर्ब की पहचान हुआ करते हैबेसबब लोग परेशान हुआ करते है, ये हकीक़त है जहाँ टूट के - [नींद ना आये फूलो पे, काँटो पे सोना पड़ता है...](https://bazmeshayari.com/neend-naa-aaye-phoolo/): यहाँ पल पल चलना पड़ता हैहर रंग में ढलना पड़ता है, हर मोड़ पे ठोकर लगती हैहर हाल - [सर रख कर रोने को शाना चाहिए था...](https://bazmeshayari.com/sar-rakh-kar-rone-ko/): सर रख कर रोने को शाना चाहिए थामैं तन्हा था तुझको आना चाहिए था, आज मैं आया था - [जिस शेर का उन्वान मुहब्बत थी, वो तुम थे...](https://bazmeshayari.com/jis-sher-ka-unwan-muhabbat-thi/): जिस शेर का उन्वान मुहब्बत थी, वो तुम थेजिस दर्द का दरमान मुहब्बत थी, वो तुम थे, रंगीन - [चाहा है तुझे मैंने तेरी ज़ात से हट कर...](https://bazmeshayari.com/chaha-hai-tujhe-teri/): चाहा है तुझे मैंने तेरी ज़ात से हट करइस बार खड़ा हूँ मैं रवायात से हट कर, तुम - [तुझे ना आयेगी मुफ़लिस की मुश्किलात समझ..](https://bazmeshayari.com/tujhe-naa-ayegi-muflis-ki/): तुझे ना आयेगी मुफ़लिस की मुश्किलात समझमैं छोटे लोगो के घर का बड़ा हूँ, बात समझ, मेरे अलावा - [हमको आना ही पड़ा परदेश कमाने के लिए...](https://bazmeshayari.com/humko-aana-hi-pada-pardesh/): राह से हिज़्र की दीवार हटाने के लिएहाथ भी जोड़े उसको मनाने के लिए, अपनी खातिर तो कभी - [फिर यूँ हुआ कि रास्ते यकज़ा नहीं रहे...](https://bazmeshayari.com/fir-yun-hua-ki/): फिर यूँ हुआ कि रास्ते यकज़ा नहीं रहेवो भी अना परस्त था मैं भी अना परस्त, फिर यूँ - [रात भी, नींद भी, कहानी भी...](https://bazmeshayari.com/raat-bhi-neend-bhi/): रात भी, नींद भी, कहानी भीहाय, क्या चीज़ है जवानी भी एक पैग़ाम-ए-ज़िन्दगानी भीआशिक़ी मर्गे-नागहानी भी इस अदा - [खो न जाए कहीं हर ख़्वाब सदाओं की तरह...](https://bazmeshayari.com/kho-naa-jaaye-har-khwab/): खो न जाए कहीं हर ख़्वाब सदाओं की तरहज़िंदगी महव-ए-तजस्सुस है हवाओं की तरह टूट जाए न कहीं - [कब तक यूँ बहारों में, पतझड़ का चलन होगा...](https://bazmeshayari.com/kabtak-yun-baharo-me/): कब तक यूँ बहारों में, पतझड़ का चलन होगाकलियों की चिता होगी, फूलों का हवन होगा, हर धर्म - [मेरे ख़ुदा मैं अपने ख़यालों को क्या करूँ..](https://bazmeshayari.com/mere-khuda-mai-apne/): मेरे ख़ुदा मैं अपने ख़यालों को क्या करूँअंधों के इस नगर में उजालों को क्या करूँ ? चलना - [हौसले गम से लड़ गए मेरे...](https://bazmeshayari.com/hausle-gam-se-lad-gaye/): हौसले गम से लड़ गए मेरेअश्क मुश्किल में पड़ गए मेरे, मैंने हिज़रत का बीज क्या बोयापाँव जड़ - [इश्क उनसे हुआ देखते देखते...](https://bazmeshayari.com/ishq-unse-hua-dekhte/): इश्क उनसे हुआ देखते देखतेहुस्न पर मर मिटा देखते देखते, कातिलाना अदा रोग देकर गईबेख़बर फ़िर रहा देखते - [साथ मुझको ही पाओगे जिधर जाओगे...](https://bazmeshayari.com/mujhko-hi-paaoge/): साथ मुझको ही पाओगे जिधर जाओगेइससे ज्यादा तुम्हे चाहा तो बिगड़ जाओगे, दिल ए नादान ने किया फिर - [चलो मौत को गले लगा कर देखे....](https://bazmeshayari.com/chalo-maut-ko-gale/): चलो मौत को गले लगा कर देखेज़िन्दगी से पीछा छुड़ा कर देखे, घुट घुट कर जीने से बारहा - [सोचा कि ख़ुद पे ज़रा सी इनायत कर लूँ..](https://bazmeshayari.com/khud-pe-inayat-kar-loo/): सोचा कि ख़ुद पे ज़रा सी इनायत कर लूँऐ ज़िन्दगी तुझसे वो पहली सी मुहब्बत कर लूँ, सुनाऊँ - [मैं सोचो के किस गुमाँ में था....](https://bazmeshayari.com/main-socho-ke-kis-guman-me-tha/): मैं सोचो के किस गुमाँ में थामैं किसी दूसरे जहान में था, रहने वाले आबाद हो न सकेकोई - [सब्ज़ गुम्बद से सदा आती है...](https://bazmeshayari.com/sabz-gumbad-se-sada-aati-hai/): सब्ज़ गुम्बद से सदा आती हैमुझको वो ताज़ा हवा आती है, चाँद भी तब ही चमक उठता हैजब - [एक चिड़ियाँ ने आज ये सवाल किया..](https://bazmeshayari.com/chidiya-ne-ye-sawal-kiya/): बैठ कर पास मेरे एक चिड़ियाँ ने आज ये सवाल कियाहम तो ठहरे परिंदे, इन्सान ने इन्सान का - [मेरे मुल्क की तो बिल्कुल खाम है सियासत...](https://bazmeshayari.com/mere-mulq-ki-kham-hai/): ये जो आवाम में फ़िक्र ए आम है सियासतमेरे मुल्क की तो बिल्कुल खाम है सियासत, नफ़रत का - [इन्सान भूल चुका है इन्सान की क़ीमत...](https://bazmeshayari.com/insan-bhool-chuka/): इन्सान भूल चुका है इन्सान की क़ीमतबाज़ार में बढ़ गई आज हैवान की क़ीमत, इक्तिदार में आते है - [तन्हाइयो में अश्क बहाने से क्या मिला...](https://bazmeshayari.com/tanhaaiyo-me-ashk-bahane/): तन्हाइयो में अश्क बहाने से क्या मिलाख़ुद को दीया बना के जलाने से क्या मिला ? मुझसे बिछड़ - [बेलौस हँसी दिखाना, दिल से निभाना हर रिश्ता यहाँ...](https://bazmeshayari.com/belaus-hansi-dikhana-dil-se-nibhana/): बेलौस हँसी दिखाना, दिल से निभाना हर रिश्ता यहाँ मुस्कान पर अपने पराये सभी का अधिकार होता है, - [हिज़्र में खून रुलाते हो, कहाँ होते हो ?](https://bazmeshayari.com/hizr-me-khoon-rulate-ho-kahan-hote-ho/): हिज़्र में खून रुलाते हो, कहाँ होते हो ? लौट कर क्यूँ नहीं आते हो, कहाँ होते हो - [गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले...](https://bazmeshayari.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ad%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%8f-%e0%a4%a8%e0%a5%8c-%e0%a4%ac/): गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले, क़फ़स उदास है यारो - [यूँ उम्र भर रहे बेताब देखने के लिये...](https://bazmeshayari.com/yun-umr-bhar-rahe-betab/): यूँ उम्र भर रहे बेताब देखने के लिये किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये, कहाँ थे - [एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब...](https://bazmeshayari.com/ek-arse-se-zamin-se-lapta-hai/): एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब कोई बतलाये कहाँ गायब हुआ है इन्किलाब, एक वो भी - [गुलों में रंग न खुशबू, गरूर फिर भी है...](https://bazmeshayari.com/gulo-me-rang-n-khushboo-guru-fir-bhi-hai/): गुलों में रंग न खुशबू, गरूर फिर भी है नशे में रूप के वो चूर-चूर फिर भी है, - [अश्क आँखों में छुपाते हुए थक जाता हूँ...](https://bazmeshayari.com/ashq-aankho-me-chhupate-hue-thak-jata-hoon/): अश्क आँखों में छुपाते हुए थक जाता हूँ बोझ पानी का उठाते हुए थक जाता हूँ, पाँव रखते - [तुम जैसे तो लाखो ही थे, है और भी आएँगे...](https://bazmeshayari.com/tum-jaise-to-lakho-the-hai-aur-ayenge/): तुम जैसे तो लाखो ही थे, है और भी आएँगे मगर हम जैसे तुम्हे बहुत कम ही मिल - [आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं...](https://bazmeshayari.com/agaah-apni-maut-se-koi-bashar-nahi/): आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं सामान सौ बरस के हैं कल की ख़बर नहीं, आ जाएँ - [तेरे बदन से जो छू कर इधर भी आता है...](https://bazmeshayari.com/tere-badan-se-jo-chhoo-kar/): तेरे बदन से जो छू कर इधर भी आता है मिसाल-ए-रंग वो झोंका नज़र भी आता है, तमाम - [एक पगली मेरा नाम जो ले शरमाये भी घबराये भी...](https://bazmeshayari.com/ek-pagli-mera-naam-jo-le/): एक पगली मेरा नाम जो ले शरमाये भी घबराये भी गलियों गलियों मुझसे मिलने आये भी घबराये भी, - [वही किस्से है वही बात पुरानी अपनी...](https://bazmeshayari.com/wahi-qisse-hai-wahi/): वही किस्से है वही बात पुरानी अपनी कौन सुनता है भला राम कहानी अपनी, सितमगर को ये हमदर्द - [रेत पर लिख के मेरा नाम मिटाया न करो...](https://bazmeshayari.com/ret-par-likh-ke-mera-naam/): रेत पर लिख के मेरा नाम मिटाया न करो आँख सच बोलती हैं प्यार छुपाया न करो, लोग - [उसे कहना बिछड़ने से मुहब्बत तो नहीं मरती...](https://bazmeshayari.com/use-kahna-bichhdne-se-muhabbat-to-nahi-marti/): उसे कहना बिछड़ने से मुहब्बत तो नहीं मरती बिछड़ जाना मुहब्बत की सदाकत की अलामत है मुहब्बत एक - [नहीं डरता मैं काँटो से मगर फूलो से डरता हूँ...](https://bazmeshayari.com/nahi-dart-main-kaanto-se-magar-foolo-se/): नहीं डरता मैं काँटो से मगर फूलो से डरता हूँ चुभन दे जाएँ जो दिल को मैं उन - [कभी याद आऊँ तो पूछना ज़रा अपनी फ़ुर्सत ए शाम से...](https://bazmeshayari.com/kabhi-yaad-aaoon-to/): कभी याद आऊँ तो पूछना ज़रा अपनी फ़ुर्सत ए शाम से किसे इश्क़ था तेरी ज़ात से किसे - [जान मेरी जान कोई और है बात मेरी मान कोई और है...](https://bazmeshayari.com/jaan-meri-jaan-koi-aur-hai/): जान मेरी जान कोई और है बात मेरी मान कोई और है, हो गया हूँ मैं किसी का - [सुना है इस मुहब्बत में बहुत नुक़सान होता है...](https://bazmeshayari.com/suna-hai-is-muhabbat/): सुना है इस मुहब्बत में बहुत नुक़सान होता है, महकता झूमता जीवन गमो के नाम होता है, सुना - [वो जो दिल में तेरा मुक़ाम है किसी और को वो दिया नहीं..](https://bazmeshayari.com/wo-jo-dil-me-tara-muqam-hai/): वो जो दिल में तेरा मुक़ाम है किसी और को वो दिया नहीं, वो जो रिश्ता तुझसे है - [तेरी आँखों के दरीचे से गुज़ारे जाते...](https://bazmeshayari.com/teri-aankho-ke-dariche-se-guzare-jaate/): तेरी आँखों के दरीचे से गुज़ारे जाते तो मेरे ख़्वाब यूँ बे मौत न मारे जाते, एक रिवायत - [बाग़ पा कर ख़फ़क़ानी ये डराता है मुझे...](https://bazmeshayari.com/baag-paa-khafqaani-ye-darata-hai/): बाग़ पा कर ख़फ़क़ानी ये डराता है मुझे साया-ए-शाख़-ए-गुल अफ़ई नज़र आता है मुझे, जौहर-ए-तेग़ ब-सर-चश्म-ए-दीगर मालूम हूँ - [क़यामत है कि सुन लैला का दश्त-ए-क़ैस में आना...](https://bazmeshayari.com/qayamat-hai-ki-sun/): क़यामत है कि सुन लैला का दश्त-ए-क़ैस में आना तअ’ज्जुब से वो बोला यूँ भी होता है ज़माने - [तुम जानो तुम को ग़ैर से जो रस्म-ओ-राह हो...](https://bazmeshayari.com/tum-jaano-tumko-gair-se/): तुम जानो तुम को ग़ैर से जो रस्म-ओ-राह हो मुझ को भी पूछते रहो तो क्या गुनाह हो - [नहीं कि मुझको क़यामत का ए'तिक़ाद नहीं...](https://bazmeshayari.com/nahi-ki-mujhko-qayamat/): नहीं कि मुझको क़यामत का ए’तिक़ाद नहीं शब-ए-फ़िराक़ से रोज़-ए-जज़ा ज़ियाद नहीं, कोई कहे कि शब-ए-मह में क्या - [नफ़स न अंजुमन-ए-आरज़ू से बाहर खींच...](https://bazmeshayari.com/nafas-na-anjuman-e-aarzoo-se/): नफ़स न अंजुमन-ए-आरज़ू से बाहर खींच अगर शराब नहीं इंतिज़ार-ए-साग़र खींच, कमाल-ए-गर्मी-ए-सई-ए-तलाश-ए-दीद न पूछ ब-रंग-ए-ख़ार मिरे आइने से - [न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता...](https://bazmeshayari.com/na-tha-kuchh-to-khuda-tha/): न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता डुबोया मुझ को होने ने न - [चलो सागर ए इश्क़ का किनारा ढूँढे...](https://bazmeshayari.com/chalo-sagar-e-ishq-ka-kinara-dhoondhe/): चलो सागर ए इश्क़ का किनारा ढूँढे डूबने वालो के लिए सहारा ढूँढे, यूँ भी ज़माने में गम - [कभी लफ्ज़ भूल जाऊँ, कभी बात भूल जाऊँ...](https://bazmeshayari.com/kabhi-lafz-bhool-jaaoon-kabhi-baat-bhool-jaaoon/): कभी लफ्ज़ भूल जाऊँ कभी बात भूल जाऊँ तुझे इस क़दर चाहूँ कि अपनी ज़ात भूल जाऊँ उठ - [जो तेरे प्यार के दरियाँ कशीद हो जाएँ...](https://bazmeshayari.com/jo-tere-pyar-ka-dariyan-kashid-ho-jaaye/): जो तेरे प्यार के दरियाँ कशीद हो जाएँ मेरी हयात के मंज़र ज़दीद हो जाएँ, तुम्हारी चश्म ए - [हम जो बे हाल ए ज़ार बैठे है...](https://bazmeshayari.com/hum-jo-haal-e/): हम जो बे हाल ए ज़ार बैठे है दिल की दिल में हार बैठे है, तेरी महफ़िल से - [सितारों को जो छू कर देखते है...](https://bazmeshayari.com/sitaro-ko-jo-choo-kar-dekhte-hai/): सितारों को जो छू कर देखते है सिकंदर है मुक़द्दर देखते है, समन्दर में हमें दिखते है क़तरे - [सब के होते हुए लगता है कि घर ख़ाली है...](https://bazmeshayari.com/sabke-hote-hue-lagta-hai-ki-ghar-khali-hai/): सब के होते हुए लगता है कि घर ख़ाली है ये तकल्लुफ़ है कि जज़्बात की पामाली है, - [खिड़कियाँ खोल रहा था कि हवा आएगी...](https://bazmeshayari.com/khidkiyan-khol-raha-tha-ki-hawa-ayegi/): खिड़कियाँ खोल रहा था कि हवा आएगी क्या ख़बर थी कि चिरागों को निगल जाएगी, मुझेको इस वास्ते - [मुलाकातें हमारी बेइरादा क्यों नहीं होतीं ?](https://bazmeshayari.com/mulaqate-hamari-beirada-kyo/): मुलाकातें हमारी बेइरादा क्यों नहीं होतीं ? मुहब्बत की गुजर कहीं कुशादा क्यों नहीं होतीं हमारे दरमियान ये - [किस की तलाश है किस के असर में हैं...](https://bazmeshayari.com/kis-ki-talash-kis-ki-asar-me-hai/): किस की तलाश है किस के असर में हैं जब से चले हैं घर से मुसलसल सफ़र में - [मेरे दिल के अरमां रहे रात जलते...](https://bazmeshayari.com/mere-dil-ke-armaan-rahe-raat-jalte/): मेरे दिल के अरमां रहे रात जलते रहे सब करवट पे करवट बदलते, यूँ हारी है बाज़ी मुहब्बत - [कुछ इस तरह से इबादत खफ़ा हुई हमसे...](https://bazmeshayari.com/kuch-is-tarah-se-ibadat-khafa-hui-hamse/): कुछ इस तरह से इबादत खफ़ा हुई हमसे नमाज़ ए इश्क बहुत कम अदा हुई हमसे, गरीब आँखों - [कश्ती चला रहा है मगर किस अदा के साथ...](https://bazmeshayari.com/qashti-chala-raha-hai-magar-kis-ada-ke-saath/): कश्ती चला रहा है मगर किस अदा के साथ हम भी न डूब जाएँ कहीं ना ख़ुदा के - [ये है मयकदा यहाँ रिंद हैं यहाँ सब का साक़ी इमाम है...](https://bazmeshayari.com/ye-hai-maykada-yahan-rind-hai/): ये है मयकदा यहाँ रिंद हैं यहाँ सब का साक़ी इमाम है ये हरम नहीं है ऐ शैख़ - [न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम...](https://bazmeshayari.com/naa-ibtida-ki-khabar-naa-inteha-malum/): न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या - [किसी से भी नहीं हम सब्र की तलक़ीन लेते है...](https://bazmeshayari.com/kisi-se-bhi-nahi-ham-sabr-e-talqin/): किसी से भी नहीं हम सब्र की तलक़ीन लेते है हमें मिलती नहीं जो चीज उसको छीन लेते - [आँखे बन जाती है सावन की घटा शाम के बाद...](https://bazmeshayari.com/aankhe-ban-jati-hai-sawan-ki-ghata/): आँखे बन जाती है सावन की घटा शाम के बाद लौट जाता है अगर कोई खफ़ा शाम के - [मुझको पागल कहने वाला ख़ुद ही पागल हो जाएगा...](https://bazmeshayari.com/mujhko-pagal-kahne-wala/): कोई हसीन मंज़र आँखों से जब ओझल हो जाएगा मुझको पागल कहने वाला ख़ुद ही पागल हो जाएगा, - [तभी तो मैं मुहब्बत का कही हवालाती नहीं होता...](https://bazmeshayari.com/tabhi-to-main-muhabbat/): तभी तो मैं मुहब्बत का कही हवालाती नहीं होता जहाँ अपने सिवा कोई शख्स मुलाक़ाती नहीं होता, गिरफ्तार - [मैं रातें जाग कर अक्सर वो यादें झाँक कर अक्सर...](https://bazmeshayari.com/main-raaten-jaag-kar-aksar/): मैं रातें जाग कर अक्सर वो यादें झाँक कर अक्सर निशाँ जो छोड़ देती है मेरी ही ज़ात - [मेरे दोस्त, ऐ मेरे प्यारे अभी बात है अधूरी...](https://bazmeshayari.com/mere-dost-ae-mere-pyare/): मेरे दोस्त, ऐ मेरे प्यारे अभी बात है अधूरी अभी चाँदनी है बाक़ी अभी रात है अधूरी, वही - [चाँद यूँ कुछ देर को आते हो चले जाते हो...](https://bazmeshayari.com/chaand-yun-kuch-der-ko-aate-ho/): चाँद यूँ कुछ देर को आते हो चले जाते हो मेरी नज़रों से छुप कर बादलो में शरमाते - [एक हकीकी ख़्वाब हुआ तेरा साथ सराब हुआ...](https://bazmeshayari.com/ek-haqiqi-khwab-hua-tera-saath/): एक हकीकी ख़्वाब हुआ तेरा साथ सराब हुआ, सब अंदेशे कमाल थे मुक़म्मल हुए, पैकर ए ज़माल थे, - [मैंने पल भर में यहाँ लोगो को बदलते हुए देखा है...](https://bazmeshayari.com/maine-pal-bhar-me-yahan-logo-ko/): मैंने पल भर में यहाँ लोगो को बदलते हुए देखा है ज़िन्दगी से हारे हुए लोगो को जीतते - [इस तसल्ली से बरसते है आँसू तेरे सामने...](https://bazmeshayari.com/is-tasalli-se-barasate-hai-aansoo/): इस तसल्ली से बरसते है आँसू तेरे सामने कि तेरा हाथ मेरे रुखसार को तो आएगा, तेरे चाहने - [जिधर देखते है हर तरफ गमो के अम्बार देखते है...](https://bazmeshayari.com/jidhar-dekhte-hai-har-taraf-gamo-ka/): जिधर देखते है हर तरफ गमो के अम्बार देखते है हर किसी को रंज़ ओ अलम में गिरफ्तार - [जानता कोई नहीं आज असूलो की ज़ुबान...](https://bazmeshayari.com/jaanta-koi-nahi-aaj-asoolo-ki-zuban/): जानता कोई नहीं आज असूलो की ज़ुबान काश ! आ जाए हमें बोलना फूलों की ज़ुबान, मौसम ए - [बशर तरसते है उम्दा खानों को...](https://bazmeshayari.com/bashar-taraste-hai-umda/): बशर तरसते है उम्दा खानों को मौत पड़ती है हुक्मरानो को, ज़ुर्म आज़ाद फिर रहा है यहाँ बेकसों - [सब गुनाह ओ हराम चलने दो....](https://bazmeshayari.com/sab-gunah-o-haram-chalne-do/): सब गुनाह ओ हराम चलने दो कह रहे है निज़ाम चलने दो, ज़िद्द है क्या वक़्त को बदलने - [ज़हालत की तारीकियो में गुम अहल ए वतन को...](https://bazmeshayari.com/zahalat-ki-tarikiyo-me-gum/): ज़हालत की तारीकियो में गुम अहल ए वतन को वो ले कर तालीम की मशाल रास्ता दिखाने चला - [एक शख्स की खातिर ज़बर कर बैठा हूँ...](https://bazmeshayari.com/ek-shakhs-ki-khatir-zabar-kar-baitha-hoo/): एक शख्स की खातिर ज़बर कर बैठा हूँ मैं ज़िन्दगी को इधर उधर कर बैठा हूँ, उस लम्हे - [मेरे ज़ख्मो की हालात को रफूगर जानता है...](https://bazmeshayari.com/mere-zakhmo-ki-halat-ko-rafoogar-janta-hai/): ख़ुदा की कौन सी है राह बेहतर जानता है मज़ा है नेकियों में क्या कलंदर जानता है, बहुत - [ऐ निगाह ए दोस्त ये क्या हो गया, क्या कर दिया...](https://bazmeshayari.com/ae-nigaah-e-dost-ye-kya-ho-gaya/): ऐ निगाह ए दोस्त ये क्या हो गया क्या कर दिया पहले पहले रौशनी दी फिर अँधेरा कर - [दिलो में बस अपने मुहब्बत भरे...](https://bazmeshayari.com/dilo-me-bas-apne/): चलो आओ हम एक वायदा करें दिलो में बस अपने मुहब्बत भरे, वो सब काम जिनसे दुखे दिल - [सुरखाब क्या ख़रीदे असबाब क्या ख़रीदे ...](https://bazmeshayari.com/surkhab-kya-kharide-asbab-kya-kharide/): सुरखाब क्या ख़रीदे असबाब क्या ख़रीदे फ़ितरत फ़कीर जिसकी अलक़ाब क्या ख़रीदे, ले जा इन्हें उठा कर सौदा - [मत पूछो मुसलमान का हाल...](https://bazmeshayari.com/mat-pucho-musalman-haal/): मत पूछो मुसलमान का हाल… मस्ज़िद के लिए सर कटाने को तैयार है लेकिन मस्ज़िद में सर झुकाने - [फ़लक पे कितना उदास कितना तन्हा...](https://bazmeshayari.com/falaq-pe-kitna-udas-kitna-tanha/): फ़लक पे कितना उदास कितना तन्हा कितना बेकस सा लगा हिलाल ए ईद, हम हुजूम ए शहर में - [मैं हूँ मेरी चश्म-ए-तर है रात है तन्हाई है...](https://bazmeshayari.com/main-hoon-meri-chashm/): मैं हूँ मेरी चश्म-ए-तर है रात है तन्हाई है दर्द मेरा हम-सफ़र है रात है तन्हाई है, जुगनुओं - [रवैये मार देते है ये लहज़े मार देते है...](https://bazmeshayari.com/rawaiye-maar-dete-hai/): रवैये मार देते है ये लहज़े मार देते है वही जो जान से प्यारे हैं रिश्ते मार देते - [आगाज़ ईद है, अंज़ाम ईद है, नेक काम ईद है...](https://bazmeshayari.com/aagaaz-eid-anzam-eid-hai/): ईद मुबारक़ आगाज़ ईद है, अंज़ाम ईद है, नेक काम ईद है सच्चाई ओ हक़ पे रहे क़ायम - [अपनी ज़रूरत के मुताबिक़....](https://bazmeshayari.com/apni-zarurat-ke-mutabik/): अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ लोगो के जज़्बात बदल जाते है, इंसानों की इन्हें फिक़र नहीं मगर ये हैवानो - [कहते हैं ईद है आज अपनी भी ईद होती...](https://bazmeshayari.com/kahte-hai-eid-hai/): कहते हैं ईद है आज अपनी भी ईद होती हम को अगर मयस्सर जानाँ की दीद होती, क़ीमत - [आये जो वो तो दिल के सब अरमान मचल गए...](https://bazmeshayari.com/aaye-jo-wo-to/): आये जो वो तो दिल के सब अरमान मचल गएबुझते हुए चिराग़ ए वफ़ा फिर से जल गए, - [राज़ कहाँ तक राज़ रहेगा मंज़र-ए-आम पे आएगा](https://bazmeshayari.com/raaj-kahan-tak-raaj-rahega/): राज़ कहाँ तक राज़ रहेगा मंज़र-ए-आम पे आएगाजी का दाग़ उजागर हो कर सूरज को शरमाएगा, शहरों को - [पीत करना तो हम से निभाना सजन...](https://bazmeshayari.com/peet-karna-to-hamse-nibhana-sajan/): पीत करना तो हम से निभाना सजनहम ने पहले ही दिन था कहा ना सजन, तुम ही मजबूर - [हिलाल-ए-शाम से बढ़ कर माह-ए-तमाम हुए..](https://bazmeshayari.com/hilal-e-shaam-se/): लोग हिलाल-ए-शाम से बढ़ कर पल में माह-ए-तमाम हुएहम हर बुर्ज में घटते घटते सुब्ह तलक गुमनाम हुए, - [कुछ कहने का वक़्त नहीं कुछ न कहो ख़ामोश रहो...](https://bazmeshayari.com/kuch-naa-kaho-khamosh-raho/): कुछ कहने का वक़्त नहीं ये कुछ न कहो ख़ामोश रहोऐ लोगो ख़ामोश रहो हाँ ऐ लोगो ख़ामोश - [किस को पार उतारा तुम ने किस को पार उतारोगे...](https://bazmeshayari.com/kisko-paar-utara-tumne-kisko-paar/): किस को पार उतारा तुम ने किस को पार उतारोगेमल्लाहो तुम परदेसी को बीच भँवर में मारोगे, मुँह - [कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा...](https://bazmeshayari.com/kal-chaudawahi-ki-raat-thi/): कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेराकुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा - [सब झाड़ फूँक सीख गए शेख जी से हम...](https://bazmeshayari.com/sab-jhaad-foonk-sikh-gaye-shekh-ji-se-ham/): सब झाड़ फूँक सीख गए शेख जी से हममुर्गे को ज़िबह करते है उल्टी छुरी से हम, बचपन - [ये मेरी ग़ज़लें ये मेरी नज़्में तमाम तेरी हिकायतें हैं...](https://bazmeshayari.com/ye-meri-gazale-meri-nazme-tamam/): ये मेरी ग़ज़लें ये मेरी नज़्में तमाम तेरी हिकायतें हैंये तज़किरे तेरी लुत्फ़ के हैं ये शेर तेरी - [इब्तिदा ए इश्क़ में मेरा यूँ हुआ दिल ख़राब आधा...](https://bazmeshayari.com/ibtida-e-ishq-me-mera-yun-hua/): इब्तिदा ए इश्क़ में मेरायूँ हुआ दिल ख़राब आधा, कि जैसे सिख पर चढ़ते हीजल गया हो कबाब - [लानत है तेरी ज़िन्दगी पे नहीं तू किसी काज का...](https://bazmeshayari.com/lanat-hai-teri-zindagi-pe/): लानत है तेरी ज़िन्दगी पे नहीं तू किसी काज काशक्ल ए इंसानी में छुपा तू इब्लीस के मिजाज़ - [बहार रुत में उजाड़ रस्ते...](https://bazmeshayari.com/bahar-rut-me-ujad-raste/): बहार रुत में उजाड़ रस्तेतका करोगे तो रो पड़ोगे, किसे से मिलने को जब भीसजा करोगे तो रो - [किसी के इश्क़ में रस्तों की धूल हो गए हैं...](https://bazmeshayari.com/kisi-ke-ishq-me-rasto-ki-dhool/): किसी के इश्क़ में रस्तों की धूल हो गए हैंख़ुदा का शुक्र कि पैसे वसूल हो गए हैं, - [धमाल धूल उड़ाए तो इश्क़ होता है...](https://bazmeshayari.com/dhamaal-dhool-udaye-to/): धमाल धूल उड़ाए तो इश्क़ होता हैवज़ूद वज्द में आये तो इश्क़ होता है, बहा रहा है वो - [इश्क़ ज़न्नत इश्क़ दोज़ख इश्क़ तो मशहूर है...](https://bazmeshayari.com/ishq-zannat-ishq-dozakh-ishq-to-mashahoor-hai/): इश्क़ ज़न्नत इश्क़ दोज़ख इश्क़ तो मशहूर हैइश्क़ जंगल इश्क़ मंगल इश्क़ तो मसरूर है, इश्क़ मुज़रिम इश्क़ - [हिसार-ए-दीद में रोईदगी मालूम होती है...](https://bazmeshayari.com/hisaar-e-deed-me-roidagi-malum-hoti-hai/): हिसार-ए-दीद में रोईदगी मालूम होती हैतो क्यूँ अंदेशा-ए-तिश्ना-लबी मालूम होती है, तुम्हारी गुफ़्तुगू से आस की ख़ुश्बू छलकती - [हर एक दर्द मुहब्बत के नाम होता है...](https://bazmeshayari.com/her-ek-dard-muhabbat-ke-naam/): हर एक दर्द मुहब्बत के नाम होता हैयही तमाशा मगर सुबह ओ शाम होता है, कही भी मिलता - [तुमको बेलौस प्यार करता हूँ....](https://bazmeshayari.com/tumko-be-laus-pyar/): हर वक़्त इंतज़ार करता हूँतुमको बेलौस प्यार करता हूँ, पर दिल में रखता हूँ बताता नहींप्यार कब आशकार - [मतलब परस्तो को क्या पता कि दोस्ती क्या है...](https://bazmeshayari.com/matlab-parasto-ko-kya-pata-ki/): मतलब परस्तो को क्या पता कि दोस्ती क्या हैगुज़र गई है जो मुश्किलो में वो ज़िन्दगी क्या है, - [मुक़द्दर का चमकता सितारा हो भी सकता है...](https://bazmeshayari.com/muqaddar-ka-chamakta-sitara/): मुक़द्दर का चमकता सितारा हो भी सकता हैमुझे तक़दीर का शायद इशारा हो भी सकता है, मिलावट झूठ - [एक मैं और इतने लाखों सिलसिलों के सामने...](https://bazmeshayari.com/ek-main-aur-itne-laakho-silsilo/): एक मैं और इतने लाखों सिलसिलों के सामनेएक सौत-ए-गुंग जैसे गुम्बदों के सामने, मिटते जाते नक़्श दूद-ए-दम की - [इक मसाफ़त पाँव शल करती हुई सी ख़्वाब में...](https://bazmeshayari.com/ek-mashafat-paanvshal-karti-hui/): इक मसाफ़त पाँव शल करती हुई सी ख़्वाब मेंइक सफ़र गहरा मुसलसल ज़र्दी-ए-महताब में, तेज़ है बू-ए-शगूफ़ा हाए - [एक नगर के नक़्श भुला दूँ एक नगर ईजाद करूँ...](https://bazmeshayari.com/ek-nagar-ke-naqsh-bhula-doon/): एक नगर के नक़्श भुला दूँ एक नगर ईजाद करूँएक तरफ़ ख़ामोशी कर दूँ एक तरफ़ आबाद करूँ, - [इक तेज़ तीर था कि लगा और निकल गया...](https://bazmeshayari.com/ek-tez-teer-tha-ki-laga/): इक तेज़ तीर था कि लगा और निकल गयामारी जो चीख़ रेल ने जंगल दहल गया, सोया हुआ - [ग़ैरों से मिल के ही सही बे-बाक तो हुआ...](https://bazmeshayari.com/gairo-se-mil-ke-hi-sahi/): ग़ैरों से मिल के ही सही बे-बाक तो हुआबारे वो शोख़ पहले से चालाक तो हुआ, जी ख़ुश - [है शक्ल तेरी गुलाब जैसी, नज़र है तेरी शराब जैसी..](https://bazmeshayari.com/shakl-hai-teri-gulab-jaisi/): है शक्ल तेरी गुलाब जैसीनज़र है तेरी शराब जैसी, हवा सहर की है इन दिनों मेंबदलते मौसम के - [ग़म की बारिश ने भी तेरे नक़्श को धोया नहीं...](https://bazmeshayari.com/gam-ki-barish-ne-bhi-tera-naqsh/): ग़म की बारिश ने भी तेरे नक़्श को धोया नहींतू ने मुझ को खो दिया मैं ने तुझे - [चादर की इज्ज़त करता हूँ, और परदे को मानता हूँ..](https://bazmeshayari.com/chadar-ki-izzat-karta-hoon/): चादर की इज्ज़त करता हूँऔर परदे को मानता हूँ, हर परदा परदा नहीं होताइतना मैं भी जानता हूँ, - [उसे कहना मुहब्बत दिल के ताले तोड़ देती है...](https://bazmeshayari.com/muhabbat-dil-ke-taale-tod-deti-hai/): उसे कहना मुहब्बत दिल के ताले तोड़ देती हैउसे कहना मुहब्बत दो दिलो को जोड़ देती है, उसे - [कोई तो फूल खिलाए दुआ के लहज़े में...](https://bazmeshayari.com/koi-to-fool-khilaye/): कोई तो फूल खिलाए दुआ के लहज़े मेंअज़ब तरह की घुटन है हवा के लहज़े में, ये वक़्त - [ख़बर क्या थी कि ऐसे अज़ाब उतरेंगे...](https://bazmeshayari.com/khabar-kya-thi-aise-azab-utrenge/): ख़बर क्या थी कि ऐसे अज़ाब उतरेंगेजो होंगे बाँझ वो आँखों में ख़्वाब उतरेंगे, सजेंगे ज़िस्म पे कुछ - [अपने एहसास से छू कर मुझे संदल कर दो...](https://bazmeshayari.com/apne-ehsas-se-chhoo-kar-mujhe-sandal-kar-do/): अपने एहसास से छू कर मुझे संदल कर दोमैं कि सदियों से अधूरा हूँ मुकम्मल कर दो, न - [अभी तो इश्क़ में ऐसा भी हाल होना है...](https://bazmeshayari.com/abhi-to-ishq-me-aisa-bhi-haal-hona-hai/): अभी तो इश्क़ में ऐसा भी हाल होना हैकि अश्क रोकना तुम से मुहाल होना है, हर एक - [चराग़ ए तूर जलाओ बड़ा अँधेरा है...](https://bazmeshayari.com/charag-e-toor-jalaao-bada-andhera-hai/): चराग़ ए तूर जलाओ बड़ा अँधेरा है ज़रा नक़ाब उठाओ बड़ा अँधेरा है, अभी तो सुब्ह के माथे - [भूली हुई सदा हूँ मुझे याद कीजिए...](https://bazmeshayari.com/bhooli-hui-sada-hoon-mujhe/): भूली हुई सदा हूँ मुझे याद कीजिए तुम से कहीं मिला हूँ मुझे याद कीजिए, मंज़िल नहीं हूँ - [ग़म के मुजरिम ख़ुशी के मुजरिम हैं...](https://bazmeshayari.com/gam-ke-muzrim-khushi-ke/): ग़म के मुजरिम ख़ुशी के मुजरिम हैं लोग अब ज़िंदगी के मुजरिम हैं, और कोई गुनाह याद नहीं - [सोहनी धरती के रखवाले ये प्यारे खाक़ी वर्दी वाले...](https://bazmeshayari.com/sohni-dharti-ke-rakhwale-ye-pyare-vardiwale/): सोहनी धरती के रखवाले ये प्यारे खाक़ी वर्दी वाले, हर बाप का फ़ख्र ओ गुरुर है ये हर - [हारे हुए नसीब का मयार देख कर...](https://bazmeshayari.com/haare-hue-nasib-ka-mayar-dekh-kar/): हारे हुए नसीब का मयार देख कर वो चल पड़ा है इश्क़ का अख़बार देख कर, आयेंगी काम - [अज़ब ही मेरे मुल्क की कहानी है...](https://bazmeshayari.com/azab-hi-mere-mulq/): अज़ब ही मेरे मुल्क की कहानी है यहाँ सस्ता खून पर महँगा पानी है, खिले है फूल कागज़ - [छोड़ के सब कुछ फक़त तुम इन्सान बनो...](https://bazmeshayari.com/chhod-ke-sab-kuch-faqat/): बना के भेजा था उस रब ने अपना तर्जुमान तुम्हे छोड़ के सब कुछ फक़त तुम इन्सान बनो, - [एक मय्यत ज़मीं तले उतरी एक मय्यत नहीं उठाई गई...](https://bazmeshayari.com/ek-mayyat-zami-tale-utri/): उसमें कोई रईस मुज़रिम था जो कहानी नहीं सुनाई गई, एक मय्यत ज़मीं तले उतरी एक मय्यत नहीं - [दुआ तो दूर है अबतक सलाम आया नहीं...](https://bazmeshayari.com/dua-to-door-abtak-salam-aya-nahi/): तेरी तरफ से कोई भी पयाम आया नहीं दुआ तो दूर है अबतक सलाम आया नहीं, मुझे तो - [तुम्हारी सोच, तुम्हारे गुमाँ से बाहर हम...](https://bazmeshayari.com/tumhari-soch-tumhare-gumaan-se-bahar/): तुम्हारी सोच, तुम्हारे गुमाँ से बाहर हम खड़े हुए है सफ ए दोस्तां से बाहर हम, हमें ही - [पूछो अगर तो करते है इन्कार सब के सब...](https://bazmeshayari.com/pucho-agar-to-karte-hai-inqar-sab-ke-sab/): पूछो अगर तो करते है इन्कार सब के सब सच ये कि है हयात से बेज़ार सब के - [कहीं क़बा तो कहीं आस्तीं बिछाते हुए](https://bazmeshayari.com/kahin-kaba-to-kahin/): कहीं क़बा तो कहीं आस्तीं बिछाते हुए मैं मर गया हूँ वफादारियाँ निभाते हुए, अज़ीब रात थी आँखे - [हमारे खून में अब तक ये बीमारी नहीं आई...](https://bazmeshayari.com/hamare-khoon-me-abtak-ye-bimari/): वफ़ादारी पे दे दी जान मगर ग़द्दारी नहीं आई हमारे खून में अब तक ये बीमारी नहीं आई, - [वो कौन है जो गम का मज़ा जानते नहीं...](https://bazmeshayari.com/wo-kaun-hai-jo-gam-ka-maza-jante-nahi/): वो कौन है जो गम का मज़ा जानते नहीं बस दूसरों के दर्द को ही पहचानते नहीं, इस - [आवाम भूख से देखो निढाल है कि नहीं ?](https://bazmeshayari.com/awaam-bhookh-se-dekho/): आवाम भूख से देखो निढाल है कि नहीं ? हर एक चेहरे से ज़ाहिर मलाल है कि नहीं - [बस एक ही हल इसका हमारे पास है लोगो...](https://bazmeshayari.com/bas-ek-hi-hal-iska-hamare-paas-hai-logo/): बस एक ही हल इसका हमारे पास है लोगो जो हुक्मराँ बिक जाए वो बकवास है लोगो, किस - [चुनाव से पहले मशरूफ़ होते है सारे ही उम्मीदवार...](https://bazmeshayari.com/chunav-se-pahle-mashroof/): चुनाव से पहले मशरूफ़ होते है सारे ही उम्मीदवार दिन रात मीटिंगे होती है इन सबके प्यादे और - [जानते सब है मुझे, पहचानता कोई नहीं...](https://bazmeshayari.com/jaante-sab-hai-mujhe-pahchanta-koi-nahi/): आशना होते हुए भी आशना कोई नहीं जानते सब है मुझे, पहचानता कोई नहीं, तन्हा मेरे ज़िम्मे क्यूँ - [ज़िन्दा रहें तो क्या है जो मर जाएँ हम तो क्या...](https://bazmeshayari.com/zinda-rahe-to-kya-hai-jo-mar-jaayen-to-kya/): ज़िन्दा रहें तो क्या है जो मर जाएँ हम तो क्या दुनियाँ से ख़ामोशी से गुज़र जाएँ हम - [खटकती जो रहे दिल में वो हसरत हम भी रखते है...](https://bazmeshayari.com/khatakti-jo-rahe-dil-me-wo-hasrat/): वतन की सर ज़मी से इश्क़ ओ उल्फ़त ही नहीं खटकती जो रहे दिल में वो हसरत हम - [कितने ही पेड़ ख़ौफ़ ए ख़िज़ाँ से उजड़ गए...](https://bazmeshayari.com/kitne-hi-ped-khauf/): कितने ही पेड़ ख़ौफ़ ए ख़िज़ाँ से उजड़ गए कुछ बर्ग ए सब्ज़ वक़्त से पहले ही झड़ - [बढ़ जाएगी शायद मेरी तन्हाई ज़रा और...](https://bazmeshayari.com/badh-jayegi-meri-tanhai-zara-aur/): हो जाएगी जब तुम से शनासाई ज़रा और बढ़ जाएगी शायद मेरी तन्हाई ज़रा और, क्यूँ खुल गए - [जीवन को दुख दुख को आग और आग को पानी कहते...](https://bazmeshayari.com/jivan-ko-dukh-dukh/): जीवन को दुख दुख को आग और आग को पानी कहते बच्चे लेकिन सोए हुए थे किस से - [दुनियाँ के लोग खुशियाँ मनाने में रह गए...](https://bazmeshayari.com/duniyan-ke-log-khushiyan/): दुनियाँ के लोग खुशियाँ मनाने में रह गए हम बदनसीब अश्क बहाने में रह गए, कुछ जाँ निसार - [मुहब्बत आज़माती है, मुझे तुम याद आते हो...](https://bazmeshayari.com/muhabbat-aazmati-hai/): मुहब्बत आज़माती है, मुझे तुम याद आते हो जुदाई अब सताती है, मुझे तुम याद आते हो, मुहब्बत - [अर्ज़ ए गम कभी उसके रूबरू भी हो जाए...](https://bazmeshayari.com/arz-e-gam-kabhi-uske-rubroo/): अर्ज़ ए गम कभी उसके रूबरू भी हो जाए शायरी तो होती है, कभी गुफ़्तगू भी हो जाए, - [हमसे क़ीमत तो ये पूरी ही लिया करती है...](https://bazmeshayari.com/hamse-qimat-to-ye-poori-liya/): हमसे क़ीमत तो ये पूरी ही लिया करती है ज़िन्दगी ख़्वाब अधूरे ही दिया करती है, हर मुहब्बत - [मुहब्बत कहाँ अब घरों में मिले...](https://bazmeshayari.com/muhabbat-kahan-ab-gharo-me-mile/): मुहब्बत कहाँ अब घरों में मिले यहाँ फूल भी पत्थरो में मिले, जो फिरते रहे दनदनाते हुए वही - [चंद सिक्को के एवज़ हर ज़ुर्म के सबूत मिटाने वालो...](https://bazmeshayari.com/chand-sikko-ke-evaz/): चंद सिक्को के एवज़ हर ज़ुर्म के सबूत मिटाने वालो इक्तिदार के नशे में धूत, लोगो पे ज़ुल्म - [सुनो ! दौर ए बेहिस में जब कमाली हार जाता है...](https://bazmeshayari.com/suno-daur-e-behis/): सुनो ! दौर ए बेहिस में जब कमाली हार जाता है हरामी जीत जाते है हलाली हार जाता - [ख़बरें हुकुमत की क़ब्रें आवाम की...](https://bazmeshayari.com/khabren-huqumat-ki-qabren-aawam-ki/): ख़बरें हुकुमत की क़ब्रें आवाम की हमको नहीं है लालच तुम्हारे इनाम की, बोया है तुमने जो भी - [एक ज़ालिम उसपे क़हर आँखे दिखा रहा है...](https://bazmeshayari.com/ek-zalim-uspe-qahar-aankhe/): एक तो ज़ालिम उसपे क़हर आँखे दिखा रहा है अंज़ाम ए बेहया शायद अब नज़दीक आ रहा है, - [गम ए वफ़ा को पस ए पुश्त डालना होगा...](https://bazmeshayari.com/gam-e-wafa-ko-pas-e-pusht/): गम ए वफ़ा को पस ए पुश्त डालना होगा खटक रहा है जो काँटा निकालना होगा, फ़कीर ए - [गुलाब चाँदनी रातों पे वार आये हम...](https://bazmeshayari.com/gulab-chaandni-raton-pe-waar/): गुलाब चाँदनी रातों पे वार आये हम तुम्हारे होंठों का सदका उतार आये हम, वो एक झील थी - [हुई न खत्म तेरी रह गुज़ार क्या करते...](https://bazmeshayari.com/hui-na-khatm-teri-rah-guzar/): हुई न खत्म तेरी रह गुज़ार क्या करते तेरे हिसार से ख़ुद को फ़रार क्या करते ? सफ़ीना - [एक लफ़्ज़ ए मोहब्बत का अदना ये फ़साना है...](https://bazmeshayari.com/ek-lafz-e-mohabbat-ka-adna-ye/): एक लफ़्ज़ ए मोहब्बत का अदना ये फ़साना है सिमटे तो दिल ए आशिक़ फैले तो ज़माना है, - [इसी चमन में ही हमारा भी एक ज़माना था...](https://bazmeshayari.com/isi-chaman-me-hi-hamara/): इसी चमन में ही हमारा भी एक ज़माना था यहीं कहीं कोई सादा सा आशियाना था, नसीब अब - [आदमी आदमी से मिलता है दिल मगर कम किसी से मिलता है...](https://bazmeshayari.com/aadmi-aadmi-se-milta-hai/): आदमी आदमी से मिलता है दिल मगर कम किसी से मिलता है, भूल जाता हूँ मैं सितम उस - [आँखों का था क़ुसूर न दिल का क़ुसूर था...](https://bazmeshayari.com/aankho-ka-tha-qusoor-naa-dil-ka/): आँखों का था क़ुसूर न दिल का क़ुसूर था आया जो मेरे सामने मेरा ग़ुरूर था, वो थे - [अल्लाह अगर तौफ़ीक़ न दे इन्सान के बस का काम नहीं...](https://bazmeshayari.com/allah-agar-taufiq-na-de/): अल्लाह अगर तौफ़ीक़ न दे इन्सान के बस का काम नहीं फ़ैज़ान ए मोहब्बत आम सही, इर्फ़ान ए - [बड़ी क़दीम रिवायत है ये सताने की...](https://bazmeshayari.com/badi-qadim-riwayat-hai/): बड़ी क़दीम रिवायत है ये सताने की करो कुछ और ही तदबीर आज़माने की, कभी तो फूट कर - [जिसे तुम प्यार समझे थे वो कारोबार था हमदम...](https://bazmeshayari.com/jise-tum-pyar-samjhe-the/): जिसे तुम प्यार समझे थे वो कारोबार था हमदम यहाँ सब अपने मतलब में मुहब्बत साथ रखते है, - [जो मिला उससे गुज़ारा न हुआ...](https://bazmeshayari.com/jo-mila-usse-guzara-n-hua/): जो मिला उससे गुज़ारा न हुआ जो हमारा था, वो हमारा न हुआ,   हम किसी और से - [पास आओ कि एक इल्तज़ा सुन लो...](https://bazmeshayari.com/paas-aao-ki-ek-iltaza-sun-lo/): पास आओ कि एक इल्तज़ा सुन लो हाँ प्यार है तुमसे बेपनाह सुन लो, एक तुम्ही को तो - [मालूम है इस दुनियाँ में मशहूर नहीं है...](https://bazmeshayari.com/malum-hai-is-duniyan-me/): मालूम है इस दुनियाँ में मशहूर नहीं है ये गाँव तेरे दिल से तो अब दूर नहीं है, - [माना कि अब तुम्हारा दिल भर गया होगा...](https://bazmeshayari.com/mana-ki-ab-tumahra/): माना कि अब तुम्हारा दिल भर गया होगा हमसे ना सही, प्यार कही और हो गया होगा, ये - [हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले...](https://bazmeshayari.com/hazaro-khwahishe-aisi-ki/): हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले, - [शाम तक सुबह की नज़रों से उतर जाते है...](https://bazmeshayari.com/shaam-tak-subah-kee-nazro-se/): शाम तक सुबह की नज़रों से उतर जाते है इतने समझौतों पे जीते है कि मर जाते है, - [ख़्वाब के जज़ीरो पर एक दीया जलाना था...](https://bazmeshayari.com/khwab-ke-jaziro-par-ek-diya/): ख़्वाब के जज़ीरो पर एक दीया जलाना था और फिर हवाओं को रास्ता बताना था, दर्द की फ़सिलो - [उदास शामो का तुम कुछ हिसाब रख लेना...](https://bazmeshayari.com/udas-shamo-ka-tum/): उदास शामो का तुम कुछ हिसाब रख लेना, दिल ए हज़ीं में मुहब्बत का बाब रख लेना, न - [बारिश की बरसती बूँदों ने जब दस्तक दी दरवाज़े पर...](https://bazmeshayari.com/barish-kee-barasti-boondo-ne/): बारिश की बरसती बूँदों ने जब दस्तक दी दरवाज़े पर महसूस हुआ तुम आये हो, अंदाज़ तुम्हारे जैसा - [अभी तो चाँद निकला है, अभी तो रात बाक़ी है...](https://bazmeshayari.com/abhi-to-chaand-nikla-hai/): अभी तो चाँद निकला है, अभी तो रात बाक़ी है दिल को दिल से कहनी है, अभी वो - [वो लोग जो कुछ रोज़ जवानी में मिलेंगे...](https://bazmeshayari.com/wo-log-jo-kuch-roz-jawani-me/): वो लोग जो कुछ रोज़ जवानी में मिलेंगे हर शाम वो फिर तेरी कहानी में मिलेंगे, ढूँढो न - [एक वो इतने खूबरू तौबा...](https://bazmeshayari.com/ek-wo-itne-khoobroo-tauba/): एक वो इतने खूबरू तौबा उसपे छूने की आरज़ू तौबा ! हाथ काँपेंगे रूह मचलेगी जब वो आएँगे - [यूँ ही तन्हाई में अब दिल को सजा देते है...](https://bazmeshayari.com/yun-hi-tanhaai-me-ab-dil-ko/): यूँ ही तन्हाई में अब दिल को सजा देते है नाम लिखते है तेरा लिख के मिटा देते - [क्या मिला ? और हुआ कितना ख़सारा सोचा...](https://bazmeshayari.com/kya-mila-aur-hua-kitna-khasaara-socha/): क्या मिला ? और हुआ कितना ख़सारा सोचा बाद मुद्दत के यही क़िस्सा दोबारा सोचा, रात फिर देर - [इश्क़ जब एक मगरूर से हुआ तो फिर...](https://bazmeshayari.com/ishq-jab-ek-magrur/): इश्क़ जब एक मगरूर से हुआ तो फिर छोड़ कर अना ख़ुद को झुकाना पड़ा मुझे, उसने खेला - [लरज़ती छत शिकस्ता बाम ओ दर से बात करनी है...](https://bazmeshayari.com/larzati-chhat-shikasta-baam-o-dar/): लरज़ती छत शिकस्ता बाम ओ दर से बात करनी है मुझे तन्हाई में कुछ अपने घर से बात - [उदास चाँद खुले पानियों में छोड़ गया...](https://bazmeshayari.com/udas-chaand-khule-paaniyo/): उदास चाँद खुले पानियों में छोड़ गया वो अपना चेहरा मेरे आँसूओ में छोड़ गया, हवा के झोंके - [तेरे फ़िराक़ के लम्हे शुमार करते हुए...](https://bazmeshayari.com/tere-firaq-ke-lamhe-shumar/): तेरे फ़िराक़ के लम्हे शुमार करते हुए बिखर गए हैं तेरा इंतिज़ार करते हुए, तुम्हें ख़बर ही नहीं - [सोचता हूँ कि उसे नींद भी आती होगी...](https://bazmeshayari.com/sochta-hoon-use-neend-bhi/): सोचता हूँ कि उसे नींद भी आती होगी या मेरी तरह फ़क़त अश्क बहाती होगी, वो मेरी शक्ल - [समन्दर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं...](https://bazmeshayari.com/samandar-me-utarta-hoon-to/): समन्दर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं तेरी आँखों को पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती - [महफ़िल से मुझको उठाने के बाद क्या मिलेगा दिल दुखाने के बाद...](https://bazmeshayari.com/mahfil-se-mujhko-uthane-ke-baad/): महफ़िल से मुझको उठाने के बाद क्या मिलेगा दिल दुखाने के बाद, आज तो देख लूँ मैं तुम्हे - [अपने हो कर भी जो नहीं मिलते...](https://bazmeshayari.com/apne-ho-kar-bhi-jo-nahi-milte/): अपने हो कर भी जो नहीं मिलते दिल ये जा कर है क्यूँ वही मिलते ? यहाँ मिलती - [यूँ बात बात पे कर के मुकालमा मुझसे...](https://bazmeshayari.com/yun-baat-baat-pe-kar-ke/): यूँ बात बात पे कर के मुकालमा मुझसे वो खुल रहा है मुसलसल ज़रा ज़रा मुझसे, मैं शाख - [तेरे लिए सब छोड़ के भी तेरा न रहा मैं...](https://bazmeshayari.com/tere-liye-sab-chhod-ke-bhi-tera-na/): तेरे लिए सब छोड़ के भी तेरा न रहा मैं दुनियाँ भी गई इश्क़ में, तुझसे भी गया - [इस मुहब्बत के करम से पहले...](https://bazmeshayari.com/is-muhabbat-ke-karam-se-pahle/): इस मुहब्बत के करम से पहले ख़ुद को जीता था मैं तुमसे पहले, हसरत ओ यास ओ अलम - [तुझे क्या बताऊँ ऐ दिलरुबा तेरे सामने मेरा हाल है...](https://bazmeshayari.com/tumhe-kya-bataaoon-ae-dilruba/): तुझे क्या बताऊँ ऐ दिलरुबा तेरे सामने मेरा हाल है मुझे जुस्तुजू है फ़क़त तेरी मुझे सिर्फ़ तेरा - [ज़हे क़िस्मत अगर तुम को हमारा दिल पसंद आया...](https://bazmeshayari.com/jah-e-qismat-agar-tumko/): ज़हे क़िस्मत अगर तुम को हमारा दिल पसंद आया मगर ये दाग़ क्यूँ कर ऐ मह-ए-कामिल पसंद आया, - [ख़ुद को न ऐ बशर कभी क़िस्मत पे छोड़ तू...](https://bazmeshayari.com/khud-ko-n-ae-bashar-kabhi/): ख़ुद को न ऐ बशर कभी क़िस्मत पे छोड़ तू दरिया की तेज धार को हिम्मत से मोड़ - [सुना कर हाल क़िस्मत आज़मा कर लौट आए हैं...](https://bazmeshayari.com/suna-kar-haal-qismat-aazma-kar/): सुना कर हाल क़िस्मत आज़मा कर लौट आए हैं उन्हें कुछ और बेगाना बना कर लौट आए हैं, - [हाथ उठे जो दुआ को, तो दिल ऐसे रखा...](https://bazmeshayari.com/haath-uthe-jo-dua-ko-to-dil-aise-rakha/): हाथ उठे जो दुआ को, तो दिल ऐसे रखा ख्वाहिशे बाद में रखी तुझे पहले रखा, वक़्त ने - [दर्द हो, दुःख हो तो दवा कीजिए...](https://bazmeshayari.com/dard-ho-dukh-ho-to-dawa-kijiye/): दर्द हो, दुःख हो तो दवा कीजिए फट पड़े आसमां तो क्या कीजिए ? नहीं इलाज़ ए गम - [जब लहज़े बदल जाएँ तो वज़ाहते कैसी...](https://bazmeshayari.com/jab-lahze-badal-jaayen-to/): जब लहज़े बदल जाएँ तो वज़ाहते कैसी नयी मयस्सर हो जाएँ तो पुरानी चाहतें कैसी ? वस्ल में - [जब भी तुम चाहो मुझे ज़ख्म नया देते रहो...](https://bazmeshayari.com/jab-bhi-tum-chaho-mujhe-zakhm/): जब भी तुम चाहो मुझे ज़ख्म नया देते रहो बाद में फिर मुझे सहने की दुआ देते रहो, - [इश्क़ में जान से गुज़रते है गुज़रने वाले...](https://bazmeshayari.com/ishq-me-jaan-se-guzrte-hai/): इश्क़ में जान से गुज़रते है गुज़रने वाले मौत की राह नहीं देखते मरने वाले, आखिरी वक़्त भी - [ग़ज़ल का हुस्न है और गीत का शबाब है वो...](https://bazmeshayari.com/gazal-ka-husn-hai-aur-geet-ka/): ग़ज़ल का हुस्न है और गीत का शबाब है वो नशा है जिसमे सुखन का वही शराब है - [अब भी कहता हूँ कि तुम्हे घबराना नहीं है...](https://bazmeshayari.com/ab-bhi-kahta-hoo-ki-tumhe/): अब भी कहता हूँ कि तुम्हे घबराना नहीं है घबरा कर कोई गलत क़दम उठाना नहीं है, हुनूज़ - [सोचता हूँ लहू तुम्हारा मैं गरमाऊँ किस तरह... ?](https://bazmeshayari.com/sochta-hoon-lahoo-tumhara-main/): सोचता हूँ लहू तुम्हारा मैं गरमाऊँ किस तरह ? ऐ मेरी कौम तुम्हे आख़िर मैं जगाऊँ किस तरह - [रात पिघली है तेरे सुरमई आँचल की तरह...](https://bazmeshayari.com/raat-pighli-hai-tere-surmai-aanchal-ki-tarah/): रात पिघली है तेरे सुरमई आँचल की तरह चाँद निकला है तुझे ढूँढने पागल की तरह, ख़ुश्क पत्तों - [तुमको वहशत तो सीखा दी है गुज़ारे लायक...](https://bazmeshayari.com/tumko-wahshat-to-sikha-dee-hai/): तुमको वहशत तो सीखा दी है गुज़ारे लायक और कोई हुक्म ? कोई काम हमारे लायक ? माज़रत - [एक अनकही, ख़ामोश मुहब्बत पे बात कर...](https://bazmeshayari.com/ek-ankahi-khamosh-muhabbat-pe-baat-kar/): एक अनकही, ख़ामोश मुहब्बत पे बात कर जो कर सके तो बाप की चाहत पे बात कर, रखता - [मुझे तन्हाई अपनी अब तुम्हारे नाम करना है...](https://bazmeshayari.com/mujhe-tanhai-apni-ab/): मुझे तन्हाई अपनी अब तुम्हारे नाम करना है बहुत मैं थक चुका हूँ अब मुझे आराम करना है, - [शादी से पहले हीरो नंबर वन शादी के बाद....](https://bazmeshayari.com/shadi-se-pahle-hero/): शादी से पहले हीरो नंबर वन शादी के बाद कुली नंबर वन शादी से पहले मैंने प्यार किया - [सियासत ने बदला में'यार मुल्क में हुक्मरानी का...](https://bazmeshayari.com/siyasat-ne-badla-meyar-mulq-me/): सियासत ने बदला में’यार मुल्क में हुक्मरानी का देश चलने लगा है पा कर इशारे अमीर घरानों से, - [है बहुत अँधेरा अब सूरज निकलना चाहिए...](https://bazmeshayari.com/hai-bahut-andhera-ab-suraj-nikalna/): है बहुत अँधेरा अब सूरज निकलना चाहिए जैसे भी हो अब ये मौसम बदलना चाहिए, रोज़ जो चेहरे - [संग ए मरमर से तराशा हुआ ये शोख़ बदन....](https://bazmeshayari.com/sang-e-marmar-se-tarasha-hua-ye-shokh/): संग ए मरमर से तराशा हुआ ये शोख़ बदन इतना दिलकश है कि अपनाने को जी चाहता है, - [वो नवाज़िशे वो इनायते वो बिला वजह की शिकायतें...](https://bazmeshayari.com/wo-nawazishe-wo-inayate/): वो नवाज़िशे वो इनायते वो बिला वजह की शिकायतें कभी रूठना कभी मनाना वो बिखरी सिमटी ख्वाहिशे, वो - [उसे मैं क्यूँ बताऊँ...???](https://bazmeshayari.com/use-main-kyun-bataaoon/): उसे मैं क्यूँ बताऊँ ??? मैंने उसको कितना चाहा है, बताया झूठ हो जाता है, सच्ची बात की - [अगर चाहते हो तुम सदा मुस्कुराना...](https://bazmeshayari.com/agar-chahte-ho-tum-sada-muskurana/): अगर चाहते हो तुम सदा मुस्कुराना कभी अपनी माँ का दिल न दुखाना,   करो अपनी माँ की - [वो ख़ुद आँसू बहाएगा ज़रा तुम मर तो जाने दो...](https://bazmeshayari.com/wo-khud-aansoo-bahayega-zara-tum/): वो ख़ुद आँसू बहाएगा ज़रा तुम मर तो जाने दो मुझे वापस बुलाएगा ज़रा तुम मर तो जाने - [फिर झूम उठा सावन फिर काली घटा छाई...](https://bazmeshayari.com/fir-jhoom-utha-sawan/): फिर झूम उठा सावन फिर काली घटा छाई फिर दर्द ने करवट ली फिर याद तेरी आई, होंठो - [चेहरे का ये निखार मुक़म्मल तो कीजिए...](https://bazmeshayari.com/chehre-ka-ye-nikhar/): चेहरे का ये निखार मुक़म्मल तो कीजिए ये रूप ये सिंगार मुक़म्मल तो कीजिए, रहने ही दे हुज़ूर - [किसी तरंग किसी सर ख़ुशी में रहता था...](https://bazmeshayari.com/kisi-tarang-kisi-sar-khushi-me-rahta-tha/): किसी तरंग किसी सर ख़ुशी में रहता था ये कल की बात है दिल ज़िन्दगी में रहता था, - [ज़िन्दगी पाँव न धर ज़ानिब ए अंज़ाम अभी...](https://bazmeshayari.com/zindagi-paanv-na-dhar-zanib-e-anzam/): ज़िन्दगी पाँव न धर ज़ानिब ए अंज़ाम अभी मेरे ज़िम्मे है अधूरे से कई काम अभी, अभी ताज़ा - [कभी ख़ामोश रहोगी कभी कुछ बोलोगी...](https://bazmeshayari.com/kabhi-khamosh-rahogi-kabhi/): कभी ख़ामोश रहोगी कभी कुछ बोलोगी हमें भुलाना भी चाहो तो भूला ना पाओगी, कोई पूछेगा बे वजह - [मुझे इतना प्यार न दो बाबा....](https://bazmeshayari.com/mujhe-itna-pyar-na-do-baba/): बेटी का दर्द… मुझे इतना प्यार न दो बाबा कल जितना मुझे नसीब न हो, ये जो माथा - [चिड़ियाँ होती है बेटियाँ....](https://bazmeshayari.com/chidiyan-hoti-hai-betiyan/): चिड़ियाँ होती है बेटियाँ मगर पंख नहीं होते बेटियों के, मायके भी होते है,ससराल भी होते है मगर - [फ़लक पे चाँद के हाले भी सोग करते हैं...](https://bazmeshayari.com/falaq-pe-chaand-ke-haale-bhi-sog-karte-hai/): फ़लक पे चाँद के हाले भी सोग करते हैं जो तू नहीं तो उजाले भी सोग करते हैं, - [खून अपना हो या पराया हो....](https://bazmeshayari.com/khoon-apna-ho-ki/): खून अपना हो या पराया हो नस्ल ए आदम का खून है आखिर,   जंग मशरिक़ में हो - [हालात थे ख़राब या मैं ख़राब था...](https://bazmeshayari.com/halaat-the-kharab-yaa-main/): हालात थे ख़राब या मैं ख़राब था मेरे सवाल में शामिल जवाब था, ख़ुशी मेरी क़िस्मत ने छिनी - [कभी लोग बदले कभी ठिकाना बदला...](https://bazmeshayari.com/kabhi-log-badle-kabhi/): कभी लोग बदले कभी ठिकाना बदला कभी सनम कभी सनम खाना बदला, साक़ी न मिल सका फिर भी - [ऐ दिल ये तेरी ज़िद्द मुझे नादानी लगती है...](https://bazmeshayari.com/ae-dil-ye-teri-zidd/): ऐ दिल ये तेरी ज़िद्द मुझे नादानी लगती है उसे पाने की उम्मीद अब बेमानी लगती है, क्यों - [बदन पे जिसके शराफ़त का पैरहन देखा...](https://bazmeshayari.com/badan-pe-jiske-sharafat-ka/): बदन पे जिसके शराफ़त का पैरहन देखा वो आदमी भी यहाँ हमने बदचलन देखा, ख़रीदने को जिसे कम - [सितम सितम न रहा जब सनम सनम न रहा...](https://bazmeshayari.com/sitam-sitam-na-raha/): सितम सितम न रहा जब सनम सनम न रहा कुछ ऐसे दर्द ने घेरा कि गम भी गम - [जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया...](https://bazmeshayari.com/jaate-jaate-wo-mujhe-achchi/): जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया उम्र भर दोहराऊँगा ऐसी कहानी दे गया, उससे मैं कुछ - [सोयें कहाँ थे आँखों ने तकिए भिगोये थे...](https://bazmeshayari.com/soye-kahan-the-aankho-ne/): सोयें कहाँ थे आँखों ने तकिए भिगोये थे हम भी कभी किसी के लिए ख़ूब रोये थे, अँगनाई - [विसाल ऐसे भी महँगा पड़ेगा दोनों को...](https://bazmeshayari.com/vishal-aise-bhi-mahnga-padega/): विसाल ऐसे भी महँगा पड़ेगा दोनों को बिछड़ने के लिए मिलना पड़ेगा दोनों को, फिर ऐसे तर्क ए - [उसने यूँ रास्ता दिया मुझको...](https://bazmeshayari.com/usne-yun-rasta-diya-mujhko/): उसने यूँ रास्ता दिया मुझको रास्ते से ही हटा दिया मुझको, दूर करने के वास्ते ख़ुद से ख़ुद - [उम्र भर सीने में एक दर्द दबाए रखा...](https://bazmeshayari.com/umr-bhar-sine-me-ek-dard/): उम्र भर सीने में एक दर्द दबाए रखा एक बेनाम से रिश्ते को निभाए रखा, था मुझे वहम - [कुछ एक रोज़ में मैं चाहतें बदलता हूँ...](https://bazmeshayari.com/kuch-ek-roz-me-main-chahte/): कुछ एक रोज़ में मैं चाहतें बदलता हूँ अगर न सीट मिले तो बसें बदलता हूँ, हर एक - [जुदाई में तेरी आँखों को झील करते हुए...](https://bazmeshayari.com/judai-me-teri-aankho-ko/): जुदाई में तेरी आँखों को झील करते हुए सुबूत ज़ाएअ’ किया है दलील करते हुए, मैं अपने आप - [झूठ का बोलना आसान नहीं होता है...](https://bazmeshayari.com/jhooth-bolna-aasaan-nahi/): झूठ का बोलना आसान नहीं होता है ये दिल तेरे बाद परेशान नहीं होता है, सब तेरे बा’द - [क़िताब ए ज़ीस्त में ज़हमत के बाब इतने है...](https://bazmeshayari.com/kitab-e-zist-me-zahmat/): क़िताब ए ज़ीस्त में ज़हमत के बाब इतने है ज़रा सी उम्र मिली है अज़ाब इतने है, ज़फ़ा, - [हरगिज़ किसी भी तौर किसी के न हो सके...](https://bazmeshayari.com/hargiz-kisi-bhi-taur-kisi/): हरगिज़ किसी भी तौर किसी के न हो सके हम उसके बाद और किसी के न हो सके, - [एक रात लगती है एक सहर बनाने में...](https://bazmeshayari.com/ek-raat-lagti-hai-ek/): एक रात लगती है एक सहर बनाने में हमने क्यों नहीं सोचा हमसफ़र बनाने में ? मंज़िलें बदलते - [दिन रात उसके हिज्र का दीमक लगे लगे...](https://bazmeshayari.com/din-raat-uske-hizr-ka/): दिन रात उसके हिज्र का दीमक लगे लगे दिल के तमाम ख़ाने मुझे खोखले लगे, महफ़िल में नाम - [छोड़ कर ऐसे गया है छोड़ने वाला मुझे...](https://bazmeshayari.com/chhod-kar-aise-gaya-hai/): छोड़ कर ऐसे गया है छोड़ने वाला मुझे दोस्तो उसने कहीं का भी नहीं छोड़ा मुझे, बोलबाला इस - [अब दरमियाँ कोई भी शिकायत नहीं बची...](https://bazmeshayari.com/ab-darmiyan-koi-bhi/): अब दरमियाँ कोई भी शिकायत नहीं बची या’नी क़रीब आने की सूरत नहीं बची, अब और कोई सदमा - [अगर जो प्यार ख़ता है तो कोई बात नहीं...](https://bazmeshayari.com/agar-jo-pyar-khata-hai/): अगर जो प्यार ख़ता है तो कोई बात नहीं क़ज़ा ही इसकी सज़ा है तो कोई बात नहीं, - [पथरा गई आँखे तेरा इंतज़ार करते करते...](https://bazmeshayari.com/pathara-gai-aankhe-tera/): पथरा गई आँखे तेरा इंतज़ार करते करते टूट गए हम एक तरफ़ा प्यार करते करते, क़यामत है इज़हार - [टूट कर बिखरे हुए इन्सान कहाँ जाएँगे ?](https://bazmeshayari.com/tut-kar-bikhre-hue/): टूट कर बिखरे हुए इन्सान कहाँ जाएँगे ? दूर तक सन्नाटा है नादान कहाँ जाएँगे ? रिश्ते जो - [किसे ख़बर थी हवा राह साफ़ करते हुए...](https://bazmeshayari.com/kise-khabar-thi-hawa/): किसे ख़बर थी हवा राह साफ़ करते हुए मेरा तवाफ़ करेगी तवाफ़ करते हुए, मैं ऐसा हँस रहा - [रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना...](https://bazmeshayari.com/ret-bhari-hai-in-aankho-me/): रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना कोई सूखा पेड़ मिले तो उस से - [फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे...](https://bazmeshayari.com/fool-barse-kahin-shabnam/): फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे और इस दिल की तरफ़ बरसे तो पत्थर बरसे, कोई बादल - [नज़र से गुफ़्तुगू ख़ामोश लब तुम्हारी तरह...](https://bazmeshayari.com/nazar-se-guftagoo-lab/): नज़र से गुफ़्तुगू ख़ामोश लब तुम्हारी तरह ग़ज़ल ने सीखे हैं अंदाज़ सब तुम्हारी तरह, जो प्यास तेज़ - [न जी भर के देखा न कुछ बात की...](https://bazmeshayari.com/naa-ji-bhar-ke-dekha/): न जी भर के देखा न कुछ बात की बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की, उजालों की परियाँ नहाने - [मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे...](https://bazmeshayari.com/musafir-ke-raste-badalte-rahe/): मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे मुक़द्दर में चलना था चलते रहे, कोई फूल सा हाथ काँधे पे था - [एक भटके हुए लश्कर के सिवा कुछ भी नहीं...](https://bazmeshayari.com/ek-bhatke-hue-lashkar/): एक भटके हुए लश्कर के सिवा कुछ भी नहीं ज़िन्दगानी मेरी ठोकर के सिवा कुछ भी नहीं, आप - [प्यास जो उम्र भर न बुझी पुरानी होगी...](https://bazmeshayari.com/pyas-jo-umr-bhar-na-bujhi/): प्यास जो उम्र भर न बुझी पुरानी होगी कभी तो आख़िर वो प्यास बुझानी होगी, उम्र गुज़ार दी - [गुल तेरा रंग चुरा लाए है गुलज़ारो में...](https://bazmeshayari.com/gul-tera-rang-chura-laye-hai/): गुल तेरा रंग चुरा लाए है गुलज़ारो में जल रहा हूँ भरी बरसात की बौछारों में, मुझसे कतरा - [आओ बाँट ले सब दर्द ओ अलम...](https://bazmeshayari.com/aao-baant-le-sab-dard-o-alam/): आओ बाँट ले सब दर्द ओ अलम कुछ तुम रख लो, कुछ हम रख ले अब पोंछ ले - [वो मेरे हाल पे रोया भी मुस्कुराया भी...](https://bazmeshayari.com/wo-mere-haal-pe-roya-bhi/): वो मेरे हाल पे रोया भी मुस्कुराया भी अजीब शख़्स है अपना भी है पराया भी, ये इंतिज़ार - [ये क़र्ज़ तो मेरा है चुकाएगा कोई और...](https://bazmeshayari.com/ye-qarz-to-mera-hai/): ये क़र्ज़ तो मेरा है चुकाएगा कोई और दुख मुझ को है और नीर बहाएगा कोई और, क्या - [मेरे लोग ख़ेमा ए सब्र में मेरा शहर गर्द ए मलाल में...](https://bazmeshayari.com/mere-log-khema-e-sabr-me/): मेरे लोग ख़ेमा ए सब्र में मेरा शहर गर्द ए मलाल में अभी कितना वक़्त है ऐ ख़ुदा - [दोस्त क्या ख़ूब वफ़ा का सिला देते है...](https://bazmeshayari.com/dost-kya-khoob-wafa-ka-sila/): दोस्त क्या ख़ूब वफ़ा का सिला देते है हर नये मोड़ पर एक ज़ख्म नया देते है, तुमसे - [निहत्थे आदमी के हाथ में हिम्मत ही काफी है...](https://bazmeshayari.com/nihatthe-aadmi-ke-hath-me/): निहत्थे आदमी के हाथ में हिम्मत ही काफी है हवा का रुख बदलने के लिए चाहत ही काफी - [हो मुबारक़ तुम्हे तुम्हारी उड़ान पिंजरे में...](https://bazmeshayari.com/ho-mubaraq-tumhe-tumhari/): हो मुबारक़ तुम्हे तुम्हारी उड़ान पिंजरे में अता हुए है तुम्हे दो जहाँ पिंजरे में, है सैरगाह भी - [फ़साना अब कोई अंजाम पाना चाहता है...](https://bazmeshayari.com/fasana-ab-koi-anzam/): फ़साना अब कोई अंजाम पाना चाहता है तअल्लुक़ टूटने को एक बहाना चाहता है, जहाँ एक शख़्स भी - [बारिश के क़तरे के दुख से ना वाक़िफ़ हो...](https://bazmeshayari.com/barish-ke-qatre-ke-dukh/): बारिश के क़तरे के दुख से ना वाक़िफ़ हो तुम हँसते चेहरे के दुख से ना वाक़िफ़ हो, - [सज़दे के सिवा सर को झुकाना नहीं आता...](https://bazmeshayari.com/sazde-ke-siwa-sar-ko/): रूठे हुए लोगो को मनाना नहीं आता सज़दे के सिवा सर को झुकाना नहीं आता, पत्थर तो चलाना - [सावन को ज़रा खुल के बरसने की दुआ दो...](https://bazmeshayari.com/savan-ko-zara-khul-ke/): सावन को ज़रा खुल के बरसने की दुआ दो हर फूल को गुलशन में महकने की दुआ दो, - [रास्ते जो हमेशा सहल ढूँढ़ते है...](https://bazmeshayari.com/raste-jo-hamesha-sahal/): रास्ते जो हमेशा सहल ढूँढ़ते है हो न हो वो सराबो में जल ढूँढ़ते है, जब भी लगता - [आज जो तुम्हारी नज़र में एक तवायफ़ सी है वो...](https://bazmeshayari.com/aaj-jo-tumhari-nazar-me/): आज जो तुम्हारी नज़र में एक तवायफ़ सी है वो तुम्हारी ही तो बनाई हुई बेअदब रिवायत सी - [हर क़दम कहता है तू आया है जाने के लिए...](https://bazmeshayari.com/har-qadam-kahta-hai/): हर क़दम कहता है तू आया है जाने के लिए मंज़िल ए हस्ती नहीं है दिल लगाने के - [ख़राब लोगो से भी रस्म ओ राह रखते थे...](https://bazmeshayari.com/kharab-logo-se-bhi-rasm-o-raah/): ख़राब लोगो से भी रस्म ओ राह रखते थे पुराने लोग गज़ब की निगाह रखते थे, ये और - [सिखाया जो सबक़ माँ ने वो हर पल निभाता हूँ...](https://bazmeshayari.com/sikhaya-jo-sabaq-maa-ne/): सिखाया जो सबक़ माँ ने वो हर पल निभाता हूँ मुसीबत लाख आये सब्र दिल को सिखाता हूँ, - [खुल के मिलने का सलीक़ा उन्हें आता नहीं...](https://bazmeshayari.com/khul-ke-milne-ka-saliqa/): खुल के मिलने का सलीक़ा उन्हें आता नहीं और मेरे क़रीब तो कोई चोर दरवाज़ा नहीं, वो समझते - [अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं...](https://bazmeshayari.com/ashaar-mere-yun-to/): अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं कुछ शेर फकत उनको सुनाने के लिए हैं, अब ये - [कोई चेहरा न हुआ रोशन न उजागर आँखें...](https://bazmeshayari.com/koi-chehra-n-hua-raushan/): कोई चेहरा न हुआ रोशन न उजागर आँखें आइना देख रही थीं मेरी पत्थर आँखें, ले उड़ी वक्त - [इस तरह सताया है परेशान किया है...](https://bazmeshayari.com/is-tarah-sataya-hai/): इस तरह सताया है परेशान किया है गोया कि मोहब्बत नहीं एहसान किया है, तुझको ही नहीं मुझ - [न शब ओ रोज़ ही बदले है न हाल अच्छा है...](https://bazmeshayari.com/naa-shab-o-roz-hi-badle/): न शब ओ रोज़ ही बदले है न हाल अच्छा है किस ब्राह्मण ने कहा था कि ये - [सब जल गया जलते हुए ख़्वाबों के असर से...](https://bazmeshayari.com/sab-jal-gaya-jalte-hue/): सब जल गया जलते हुए ख़्वाबों के असर से उठता है धुआँ दिल से निगाहों से जिगर से, - [एक दिन मुल्क के हर घर में उजाला होगा...](https://bazmeshayari.com/ek-din-mulq-ke-har-ghar-me/): एक दिन मुल्क के हर घर में उजाला होगा हर शख्स यहाँ सबका भला चाहने वाला होगा, इंसानों - [लोग कैसे है यहाँ के ? ये नगर कैसा है ?](https://bazmeshayari.com/log-kaise-hai-yahan-ke/): लोग कैसे है यहाँ के ? ये नगर कैसा है ? उनकी जादू भरी बातों में असर कैसा - [गुज़रे जो अपने यारों की सोहबत में चार दिन...](https://bazmeshayari.com/guzre-jo-apne-yaaro-ki/): गुज़रे जो अपने यारों की सोहबत में चार दिन ऐसा लगा बसर हुए जन्नत में चार दिन, उम्र - [वो दिल की झील में उतरा था एक साअ'त को...](https://bazmeshayari.com/wo-dil-ki-jheel-me-utra-tha/): वो दिल की झील में उतरा था एक साअ’त को ये उम्र हो गई है सहते इस मलामत - [ग़ैरत ए इश्क़ सलामत थी अना ज़िंदा थी...](https://bazmeshayari.com/gairat-e-ishq-salamat-thi/): ग़ैरत ए इश्क़ सलामत थी अना ज़िंदा थी वो भी दिन थे कि रह ओ रस्म ए वफ़ा - [उसे हम पा ही लेते बस ज़रा सा और चलते तो...](https://bazmeshayari.com/use-ham-paa-hi-lete-bas/): उसे हम पा ही लेते बस ज़रा सा और चलते तो सफ़र आसान था लेकिन ज़रा रस्ते संभलते - [तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की...](https://bazmeshayari.com/tinka-tinka-kaante-tode/): तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की क्यूँ इतनी लम्बी होती है चाँदनी रात जुदाई की ? - [सहमा सहमा डरा सा रहता है...](https://bazmeshayari.com/sahma-sahma-dara-saa-rahta-hai/): सहमा सहमा डरा सा रहता है जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है, काई सी जम गई है - [शाम से आज साँस भारी है...](https://bazmeshayari.com/shaam-se-aaj-sans-bhari-hai/): शाम से आज साँस भारी है बे क़रारी सी बे क़रारी है, आपके बाद हर घड़ी हमने आपके - [ज़हर के घूँट भी हँस हँस के पीये जाते है...](https://bazmeshayari.com/zahar-ke-ghoont-bhi-hans/): ज़हर के घूँट भी हँस हँस के पीये जाते है हम बहरहाल सलीक़े से जीये जाते है, एक - [किसी के वायदे पे क्यों ऐतबार हमने किया ?](https://bazmeshayari.com/kisi-ke-wayde-pe-kyo/): किसी के वायदे पे क्यों ऐतबार हमने किया ? न आने वालो का क्यों इंतज़ार हमने किया ? - [रोग ऐसे भी गम ए यार से लग जाते है...](https://bazmeshayari.com/rog-aise-bhi-gam-e-yaar-se/): रोग ऐसे भी गम ए यार से लग जाते है दर से उठते है तो दीवार से लग - [दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के...](https://bazmeshayari.com/dono-jahan-teri-muhabbat/): दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के वो जा रहा है कोई शब ए ग़म गुज़ार के, वीराँ - [किस्से मेरी उल्फ़त के जो मर्क़ूम है सारे...](https://bazmeshayari.com/qisse-meri-ulfat-ke-jo/): किस्से मेरी उल्फ़त के जो मर्क़ूम है सारे आ देख तेरे नाम से मौसम है सारे, बस इस - [ये इश्क़ पे सब दुनियाँ वाले बेकार की बातें करते है...](https://bazmeshayari.com/ye-ishq-pe-sab-duniya-wale/): ये इश्क़ पे सब दुनियाँ वाले बेकार की बातें करते है पायल के ग़मों का इल्म नहीं झंकार - [कोई नहीं आता समझाने अब आराम से हैं दीवाने...](https://bazmeshayari.com/koi-nahi-aata-samjhane/): कोई नहीं आता समझाने अब आराम से हैं दीवाने, तय न हुए दिल के वीराने थक कर बैठ - [कितना बेकार तमन्ना का सफ़र होता है...](https://bazmeshayari.com/kitna-bekar-tamanna-ka-safar/): कितना बेकार तमन्ना का सफ़र होता है कल की उम्मीद पे हर आज बसर होता है, यूँ मैं - [इंशा जी उठा अब कूच करो, इस शहर में जी का लगाना क्या...](https://bazmeshayari.com/insha-ji-utha-ab-kooch-karo/): इंशा जी उठा अब कूच करो, इस शहर में जी का लगाना क्या वहशी को सुकूं से क्या - [शिकवा भी ज़फ़ा का कैसे करे एक नाज़ुक सी दुश्वारी है...](https://bazmeshayari.com/shikwa-bhi-zafa-ka-kaise/): शिकवा भी ज़फ़ा का कैसे करे एक नाज़ुक सी दुश्वारी है आगाज़ ए वफ़ा ख़ुद हमने किया था - [उर्दू है मेरा नाम मैं ख़ुसरो की पहेली...](https://bazmeshayari.com/urdu-hai-mera-naam-mai/): उर्दू है मेरा नाम मैं ख़ुसरो की पहेली मैं मीर की हमराज़ हूँ ग़ालिब की सहेली, दक्कन के - [क़र्ज़ जाँ का उतारने के लिए मैं जीया ख़ुद को मारने के लिए...](https://bazmeshayari.com/qarz-jaan-utarne-ke-liye/): क़र्ज़  जाँ का उतारने के लिए मैं जीया ख़ुद को मारने के लिए,   मुझे जलना पड़ा दीये - [ये ज़र्द पत्तों की बारिश मेरा ज़वाल नहीं...](https://bazmeshayari.com/ye-zard-patton-ki-barish/): ये ज़र्द पत्तों की बारिश मेरा ज़वाल नहीं मेरे बदन पे किसी दूसरे की शाल नहीं, उदास हो - [वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है...](https://bazmeshayari.com/wo-chandani-ka-badan/): वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है, उतर भी आओ - [वही ताज है वही तख़्त है वही ज़हर है वही जाम है...](https://bazmeshayari.com/wahi-taaz-hai-wahi-takht-hai/): वही ताज है वही तख़्त है वही ज़हर है वही जाम है ये वही ख़ुदा की ज़मीन है - [थी जिसकी जुस्तज़ू वो हकीक़त नहीं मिली...](https://bazmeshayari.com/thi-jiski-justazoo-wo-haqiqat-nahi/): थी जिसकी जुस्तज़ू वो हकीक़त नहीं मिली इन बस्तियों में हमको रफ़ाक़त नहीं मिली, अबतक हूँ इस गुमाँ - [अब जो बिछडे हैं, तो बिछडने की शिकायत कैसी...](https://bazmeshayari.com/ab-jo-bichhde-hai-to-bichhadne-ki/): अब जो बिछडे हैं, तो बिछडने की शिकायत कैसी मौत के दरिया में उतरे तो जीने की इजाजत - [कौन कहता है शरारत से तुम्हे देखते है...](https://bazmeshayari.com/kaun-kahta-hai-shararat-se-tumhe-dekhte-hai/): कौन कहता है शरारत से तुम्हे देखते है जान ए मन हम तो मुहब्बत से तुम्हे देखते है, - [तू समझता है कि रिश्तों की दुहाई देंगे...](https://bazmeshayari.com/tu-samjhta-hai-ki-rishto-ki-duhai-denge/): तू समझता है कि रिश्तों की दुहाई देंगे हम तो वो हैं तेरे चेहरे से दिखाई देंगे, हम - [तहरीर से वर्ना मेरी क्या हो नहीं सकता...](https://bazmeshayari.com/tahrir-se-warna-meri-kya-ho-nahi/): तहरीर से वर्ना मेरी क्या हो नहीं सकता एक तू है जो लफ़्ज़ों में अदा हो नहीं सकता, - [जो पत्थरो में जुबां ढूँढे हम वो चीज है दोस्त...](https://bazmeshayari.com/jo-pattharo-me-zuban-dhoondhe/): जो पत्थरो में जुबां ढूँढे हम वो चीज है दोस्त है मर्ज़ ख़्वाब सजाना तो हम मरीज़ है - [दोस्तों से रसाई सोचेंगे सबसे हो आशनाई सोचेंगे...](https://bazmeshayari.com/dosto-se-rasaai-sochenge/): दोस्तों से रसाई सोचेंगे सबसे हो आशनाई सोचेंगे, सोचती चाहे जो रहे दुनियाँ हम तो सबकी भलाई सोचेंगे, - [तेरे में अब तो रही बात वो नहीं है दोस्त...](https://bazmeshayari.com/tere-me-ab-to-rahi-baat-wo-nahi/): तेरे में अब तो रही बात वो नहीं है दोस्त हुई ये अपनी मुलाक़ात वो नहीं है दोस्त, - [हिज़्र ए गम क़ुर्ब में तन्हाई रुलाती होगी...](https://bazmeshayari.com/hizr-e-gam-qurb-me-tanhaai/): हिज़्र ए गम क़ुर्ब में तन्हाई रुलाती होगी याद मेरी भी उसे फिर तो सताती होगी, ऐ हवा - [किसी की आह सुनते ही जो फ़ौरन काँप जाते है...](https://bazmeshayari.com/kisi-ki-aah-sunte-hi-jo-kaanp/): किसी की आह सुनते ही जो फ़ौरन काँप जाते है वही इंसानियत के दर्द में आँसू बहाते है, - [नफ़रत को छोड़ द तू मुहब्बत की बात कर...](https://bazmeshayari.com/nafrat-ko-chhod-de-tu-muhabbat-ki/): नफ़रत को छोड़ द तू मुहब्बत की बात कर इत्तिहाद ओ अमन ओ शराफ़त की बात कर, मत - [अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं...](https://bazmeshayari.com/apni-marzi-se-kahan-apne-safar/): अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम - [कहानियों ने ज़रा खींच कर बदन अपने...](https://bazmeshayari.com/kahaniyo-ne-zara-khich-kar-badan/): कहानियों ने ज़रा खींच कर बदन अपने हरम सरा से बुलाया हमें वतन अपने, खुले गले की क़मीसें - [अदा है ख़्वाब है तस्कीन है तमाशा है...](https://bazmeshayari.com/ada-hai-khwab-hai-taskin-hai/): अदा है ख़्वाब है तस्कीन है तमाशा है हमारी आँख में एक शख़्स बेतहाशा है, ज़रा सी चाय - [तुम्हे न फिर से सताएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़...](https://bazmeshayari.com/tumhe-n-fir-se-satayenge-ham/): तुम्हे न फिर से सताएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़ कि अब न लौट के आएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़, रखेंगे - [दिल ने जब जब तुझ पे इंहिसार किया...](https://bazmeshayari.com/dil-ne-jab-jab-tujh-pe-inhisar-kiya/): दिल ने जब जब तुझ पे इंहिसार किया तुमने ख़ुद को और भी बे ऐतबार किया, तू चल - [नादान न बन इतना तू हर सवाल का जवाब जानता है...](https://bazmeshayari.com/nadaan-na-ban-itna-tu-har/): नादान न बन इतना तू हर सवाल का जवाब जानता है मेरी नींदे चुराने वाले तू मेरा हर - [वही बहाना बना है उदास होने का...](https://bazmeshayari.com/wahi-bahana-bana-hai-udas-hone-ka/): बहुत गुमान था मौसम शनास होने का वही बहाना बना है उदास होने का, बदन को काढ़ लिया - [अना से तर्क ए अना तक सफ़र किया जाए...](https://bazmeshayari.com/ana-se-tark-e-ana-tak-safar/): बहुत कठिन ही सही मगर किया जाए अना से तर्क ए अना तक सफ़र किया जाए, जब अपनी - [मैं जो महका तो मेरी शाख़ जला दी उसने...](https://bazmeshayari.com/main-jo-mahka-to-meri-shaakh/): मैं जो महका तो मेरी शाख़ जला दी उसने सब्ज़ मौसम में मुझे ज़र्द हवा दी उसने, पहले - [नग्मो से भरे दरिया थे रवां गीतों से भरी हरियाली थी...](https://bazmeshayari.com/nagmo-se-bhare-dariya-the-ravan-geeto-se/): इस देस का रंग अनोखा था इस देस की बात निराली थी नग्मो से भरे दरिया थे रवां - [एक वा'दा है किसी का जो वफ़ा होता नहीं...](https://bazmeshayari.com/ek-wada-hai-kisi-ka-jo-wafa-hota-nahi/): एक वा’दा है किसी का जो वफ़ा होता नहीं वर्ना इन तारों भरी रातों में क्या होता नहीं, - [मेरे नग़्मात को अंदाज़ ए नवा याद नहीं...](https://bazmeshayari.com/mere-nagmat-ko-andaz-e-nava-yaad-nahi/): है दुआ याद मगर हर्फ़ ए दुआ याद नहीं मेरे नग़्मात को अंदाज़ ए नवा याद नहीं, मैं - [जाते जाते मुझे इल्ज़ाम तो देते जाओ...](https://bazmeshayari.com/jaate-jaate-mujhe-ilzam-to/): जाते जाते मुझे इल्ज़ाम तो देते जाओ दिल के रिश्ते को कोई नाम तो देते जाओ, दम निकल - [वो इस अंदाज़ की मुझसे मोहब्बत चाहता है...](https://bazmeshayari.com/wo-is-andaz-ki-mujhse-mohabbat/): वो इस अंदाज़ की मुझसे मोहब्बत चाहता है मेरे हर ख़्वाब पर अपनी हुकूमत चाहता है, मेरे हर - [आँखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते...](https://bazmeshayari.com/aankhe-mujhe-talwo-se-wo/): आँखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते अरमान मेरे दिल के निकलने नहीं देते, ख़ातिर से तेरी - [देसों में सब से अच्छा हिन्दोस्तान मेरा...](https://bazmeshayari.com/deso-me-sabse-achcha-hindustan-mera/): देसों में सब से अच्छा हिन्दोस्तान मेरा रू ए ज़मीं पे जन्नत, जन्नत निशान मेरा, वो प्यारा प्यारा - [हुस्न ए मह गरचे ब हंगाम ए कमाल अच्छा है...](https://bazmeshayari.com/husn-e-mah-garche-ba-hangam/): हुस्न ए मह गरचे ब हंगाम ए कमाल अच्छा है उससे मेरा मह ए ख़ुर्शीद ज़माल अच्छा है, - [तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है न...](https://bazmeshayari.com/teri-khushiyo-ka-sabab/): तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है न दोस्ती मुझ से और प्यार कोई और है न - [ये चुभन अकेलेपन की, ये लगन उदास शब से...](https://bazmeshayari.com/ye-chubhan-akelepan-ki/): ये चुभन अकेलेपन की, ये लगन उदास शब से मैं हवा से लड़ रहा हूँ, तुझे क्या बताऊँ - [जिनके घरो में आज भी चूल्हा नहीं जला...](https://bazmeshayari.com/jinke-gharo-me-aaj-chulha-nahi/): जिनके घरो में आज भी चूल्हा नहीं जला खाना गर हम उनको खिलाएँ तो ईद है, पानी नहीं - [मुबारक़ हो ! अहल ए वतन क्या ख़ूब...](https://bazmeshayari.com/mubarak-ho-ahl-e-watan/): मुबारक़ हो ! अहल ए वतन क्या ख़ूब इज्ज़त बख्शी है आलमी अखबारों ने   सोने की चिड़िया - [आया ही नहीं कोई बोझ अपना उठाने को...](https://bazmeshayari.com/aaya-hi-nahi-koi-bojh-uthane-ko/): आया ही नहीं कोई बोझ अपना उठाने को कब तक मैं छुपा रखता इस ख़्वाब ख़ज़ाने को ? - [अब इस मकाँ में नया कोई दर नहीं करना...](https://bazmeshayari.com/ab-is-maqan-me-naya-koi/): अब इस मकाँ में नया कोई दर नहीं करना ये काम सहल बहुत है मगर नहीं करना, ज़रा - [छोड़ो अब उस चराग़ का चर्चा बहुत हुआ...](https://bazmeshayari.com/chhodo-ab-us-charag-ka/): छोड़ो अब उस चराग़ का चर्चा बहुत हुआ अपना तो सब के हाथों ख़सारा बहुत हुआ, क्या बेसबब - [सवाद ए शाम न रंग ए सहर को देखते हैं...](https://bazmeshayari.com/sawad-e-sham-n-rang-e-sahar/): सवाद ए शाम न रंग ए सहर को देखते हैं बस एक सितारा ए वहशत असर को देखते - [लोग कहते थे वो मौसम ही नहीं आने का...](https://bazmeshayari.com/log-kahte-the-wo-mausam/): लोग कहते थे वो मौसम ही नहीं आने का अब के देखा तो नया रंग है वीराने का, - [किसी से क्या कहे सुने अगर गुबार हो गए...](https://bazmeshayari.com/kisi-se-kya-kahe-sune/): किसी से क्या कहे सुने अगर गुबार हो गए हम ही हवा की ज़द में थे हम ही - [अब वो झोंके कहाँ सबा जैसे आग है शहर की हवा जैसे](https://bazmeshayari.com/ab-wo-jhonke-kahan-saba-jaise/): अब वो झोंके कहाँ सबा जैसे आग है शहर की हवा जैसे, शब सुलगती है दोपहर की तरह - [दोस्ती को आम करना चाहता है...](https://bazmeshayari.com/dosti-ko-aam-karna-chahta-hai/): दोस्ती को आम करना चाहता है ख़ुद को नीलाम करना चाहता है, बेंच आया है घटा के हाथ - [मिलते है दोस्त क़िस्मत से ज़माने में...](https://bazmeshayari.com/milte-hai-dost-qismat-se/): मिलते है दोस्त क़िस्मत से ज़माने में हर एक होता नहीं क़ाबिल ए ऐतबार ज़माने में, ख़ुलूस के - [हम एक ख़ुदा के बन्दे है और एक जहाँ में बसते है](https://bazmeshayari.com/hum-ek-khuda-ke-bande-hai/): हम एक ख़ुदा के बन्दे है और एक जहाँ में बसते है, रब भी जब चाहे हम साथ - [झूठी हँसी तेरा मुस्कुराना झूठा...](https://bazmeshayari.com/jhuthi-hansi-tera-muskurana/): झूठी हँसी तेरा मुस्कुराना झूठा यार तेरा तो हर एक बहाना झूठा, कैसे ऐतबार करूँ फिर से तुझ - [आज के माहौल में इंसानियत बदनाम है...](https://bazmeshayari.com/aaj-ke-mahaul-me-insaniyat/): आज के माहौल में इंसानियत बदनाम है ये इनाद ए बाहमी का ही फ़क़त अंजाम है, हक़ शनासी - [तुख़्म ए नफ़रत बो रहा है आदमी...](https://bazmeshayari.com/tukhm-e-nafrat-bo-raha-hai/): तुख़्म ए नफ़रत बो रहा है आदमी आदमियत खो रहा है आदमी, ज़िंदगी का नाम है जेहद ए - [ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो...](https://bazmeshayari.com/zindagi-ye-to-nahi-tujhko/): ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो कुछ न कुछ हम ने तेरा क़र्ज़ उतारा - [ज़िंदगी तुझ को भुलाया है बहुत दिन हमने...](https://bazmeshayari.com/zindagi-tujhko-bhulaya-hai/): ज़िंदगी तुझ को भुलाया है बहुत दिन हमने वक़्त ख़्वाबों में गँवाया है बहुत दिन हमने, अब ये - [अगर सफ़र में मेरे साथ मेरा यार चले...](https://bazmeshayari.com/agar-safar-me-mere-sath/): अगर सफ़र में मेरे साथ मेरा यार चले तवाफ़ करता हुआ मौसम ए बहार चले, लगा के वक़्त - [बूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच..](https://bazmeshayari.com/boodha-tapra-tuta-chhappar/): बूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच उसने कैसे काटी होंगी, लंबी लंबी रातें सच, लफ़्जों - [ये नफ़रतो की सदाएँ, वतन का क्या होगा ?](https://bazmeshayari.com/ye-nafrato-kee-sadayen/): ये नफ़रतो की सदाएँ, वतन का क्या होगा ? हवा में आग बही, तो चमन का क्या होगा - [ले गया दिल में दबा कर राज़ कोई...](https://bazmeshayari.com/le-gaya-dil-me-daba-kar/): ले गया दिल में दबा कर राज़ कोई पानियों पे लिख गया आवाज़ कोई, बाँध कर मेरे परो - [सता लें हमको दिलचस्पी जो है उनकी सताने में...](https://bazmeshayari.com/sata-le-hamko-dilchaspi-jo-hai/): सता लें हमको दिलचस्पी जो है उनकी सताने में हमारा क्या वो हो जाएँगे रुस्वा ख़ुद ज़माने में, - [हिज़रतो का ज़माना भी क्या ज़माना है...](https://bazmeshayari.com/hizrato-ka-zamana-bhi-kya/): हिज़रतो का ज़माना भी क्या ज़माना है उन्ही से दूर है जिनके लिए कमाना है, ख़ुशी ये है - [समझ रहे थे कि अपनी सुधर गई दुनियाँ...](https://bazmeshayari.com/samjh-rahe-the-ki-apni-sudhar/): समझ रहे थे कि अपनी सुधर गई दुनियाँ हमें तो मुफ़्त में बदनाम कर गई दुनियाँ, मुतालबों से - [बीते रिश्ते तलाश करती है...](https://bazmeshayari.com/bite-rishte-talash-karti-hai/): बीते रिश्ते तलाश करती है ख़ुशबू गुंचे तलाश करती है, जब गुज़रती है उस गली से सबा ख़त - [अश्क ओ खूं घुलते है तब दीदा ए तर बनती है...](https://bazmeshayari.com/ashk-o-khoon-ghulte-hai/): अश्क ओ खूं घुलते है तब दीदा ए तर बनती है दास्ताँ इश्क़ में मरने से अमर बनती - [सभी कहें मेरे गम ख़्वार के अलावा भी...](https://bazmeshayari.com/sabhi-kahen-mere-gamkhwar-ke/): सभी कहें मेरे गम ख़्वार के अलावा भी कोई तो बात करो यार के अलावा भी, बहुत से - [हर मुलाक़ात में लगते हैं वो बेगाने से...](https://bazmeshayari.com/har-mulaqat-me-lagte-hai/): हर मुलाक़ात में लगते हैं वो बेगाने से फ़ाएदा क्या है भला ऐसों के याराने से, कुछ जो - [तुम हो जब मेरे लिए हैं दो जहाँ मेरे लिए...](https://bazmeshayari.com/tum-ho-jab-mere-liye/): तुम हो जब मेरे लिए हैं दो जहाँ मेरे लिए ये ज़मीं मेरे लिए ये आसमाँ मेरे लिए, - [सर जिस पे न झुक जाए उसे दर नहीं कहते...](https://bazmeshayari.com/sar-jis-pe-na-jhuk-jaaye/): सर जिस पे न झुक जाए उसे दर नहीं कहते हर दर पे जो झुक जाए उसे सर - [मैं दहशतगर्द था मरने पे बेटा बोल सकता है...](https://bazmeshayari.com/main-dahshatgard-tha-marne-pe/): मैं दहशतगर्द था मरने पे बेटा बोल सकता है हुकूमत के इशारे पे तो मुर्दा बोल सकता है, - [मुहब्बत करने वालों में ये झगड़ा डाल देती है...](https://bazmeshayari.com/muhabbat-karne-walo-me/): मुहब्बत करने वालों में ये झगड़ा डाल देती है सियासत दोस्ती की जड़ में मट्ठा डाल देती है, - [ये संसद है यहाँ भगवान का भी बस नहीं चलता...](https://bazmeshayari.com/ye-sansad-hai-yahan-bhagwan/): ये संसद है यहाँ भगवान का भी बस नहीं चलता जहाँ पीतल ही पीतल हो वहाँ पारस नहीं - [अजब दुनिया है नाशायर यहाँ पर सर उठाते हैं..](https://bazmeshayari.com/azab-duniyan-hai-naa-shayar/): अजब दुनिया है नाशायर यहाँ पर सर उठाते हैं जो शायर हैं वो महफ़िल में दरी चादर उठाते - [उनसे मिलिए जो यहाँ फेर बदल वाले हैं...](https://bazmeshayari.com/unse-miliye-jo-yahan/): उनसे मिलिए जो यहाँ फेर बदल वाले हैं हमसे मत बोलिए हम लोग ग़ज़ल वाले हैं, कैसे शफ़्फ़ाफ़ - [हर एक आवाज़ अब उर्दू को फ़रियादी बताती है..](https://bazmeshayari.com/har-ek-awaz-ab-urdu-ko/): हर एक आवाज़ अब उर्दू को फ़रियादी बताती है यह पगली फिर भी अब तक ख़ुद को शहज़ादी - [चराग़ अपनी थकन की कोई सफ़ाई न दे...](https://bazmeshayari.com/charag-apni-thakan-ki/): चराग़ अपनी थकन की कोई सफ़ाई न दे वो तीरगी है कि अब ख़्वाब तक दिखाई न दे, - [एक टूटी हुई ज़ंजीर की फ़रियाद हैं हम...](https://bazmeshayari.com/ek-tuti-hui-zanjir-ki/): एक टूटी हुई ज़ंजीर की फ़रियाद हैं हम और दुनिया ये समझती है कि आज़ाद हैं हम, क्यूँ - [जिस्म का बोझ उठाए हुए चलते रहिए...](https://bazmeshayari.com/zism-ka-bojh-uthaye-hue/): जिस्म का बोझ उठाए हुए चलते रहिए धूप में बर्फ़ की मानिंद पिघलते रहिए, ये तबस्सुम तो है - [दुनियाँ कहीं जो बनती है मिटती ज़रूर है...](https://bazmeshayari.com/duniyan-kahin-jo-banti-hai/): दुनियाँ कहीं जो बनती है मिटती ज़रूर है परदे के पीछे कोई न कोई ज़रूर है, जाते है - [तू ग़ज़ल बन के उतर बात मुकम्मल हो जाए...](https://bazmeshayari.com/tu-gazal-ban-ke-utar/): तू ग़ज़ल बन के उतर बात मुकम्मल हो जाए मुंतज़िर दिल की मुनाजात मुकम्मल हो जाए, उम्र भर - [हाल ए दिल पे ही शायर बुनते है गज़ल...](https://bazmeshayari.com/haal-e-dil-pe-hi-shayar/): हाल ए दिल पे ही शायर बुनते है गज़ल जो बात दिल की समझते है वो सुनते है - [दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह...](https://bazmeshayari.com/dard-se-mera-daman-bhar-de/): दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह फिर चाहे दीवाना कर दे या अल्लाह, मैनें तुझसे चाँद - [बिखरे बिखरे सहमे सहमे रोज़ ओ शब देखेगा कौन...](https://bazmeshayari.com/bikhre-bikhre-sahme-sahme/): बिखरे बिखरे सहमे सहमे रोज़ ओ शब देखेगा कौन लोग तेरे जुर्म देखेंगे सबब देखेगा कौन ? हाथ - [ये विसाल ओ हिज़्र का मसअला तो...](https://bazmeshayari.com/ye-visal-o-hizr-ka-masala/): ये विसाल ओ हिज़्र का मसअला तो मेरी समझ में न आ सका कभी कोई मुझको न पा - [हम ग़ज़ल में तेरा चर्चा नहीं होने देते...](https://bazmeshayari.com/ham-gazal-me-tera/): हम ग़ज़ल में तेरा चर्चा नहीं होने देते तेरी यादों को भी रुस्वा नहीं होने देते, कुछ तो - [मेरे थके हुए शानों से बोझ उतर तो गया...](https://bazmeshayari.com/mere-thake-hue-shano-se/): मेरे थके हुए शानों से बोझ उतर तो गया बहुत तवील था ये दिन मगर गुज़र तो गया, - [थकी हुई मामता की क़ीमत लगा रहे हैं...](https://bazmeshayari.com/thaki-hui-mamta-ki/): थकी हुई मामता की क़ीमत लगा रहे हैं अमीर बेटे दुआ की क़ीमत लगा रहे हैं, मैं जिन - [तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं...](https://bazmeshayari.com/tum-pucho-aur-main-naa/): तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो - [आज कुछ बात है जो ज़िद पे अड़े हैं कुत्ते...](https://bazmeshayari.com/aaj-kuch-baat-hai-jo/): आज कुछ बात है जो ज़िद पे अड़े हैं कुत्ते जाने क्यूँ अपने ही मालिक पे चढ़े हैं - [ज़रीदे में छपी है एक ग़ज़ल दीवान जैसा है...](https://bazmeshayari.com/zaride-me-chhapi-hai/): ज़रीदे में छपी है एक ग़ज़ल दीवान जैसा है ग़ज़ल का फ़न अभी भी रेत के मैदान जैसा - [ज़िन्दगी बस एक ये लम्हा मुझे भी भा गया...](https://bazmeshayari.com/zindagi-bas-ek-ye-lamha/): ज़िन्दगी बस एक ये लम्हा मुझे भी भा गया आज बेटे के बदन पर कोट मेरा आ गया, - [समझता खूब है वो भी बयान की कीमत...](https://bazmeshayari.com/samjhta-khoob-hai-wo-bhi/): समझता खूब है वो भी बयान की कीमत चुका रहा है जो अब भी ज़ुबान की कीमत, इसी - [ज़िन्दगी दी है तो जीने का हुनर भी देना...](https://bazmeshayari.com/zindagi-dee-hai-to-jine-ka/): ज़िन्दगी दी है तो जीने का हुनर भी देना पाँव बख्शे है तो तौफ़ीक ए सफ़र भी देना, - [काँटे ही चुभन दे ज़रूरी तो नहीं...](https://bazmeshayari.com/kaante-hi-chubhan-de/): काँटे ही चुभन दे ज़रूरी तो नहीं फूल भी नश्तर चभोते है, बारिश ही भिगोए तन मन ज़रूरी - [दुश्मन मेरी ख़ुशियों का ज़माना ही नहीं था...](https://bazmeshayari.com/dushman-meri-khushiyo-ka/): दुश्मन मेरी ख़ुशियों का ज़माना ही नहीं था तुमने भी कभी अपना तो जाना ही नहीं था, क्या - [ज़ख्म ए तन्हाई में ख़ुशबू ए हिना किसकी थी...](https://bazmeshayari.com/zakhm-e-tanhai-me/): ज़ख्म ए तन्हाई में ख़ुशबू ए हिना किसकी थी साया दीवार पे मेरा था, सदा किसकी थी ? - [ना जाने कैसी तक़दीर पाई है...](https://bazmeshayari.com/naa-jaane-kaisi-taqdeer/): ना जाने कैसी तक़दीर पाई है जो आया आज़मा के चला गया, कल तक गले लगाने वाला भी - [कभी राहो में मिली होगी तू...](https://bazmeshayari.com/kabhi-raaho-me-mili-hogi/): कभी राहो में मिली होगी तू तुझे मैंने कभी देखा तो होगा, हर दिल कुछ कहता है इस - [सफ़र है धूप का इसमें क़याम थोड़ी है...](https://bazmeshayari.com/safar-hai-dhoop-ka/): सफ़र है धूप का इसमें क़याम थोड़ी है बला है इश्क़ ये बच्चों का काम थोड़ी है, किसी - [तनाव में जब आ जाए तो धागे टूट जाते है...](https://bazmeshayari.com/tanav-me-jab-aa-jaaye/): तनाव में जब आ जाए तो धागे टूट जाते है ज़रा सी बात पर पुराने रिश्ते टूट जाते - [अंधेरा ज़ेहन का सम्त ए सफ़र जब खोने लगता है...](https://bazmeshayari.com/andhera-zehan-ka-samt/): अंधेरा ज़ेहन का सम्त ए सफ़र जब खोने लगता है किसी का ध्यान आता है उजाला होने लगता - [दुनियाँ जिसे कहते है जादू का खिलौना है...](https://bazmeshayari.com/duniyan-jise-kahte-hai/): दुनियाँ जिसे कहते है जादू का खिलौना है मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है, - [कोई दर्द कोई ख़ुशी कोई अरमान अब नहीं...](https://bazmeshayari.com/koi-dard-koi-khushi-koi/): कोई दर्द कोई ख़ुशी कोई अरमान अब नहीं ज़िस्म तो है मगर जान अब नहीं, जिस कदर था - [ज़िन्दगी यूँ हुई बसर तन्हा...](https://bazmeshayari.com/zindagi-yun-hui-basar/): ज़िन्दगी यूँ हुई बसर तन्हा काफ़िला साथ और सफ़र तन्हा, अपने साये से चौक जाते है उम्र गुज़री - [काँटो की चुभन पे फूलो का मज़ा भी...](https://bazmeshayari.com/kaanto-kee-chubhan-pe/): काँटो की चुभन पे फूलो का मज़ा भी दिल दर्द के मौसम में रोया भी हँसा भी, आने - [कुछ भी हो वो अब दिल से जुदा हो नहीं सकते...](https://bazmeshayari.com/kuch-bhi-ho-wo-ab/): कुछ भी हो वो अब दिल से जुदा हो नहीं सकते हम मुजरिम ए तौहीन ए वफ़ा हो - [जब ज़िंदगी सुकून से महरूम हो गई...](https://bazmeshayari.com/jab-zindagi-sukun-se/): जब ज़िंदगी सुकून से महरूम हो गई उन की निगाह और भी मासूम हो गई, हालात ने किसी - [तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा...](https://bazmeshayari.com/tum-door-ho-to-pyar/): तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा अब के बरस बहार का मौसम न आएगा, चूमूँगा - [ज़िंदगी का हर नफ़स मम्नून है तदबीर का...](https://bazmeshayari.com/zindagi-ka-har-nafas/): ज़िंदगी का हर नफ़स मम्नून है तदबीर का वाइज़ो धोखा न दो इंसान को तक़दीर का, अपनी सन्नाई - [गर हक़ चाहते हो तो फिर जंग लड़ो...](https://bazmeshayari.com/gar-haq-chahte-ho-to-fir/): गर हक़ चाहते हो तो फिर जंग लड़ो गुहार लगाने से कहाँ ये निज़ाम बदलेगा, छाँव ढूँढ़ते हो, - [जाने क्यूँ अब शर्म से चेहरे गुलाब नहीं होते...](https://bazmeshayari.com/jaane-kyun-ab-sharm-se/): जाने क्यूँ अब शर्म से चेहरे गुलाब नहीं होते जाने क्यूँ अब मस्त मौला मिजाज़ नहीं होते, पहले - [मुफ़लिसी में दिन बिताते है यहाँ...](https://bazmeshayari.com/muflisi-me-din-bitate-hai/): मुफ़लिसी में दिन बिताते है यहाँ फिर भी सपने हम सजाते है यहाँ, मज़हबी बातें उठा कर लोग - [झूठी बाते झूठे लोग, सहते रहेंगे सच्चे लोग...](https://bazmeshayari.com/jhuthi-baaten-jhuthe-log/): झूठी बाते झूठे लोग, सहते रहेंगे सच्चे लोग हरियाली पर बोलेंगे, सावन के सब अँधे लोग, दो कौड़ी - [न मिली छाँव कहीं, यूँ तो कई शज़र मिले...](https://bazmeshayari.com/na-mili-chhavn-kahi-yun/): न मिली छाँव कहीं, यूँ तो कई शज़र मिले वीरान ही मिले सफ़र में जो भी शहर मिले, - [रौनक तुम्हारे दम से है लैल ओ नहार की...](https://bazmeshayari.com/raunak-tumhare-dam-se/): रौनक तुम्हारे दम से है लैल ओ नहार की तुम आबरू हो आमद ए फ़सल ए बाहर की, - [हर रिश्ता यहाँ बस चार दिन की कहानी है...](https://bazmeshayari.com/har-rishta-yahan-bas/): हर रिश्ता यहाँ बस चार दिन की कहानी है अंज़ाम ए वफ़ा का सिला आँखों से बहता पानी - [तलब की राहों में सारे आलम नए नए से...](https://bazmeshayari.com/talab-ki-raaho-me-saare/): तलब की राहों में सारे आलम नए नए से शजर हजर लोग शहर मौसम नए नए से, चमक - [सुख़नवरी का बहाना बनाता रहता हूँ...](https://bazmeshayari.com/sukhanwari-ka-bahana/): सुख़नवरी का बहाना बनाता रहता हूँ तेरा फ़साना तुझी को सुनाता रहता हूँ, मैं अपने आप से शर्मिंदा - [सियाह रात से हम रौशनी बनाते हैं...](https://bazmeshayari.com/siyah-raat-se-ham-raushni/): सियाह रात से हम रौशनी बनाते हैं पुरानी बात को अक्सर नई बनाते हैं, कल एक बच्चे ने - [शाख़ से फूल से क्या उस का पता पूछती है...](https://bazmeshayari.com/shakh-se-fool-se-kya-uska/): शाख़ से फूल से क्या उसका पता पूछती है या फिर इस दश्त में कुछ और हवा पूछती - [भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ ?](https://bazmeshayari.com/bhookh-hai-to-sabr-kar/): भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ ? आजकल दिल्ली में है ज़ेर ए बहस - [परिन्दे अब भी पर तोले हुए हैं...](https://bazmeshayari.com/parinde-ab-bhi-par-tole/): परिन्दे अब भी पर तोले हुए हैं हवा में सनसनी घोले हुए हैं, तुम्हीं कमज़ोर पड़ते जा रहे - [इस नदी की धार से ठंडी हवा आती तो है...](https://bazmeshayari.com/is-nadi-ki-dhaar-se-thandi/): इस नदी की धार से ठंडी हवा आती तो है नाव जर्जर ही सही लहरों से टकराती तो - [कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं...](https://bazmeshayari.com/kaise-manzar-samne-aane/): कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं गाते गाते लोग चिल्लाने लगे हैं, अब तो इस तालाब का पानी - [मैंने तो बहुत देखे अपने भी पराये भी...](https://bazmeshayari.com/maine-to-bahut-dekhe/): मैंने तो बहुत देखे अपने भी पराये भी कुछ ज़िन्दगी भी देखी कुछ मौत के साये भी, इस - [फ़तह की सुन के ख़बर, प्यार जताने आए...](https://bazmeshayari.com/fatah-ki-sun-ke-khabar/): फ़तह की सुन के ख़बर, प्यार जताने आए रूठे हुए थे हमसे यार रिश्तेदार मनाने आए, अच्छे दिन - [नसीबो पर नहीं चलते नजीरों पर नहीं चलते...](https://bazmeshayari.com/nasibo-par-nahi-chalte/): नसीबो पर नहीं चलते, नजीरों पर नहीं चलते जो सचमुच में बड़े है वो लकीरों पर नहीं चलते, - [फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आये सवालो की तरह...](https://bazmeshayari.com/falsafe-ishq-me-pesh/): फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आये सवालो की तरह हम परेशाँ ही रहे अपने ख्यालो की तरह, शीशागर बैठे - [हकीक़त में नहीं कुछ भी दिखा है...](https://bazmeshayari.com/haqiqat-me-nahi-kuch/): हकीक़त में नहीं कुछ भी दिखा है क़िताबो में मगर सब कुछ लिखा है, मुझे समझा के वो - [बसा बसाया शहर अब बंजर लग रहा है...](https://bazmeshayari.com/basa-basaya-shahar-ab/): बसा बसाया शहर अब बंजर लग रहा है चारो ओर उदासियो का मंज़र लग रहा है, जाने अंजाने - [रोज़ जब रात को बारह का गजर होता है...](https://bazmeshayari.com/roz-jab-raat-ko-barah-ka/): रोज़ जब रात को बारह का गजर होता है यातनाओं के अँधेरे में सफ़र होता है, कोई रहने - [आँसू हो, उदासी हो और ख़ामोश चीत्कार हो...](https://bazmeshayari.com/aansoo-ho-udasi-ho/): आँसू हो, उदासी हो और ख़ामोश चीत्कार हो गज़ल कहनी हो तो पहले किसी से प्यार हो, कलम - [क्या करेंगे आप मेरे दिल का मंज़र देख कर](https://bazmeshayari.com/kya-karenge-aap-mere-dil-ka/): क्या करेंगे आप मेरे दिल का मंज़र देख कर ख़ामखा हैरान होंगे एक समन्दर देख कर, ये अमीरों - [हमने सुना था फ़रिश्ते जान लेते है...](https://bazmeshayari.com/hamne-suna-tha-farishte/): हमने सुना था फ़रिश्ते जान लेते है खैर छोड़ो ! अब तो इन्सान लेते है, इश्क़ ने ऐसी - [खुद ही जवाब देता खुद सवाल करता है](https://bazmeshayari.com/khud-hi-jawab-deta-khud-sawal/): खुद ही जवाब देता खुद सवाल करता है जमाना तेरा मेरे मौला कमाल करता है, भूले से भी - [अमीरों को मिलती है हर जगह इज्ज़त](https://bazmeshayari.com/amiro-ko-milti-hai-har-jagah/): अमीरों को मिलती है हर जगह इज्ज़त ये ग़ुरबत हम गरीबो को कहाँ इज्ज़त पाने देती है, झोलियाँ - [इतना एहसान तो हम पर वो ख़ुदारा करते](https://bazmeshayari.com/itna-ehsan-to-ham-par/): इतना एहसान तो हम पर वो ख़ुदारा करते अपने हाथो से ज़िगर चाक हमारा करते, हमको तो दर्द - [खून में डूबी सियासत नहीं देखी जाती...](https://bazmeshayari.com/khoon-me-dubi-siyasat/): खून में डूबी सियासत नहीं देखी जाती हमसे अब देश की हालत नहीं देखी जाती, उनके चेहरों से - [आ जाओ मैं लोरी गा के सुना देता हूँ...](https://bazmeshayari.com/aa-jaao-mai-lori-gaa-ke/): आ जाओ मैं लोरी गा के सुना देता हूँ चाँद अपना है उसे छत पे बुला लेता हूँ, - [दरिन्दे खून बहने का इंतज़ार करेंगे...](https://bazmeshayari.com/darinde-khoon-bahne-ka/): दरिन्दे खून बहने का इंतज़ार करेंगे भरे पेट वाले अब भूखो पे वार करेंगे, वतन में क़त्ल ए - [हर एक रूह में एक ग़म छुपा लगे है मुझे](https://bazmeshayari.com/har-ek-rooh-me-ek-gam/): हर एक रूह में एक ग़म छुपा लगे है मुझे ये ज़िन्दगी तो कोई बद्दुआ लगे है मुझे, - [हर वक़्त किसी को मुकम्मल नज़ारा नहीं मिलता](https://bazmeshayari.com/har-waqt-kisi-ko-muqammal/): हर वक़्त किसी को मुकम्मल नज़ारा नहीं मिलता उम्मीद जब रखो तो कहीं किनारा नहीं मिलता, वफाओं के - [हर शख्स का जीना यहाँ आसान नहीं है...](https://bazmeshayari.com/har-shakhs-ka-jina-yahan/): हर शख्स का जीना यहाँ आसान नहीं है मुश्किल से मिले वो जो परेशान नहीं है, हर शख्स - [हर एक शख़्स परेशान ओ दर बदर सा लगे](https://bazmeshayari.com/har-ek-shakhs-pareshan/): हर एक शख़्स परेशान ओ दर बदर सा लगे ये शहर मुझको तो यारो कोई भँवर सा लगे, - [रोज़मर्रा वही सब ख़बर देख कर...](https://bazmeshayari.com/rozmarra-wahi-sab-khabar/): रोज़मर्रा वही सब ख़बर देख कर अब तो पत्थर हुआ ये ज़िगर देखिए, सड़के चलने लगी आदमी रुक - [ज़िन्दगी का बोझ उठाना पड़ेगा...](https://bazmeshayari.com/zindagi-ka-bojh-uthana/): ज़िन्दगी का बोझ उठाना पड़ेगा गर ज़िन्दा हो तो दिखाना पड़ेगा, लगने लगे जो मसला ये ज़िन्दगी तो - [अश्क जब हम बहाने लगते हैं...](https://bazmeshayari.com/ashk-jab-ham-bahane-lagte-hai/): अश्क जब हम बहाने लगते हैं कितने ही गम ठिकाने लगते हैं आईना ले के निकले जब जब - [तमाम उम्र कटी उसकी मेज़बानी में](https://bazmeshayari.com/tamam-umr-kati-uski/): तमाम उम्र कटी उसकी मेज़बानी में बिछड़ गया था कभी जो भरी जवानी में, हमारे होने तलक सब - [किसी कमज़ोर की जब भी दुआएँ गूँज उठती है](https://bazmeshayari.com/kisi-kamzor-ki-jab/): किसी कमज़ोर की जब भी दुआएँ गूँज उठती है अबाबीलों के लश्कर से फज़ाएँ गूँज उठती है, ख़ामोशी - [तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है](https://bazmeshayari.com/tu-is-qadar-mujhe/): तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है तुझे अलग से जो सोचू अजीब लगता है, जिसे ना - [मुश्किल चाहे लाख हो लेकिन एक दिन तो हल होती है](https://bazmeshayari.com/mushkil-chahe-laakh-ho/): मुश्किल चाहे लाख हो लेकिन एक दिन तो हल होती है ज़िन्दा लोगों की दुनिया में अक्सर हलचल - [हमें कुछ पता नहीं है हम क्यूँ बहक रहे हैं ?](https://bazmeshayari.com/hame-kuch-pata-nahi-hai/): हमें कुछ पता नहीं है हम क्यूँ बहक रहे हैं ? रातें सुलग रही हैं दिन भी दहक - [लेना देना ही क्या फिर ऐसे यारो से ?](https://bazmeshayari.com/lena-dena-hi-kya/): लेना देना ही क्या फिर ऐसे यारो से ? सुख दुःख भी जब बाँटने हो दीवारों से, ज़िस्म - [हिज़ाब तेरे चेहरे पर मैं सजा दूँ...](https://bazmeshayari.com/hizab-tere-chahre-par/): हिज़ाब तेरे चेहरे पर आ मैं सजा दूँ बाग़ ए इरम की तुझे मैं हूर बना दूँ,   - [अब ज़िन्दगी पे हो गई भारी शरारतें...](https://bazmeshayari.com/ab-zindagi-pe-ho-gai-bhaari/): अब ज़िन्दगी पे हो गई भारी शरारतें तन्हाइयो ने छीन ली सारी शरारतें, होंठो के गुलिस्तान पे लाली - [जब दुश्मनों के चार सू लश्कर निकल पड़े...](https://bazmeshayari.com/jab-dushmano-ke-chaar/): जब दुश्मनों के चार सू लश्कर निकल पड़े हम भी कफ़न बाँध के सर पर निकल पड़े, जिन - [मुमकिन ही न थी ख़ुद से शनासाई यहाँ तक...](https://bazmeshayari.com/mumkin-hi-na-thi-khud-se/): मुमकिन ही न थी ख़ुद से शनासाई यहाँ तक ले आया मुझे मेरा तमाशाई यहाँ तक, रस्ता हो - [वो एक लम्हा मुहब्बत भरा तेरे साथ...](https://bazmeshayari.com/wo-ek-lamha-muhabbat-bhara/): वो एक लम्हा मुहब्बत भरा तेरे साथ ज़िन्दगी भर की ख़ुशियों पर भारी है, हम ही नहीं दिल - [तेरी सूरत निगाहों में फिरती रहे...](https://bazmeshayari.com/teri-surat-nigaho-me-firti/): तेरी सूरत निगाहों में फिरती रहे इश्क़ तेरा सताए तो मैं क्या करूँ ? कोई इतना तो आ - [अब शौक़ से कि जाँ से गुज़र जाना चाहिए...](https://bazmeshayari.com/ab-shauq-se-ki-jaan-se/): अब शौक़ से कि जाँ से गुज़र जाना चाहिए बोल ऐ हवा ए शहर किधर जाना चाहिए ? - [नाज़ उसके उठाता हूँ रुलाता भी मुझे है...](https://bazmeshayari.com/naaz-uske-uthata-hoo/): नाज़ उसके उठाता हूँ रुलाता भी मुझे है ज़ुल्फो में सुलाता भी, जगाता भी मुझे है, आता है - [वफ़ा ए वादा नहीं वादा ए दिगर भी नहीं...](https://bazmeshayari.com/wafa-e-wada-nahi-wada-e-digar/): वफ़ा ए वादा नहीं वादा ए दिगर भी नहीं वो मुझसे रूठे तो थे लेकिन इस क़दर भी - [लोग सह लेते थे हँस कर कभी बेज़ारी भी...](https://bazmeshayari.com/log-sah-lete-the/): लोग सह लेते थे हँस कर कभी बेज़ारी भी अब तो मश्कूक हुई अपनी मिलन सारी भी, वार - [कुछ क़दम और मुझे जिस्म को ढोना है यहाँ...](https://bazmeshayari.com/kuch-qadam-aur-mujhe-zism/): कुछ क़दम और मुझे जिस्म को ढोना है यहाँ साथ लाया हूँ उसी को जिसे खोना है यहाँ, - [कुछ रोज़ से रोज़ शाम बस यूँ ही ढल जाती है](https://bazmeshayari.com/kuch-roz-se-shaam/): कुछ रोज़ से रोज़ शाम बस यूँ ही ढल जाती है बीती हुई यादो की शमाँ मेरे सिरहाने - [शाम आई तिरी यादों के सितारे निकले...](https://bazmeshayari.com/shaam-aai-teri-yaado/): शाम आई तिरी यादों के सितारे निकले रंग ही ग़म के नहीं नक़्श भी प्यारे निकले, एक मौहूम - [ताज़ा मोहब्बतों का नशा जिस्म-ओ-जाँ में है..](https://bazmeshayari.com/taza-mohabbato-ka-nasha/): ताज़ा मोहब्बतों का नशा जिस्म-ओ-जाँ में हैफिर मौसम-ए-बहार मिरे गुल्सिताँ में है, इक ख़्वाब है कि बार-ए-दिगर देखते - [तेरे साथ सफ़र मैं कुछ इस तरह करता रहा...](https://bazmeshayari.com/tere-sath-safar-main-kuch-is-tarah/): तेरे साथ सफ़र मैं कुछ इस तरह करता रहा दूर हो कर भी महसूस तुम्हे हरदम करता रहा, - [आंधियाँ भी चले और दीया भी जले...](https://bazmeshayari.com/aandhiyan-bhi-chale-aur-diya-bhi/): आंधियाँ भी चले और दीया भी जले होगा कैसे भला आसमां के तले ? अब भरोसा करे भी - [ज़मी सूखी है और पानी के भी लाले है...](https://bazmeshayari.com/zami-sukhi-hai-aur-pani-ke-bhi/): ज़मी सूखी है और पानी के भी लाले है इन्सान ही आज इन्सान के निवाले है जिनके दिलो - [बदनाम मेरे प्यार का अफ़साना हुआ है...](https://bazmeshayari.com/badnam-mere-pyar-ka-afsana/): बदनाम मेरे प्यार का अफ़साना हुआ है दीवाने भी कहते है कि दीवाना हुआ है, रिश्ता था तभी - [अज़ब मअमूल है आवारगी का...](https://bazmeshayari.com/azab-maamul-hai-aawargi-ka/): अज़ब मअमूल है आवारगी का गिरेबाँ झाँकती है हर गली का, न जाने किस तरह कैसे ख़ुदा ने - [हादसे ज़ीस्त की तौक़ीर बढ़ा देते हैं...](https://bazmeshayari.com/hadse-zist-ki-taukir/): हादसे ज़ीस्त की तौक़ीर बढ़ा देते हैं ऐ ग़म ए यार तुझे हम तो दुआ देते हैं, तेरे - [हैरतों के सिलसिले सोज़ ए निहाँ तक आ गए..](https://bazmeshayari.com/hairato-ke-silsile-soz/): हैरतों के सिलसिले सोज़ ए निहाँ तक आ गए हम नज़र तक चाहते थे तुम तो जाँ तक - [मैंने कहा कि दिल में तो अरमान हैं बहुत...](https://bazmeshayari.com/maine-kaha-ki-dil-me/): मैंने कहा कि दिल में तो अरमान हैं बहुत उस ने कहा कि आप तो नादान हैं बहुत, - [मैं तकिए पर सितारे बो रहा हूँ...](https://bazmeshayari.com/main-takiye-par-sitare/): मैं तकिए पर सितारे बो रहा हूँ जन्म दिन है अकेला रो रहा हूँ, किसी ने झाँक कर - [मुहताज हमसफ़र की मसाफ़त न थी मेरी...](https://bazmeshayari.com/muhtaz-hamsafar-ki-masafat/): मुहताज हमसफ़र की मसाफ़त न थी मेरी सब साथ थे किसी से रिफ़ाक़त न थी मेरी, हक़ किस - [मुझे ऐसा लुत्फ़ अता किया कि जो हिज़्र था न विसाल था..](https://bazmeshayari.com/mujhe-aisa-lutf-ataa-kiya/): मुझे ऐसा लुत्फ़ अता किया कि जो हिज्र था न विसाल था मेरे मौसमों के मिज़ाज दाँ तुझे - [मेरे ख़्वाबों में यादों मे हो सिर्फ तुम...](https://bazmeshayari.com/mere-khwabo-me-yaado-me/): मेरे ख़्वाबों में यादों मे हो सिर्फ तुमऔर ज़हन ओ ख़्यालों में हो सिर्फ तुम, कुछ नहीं है - [ठोकरें खा के सँभलना नहीं आता है मुझे...](https://bazmeshayari.com/thokare-khaa-ke-sambhlna-nahi/): ठोकरें खा के सँभलना नहीं आता है मुझे चल मेरे साथ कि चलना नहीं आता है मुझे, अपनी - [तू मुझ को जो इस शहर में लाया नहीं होता...](https://bazmeshayari.com/tu-mujhko-jo-is-shahar-me/): तू मुझ को जो इस शहर में लाया नहीं होता मैं बे सर ओ सामाँ कभी रुस्वा नहीं - [तुम कुछ भी करो होश में आने के नहीं हम...](https://bazmeshayari.com/tum-kuch-bhi-karo-hosh-me/): तुम कुछ भी करो होश में आने के नहीं हम हैं इश्क़ घराने के ज़माने के नहीं हम, - [तुम्हें उससे मोहब्बत है तो हिम्मत क्यूँ नहीं करते...](https://bazmeshayari.com/tumhe-usse-mohabbat-hai-to/): तुम्हें उससे मोहब्बत है तो हिम्मत क्यूँ नहीं करते किसी दिन उसके दर पे रक़्स ए वहशत क्यूँ - [राह ए इश्क़ के हर मोड़ पे परेशानियाँ होंगी...](https://bazmeshayari.com/raah-e-ishq-ke-har-mod-pe/): राह ए इश्क़ के हर मोड़ पे परेशानियाँ होंगी बहारे ना सही मगर सदा ही वीरानियाँ होंगी, कहीं - [पास आओ एक इल्तज़ा सुन लो...](https://bazmeshayari.com/paas-aao-ek-iltaza-sun-lo/): पास आओ एक इल्तज़ा सुन लो प्यार है तुमसे बेपनाह सुन लो, एक तुम्ही को ख़ुदा से माँगा - [मुहब्बत जो हकीकी हो तो क़िस्मत ही सँवर जाती...](https://bazmeshayari.com/muhabbat-jo-haqiqi-ho-to/): मुहब्बत जो हकीकी हो तो क़िस्मत ही सँवर जाती मुहब्बत जो मिजाज़ी हो तो उलझन औद कर आती, - [मेरा दिल बुराई से तू साफ़ कर दे...](https://bazmeshayari.com/mera-dil-burai-se-tu-saaf/): मेरा दिल बुराई से तू साफ़ कर दे ऐ देने वाले मुझे माफ़ कर दे,   मेरी तरफ - [राहें वही खड़ी थी मुसाफ़िर भटक गया...](https://bazmeshayari.com/raahe-wahi-khadi-thi-musafir/): राहें वही खड़ी थी मुसाफ़िर भटक गया एक लफ्ज़ आते आते लबो तक अटक गया, जिस पेड़ की - [ये सच है कि हम लोग बहुत आसानी में रहें...](https://bazmeshayari.com/ye-sach-hai-ki-ham-log/): ये सच है कि हम लोग बहुत आसानी में रहें पर नाम वही कर गए जो बख्त गिरानी - [कोई अज़्म ओ इरादा नहीं चाहिए..](https://bazmeshayari.com/koi-azm-o-irada-nahi-chahiye/): कोई अज़्म-ओ-इरादा, नहीं चाहिएआपसे कोई वादा, नहीं चाहिए, आपकी रुह में, इश्क़ बनकर रहूँइससे कुछ भी ज़ियादा, नहीं - [तू कभी आ देख कभी साथ तों चल...](https://bazmeshayari.com/tu-kabhi-aa-dekh-kabhi-saath/): तू कभी आ देख कभी साथ तों चलमेरे तसव्वुर की दुनियाँ बहुत हसीन है, यहाँ हवा जो चलती - [कभी दादी कभी नानी से अलग कर दिए गए...](https://bazmeshayari.com/kabhi-dadi-kabhi-naani-se/): कभी दादी कभी नानी से अलग कर दिए गए बच्चे परियों की कहानी से अलग कर दिए गए, - [कुछ ख़ुद भी थे अफ़सुर्दा से...](https://bazmeshayari.com/kuch-khud-bhi-the-afsurda/): कुछ ख़ुद भी थे अफ़सुर्दा से कुछ लोग भी हमसे रूठ गए, कुछ ख़ुद भी ज़ख्म के आदी - [काम इस दिल की तबाही से लिया क्या जाए...](https://bazmeshayari.com/kaam-is-dil-ki-tabahi-se/): काम इस दिल की तबाही से लिया क्या जाए सोचता हूँ कि ख़राबे में किया क्या जाए ? - [इश्क़ सहरा है कि दरियाँ कभी सोचा तुमने...](https://bazmeshayari.com/ishq-sahra-hai-ki-dariya/): इश्क़ सहरा है कि दरियाँ कभी सोचा तुमने तुझसे क्या है मेरा नाता कभी सोचा तुमने ? हाँ - [दोस्तों ! आज दिल में छुपे कुछ राज़ बयाँ करता हूँ...](https://bazmeshayari.com/dosto-aaj-dil-me-chhupe-kuch/): दोस्तों ! आज मैं दिल में छुपे कुछ राज़ बयाँ करता हूँ दुःख से जुड़े ग़ुरबत के दिनों - [एक मंज़र यूं नजर आया कि मैं भी डर गया...](https://bazmeshayari.com/ek-manzar-yun-nazar-aaya/):   एक मंज़र यूं नजर आया कि मैं भी डर गया हाथ में रोटी थी जिसके वो भिखारी - [वो मुहब्बत गई वो फ़साने गए...](https://bazmeshayari.com/wo-muhabbat-gayi-wo-fasane/): वो मुहब्बत गई वो फ़साने गए जो खज़ाने थे अपने खज़ाने गए, चाहतो का वो दिलकश ज़माना गया - [दिल जब घबराये तो ख़ुद को एक क़िस्सा सुना देना...](https://bazmeshayari.com/dil-jab-ghabraye-to-khud-ko/): दिल जब घबराये तो ख़ुद को एक क़िस्सा सुना देना ज़िन्दगी कितनी भी मुश्किल क्यूँ ना हो मुस्कुरा - [तस्वीर का रुख एक नहीं दूसरा भी है...](https://bazmeshayari.com/tasvir-ka-rukh-ek-nahi/): तस्वीर का रुख एक नहीं दूसरा भी है खैरात जो देता है वही लूटता भी है, ईमान को - [यही कम नहीं है ज़िन्दगी के लिए...](https://bazmeshayari.com/yahi-kam-nahi-hai-zindagi-ke-liye/): यही कम नहीं है ज़िन्दगी के लिए यहाँ चैन मिल जाए दो घड़ी के लिए, दिल ए ज़ार - [आपसे किसने कहा स्वर्णिम शिखर बनकर दिखो...](https://bazmeshayari.com/aapse-kisne-kaha/): आपसे किसने कहा स्वर्णिम शिखर बनकर दिखो शौक दिखने का है तो फिर नींव के अंदर दिखो, चल - [जब तलक लगती नहीं है बोलियाँ मेरे पिता...](https://bazmeshayari.com/jab-talak-lagti-nahi-hai-boliyan/): जब तलक लगती नहीं है बोलियाँ मेरे पिता तब तलक उठती नहीं है डोलिया मेरे पिता, आज भी - [ऐ सनम वस्ल की तदबीरों से क्या होता है...](https://bazmeshayari.com/ae-sanam-wasl-ki-tadbiro-se/): ऐ सनम वस्ल की तदबीरों से क्या होता है वही होता है जो मंज़ूर ए ख़ुदा होता है, - [क़मर की वो ख़ुर्शीद तस्वीर है गले में...](https://bazmeshayari.com/qamar-ki-wo-khurshid-tasveer-hai/): क़मर की वो ख़ुर्शीद तस्वीर है गले में सितारों की ज़ंजीर है, कहाँ पा ए जानाँ कहाँ मेरा - [किस तरह मिलें कोई बहाना नहीं मिलता...](https://bazmeshayari.com/kis-tarah-mile-koi-bahana-nahi/): किस तरह मिलें कोई बहाना नहीं मिलता हम जा नहीं सकते उन्हें आना नहीं मिलता, फिरते हैं वहाँ - [घर जब बना लिया तेरे दर पर कहे बग़ैर...](https://bazmeshayari.com/ghar-jab-bana-liya/): घर जब बना लिया तेरे दर पर कहे बग़ैर जानेगा अब भी तू न मेरा घर कहे बग़ैर, - [वो जिस का अक्स लहू को जगा दिया करता...](https://bazmeshayari.com/wo-jiska-aks-lahoo-ko-jaga-diya/): वो जिस का अक्स लहू को जगा दिया करता मैं ख़्वाब ख़्वाब में उस को सदा दिया करता, - [अब तो बस ये जान है मौला बाक़ी झूठी शान है मौला...](https://bazmeshayari.com/ab-to-bas-ye-jaan-hai-maula/): अब तो बस ये जान है मौला बाक़ी झूठी शान है मौला, गम का कोई निशाँ नहीं है - [क्या आँधियाँ बड़ी आने वाली है....](https://bazmeshayari.com/kya-aandhiyan-badi-aane-wali-hai/): क्या आँधियाँ बड़ी आने वाली है क्या कुछ बुरा होने वाला है ? इन्सान पहले से कुछ नहीं - [क्या बताते हैं इशारात तुम्हें क्या मा'लूम...](https://bazmeshayari.com/kya-batate-hai-siharaat-tumhe/): क्या बताते हैं इशारात तुम्हें क्या मा’लूम कितने मश्कूक हैं हालात तुम्हें क्या मा’लूम ? ये उलझते हुए - [उसके नज़दीक ग़म ए तर्क ए वफ़ा कुछ भी नहीं...](https://bazmeshayari.com/uske-nazdik-gam-e-tark-e-wafa/): उसके नज़दीक ग़म ए तर्क ए वफ़ा कुछ भी नहीं मुतमइन ऐसा है वो जैसे हुआ कुछ भी - [उसकी चाह में नाम नहीं आने वाला...](https://bazmeshayari.com/uski-chaah-me-naam-nahi-aane/): उसकी चाह में नाम नहीं आने वाला अब मेरा अंजाम नहीं आने वाला, हुस्न से काम पड़ा है - [ज़िन्दगी से एक दिन मौसम खफ़ा हो जाएँगे...](https://bazmeshayari.com/zindagi-se-ek-din-mausam-khafa/): ज़िन्दगी से एक दिन मौसम खफ़ा हो जाएँगे रंग ए गुल और बू ए गुल दोनों हवा हो - [कभी बहार का मौसम नया दिखाई दे...](https://bazmeshayari.com/kabhi-bahar-ka-mausam-naya/): कभी बहार का मौसम नया दिखाई दे गुलाब बातें करें और सबा दिखाई दे, शब ए जुनूँ है - [मरीज़ ए इश्क़ का मर्ज़ वो बुखार बताते हैं...](https://bazmeshayari.com/mariz-e-ishq-ka-marz-wo/): मरीज़ ए इश्क़ का मर्ज़ वो बुखार बताते हैं शख़्स एक है पर क़ातिल बेशुमार बताते हैं, नशा - [ज़िंदगी दर्द की कहानी है चश्म ए अंजुम में भी तो पानी है...](https://bazmeshayari.com/zindagi-dard-ki-kahani-hai/): ज़िंदगी दर्द की कहानी है चश्म ए अंजुम में भी तो पानी है, बेनियाज़ाना सुन लिया ग़म ए - [अचानक दिलरुबा मौसम का दिल आज़ार हो जाना...](https://bazmeshayari.com/achanak-dilruba-mausam-ka-dil/): अचानक दिलरुबा मौसम का दिल आज़ार हो जाना दुआ आसाँ नहीं रहना सुख़न दुश्वार हो जाना, तुम्हें देखें - [अभी कुछ और करिश्मे ग़ज़ल के देखते हैं...](https://bazmeshayari.com/abhi-kuch-aur-karishme-gazal-ke/): अभी कुछ और करिश्मे ग़ज़ल के देखते हैं ‘फ़राज़’ अब ज़रा लहजा बदल के देखते हैं, जुदाइयाँ तो - [कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता...](https://bazmeshayari.com/kabhi-kisi-ko-muqammal-jahan/): कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता, तमाम शहर में ऐसा नहीं - [ज़रा सी देर थी बस एक दिया जलाना था...](https://bazmeshayari.com/zara-see-der-thi-bas-ek-diya/): ज़रा सी देर थी बस एक दिया जलाना था और इसके बाद फ़क़त आँधियों को आना था, मैं - [डूब कर भी न पड़ा फ़र्क़ गिराँ जानी में...](https://bazmeshayari.com/doob-kar-bhi-na-pada-farq/): डूब कर भी न पड़ा फ़र्क़ गिराँ जानी में मैं हूँ पत्थर की तरह बहते हुए पानी में, - [दी है वहशत तो ये वहशत ही मुसलसल हो जाए...](https://bazmeshayari.com/dee-haiwahshat-to-ye-wahshat/): दी है वहशत तो ये वहशत ही मुसलसल हो जाए रक़्स करते हुए अतराफ़ में जंगल हो जाए, - [गर्म रफ़्तार है तेरी ये पता देते हैं...](https://bazmeshayari.com/garm-raftar-hai-teri-ye/): गर्म रफ़्तार है तेरी ये पता देते हैं दम बदम लौ तेरे नक़्श ए कफ़ ए पा देते - [कोई नई चोट फिर से खाओ ! उदास लोगो...](https://bazmeshayari.com/koi-nayi-chot-fir-se/): कोई नई चोट फिर से खाओ ! उदास लोगो कहा था किसने कि मुस्कुराओ ! उदास लोगो, गुज़र - [जो चल सको तो कोई ऐसी चाल चल जाना...](https://bazmeshayari.com/jo-chal-sako-to-koi-aisi/): जो चल सको तो कोई ऐसी चाल चल जाना मुझे गुमाँ भी ना हो और तुम बदल जाना, - [किताबों में मेरे फ़साने ढूँढते हैं...](https://bazmeshayari.com/kitabo-me-mere-fasane/): किताबों में मेरे फ़साने ढूँढते हैं नादां हैं गुज़रे ज़माने ढूँढते हैं, जब वो थे तलाश ए ज़िंदगी - [अब के रुत बदली तो ख़ुशबू का सफ़र देखेगा कौन...](https://bazmeshayari.com/ab-ke-rut-badlito-khushboo/): अब के रुत बदली तो ख़ुशबू का सफ़र देखेगा कौन ज़ख़्म फूलों की तरह महकेंगे पर देखेगा कौन - [इस तरह मोहब्बत में दिल पे हुक्मरानी है...](https://bazmeshayari.com/is-tarah-muhabbat-me-dil/): इस तरह मोहब्बत में दिल पे हुक्मरानी है दिल नहीं मेरा गोया उनकी राजधानी है, घास के घरौंदे - [बेतकल्लुफ़ मेरा है जान बनाता है मुझे...](https://bazmeshayari.com/betakalluf-mera-hai-jaan-batata/): बेतकल्लुफ़ मेरा है जान बनाता है मुझे सामने तेरे कहाँ बोलना आता है मुझे, वो उदासी कि बिखरने - [एक दिन ख़ुद को अपने पास बिठाया हमने...](https://bazmeshayari.com/ek-din-khud-ko-apne-paas/): एक दिन ख़ुद को अपने पास बिठाया हमने पहले यार बनाया फिर समझाया हमने, ख़ुद भी आख़िर कार - [बरसों जुनूँ सहरा सहरा भटकाता है...](https://bazmeshayari.com/barso-junoon-sahra-bhatkata-hai/): बरसों जुनूँ सहरा सहरा भटकाता है घर में रहना यूँही नहीं आ जाता है, प्यास और धूप के - [काश ! तुम मेरी होती तो क्या गज़ब ज़िन्दगी होती](https://bazmeshayari.com/kash-tum-meri-hoti/): काश ! तुम मेरी होती तो क्या गज़ब ज़िन्दगी होती फिर ना ज़िन्दगी में हमारी कभी कोई कमी - [वो बड़े बनते हैं अपने नाम से](https://bazmeshayari.com/wo-bade-bante-hai/): वो बड़े बनते हैं अपने नाम से हम बड़े बनते है अपने काम से, वो कभी आग़ाज़ कर - [ख़्वाब के फूलों की ताबीरें कहानी हो गईं](https://bazmeshayari.com/khwab-ke-phoolo-ki/): ख़्वाब के फूलों की ताबीरें कहानी हो गईं ख़ून ठंडा पड़ गया आँखें पुरानी हो गईं, जिस का - [अज़ीब कर्ब में गुज़री जहाँ जहाँ गुज़री](https://bazmeshayari.com/azib-karb-me-guzri/): अज़ीब कर्ब में गुज़री जहाँ जहाँ गुज़री अगरचे चाहने वालो के दरमियाँ गुज़री, तमाम उम्र चिराग़ ए उम्मीद - [तेरी यादें तेरी बातें तेरी ख़ामोशी तेरा फ़िक्र](https://bazmeshayari.com/teri-yaaden-teri-baaten/): तेरी यादें, तेरी बातें, तेरी ख़ामोशी, तेरा फ़िक्र तेरा ज़िक्र, अब सब कुछ आसान सा लगता है, तू - [गम से वो मेरे आशना न हुआ कभी](https://bazmeshayari.com/gam-se-wo-mere/): गम से वो मेरे आशना न हुआ कभी और दुःख मेरा मुझ से जुदा न हुआ कभी, ज़िन्दगी - [अंज़ाम नहीं मिलता, उन्वान नहीं मिलता](https://bazmeshayari.com/anzam-nahi-milta-unwan/): अंज़ाम नहीं मिलता, उन्वान नहीं मिलता कम इश्क़ के दरिया में तूफ़ान नहीं मिलता, रोते है लिपट के - [मेरी एक छोटी सी कोशिश तुम्हे पाने के लिए](https://bazmeshayari.com/meri-ek-chhoti-si-koshish/): मेरी एक छोटी सी कोशिश तुम्हे पाने के लिए बन गई है मसअला सारे ज़माने के लिए, रेत - [अधूरे ख़्वाब की अनोखी ताबीर होती है](https://bazmeshayari.com/adhure-khwab-ki-anokhi/): अधूरे ख़्वाब की अनोखी ताबीर होती है हर हाथों में मुहब्बत की लकीर होती है, जरूरी तो नहीं - [मौत तो एक दिन आनी ही है](https://bazmeshayari.com/maut-to-ek-din-aani-hi/): मौत तो एक दिन आनी ही है ज़िन्दगी जो मिली फ़ानी ही है, शख्स वो है अक्लमंद ओ - [किसी दिन तो तू भी मुहब्बत हक़ीक़ी कर के देख](https://bazmeshayari.com/kisi-din-to-tu/): किसी दिन तो तू भी मुहब्बत हक़ीक़ी कर के देख कैसे जीते है तेरे बगैर तू भी तो - [ऐसे मौसम में भला कौन जुदा होता है](https://bazmeshayari.com/aise-mausam-me-bhala/): ऐसे मौसम में भला कौन जुदा होता है जैसे मौसम में तू हर रोज़ खफ़ा होता है, रोज़ - [तेरे और मेरे बारे में जो मशहूर एक कहानी है](https://bazmeshayari.com/tere-aur-mere-baare/): तेरे और मेरे बारे में जो मशहूर एक कहानी है वही कहानी अब ज़माने के ज़हन से मिटानी - [मैं सुबह बेचता हूँ, मैं शाम बेचता हूँ](https://bazmeshayari.com/main-subah-bechta-hoo/): मैं सुबह बेचता हूँ, मैं शाम बेचता हूँ नहीं मैं महज़ अपना काम बेचता हूँ, इन बूढ़े दरख्तों - [पेड़ मुझे तब हसरत से देखा करते थे](https://bazmeshayari.com/ped-mujhe-tab-hasrat-se/): पेड़ मुझे तब हसरत से देखा करते थे जब मैं जंगल में पानी लाया करता था, थक जाता - [शोर करूँगा और न कुछ भी बोलूँगा](https://bazmeshayari.com/shor-karunga-aur-na/): शोर करूँगा और न कुछ भी बोलूँगा ख़ामोशी से अपना रोना रो लूँगा, सारी उम्र इसी ख्वाहिश में - [थक गया है मुसलसल सफ़र उदासी का](https://bazmeshayari.com/thak-gaya-hai-musalsal/): थक गया है मुसलसल सफ़र उदासी का और अब भी है मेरे शाने पे सर उदासी का, वो - [दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला](https://bazmeshayari.com/dost-ban-kar-bhi-nahi/): दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला वही अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला, अब उसे लोग - [कर्ब हरे मौसम को तब तक सहना पड़ता है](https://bazmeshayari.com/karb-hare-mausam-ko/): कर्ब हरे मौसम को तब तक सहना पड़ता है पतझड़ में तो पात को आख़िर झड़ना पड़ता है, - [कैसे कहे, क्या कहे इसी कशमकश में रह गए](https://bazmeshayari.com/kaise-kahe-kya-kahe/): कैसे कहे, क्या कहे इसी कशमकश में रह गए हम अल्फाज़ ढूँढ़ते रहे, वो बात अपनी कह गए, - [दुख फ़साना नहीं कि तुझ से कहें](https://bazmeshayari.com/dukh-fasana-nahi-ki/): दुख फ़साना नहीं कि तुझ से कहें दिल भी माना नहीं कि तुझ से कहें, आज तक अपनी - [जंगल काट दिए और फिर शहर भी जला दिए](https://bazmeshayari.com/jungle-kaat-diye-aur/): जंगल काट दिए और फिर शहर भी जला दिए अपने घरो के चिराग़ लोगो ने ख़ुद बुझा दिए, - [पगडंडी पर छाँवो जैसा कुछ नहीं दिखता](https://bazmeshayari.com/pagdandi-par-chhanvo-jaisa/): पगडंडी पर छाँवो जैसा कुछ नहीं दिखता गाँवों में अब गाँवों जैसा कुछ नहीं दिखता, कथनी सबकी कड़वी - [सीधे सादे से है कुछ पेंच ओ ख़म नहीं रखते](https://bazmeshayari.com/sidhe-saade-se-hai-kuch/): सीधे सादे से है कुछ पेंच ओ ख़म नहीं रखते जी भर आता है तो रो लेते है - [चीखते है दर ओ दीवार नहीं होता मैं](https://bazmeshayari.com/chikhte-hai-dar-o-deewar/): चीखते है दर ओ दीवार नहीं होता मैं आँख खुलने पे भी बेदार नहीं होता मैं, ख़्वाब देखना - [क़ुबूल है अब तो ज़िन्दगी का हर तोहफ़ा](https://bazmeshayari.com/qubul-hai-ab-to/): क़ुबूल है अब तो ज़िन्दगी का हर तोहफ़ा मैंने ख्वाहिशो का नाम बताना छोड़ दिया, जो दिल के - [जुबां कड़वी, हलक सूखा, हैं साँसे मुनज़मिद मेरी](https://bazmeshayari.com/zuban-kadwi-halak-sukha/): जुबां कड़वी, हलक सूखा, हैं साँसे मुनज़मिद मेरी ज़हर ने किया क्या आख़िर ज़रा सी चासनी दे कर, - [अज़ब क़ातिब है इन्साँ में फ़रावानी नहीं भरता](https://bazmeshayari.com/azab-qatib-hai-insa/): अज़ब क़ातिब है इन्साँ में फ़रावानी नहीं भरता दगाबाज़ी तो भरता है वफ़ादारी नहीं भरता, भरोसा था तभी - [गम ए तन्हाई में राहत ए दिल का सबब है](https://bazmeshayari.com/gam-e-tanhai-me/): गम ए तन्हाई में राहत ए दिल का सबब है एक ये चंचल सी हवा और अँधेरी रात, - [सहराओं से आने वाली हवाओं में रेत है](https://bazmeshayari.com/sahraaon-se-aane-wali/): सहराओं से आने वाली हवाओं में रेत है हिज़रत करूँगा गाँव से गाँवो में रेत है, ऐ कैस - [ये एक बात समझने में रात हो गई है](https://bazmeshayari.com/ye-ek-baat-samjhne/): ये एक बात समझने में रात हो गई है मैं उससे जीत गया हूँ कि मात हो गई - [यहाँ किसे ख़बर है कि ये उम्र बस](https://bazmeshayari.com/yahan-kise-khabar-hai/): यहाँ किसे ख़बर है कि ये उम्र बस इसी पे गौर करने में कट रही है, कि ये - [वो जो दिख रहा है सच हो ये ज़रूरी तो नहीं है](https://bazmeshayari.com/wo-jo-dikh-raha/): वो जो दिख रहा है सच हो ये ज़रूरी तो नहीं है वो जो तुम कहते हो हक़ - [संगदिल कहाँ किसी का गमगुसार करते है](https://bazmeshayari.com/sangdil-kahan-kisi-ka/): संगदिल कहाँ किसी का गमगुसार करते है ये मुर्दा ज़मीर कब मज़लूमो से प्यार करते है, ना फ़िक्र - [जो पूछती हो तो सुनो ! कैसे बसर होती है](https://bazmeshayari.com/jo-puchti-ho-to/): जो पूछती हो तो सुनो ! कैसे बसर होती है रात खैरात की, सदके की सहर होती है, - [ये न पूछो कि कैसा ये हिन्दुस्तान होना चाहिए](https://bazmeshayari.com/ye-naa-pucho-ki-kaisa/): ये न पूछो कि कैसा ये हिन्दुस्तान होना चाहिए खत्म पहले मज़हब का घमासान होना चाहिए, इन्सान को - [आँख में पानी रखो होंठों पे चिंगारी रखो](https://bazmeshayari.com/aankh-me-paani-rakho/): आँख में पानी रखो होंठों पे चिंगारी रखो ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो, राह के - [ये आसमां ज़रूरी है तो ज़मीं भी ज़रूरी है](https://bazmeshayari.com/ye-aasmaa-zaruri-hai-to/): ये आसमां ज़रूरी है तो ज़मीं भी ज़रूरी है ज़िन्दगी के वास्ते कुछ कमी भी ज़रूरी है, हर - [चेहरा देखें तेरे होंठ और पलकें देखे](https://bazmeshayari.com/chehra-dekhen-tere-honth/): चेहरा देखें तेरे होंठ और पलकें देखे दिल पे आँखे रखे और तेरी साँसे देखें, सुर्ख लबो से - [न नींद और न ख़्वाब से आँख भरनी है](https://bazmeshayari.com/naa-neend-aur-naa/): न नींद और न ख़्वाब से आँख भरनी है कि तुझे देख कर हसरत पूरी करनी है, किसी - [अज़ीब ख़्वाब था उसके बदन पे काई थी](https://bazmeshayari.com/azib-khwab-tha-uske-badan/): अज़ीब ख़्वाब था उसके बदन पे काई थी वो एक परी जो मुझे सब्ज़ करने आई थी, वो - [ख़ुद हो गाफ़िल तो अक्सर ये भी भूल जाते है](https://bazmeshayari.com/khud-ho-gafil-to-aksar/): ख़ुद हो गाफ़िल तो अक्सर ये भी भूल जाते है कि ख़ुदा सब देख रहा है वो अंजान - [बड़े बड़े शहरों की अब यही पहचान है](https://bazmeshayari.com/bade-bade-shaharo-ki/): बड़े बड़े शहरों की अब यही पहचान है ऊँची इमारतें और छोटे छोटे इन्सान है, अहल ए शहर - [काली रात के सहराओं में नूर सिपारा लिखा था](https://bazmeshayari.com/kaali-raat-ke-sahraao-me/): काली रात के सहराओं में नूर सिपारा लिखा था जिस ने शहर की दीवारों पर पहला ना’रा लिखा - [शबनम है कि धोखा है कि झरना है कि तुम हो](https://bazmeshayari.com/shabnam-hai-ki-dhokha-hai/): शबनम है कि धोखा है कि झरना है कि तुम हो दिल दश्त में एक प्यास तमाशा है - [जिस से मिल बैठे लगी वो शक्ल पहचानी हुई](https://bazmeshayari.com/jis-se-mil-baithe/): जिस से मिल बैठे लगी वो शक्ल पहचानी हुई आज तक हमसे यही बस एक नादानी हुई, सैकड़ों - [मैंने दुनियाँ से, मुझसे दुनियाँ ने](https://bazmeshayari.com/maine-duniya-se-mujhse/): मैंने दुनियाँ से, मुझसे दुनियाँ ने सैकड़ो बार बेवफ़ाई की, आसमां चूमता है मेरे क़दम दाद दीजिए शिकश्तापाई - [दिल चाहे कि आज कुछ सुनहरा लिखूँ](https://bazmeshayari.com/dil-chahe-ki-aaj/): दिल चाहे कि आज कुछ सुनहरा लिखूँ मैं ज़ात पे मेरी एक पैरा लिखूँ, मैं लिखूँ हयात सारी - [उधर की शय इधर कर दी गई है](https://bazmeshayari.com/udhar-ki-shay-idhar/): उधर की शय इधर कर दी गई है ज़मीं ज़ेर ओ ज़बर कर दी गई है, ये काली - [तुम साथ चले थे तो मेरे साथ चला दिन](https://bazmeshayari.com/tum-saath-chale-the-to/): तुम साथ चले थे तो मेरे साथ चला दिन तुम राह से बिछड़े थे कि बस डूब गया - [न घर है कोई न सामान कुछ रहा बाक़ी](https://bazmeshayari.com/naa-ghar-hai-koi/): न घर है कोई, न सामान कुछ रहा बाक़ी नहीं है कोई भी दुनिया में सिलसिला बाक़ी, ये - [किस तवक़्क़ो' पे क्या उठा रखिए ?](https://bazmeshayari.com/kis-tavaqqo-pe-kya/): किस तवक़्क़ो’ पे क्या उठा रखिए ? दिल सलामत नहीं तो क्या रखिए ? लिखिए कुछ और दास्तान - [किस को मालूम है क्या होगा नज़र से पहले](https://bazmeshayari.com/kis-ko-malum-hai/): किस को मालूम है क्या होगा नज़र से पहले होगा कोई भी जहाँ ज़ात ए बशर से पहले - [क़दम रखता है जब रास्तो पे यार आहिस्ता आहिस्ता](https://bazmeshayari.com/qadam-rakhta-hai-jab/): क़दम रखता है जब रास्तो पे यार आहिस्ता आहिस्ता तो छट जाता है सब गर्द ओ ग़ुबार आहिस्ता - [सवालो के बदले लहज़े ऐसे...](https://bazmeshayari.com/sawalo-ke-badle-lahze/): सवालो के बदले लहज़े ऐसे कि हमें जानते ही न हो जैसे, मिजाज़ मौसम भी न बदले वो - [फ़ुगा है या दुआ है कौन जाने...](https://bazmeshayari.com/fuga-hai-ya-dua/): फ़ुगा है या दुआ है कौन जाने सदाए दर्द क्या है कौन जाने ? ख़िरद पहना न दे - [खफ़ा मत हो अभी तो प्यार के दिन है](https://bazmeshayari.com/khafa-mat-ho-abhi-to/): खफ़ा मत हो अभी तो प्यार के दिन है इब्तिदा ए मुहब्बत में अभी मल्हार के दिन है, - [जितने हरामखोर थे क़ुर्ब ओ जवार में](https://bazmeshayari.com/jitne-haramkhor-the-kurb/): जितने हरामखोर थे क़ुर्ब ओ जवार में परधान बनके आ गए अगली क़तार में, दीवार फाँदने में यूँ - [आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे](https://bazmeshayari.com/aankh-par-patti-rahe/): आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे अपने शाह ए वक़्त का यूँ मर्तबा आला रहे - [ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी](https://bazmeshayari.com/ye-amiro-se-hamari/): ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी फिर कहाँ से बीच में मस्ज़िद ओ मंदिर आ गए ? - [शब ए हिज्राँ की तवालत से घबरा गया हूँ मैं](https://bazmeshayari.com/shab-e-hizraan-kee-talawat-se/): शब ए हिज्राँ की तवालत से घबरा गया हूँ मैं उसके अंदाज़ ए मुहब्बत से घबरा गया हूँ - [कुछ बात है कि आज ख्याल ए यार आया](https://bazmeshayari.com/kuch-baat-hai-ki-aaj-khyal/): कुछ बात है कि आज ख्याल ए यार आया एक बार नहीं बल्कि बार बार आया, भूल चुका - [न जाने कैसा जादू कर गई है तेरी मुक़द्दस आँखे](https://bazmeshayari.com/na-jaane-kaisa-jaadoo-kar-gai/): न जाने कैसा जादू कर गई है तेरी मुक़द्दस आँखे तेरे सिवा और किसी की तरफ़ अब देखा - [भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे](https://bazmeshayari.com/bhala-gamo-se-kahan-haar/): भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे हम आँसुओं की तरह मुस्कुराने वाले थे, हम ही ने - [उदास एक मुझी को तो कर नही जाता](https://bazmeshayari.com/udas-ek-mujhi-ko/): उदास एक मुझी को तो कर नही जाता वह मुझसे रुठ के अपने भी घर नही जाता, वह - [भरोसा कैसे करे कोई अब तिज़ारत के हवालो का ?](https://bazmeshayari.com/bharosa-kaise-kare-koi/): भरोसा कैसे करे कोई अब तिज़ारत के हवालो का ? न रहा सत्ता का यकीं हमको, न सत्ता - [अपने थके हुए दस्त ए तलब से माँगते है](https://bazmeshayari.com/apne-thake-hue-dast/): अपने थके हुए दस्त ए तलब से माँगते है जो माँगते नहीं रब से वो सब से माँगते - [जो होने वाला है वो हादसा दिखाई तो दे](https://bazmeshayari.com/jo-hone-wala-hai-wo-hadsa/): जो होने वाला है वो हादसा दिखाई तो दे कोई चराग जलाओ हवा दिखाई तो दे, तेरी गली - [क्या सरोकार अब किसी से मुझे...](https://bazmeshayari.com/kya-sarokar-ab-kisi/): क्या सरोकार अब किसी से मुझे वास्ता था तो था बस तुझी से मुझे, बेहिसी का भी अब - [रखा न अब कहीं का दिल ए बेक़रार ने](https://bazmeshayari.com/rakha-na-ab-kahin-ka-dil-e-beqarar-ne/): रखा न अब कहीं का दिल ए बेक़रार ने बर्बाद कर दिया ग़म ए बे इख़्तियार ने, दिल - [तमन्ना दो दिलों की एक ही मालूम होती है](https://bazmeshayari.com/tamanna-do-dilo-ki/): तमन्ना दो दिलों की एक ही मालूम होती है अब उनकी हर ख़ुशी अपनी ख़ुशी मालूम होती है, - [तर्क ए ग़म गवारा है और न ग़म का यारा है](https://bazmeshayari.com/tark-e-gam-ganvara/): तर्क ए ग़म गवारा है और न ग़म का यारा है अब तो दिल की हर धड़कन आ’लम - [रंगों की आड़ में खुनी खेल, ये इंसानियत क्या जाने ?](https://bazmeshayari.com/rango-ki-aad-me-khooni-khel/): रंगों की आड़ में खुनी खेल, ये इंसानियत क्या जाने ? हरा, भगवा में डूबे हुए केसरिया का - [इश्क़ कर के मुक़र गई होगी...](https://bazmeshayari.com/ishq-kar-ke-muqar/): इश्क़ कर के मुक़र गई होगी वो तो लड़की है डर गई होगी, आदतें सब ख़राब कर के - [बाद मरने के मेरे किसी केलब पे तो मेरा नाम होगा](https://bazmeshayari.com/baad-marne-ke-mere-kisi-ke/): बाद मरने के मेरे किसी केलब पे तो मेरा नाम होगा मातम होगा कहीं, कहीं शहनाइयों का एहतिमाम - [आग बहते हुए पानी में लगाने आई](https://bazmeshayari.com/aag-bahte-hue-paani/): आग बहते हुए पानी में लगाने आई तेरे ख़त आज मैं दरिया में बहाने आई, फिर तेरी याद - [होना नहीं अब उसने मेहरबान छोड़ दे](https://bazmeshayari.com/hona-nahi-ab-usne-mehrban/): होना नहीं अब उसने मेहरबान छोड़ दे उसके लिए तू चाहे ये जहान छोड़ दे, कितनी उठाए हमने - [یہ اسمِ محمدؐ تو رحمت کا خزانہ ہے](https://bazmeshayari.com/ye-ism-e-mohammad/): یہ اسمِ محمدؐ تو رحمت کا خزانہ ہےاس نورِ مبارک سے روشن یہ زمانہ ہے واللہ محمدؐ سے - [पढ़ती रहती हूँ मैं सारी चिट्ठियाँ...](https://bazmeshayari.com/padhti-rahti-hoon-main/): पढ़ती रहती हूँ मैं सारी चिट्ठियांरात है और है तुम्हारी चिट्ठियां, आओ तो पढ़ कर सुनाऊँगी तुम्हेंलिख रखी - [वो जो दिल के क़रीब होते है...](https://bazmeshayari.com/wo-jo-dil-ke-qarib-hote-hai/): वो जो दिल के क़रीब होते है लोग वो भी अज़ीब होते है, पढ़ना लिखना जो जानते न - [हम वक़्त ए मौत को तो हरगिज़ टाल न पाएँगे](https://bazmeshayari.com/ham-waqt-e-maut-ko-to/): हम वक़्त ए मौत को तो हरगिज़ टाल न पाएँगे हम ख़ाली हाथ आए है और ख़ाली हाथ - [हमने कैसे यहाँ गुज़ारी है....](https://bazmeshayari.com/hamne-kaise-yahan-guzari-hai/): हमने कैसे यहाँ गुज़ारी है अश्क खुनी है आह ज़ारी है, हम ही पागल थे जान दे बैठे - [याद आता है मुझे छोड़ के जाने वाला](https://bazmeshayari.com/yaad-aata-hai-mujhe-chhod-ke/): याद आता है मुझे छोड़ के जाने वाला मेरी हर शाम को रंगीन बनाने वाला, आज रो कर - [मैंने माना कि तुम ज़ालिम नहीं हो मगर](https://bazmeshayari.com/maine-mana-ki-tum/): मैंने माना कि तुम ज़ालिम नहीं हो मगर क्या मालूम था कि हम तुमसे डर जाएँगे, तेरी याद - [बात करते है यहाँ क़तरे भी समन्दर की तरह](https://bazmeshayari.com/baat-karte-hai-yahan-qatre-bhi/): बात करते है यहाँ क़तरे भी समन्दर की तरह अब लोग ईमान बदलते है कैलेंडर की तरह, कोई - [क्यूँ रवा रखते हो मुझसे सर्द मेहरी बे सबब](https://bazmeshayari.com/kyun-ranva-rakhte-ho/): क्यूँ रवा रखते हो मुझसे सर्द मेहरी बे सबब बीच में लाना पड़े थाना कचहरी बे सबब, मैंने - [दुनियाँ में करने पड़ते है इतने समझौते](https://bazmeshayari.com/duniya-me-karne-padte/): दुनियाँ में करने पड़ते है इतने समझौते कि मौत से पहले कई बार मर जाते है हम, ज़िन्दगी - [बस इतनी बात पे बीबी खफ़ा है शौहर से](https://bazmeshayari.com/bas-itni-si-baat-bibi-khafa-hai/): बस इतनी बात पे बीबी खफ़ा है शौहर से कि माँ के हाथ पे ला कर दिहाड़ी रखता - [राब्ता ज़िस्म का जब रूह से कट जाता है](https://bazmeshayari.com/rabta-zism-ka-jab/): राब्ता ज़िस्म का जब रूह से कट जाता है आदमी मुख्तलिफ़ हालात में बँट जाता है, देख कर - [उम्र कहते है जिसे साँसों की एक जंज़ीर है](https://bazmeshayari.com/umr-kahte-hai-jise-saanso-ki/): उम्र कहते है जिसे साँसों की एक जंज़ीर है चश्म ए बीना में हर के लम्हा नई तस्वीर - [दस्तरस में न हो हालात तो फिर क्या कीजिए](https://bazmeshayari.com/dastras-me-na-ho-halaat/): दस्तरस में न हो हालात तो फिर क्या कीजिए वक़्त दिखलाए करिश्मात तो फिर क्या कीजिए, साहब ए - [हमें कोई गम न था, गम ए आशिकी से पहले](https://bazmeshayari.com/hame-koi-gam-n-tha/): हमें कोई गम न था, गम ए आशिकी से पहले न थी दुश्मनी किसी से, तेरी दोस्ती से - [जाने क्यूँ आजकल तुम्हारी कमी अखरती है बहुत](https://bazmeshayari.com/jaane-kyun-aajkal/): जाने क्यूँ आजकल तुम्हारी कमी अखरती है बहुत यादो के बंद कमरे में ज़िन्दगी सिसकती है बहुत, पनपने - [ये सोचा नहीं है कि किधर जाएँगे...](https://bazmeshayari.com/ye-socha-nahi-hai-ki/): ये सोचा नहीं है कि किधर जाएँगे मगर हम अब यहाँ से गुज़र जाएँगे, इसी खौफ़ से रातों - [भीतर भीतर आग भरी है बाहर बाहर पानी है](https://bazmeshayari.com/bhitar-bhitar-aag-bhari/): भीतर भीतर आग भरी है बाहर बाहर पानी है तेरी मेरी, मेरी तेरी सब की यही कहानी है, - [ऐ मेरी क़ौम के लोगो ज़रा होशियार हो जाओ](https://bazmeshayari.com/ae-meri-qaum-ke-logo/): ऐ मेरी क़ौम के लोगो ज़रा होशियार हो जाओउठो अब नींद से जागो के अब बेदार हो जाओ, - [कुछ चलेगा ज़नाब, कुछ भी नहीं...](https://bazmeshayari.com/kuch-chalega-zanab-kuch/): कुछ चलेगा ज़नाब, कुछ भी नहीं चाय, कॉफ़ी, शराब, कुछ भी नहीं, चुप रहे तो कली लगे वो - [हर रिश्ता यहाँ बस चार दिन की कहानी है](https://bazmeshayari.com/har-rishta-yahan-bas-chaar-din/): हर रिश्ता यहाँ बस चार दिन की कहानी है अंज़ाम ए वफ़ा आँखों से बहता हुआ पानी है, - [जी चाहे तो शीशा बन जा, जी चाहे पैमाना बन जा](https://bazmeshayari.com/jee-chahe-to-shisha/): जी चाहे तो शीशा बन जा, जी चाहे पैमाना बन जा शीशा पैमाना क्या बनना ? मय बन - [घने बादलो से जो कभी थोड़ी धूप निकलती रहती](https://bazmeshayari.com/ghane-baadlo-se-jo-kabhi/): घने बादलो से जो कभी थोड़ी धूप निकलती रहती आसरे उम्मीद के मुमकिन है ज़िन्दगी चलती रहती, हुस्न - [उनका दावा, मुफ़लिसी का मोर्चा...](https://bazmeshayari.com/unka-daava-muflisi-ka/): उनका दावा, मुफ़लिसी का मोर्चा सर हो गया पर हकीक़त ये है मौसम और बदतर हो गया, बंद - [सियासी महाभारत में इसके पात्र...](https://bazmeshayari.com/siyasi-mahabharat-me/): सियासी महाभारत में इसके पात्र सारे आ गए योगगुरु भागे कहीं तो कहीं अन्ना हजारे आ गए, ठाकरे - [शाम को जिस वक़्त ख़ाली हाथ घर...](https://bazmeshayari.com/shaam-ko-jis-waqt/): शाम को जिस वक़्त ख़ाली हाथ घर जाता हूँ मैं मुस्कुरा देते है बच्चे और मर जाता हूँ - [कुछ अधूरी हसरतें अश्क ए रवाँ में...](https://bazmeshayari.com/kuch-adhuri-hasraten/): कुछ अधूरी हसरतें अश्क ए रवाँ में बह गए क्या कहें इस दिल की हालत, शिद्दत ए गम - [तुम्हे पूजता था दीया वो बुझा दूँ....](https://bazmeshayari.com/tumhe-pujta-tha-diya/): तुम्हे पूजता था दीया वो बुझा दूँ तुम्हारे बिना भी दुनियाँ बसा दूँ, सुनो इश्क़ में अब यही - [ज़माना आया है बेहिजाबी का आम...](https://bazmeshayari.com/zamana-aaya-hai-behizabi/): ज़माना आया है बेहिजाबी का आम दीदार ए यार होगा सुकूत था पर्दादार जिसका वो राज़ अब आश्कार - [जाने किस करनी का फल होगा...](https://bazmeshayari.com/jaane-kis-karni-ka-fal/): जाने किस करनी का फल होगा कैसी फिजा, कैसे मौसम में जागे हम ? शहरों से सेहराओ तक - [ना मस्ज़िदे ना शिवाले तलाश करते है...](https://bazmeshayari.com/naa-maszide-naa-shiwale/): ना मस्ज़िदे ना शिवाले तलाश करते है ये भूखे पेट निवाले तलाश करते है, हमारी सादा दिली देखो - [तुम्हारे हिज़्र में है ज़िन्दगी दुश्वार....](https://bazmeshayari.com/tumhare-hizr-me-hai/): तुम्हारे हिज़्र में है ज़िन्दगी दुश्वार बरसो से तुम्हे मालूम क्या तुम हो समन्दर पार बरसों से, चले - [राहत ए जाँ से तो ये दिल का वबाल...](https://bazmeshayari.com/rahat-e-jaan-se-to/): राहत ए जाँ से तो ये दिल का वबाल अच्छा है उस ने पूछा तो है इतना तेरा - [किस ओर ये सफ़र है, संभल जाइए...](https://bazmeshayari.com/kis-or-ye-safar/): किस ओर ये सफ़र है, संभल जाइए कौन कब किस डगर है, संभल जाइए, नेक रस्ते पे चलते - [तसव्वुर में भी जिसकी जुस्तुजू करता है...](https://bazmeshayari.com/tasavvur-me-bhi-jiski/): तसव्वुर में भी जिसकी जुस्तुजू करता है दिल मेरा उसी से हिज्र में भी गुफ़्तुगू करता है दिल - [हासिल हुई जब से आरज़ी शोहरते...](https://bazmeshayari.com/haasil-hui-jab-se/): हासिल हुई जब से आरज़ी शोहरते माल ओ ज़र के नशे में चूर हो गया, पा के ऊँचा - [रोज़मर्रा वही एक ख़बर देखिए...](https://bazmeshayari.com/rozmarra-wahi-ek-khabar/): रोज़मर्रा वही एक ख़बर देखिए अब तो पत्थर हुआ काँचघर देखिए, सड़के चलने लगी आदमी रुक गया हो - [एक निहत्थे आदमी के हाथ में क़िस्मत...](https://bazmeshayari.com/ek-nihatthe-aadmi-ke/): एक निहत्थे आदमी के हाथ में क़िस्मत ही काफी है हवाओं का रुख बदलने के लिए चाहत ही - [आदमी केवल वहम में तानता है...](https://bazmeshayari.com/aadmi-kewal-vaham-me/): आदमी केवल वहम में तानता है शर्तियाँ औकात वो अपनी जानता है, रहनुमाई झूठ की कर ले मगर - [क़ुदरत का करिश्मा भी क्या बेमिसाल है](https://bazmeshayari.com/qudrat-ka-karishma-bhi/): क़ुदरत का करिश्मा भी क्या बेमिसाल है चेहरे सफ़ेद काले पर खून सबका लाल है, हिन्दू है यहाँ - [ये क़ुदरत भी अब तबाही की हुई शौक़ीन](https://bazmeshayari.com/ye-qudrat-bhi-ab/): ये क़ुदरत भी अब तबाही की हुई शौक़ीन लगती है ऐ दौर ए ज़दीद साज़िश तेरी बहुत संगीन - [बात अब करते है क़तरे भी समंदर...](https://bazmeshayari.com/baat-ab-karte-hai/): बात अब करते है क़तरे भी समंदर की तरह लोग ईमान बदलते है कलेंडर की तरह, कोई मंज़िल - [हम प्यास के मारों का इस तरह गुज़ारा है](https://bazmeshayari.com/ham-pyas-ke-maaro-ka/): हम प्यास के मारों का इस तरह गुज़ारा है आँखों में नदी लेकिन हाथो में किनारा है, दो - [ये दिल टूट न जाए इस बात पर...](https://bazmeshayari.com/ye-dil-tut-na/): ये दिल टूट न जाए इस बात पर एक तरफ़ा ही ज़ोर लगाया मैंने, मेरे दिल की आवाज़ - [क्यूँ खौफ़ इस क़दर है तुम्हे हादसात का ?](https://bazmeshayari.com/kyun-khauf-is-qadar/): क्यूँ खौफ़ इस क़दर है तुम्हे हादसात का ? एक दिन ख़ुदा दिखाएगा रास्ता निज़ात का, ये तजरुबा - [वो एक लफ़्ज़ जो बेसदा जाएगा....](https://bazmeshayari.com/wo-ek-lafz-jo-besada/): वो एक लफ़्ज़ जो बेसदा जाएगा वही मुद्दतों तक सुना जाएगा, कोई है जो मेरे तआक़ुब में है - [मुक़द्दर ने कहाँ कोई नया पैग़ाम लिखा है](https://bazmeshayari.com/muqaddar-ne-kahan-koi/): मुक़द्दर ने कहाँ कोई नया पैग़ाम लिखा है अज़ल ही से वरक़ पर दिल के तेरा नाम लिखा - [शरीक ए आलम ए कैफ़ ओ सुरूर....](https://bazmeshayari.com/shariq-e-alam-e/): शरीक ए आलम ए कैफ़ ओ सुरूर मैं भी था कि रात जश्न में तेरे हुज़ूर मैं भी - [मुझे तन्हाई के ग़म से बचा लेते तो...](https://bazmeshayari.com/mujhe-tanhaai-ke-gam/): मुझे तन्हाई के ग़म से बचा लेते तो अच्छा था सफ़र में हमसफ़र अपना बना लेते तो अच्छा - [सुबह तक मैं सोचता हूँ शाम से...](https://bazmeshayari.com/subah-tak-sochta-hoon/): सुबह तक मैं सोचता हूँ शाम से जी रहा है कौन मेरे नाम से, शहर में सच बोलता - [नदी के पार उजाला दिखाई देता है](https://bazmeshayari.com/nadi-ke-paar-ujala/): नदी के पार उजाला दिखाई देता है मुझे ये ख़्वाब हमेशा दिखाई देता है, बरस रही हैं अक़ीदत - [ज़बाँ है मगर बे ज़बानों में है....](https://bazmeshayari.com/zaban-hai-magar-be/): ज़बाँ है मगर बे ज़बानों में है नसीहत कोई उसके कानों में है, चलो साहिलों की तरफ़ रुख़ - [वो सर फिरी हवा थी सँभलना पड़ा मुझे](https://bazmeshayari.com/wo-sar-firi-hawa/): वो सर फिरी हवा थी सँभलना पड़ा मुझे मैं आख़िरी चराग़ था जलना पड़ा मुझे, महसूस कर रहा - [सुना है ये जहाँ अच्छा था पहले...](https://bazmeshayari.com/suna-hai-ye-jahan/): सुना है ये जहाँ अच्छा था पहले ये जो अब दश्त है दरिया था पहले, जो होता कौन - [न जिस्म साथ हमारे न जाँ हमारी तरफ़](https://bazmeshayari.com/na-jism-saath-hamare/): न जिस्म साथ हमारे न जाँ हमारी तरफ़ है कुछ भी हम में हमारा कहाँ हमारी तरफ़, खड़े - [चलो वो इश्क़ नहीं चाहने की आदत है](https://bazmeshayari.com/chalo-wo-ishq-nahi/): चलो वो इश्क़ नहीं चाहने की आदत है पर क्या करें हमें एक दूसरे की आदत है, तू - [मेरे दिल में जब कोई मलाल होता है...](https://bazmeshayari.com/mere-dil-me-jab/): मेरे दिल में जब कोई मलाल होता है तुम क्या जानो मेरा कैसा हाल होता है, मेरी हर - [ये कब चाहा कि मैं मशहूर हो जाऊँ...](https://bazmeshayari.com/ye-kab-chaha-ki-main/): ये कब चाहा कि मैं मशहूर हो जाऊँ बस अपने आप को मंज़ूर हो जाऊँ, नसीहत कर रही - [शख्सियत ए लख्त ए ज़िगर कहला...](https://bazmeshayari.com/shaksiyat-e-lakhte-jigar/): शख्सियत ए लख्त ए ज़िगर कहला न सका ज़न्नत के धनी क़दमों को मैं सहला न सका, दूध - [ग़मों का सैलाब आया ज़रूर है...](https://bazmeshayari.com/gamo-ka-sailab-aya-zarur-hai/): ग़मों का सैलाब आया ज़रूर है कुछ खोया तो कुछ पाया ज़रूर है, एक तुम हो जो दर्द - [लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर](https://bazmeshayari.com/likh-likh-ke-aansoo/): लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है अपने सुख़न को अपनी पहचान कर लिया है, आख़िर - [जो नेकी कर के फिर दरिया में...](https://bazmeshayari.com/jo-neqi-kar-ke-dariya/): जो नेकी कर के फिर दरिया में उसको डाल जाता है वो जब भी दुनिया से जाता है - [कुछ परिंदों को तो बस दो चार...](https://bazmeshayari.com/kuch-parindo-ko-to/): कुछ परिंदों को तो बस दो चार दाने चाहिए कुछ को लेकिन आसमानों के खज़ाने चाहिए, दोस्तों का - [लेता हूँ उस का नाम भी आह ओ बुका...](https://bazmeshayari.com/leta-hoon-uska-naam/): लेता हूँ उस का नाम भी आह ओ बुका के साथ कितना हसीन रिश्ता है मेरा ख़ुदा के - [मेरे दिन की तरह रौशन मेरी हर...](https://bazmeshayari.com/mere-din-ki-tarah/): मेरे दिन की तरह रौशन मेरी हर रात होती है दुआ माँ की हर एक मौसम में मेरे - [आख़िर वो मेरे क़द की भी हद...](https://bazmeshayari.com/aakhir-wo-mere-qad-ki/): आख़िर वो मेरे क़द की भी हद से गुज़र गया कल शाम में तो अपने ही साये से - [इस दिल में आह, आँखों में नाले है...](https://bazmeshayari.com/is-dil-me-aah/): इस दिल में आह, आँखों में नाले है हमें न सताओ हम तुम्हारे चाहने वाले है, मुहब्बत भरे - [चलो अब यूँ भी आज़माए कभी...](https://bazmeshayari.com/chalo-ab-yun-bhi/): चलो अब यूँ भी आज़माए कभी तुम कह दो तो भूल जाए कभी, ज़िस्म मुर्दा हुआ तो ये - [आहिस्ता चल ऐ ज़िन्दगी....](https://bazmeshayari.com/aahista-chal-ae-zindagi/): आहिस्ता चल ऐ ज़िन्दगी अभी कई क़र्ज़ चुकाना बाक़ी है, कुछ दर्द मिटाना बाक़ी है कुछ फर्ज़ निभाना - [इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी](https://bazmeshayari.com/insan-me-haiwan-yahan/): इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी अल्लाह निगहबान यहाँ भी है वहाँ भी, ख़ूँख़्वार दरिंदों के - [अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो](https://bazmeshayari.com/azib-saneha-mujh-par/): अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो मैं अपने साए से कल रात डर गया यारो, हर एक - [बीच सफ़र में छोड़ गया हमसफ़र...](https://bazmeshayari.com/bich-safar-me-chhod-gaya/): बीच सफ़र में छोड़ गया हमसफ़र हमसफ़र ना रहा इतना दर्द दिया हमदर्द ने कि हमदर्द हमदर्द ना - [अगर तू साथ चल पड़ता सफ़र...](https://bazmeshayari.com/agar-tu-saath-chal-padta/): अगर तू साथ चल पड़ता सफ़र आसान हो जाता ख़ुशी से उम्र भर जीने का एक सामान हो - [तू अपनी खूबियाँ ढूँढ कमियां निकालने के लिए लोग हैं](https://bazmeshayari.com/tu-apni-khubiyan-dhoondh/): तू अपनी खूबियाँ ढूँढ कमियां निकालने के लिए लोग हैं, अगर रखना ही है कदम तो आगे रख - [ज़नाब शेख़ की हर्ज़ा सराई ज़ारी है](https://bazmeshayari.com/janab-shekh-ki-harza/): ज़नाब शेख़ की हर्ज़ा सराई ज़ारी है इधर से ज़ुल्म उधर से दुहाई ज़ारी है, बिछड़ गया हूँ - [हिज्र की शब घड़ी घड़ी दिल से यही...](https://bazmeshayari.com/hizr-ki-shab-ghadi/): हिज्र की शब घड़ी घड़ी दिल से यही सवाल है जिसके ख़याल में हूँ गुम उसको भी कुछ - [ऐ लिखने वाले आख़िर तू ही क्यूँ...](https://bazmeshayari.com/ae-likhne-wale-aakhir/): ऐ लिखने वाले आख़िर तू ही क्यूँ लिखता है ? है ये दर्द सबको फिर तुझे ही क्यूँ - [अब अपने दीदा ओ दिल का भी ए'तिबार](https://bazmeshayari.com/ab-apne-deeda-o/): अब अपने दीदा ओ दिल का भी ए’तिबार नहीं उसी को प्यार किया जिस के दिल में प्यार - [ये दिल आवेज़ी ए हयात न हो](https://bazmeshayari.com/ye-dil-aavezi-e-hayat-na/): ये दिल आवेज़ी ए हयात न हो अगर आहंग ए हादसात न हो, तेरी नाराज़गी क़ुबूल मगर ये - [आरज़ू को दिल ही दिल में घुट के...](https://bazmeshayari.com/aarzoo-ko-dil-hi/): आरज़ू को दिल ही दिल में घुट के रहना आ गया और वो ये समझे कि मुझ को - [जताए हक़ न कैसे हम भला इक़रार पे...](https://bazmeshayari.com/jataye-haq-na-kaise/): जताए हक़ न कैसे हम भला इक़रार पे उनके हमें फिर भी नाज़ होता है हसीं इंकार पे - [इतना एहसान तो हम पर वो ख़ुदारा करते](https://bazmeshayari.com/itna-ehsan-to-ham-par-2/): इतना एहसान तो हम पर वो ख़ुदारा करते अपने हाथों से जिगर चाक हमारा करते, हमको तो दर्द - [ज़िंदगी दी है तो जीने का हुनर भी देना](https://bazmeshayari.com/zindagi-di-hai-to/): ज़िंदगी दी है तो जीने का हुनर भी देना पाँव बख़्शें हैं तो तौफ़ीक़ ए सफ़र भी देना, - [इस बहते हुए लहू में मुझे तो](https://bazmeshayari.com/is-bahte-hue-lahoo/): इस बहते हुए लहू में मुझे तो बस इन्सान नज़र आ रहा है लानत हो तुम पे तुम्हे - [किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई मेरे ख़ुदा](https://bazmeshayari.com/kis-simt-chal-padi/): किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई मेरे ख़ुदा नफ़रत ही अब दे रही है दिखाई मेरे ख़ुदा, अम्न - [जिसने भी मुहब्बत का गीत गया है](https://bazmeshayari.com/jisne-bhi-muhabbat-ka/): जिसने भी मुहब्बत का गीत गया है ज़िन्दगी का लुत्फ़ उसने ही उठाया है, मौसम गर्मी का हो - [दुनिया में यूँ भी हमने गुज़ारी है ज़िन्दगी](https://bazmeshayari.com/duniya-me-yun-bhi/): दुनिया में यूँ भी हमने गुज़ारी है ज़िन्दगी अपनी कहाँ है जैसे उधारी है ज़िन्दगी, आवाज़ मुझको ना - [संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है](https://bazmeshayari.com/sansar-ki-har-shay/): संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है एक धुंध से आना है एक धुंध में जाना - [मर चुका हूँ कई बार फिर भी कई..](https://bazmeshayari.com/mar-chuka-hoo-kai/): मर चुका हूँ कई बार फिर भी कई बार मरना है मरने से पहले ज़िन्दगी को रग रग - [घबराने से मसले हल नहीं होते](https://bazmeshayari.com/ghabrane-se-masle-hal/): घबराने से मसले हल नहीं होते जो आज है वो कल नहीं होते, याद रखना हमेशा इस बात - [बात इधर उधर तो बहुत घुमाई जा..](https://bazmeshayari.com/baat-idhar-udhar-to/): बात इधर उधर तो बहुत घुमाई जा सकती है पर सच्चाई भला कब तक छुपाई जा सकती है - [अब मुहब्बत का इरादा बदल जाना भी...](https://bazmeshayari.com/ab-muhabbat-ka-irada/): अब मुहब्बत का इरादा बदल जाना भी मुश्किल है उन्हें खोना भी मुश्किल,उन्हें पाना भी मुश्किल है, ज़रा - [रह के मक्कारों में मक्कार हुई है दुनिया](https://bazmeshayari.com/rah-ke-makkaro-me/): रह के मक्कारों में मक्कार हुई है दुनिया मेरे दुश्मन की तरफ़दार हुई है दुनिया, पाक दामन थी - [ऐसा अपनापन भी क्या जो अज़नबी](https://bazmeshayari.com/aisa-apnapan-bhi-kya/): ऐसा अपनापन भी क्या जो अज़नबी महसूस हो साथ रह कर भी गर मुझे तेरी कमी महसूस हो, - [गर्मी ए हसरत ए नाकाम से जल जाते हैं](https://bazmeshayari.com/garmi-e-hasrat-e-naqam/): गर्मी ए हसरत ए नाकाम से जल जाते हैं हम चराग़ों की तरह शाम से जल जाते हैं, - [गरेबाँ दर गरेबाँ नुक्ता आराई भी होती है](https://bazmeshayari.com/gareban-dar-gareban-nuqta/): गरेबाँ दर गरेबाँ नुक्ता आराई भी होती है बहार आए तो दीवानों की रुस्वाई भी होती है, हम - [इस नहीं का कोई इलाज नहीं](https://bazmeshayari.com/is-nahi-ka-koi/): इस नहीं का कोई इलाज नहीं रोज़ कहते हैं आप आज नहीं, कल जो था आज वो मिज़ाज - [जो दिख रहा है उसी के अंदर जो...](https://bazmeshayari.com/jo-dikh-raha-hai/): जो दिख रहा है उसी के अंदर जो अनदिखा है वो शायरी है, जो कह सका था वो - [बूढ़ा टपरा टूटा छपरा और उस पर बरसातें सच](https://bazmeshayari.com/boodha-tapara-tuta-chhapra/): बूढ़ा टपरा, टूटा छपरा और उस पर बरसातें सच उसने कैसे काटी होगी, लंबी लंबी राते सच ? - [गँवाई किस की तमन्ना में ज़िन्दगी मैं ने](https://bazmeshayari.com/ganvai-kis-ki-tamanna/): गँवाई किस की तमन्ना में ज़िन्दगी मैं ने वो कौन है जिसे देखा नहीं कभी मैं ने, तेरा - [अज़ाब ए हिज़्र बढ़ा लूँ अगर इजाज़त हो](https://bazmeshayari.com/azab-e-hizr-badha/): अज़ाब ए हिज़्र बढ़ा लूँ अगर इजाज़त हो एक और ज़ख्म खा लूँ अगर इजाज़त हो, तुम्हारे आरिज़ - [पानी के उतरने में अभी वक़्त लगेगा](https://bazmeshayari.com/paani-ke-utarne-me/): पानी के उतरने में अभी वक़्त लगेगा हालात सँवरने में अभी वक़्त लगेगा, मच्छर से, कोरोना से अभी - [फ़सुर्दगी का मुदावा करें तो कैसे करें](https://bazmeshayari.com/farsudgi-ka-mudawa-kare/): फ़सुर्दगी का मुदावा करें तो कैसे करें वो लोग जो तेरे क़ुर्ब ए जमाल से भी डरें, एक - [एक जाम खनकता जाम कि साक़ी...](https://bazmeshayari.com/ek-zaam-khanakta-zaam/): एक जाम खनकता जाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है एक होश रुबा इनआ’म कि साक़ी रात गुज़रने - [दूर तक छाए थे बादल और कहीं..](https://bazmeshayari.com/door-tak-chhaye-the/): दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न - [जो हम पे गुज़रे थे रंज़ सारे, जो ख़ुद पे...](https://bazmeshayari.com/jo-ham-pe-guzre/): जो हम पे गुज़रे थे रंज़ सारे, जो ख़ुद पे गुज़रे तो लोग समझे जब अपनी अपनी मुहब्बतों - [नसीम ए सुबह गुलशन में गुलो से खेलती होगी](https://bazmeshayari.com/nasim-e-subah-gulshan/): नसीम ए सुबह गुलशन में गुलो से खेलती होगी किसी की आख़िरी हिचकी किसी की दिल्लगी होगी, तुम्हे - [किस एहतियात से उसने नज़र बचाई है](https://bazmeshayari.com/kis-ehtiyat-se-usne/): किस एहतियात से उसने नज़र बचाई है ज़माना अब भी समझता है आशनाई है, मेरे अज़ीज़ है इसका - [उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर](https://bazmeshayari.com/umr-bhar-chalte-rahe/): उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर परवरिश पाई है अपने ख़ून ही की धार पर, - [जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी](https://bazmeshayari.com/jis-taraf-chahoon-pahunch/): जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी मैं तो आवाज़ हूँ आवाज़ की हिजरत कैसी ? सुनने वालों - [किए वादों का निभाना बाक़ी है](https://bazmeshayari.com/kiye-waado-ka-nibhana/): किए वादों का निभाना बाक़ी है और अभी उनको मनाना बाक़ी है, मुझे अपना भी समझना बाक़ी है - [बात करते है ख़ुशी की भी तो रंज़ के साथ](https://bazmeshayari.com/baat-karte-hai-khushi-ki/): बात करते है ख़ुशी की भी तो रंज़ के साथ वो हँसाते भी है ऐसा कि रुला देते - [कभी कहा न किसी से तेरे फ़साने को](https://bazmeshayari.com/kabhi-kaha-na-kisi/): कभी कहा न किसी से तेरे फ़साने को न जाने कैसे ख़बर हो गई ज़माने को, दुआ बहार - [साथ चलते आ रहे हैं पास आ सकते नहीं](https://bazmeshayari.com/saath-chalte-aa-rahe/): साथ चलते आ रहे हैं पास आ सकते नहीं एक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं, - [हुस्न ए मह गरचे बहंगाम ए कमाल अच्छा है](https://bazmeshayari.com/husn-e-mah-garche/): हुस्न ए मह गरचे बहंगाम ए कमाल अच्छा है उससे मेरा मह ए ख़ुर्शीद जमाल अच्छा है, बोसा - [जुज़ तेरे कोई भी दिन रात न जाने मेरे](https://bazmeshayari.com/juz-tere-koi-bhi/): जुज़ तेरे कोई भी दिन रात न जाने मेरे तू कहाँ है मगर ऐ दोस्त पुराने मेरे ? - [यकुम जनवरी है नया साल है](https://bazmeshayari.com/yakum-janwari-hai-naya/): यकुम जनवरी है नया साल है दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है, बचाए ख़ुदा शर की ज़द से - [ज़िन्दगी की कशमकश से परेशान बहुत है](https://bazmeshayari.com/zindagi-ki-kashmaksh-se/): ज़िन्दगी की कशमकश से परेशान बहुत है दिल को न उलझाओ ये नादान बहुत है, यूँ सामने आ - [गिले फ़ुज़ूल थे अहद ए वफ़ा के होते हुए](https://bazmeshayari.com/gile-fuzul-the-ahad/): गिले फ़ुज़ूल थे अहद ए वफ़ा के होते हुए सो चुप रहा सितम ए नारवां के होते हुए, - [किसी दरबार की आमीन भरी खल्वत में](https://bazmeshayari.com/kisi-darbar-ki-aamin/): किसी दरबार की आमीन भरी खल्वत में ऐन मुमकिन है तुम्हे मेरा पता मिल जाए, ये भी हो - [महफ़िले ख़्वाब हुई रह गए तन्हा चेहरे](https://bazmeshayari.com/mahfile-khwab-hui-rah/): महफ़िले ख़्वाब हुई रह गए तन्हा चेहरे वक़्त ने छीन लिए कितने शनासा चेहरे, सारी दुनियाँ के लिए - [दिल से उतर जाने में एक लम्हा लगता है](https://bazmeshayari.com/dil-se-utar-jane-me/): दिल से उतर जाने में एक लम्हा लगता है दिल के बदल जाने में एक लम्हा लगता है, - [दर्द कई होते है दिल में छुपाने के लिए](https://bazmeshayari.com/dard-kai-hote-hai/): दर्द कई होते है दिल में छुपाने के लिए सब के सब आँसू नहीं होते दिखाने के लिए, - [ऐ यक़ीनों के ख़ुदा शहर ए गुमाँ...](https://bazmeshayari.com/ae-yaqino-ke-khuda-shahar/): ऐ यक़ीनों के ख़ुदा शहर ए गुमाँ किस का है नूर तेरा है चराग़ों में धुआँ किस का - [उस गुल को भेजना है मुझे ख़त...](https://bazmeshayari.com/us-gul-ko-bhejna-hai/): उस गुल को भेजना है मुझे ख़त सबा के हाथ इस वास्ते लगा हूँ चमन की हवा के - [मैंने मुद्दत से कोई ख़्वाब नहीं देखा है](https://bazmeshayari.com/maine-muddat-se-koi-khwab/): मैंने मुद्दत से कोई ख़्वाब नहीं देखा है रात खिलने का गुलाबों से महक आने का, ओस की - [हाए लोगों की करम फ़रमाइयाँ...](https://bazmeshayari.com/haay-logo-ki-karam/): हाए लोगों की करम फ़रमाइयाँ तोहमतें बदनामियाँ रुस्वाइयाँ, ज़िंदगी शायद इसी का नाम है दूरियाँ, मजबूरियाँ, तन्हाइयाँ, क्या - [फूल,खुशबू, कली की बात करें](https://bazmeshayari.com/fool-khushboo-kali-ki-baat/): फूल,खुशबू, कली की बात करें प्यार की, आशिकी की बात करें मौत का खौफ़ भूल कर यारो क्यूँ - [क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे](https://bazmeshayari.com/kya-zamana-tha-ki-ham/): क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे रात भर चाँद के हमराह फिरा करते थे, जहाँ - [जब से तेरी हर बात में रहने लगे](https://bazmeshayari.com/jab-se-teri-har-baat-me/): जब से तेरी हर बात में रहने लगे दुश्मन मेरे औक़ात में रहने लगे, ये बात भी उनको - [कहानी दर्द ओ गम की ज़िन्दगी से...](https://bazmeshayari.com/kahani-dard-o-gam-ki/): कहानी दर्द ओ गम की ज़िन्दगी से क्या कहता ? सबब ए रंज़ ओ गम जो है उसी - [दिल की बस्ती पे किसी दर्द का साया...](https://bazmeshayari.com/dil-ki-basti-pe-kisi-dard-ka/): दिल की बस्ती पे किसी दर्द का साया भी नहीं ऐसा वीरानी का मौसम कभी आया भी नहीं, - [फ़िराक़ ओ वस्ल से हट कर कोई रिश्ता...](https://bazmeshayari.com/firaq-o-vasl-se-hat-kar/): फ़िराक़ ओ वस्ल से हट कर कोई रिश्ता हमारा हो बग़ैर उस के भी शायद ज़िंदगी हमको गवारा - [किया इश्क था जो बाइसे रुसवाई बन गया](https://bazmeshayari.com/kiya-ishq-tha-jo-baaise/): किया इश्क था जो बाइसे रुसवाई बन गया यारो तमाम शहर तमाशाई बन गया, बिन माँगे मिल गए - [तजुर्बे के दम पर दीवानों ने कहा था...](https://bazmeshayari.com/tazrube-ke-dam-par-deewano/): तजुर्बे के दम पर दीवानों ने कहा था इश्क़ बुरा है मगर जुनूँ ए इश्क़ में ये बात - [बस एक बार किसी ने गले लगाया था](https://bazmeshayari.com/bas-ek-baar-kisi-ne-gale/): बस एक बार किसी ने गले लगाया था फिर उस के बाद न मैं था न मेरा साया - [किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई ऐ मेरे ख़ुदा](https://bazmeshayari.com/kis-simt-chal-padhi-hai/): किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई ऐ मेरे ख़ुदा नफ़रत ही दे रही है दिखाई ऐ मेरे ख़ुदा, - [कर्ब ए फ़ुर्क़त रूह से जाता नहीं...](https://bazmeshayari.com/karb-e-furqat-rooh/): कर्ब ए फ़ुर्क़त रूह से जाता नहीं हल कोई ग़म का नज़र आता नहीं, काश होता इल्म ये - [एहसास ए इश्क़ दिल की पनाहों में...](https://bazmeshayari.com/ehsas-e-ishq-dil-ki/): एहसास ए इश्क़ दिल की पनाहों में आ गया बादल सिमट के चाँद की बाहोँ में आ गया, - [हक़ीर जानता है इफ्तिखार माँगता है](https://bazmeshayari.com/haqir-jaanta-hai-iftikhar/): हक़ीर जानता है इफ्तिखार माँगता है वो ज़हर बाँटता है और प्यार माँगता है, ज़लील कर के रख - [कर्ब ए फ़ुर्क़त रूह से जाता नहीं...](https://bazmeshayari.com/karb-e-furqat-ruh-se/): कर्ब ए फ़ुर्क़त रूह से जाता नहीं हल कोई ग़म का नज़र आता नहीं, काश होता इल्म ये - [ये बेड़ियाँ मेरे पाँव में तुम पहना तो रहे हो](https://bazmeshayari.com/ye-bediyan-mere-paanv-me/): ये बेड़ियाँ मेरे पाँव में तुम पहना तो रहे हो फिर अहद भी ख़ुद ही तोड़ के जा - [हालात ए ज़िन्दगी से हुए मज़बूर...](https://bazmeshayari.com/haalaat-e-zindagi-se-hue/): हालात ए ज़िन्दगी से हुए मज़बूर क्या करे ? ज़ख्म ए ज़िगर भी हो गए नासूर क्या करे - [आँखें यूँ बरसीं पैराहन भीग गया...](https://bazmeshayari.com/aankhe-yun-barsi-pairahan/): आँखें यूँ बरसीं पैरहन भीग गया तेरे ध्यान में सारा सावन भीग गया, ख़ुश्क महाज़ो बढ़ के मुझे - [ये तसव्वुर का वार झूठा है...](https://bazmeshayari.com/ye-tasavvur-ka-vaar-jhutha-hai/): ये तसव्वुर का वार झूठा है ख़्वाब झूटे हैं सार झूठा है, फूल तुम तोड़ लाए शाख़ों से - [ये न समझो ये ख्याल है मेरा...](https://bazmeshayari.com/ye-naa-samjho-ye-khyal-hai/): ये न समझो ये ख्याल है मेरा जो सुनाता हूँ वो हाल है मेरा, ऐसा गम हूँ मैं - [सारे मौसम बदल गए शायद...](https://bazmeshayari.com/saare-mausam-badal-gaye/): सारे मौसम बदल गए शायद और हम भी सँभल गए शायद, झील को कर के माहताब सुपुर्द अक्स - [ज़िंदा रहने की ये तरकीब निकाली मैं ने](https://bazmeshayari.com/zinda-rahne-ki-ye-tarqib/): ज़िंदा रहने की ये तरकीब निकाली मैं ने अपने होने की ख़बर सब से छुपा ली मैं ने, - [बहुत कुछ मेहनतों से एक ज़रा...](https://bazmeshayari.com/bahut-kuch-mehnaton-se/): बहुत कुछ मेहनतों से एक ज़रा इज़्ज़त कमाई है अंधेरे झोंपड़े में रौशनी जुगनू से आई है, तसद्दुक़ - [मंज़िल पे न पहुँचे उसे रस्ता नहीं कहते](https://bazmeshayari.com/manzil-pe-naa-pahunche-use/): मंज़िल पे न पहुँचे उसे रस्ता नहीं कहते दो चार क़दम चलने को चलना नहीं कहते, एक हम - [बेकार जब दुआ है दवा क्या करेगी आज](https://bazmeshayari.com/bekar-jab-duaa-hai-dawa-kya/): बेकार जब दुआ है दवा क्या करेगी आज ऐसे में ज़िंदगी भी वफ़ा क्या करेगी आज ? ये - [सामने तू है लम्हा लम्हा मेरे...](https://bazmeshayari.com/saamne-tu-hai-lamha-lamha/): सामने तू है लम्हा लम्हा मेरे और ज़मीं आसमां की दूरी है, कोई मंतक, कोई दलील नहीं तू - [उदास दिल है कि उनकी नज़र नहीं होती](https://bazmeshayari.com/udas-dil-hai-ki-unki-nazar/): उदास दिल है कि उनकी नज़र नहीं होती बग़ैर शम्स के ताब ए क़मर नहीं होती, कुछ ऐसे - [बेवजह कहीं आना जाना क्या](https://bazmeshayari.com/bewajah-kahin-aana-jana-kya/): बेवजह कहीं आना जाना क्या बिन बात के मुस्कुराना क्या हर शख्स दानिशमंद मिलेगा यहाँ किसी को समझाना - [धरती पर जब ख़ूँ बहता है बादल...](https://bazmeshayari.com/dharti-par-jab-khoon-bahta-hai/): धरती पर जब ख़ूँ बहता है बादल रोने लगता है देख के शहरों की वीरानी जंगल रोने लगता - [दिल धड़कता है तो आती हैं सदाएँ तेरी](https://bazmeshayari.com/dil-dhadakta-hai-to-aati-hai/): दिल धड़कता है तो आती हैं सदाएँ तेरी मेरी साँसों में महकने लगीं साँसें तेरी, चाँद ख़ुद महव - [उदासी का ये पत्थर आँसुओं से नम...](https://bazmeshayari.com/udasi-ka-ye-patthar-aansooon/): उदासी का ये पत्थर आँसुओं से नम नहीं होता हज़ारों जुगनुओं से भी अँधेरा कम नहीं होता, कभी - [दो चार क्या हैं सारे ज़माने के बावजूद](https://bazmeshayari.com/do-chaar-kya-hai-saare-zamaane/): दो चार क्या हैं सारे ज़माने के बावजूद हम मिट नहीं सकेंगे मिटाने के बावजूद, ये राज़ काश - [हाल ए दिल सब से छुपाने में...](https://bazmeshayari.com/haal-e-dil-sab-se-chhupane/): हाल ए दिल सब से छुपाने में मज़ा आता है आप पूछें तो बताने में मज़ा आता है, - [बड़ा बेशर्म ज़ालिम है, बड़ी बेहिस...](https://bazmeshayari.com/bada-besharm-zalim-hai/): बड़ा बेशर्म ज़ालिम है, बड़ी बेहिस फ़ितरत है उसको कहाँ पता हया क्या ? क्या शराफ़त है, हमें - [कहीं पड़े न मोहब्बत की मार होली में](https://bazmeshayari.com/kahin-pade-naa-mohabbat-ki/): कहीं पड़े न मोहब्बत की मार होली में अदा से प्रेम करो दिल से प्यार होली में, गले - [अगर आज भी बोली ठोली न होगी](https://bazmeshayari.com/agar-aaj-bhi-boli-tholi-naa/): अगर आज भी बोली ठोली न होगी तो होली ठिकाने की होली न होगी, बड़ी गालियाँ देगा फागुन - [दिल में उठती है मसर्रत की लहर होली में](https://bazmeshayari.com/dil-me-uthti-hai-masarrat-ki/): दिल में उठती है मसर्रत की लहर होली में मस्तियाँ झूमती हैं शाम ओ सहर होली में, सारे - [ये नूर उतरेगा आख़िर ग़ुरूर उतरेगा](https://bazmeshayari.com/ye-noor-utrega-aakhir/): ये नूर उतरेगा आख़िर ग़ुरूर उतरेगा जनाब उतरेगा बंदा हुज़ूर उतरेगा, जो चढ़ गया है वो ऊपर नहीं - [समंदरों में हमारा निशान फैला है](https://bazmeshayari.com/samandaro-me-hamara-nishan/): समंदरों में हमारा निशान फैला है पलट के देख मुए आसमान फैला है, मुक़ाबला है ख़ुराफ़ात का अँधेरों - [तबीब हो के भी दिल की दवा नहीं करते](https://bazmeshayari.com/tabib-ho-ke-bhi-dil-ki/): तबीब हो के भी दिल की दवा नहीं करते हम अपने ज़ख़्मों से कोई दग़ा नहीं करते, परिंदे - [दो चार गाम राह को हमवार देखना](https://bazmeshayari.com/do-chhar-gaam-raah-ko/): दो चार गाम राह को हमवार देखना फिर हर क़दम पे एक नई दीवार देखना, आँखों की रौशनी - [दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ](https://bazmeshayari.com/duniya-ki-riwayat-se-begana/): दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ छेड़ो न मुझे मैं कोई दीवाना नहीं हूँ, इस कसरत ए - [यही हाल रहा साक़ी तेरे मयखानों का](https://bazmeshayari.com/yahi-haal-raha-saaqi-tere/): यही हाल रहा साक़ी तेरे मयखानों का तो ढेर लग जाएगा टूटे हुए पैमानों का, क़हत दुनियाँ में - [अब तरसते हो कि बच्चे मेरे बोले उर्दू](https://bazmeshayari.com/ab-taraste-ho-ki-bachche-mere/): अब तरसते हो कि बच्चे मेरे बोले उर्दू उन्हें अफरंग बनाने की ज़रूरत क्या थी ? आज रोते - [औरों की प्यास और है और उसकी...](https://bazmeshayari.com/auro-ki-pyas-aur-hai-aur/): औरों की प्यास और है और उसकी प्यास और कहता है हर गिलास पे बस एक गिलास और, - [जंग जितनी हो सके दुश्वार होनी चाहिए](https://bazmeshayari.com/jung-jitni-ho-sake-dushwar/): जंग जितनी हो सके दुश्वार होनी चाहिए जीत हासिल हो तो लज़्ज़तदार होनी चाहिए, एक आशिक़ कल सलामत - [अगरचे ज़ोर हवाओं ने डाल रखा है...](https://bazmeshayari.com/agarche-zor-hawaao-ne-daal/): अगरचे ज़ोर हवाओं ने डाल रखा है मगर चराग़ ने लौ को सँभाल रखा है, मोहब्बतों में तो - [वो हँस के देखती होती तो उस से बात...](https://bazmeshayari.com/wo-hans-ke-dekhti-hoti-to/): वो हँस के देखती होती तो उस से बात करते कोई उम्मीद भी होती तो उससे बात करते, - [उड़ते हैं गिरते हैं फिर से उड़ते हैं](https://bazmeshayari.com/udte-hai-girte-hai-fir-se/): उड़ते हैं गिरते हैं फिर से उड़ते हैं उड़ने वाले उड़ते उड़ते उड़ते हैं, कोई उस बूढे पीपल - [तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है](https://bazmeshayari.com/titli-se-dosti-na-gulabo-ka/): तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है, वर्ना तो - [तारीफ़ उस ख़ुदा की जिसने जहाँ बनाया](https://bazmeshayari.com/tarif-us-khuda-ki-jisne/): तारीफ़ उस ख़ुदा की जिसने जहाँ बनाया कैसी हसीं ज़मीं बनाई क्या आसमां बनाया, मिट्टी से बेल बूटे - [जी भर कर रोने को करता है दिल...](https://bazmeshayari.com/jee-bhar-kar-rone-ko-karta-hai/): जी भर कर रोने को करता है दिल आज पलकें भिगोने को करता है दिल, नहीं मालूम कुछ - [इलाज़ ए शीशा ए दिल करूँ मिले...](https://bazmeshayari.com/ilaz-e-shisha-e-dil-karoon/): इलाज़ ए शीशा ए दिल करूँ मिले जो शीशा गर कोई कोई मिला नहीं इधर, मिलेगा क्या उधर - [जब इक्कीस बरस गुज़रे आज़ादी...](https://bazmeshayari.com/jab-ikkis-baras-guzre/): जब इक्कीस बरस गुज़रे आज़ादी ए कामिल को तब जा के कहीं हमको ‘ग़ालिब’ का ख़याल आया, तुर्बत - [वो इंसाँ जो शिकार ए गर्दिश ए अय्याम...](https://bazmeshayari.com/wo-insaan-jo-shikar/): वो इंसाँ जो शिकार ए गर्दिश ए अय्याम होता है भला करता है दुनिया का मगर बदनाम होता - [सूरमाओं को सर ए आम से डर लगता है](https://bazmeshayari.com/soormaaon-ko-sar-e-aam-se/): सूरमाओं को सर ए आम से डर लगता है अब इंक़लाब को अवाम से डर लगता है, हमीं - [ज़िक्र उस परीवश का और फिर...](https://bazmeshayari.com/ziqr-us-pariwash-ka-aur/): ज़िक्र उस परीवश का और फिर बयां अपना बन गया रकीब आख़िर था जो राज़दां अपना, मय वो - [दर्द मिन्नत कश ए दवा न हुआ...](https://bazmeshayari.com/dard-minnat-kash-e-dawa/): दर्द मिन्नत कश ए दवा न हुआ मैं न अच्छा हुआ, बुरा न हुआ, जमा करते हो क्यूँ - [यहाँ किसी को आवाज़ कहाँ उठाने...](https://bazmeshayari.com/yahan-kisi-ko-aawaz/): यहाँ किसी को आवाज़ कहाँ उठाने देता है कोई ज़रा सी आवाज़ करो तो गला दबा देता है - [तेरी हर बात चल कर भी यूँ मेरे जी से आती है](https://bazmeshayari.com/teri-har-baat-chal/): तेरी हर बात चल कर भी यूँ मेरे जी से आती है कि जैसे याद की ख़ुशबू किसी - [समझे वही इसको जो हो दीवाना...](https://bazmeshayari.com/samjhe-wahi-isko-jo/): समझे वही इसको जो हो दीवाना किसी का अकबर ये ग़ज़ल मेरी है अफ़साना किसी का, गर शैख़ - [कहाँ ले जाऊँ दिल दोनों जहाँ में...](https://bazmeshayari.com/kahan-le-jaaoon-dil/): कहाँ ले जाऊँ दिल दोनों जहाँ में इसकी मुश्क़िल है यहाँ परियों का मजमा है, वहाँ हूरों की - [ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को...](https://bazmeshayari.com/gazalon-ka-hunar-apni/): ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को सिखाएँगे रोएँगे बहुत लेकिन आँसू नहीं आएँगे, कह देना समुंदर से हम - [ये जो हासिल हमें हर शय की फ़रावानी है](https://bazmeshayari.com/ye-jo-hasil-hame/): ये जो हासिल हमें हर शय की फ़रावानी है ये भी तो अपनी जगह एक परेशानी है, ज़िंदगी - [बुझ गई आँख तेरा इंतज़ार करते करते](https://bazmeshayari.com/bujh-gayi-aankh-tera-intazar/): बुझ गई आँख तेरा इंतज़ार करते करते टूट गए हम एक तरफ़ा प्यार करते करते, क़यामत है इज़हार - [ये और बात है तुझ से गिला नहीं करते](https://bazmeshayari.com/ye-aur-baat-hai/): ये और बात है तुझ से गिला नहीं करते जो ज़ख़्म तू ने दिए हैं भरा नहीं करते, - [थे ख़्वाब एक हमारे भी और तुम्हारे भी](https://bazmeshayari.com/the-khwab-ek-hamare/): थे ख़्वाब एक हमारे भी और तुम्हारे भी पर अपना खेल दिखाते रहे सितारे भी, ये ज़िंदगी है - [तेरा ये लुत्फ़ किसी ज़ख़्म का उन्वान न हो](https://bazmeshayari.com/tera-ye-lutf-kisi/): तेरा ये लुत्फ़ किसी ज़ख़्म का उन्वान न हो ये जो साहिल सा नज़र आता है तूफ़ान न - [वो ग़ज़ल वालों का उस्लूब समझते होंगे...](https://bazmeshayari.com/wo-gazal-walo-ka-usloob/): वो ग़ज़ल वालों का उस्लूब समझते होंगे चाँद कहते हैं किसे ख़ूब समझते होंगे, इतनी मिलती है मेरी - [जहाँ पेड़ पर चार दाने लगे...](https://bazmeshayari.com/jahan-ped-par-chaar-daane/): जहाँ पेड़ पर चार दाने लगे हज़ारों तरफ़ से निशाने लगे, हुई शाम यादों के एक गाँव में - [है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र...](https://bazmeshayari.com/hai-azib-shahar-ki/): है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है कहीं कारोबार सी दोपहर कहीं बदमिज़ाज सी - [वहशतें बिखरी पड़ी है जिस तरफ़ भी...](https://bazmeshayari.com/wahshate-bikhri-padi-hai/): वहशतें बिखरी पड़ी है जिस तरफ़ भी जाऊँ मैं घूम फिर आया हूँ अपना शहर तेरा गाँव मैं, - [क्या शर्त ए मुहब्बत है, क्या शर्त...](https://bazmeshayari.com/kya-shart-e-muhabbat/): क्या शर्त ए मुहब्बत है, क्या शर्त ए ज़माना है ! आवाज़ भी ज़ख़्मी है मगर गीत भी - [काँटो का एक मकान मेरे पास रह गया](https://bazmeshayari.com/kaanto-ka-ek-maqan/): काँटो का एक मकान मेरे पास रह गया एक फूल सा निशान मेरे पास रह गया, सामान तू - [मुश्किल दिन भी आए लेकिन फ़र्क़....](https://bazmeshayari.com/mushkil-din-bhi-aaye/): मुश्किल दिन भी आए लेकिन फ़र्क़ न आया यारी में हम ने पूरी जान लगाई उस की ताबेदारी - [दश्त की धूप है जंगल की घनी रातें हैं](https://bazmeshayari.com/dasht-ki-dhoop-hai/): दश्त की धूप है जंगल की घनी रातें हैं इस कहानी में बहर हाल कई बातें हैं, गो - [दूर होते हुए क़दमों की ख़बर जाती है](https://bazmeshayari.com/door-hote-hue-qadmo-ki/): दूर होते हुए क़दमों की ख़बर जाती है ख़ुश्क पत्ते को लिए गर्द ए सफ़र जाती है, पास - [उसे बेचैन कर जाऊँगा मैं भी...](https://bazmeshayari.com/use-bechain-kar-jaaoounga/): उसे बेचैन कर जाऊँगा मैं भी ख़मोशी से गुज़र जाऊँगा मैं भी, मुझे छूने की ख़्वाहिश कौन करता - [महफ़िलें लुट गईं जज़्बात ने दम...](https://bazmeshayari.com/mahfile-loot-gai-jazbat/): महफ़िलें लुट गईं जज़्बात ने दम तोड़ दिया साज़ ख़ामोश हैं नग़्मात ने दम तोड़ दिया, हर मसर्रत - [चेहरे पे सारे शहर के गर्द ए मलाल है...](https://bazmeshayari.com/chehre-pe-saare-shahar-ke/): चेहरे पे सारे शहर के गर्द ए मलाल है जो दिल का हाल है वही दिल्ली का हाल - [जो वफ़ा का रिवाज रखते हैं...](https://bazmeshayari.com/jo-wafa-ka-riwaz-rakhte-hai/): जो वफ़ा का रिवाज रखते हैं साफ़ सुथरा समाज रखते हैं, क़ाबिल ए रहम हैं वो इंसाँ जो - [इलाज ए ज़ख़्म ए दिल होता है...](https://bazmeshayari.com/ilaz-e-zakhme-dil/): इलाज ए ज़ख़्म ए दिल होता है ग़मख़्वारी भी होती है मगर मक़्तल की मेरे ख़ूँ से गुलकारी - [ख़्वाब का रिश्ता हक़ीक़त से न जोड़ा जाए](https://bazmeshayari.com/khwab-ka-rishta-haqiqat/): ख़्वाब का रिश्ता हक़ीक़त से न जोड़ा जाए आईना है इसे पत्थर से न तोड़ा जाए, अब भी - [दुनियाँ में शातिर नहीं अब शरीफ़...](https://bazmeshayari.com/duniyan-me-shatir-nahi/): दुनियाँ में शातिर नहीं अब शरीफ़ लटकते है अब सच्चो की बात छोड़ो वो तो सर पटकते है, - [रंग ए नफ़रत तेरे दिल से उतरता है...](https://bazmeshayari.com/rang-e-nafrat-tere/): रंग ए नफ़रत तेरे दिल से उतरता है कभी ? एक रवैया है मुरव्वत, उसे बरता है कभी - [यहाँ मरने की दुआएँ क्यूँ मांगूँ ?](https://bazmeshayari.com/yahan-marne-ki-duaayen/): यहाँ मरने की दुआएँ क्यूँ मांगूँ ? यहाँ जीने की तमन्ना कौन करे ? ये दुनियाँ हो या - [मैं जब भी कोई अछूता कलाम लिखता हूँ](https://bazmeshayari.com/main-jab-bhi-koi-achhuta/): मैं जब भी कोई अछूता कलाम लिखता हूँ तो पहले एक गज़ल तेरे नाम लिखता हूँ, बदन की - [काम उसके सारे ही सय्याद वाले है...](https://bazmeshayari.com/kaam-uske-saare-hi/): काम उसके सारे ही सय्याद वाले है मगर मैं उसे बहेलिया नहीं लिखता सर्दियाँ जितनी हो सब सह - [हमसे तो किसी काम की बुनियाद न होवे](https://bazmeshayari.com/hamse-to-kisi-kaam-ki/): हम से तो किसी काम की बुनियाद न होवे जब तक कि उधर ही से कुछ इमदाद न - [हम न निकहत हैं न गुल हैं जो महकते...](https://bazmeshayari.com/ham-nikhat-hai-na-gul/): हम न निकहत हैं न गुल हैं जो महकते जावें आग की तरह जिधर जावें दहकते जावें, ऐ - [अपने घर की चारदीवारी में अब...](https://bazmeshayari.com/apne-ghar-ki-chaardeewari/): अपने घर की चारदीवारी में अब लिहाफ़ में भी सिहरन होती है जिस दिन से किसी को गुर्बत - [ज़िस्म क्या है ? रूह तक सब कुछ....](https://bazmeshayari.com/zism-kya-hai-ruh-tak/): ज़िस्म क्या है ? रूह तक सब कुछ ख़ुलासा देखिए आप भी इस भीड़ में घुस कर तमाशा - [कुछ ग़म ए जानाँ कुछ ग़म ए दौराँ](https://bazmeshayari.com/kuch-gam-e-jaanaan/): कुछ ग़म ए जानाँ कुछ ग़म ए दौराँ दोनों मेरी ज़ात के नाम एक ग़ज़ल मंसूब है उससे - [अँधेरा सफ़र है ख़बरदार रहना...](https://bazmeshayari.com/andhera-safar-hai-khabardar/): अँधेरा सफ़र है ख़बरदार रहना लुटेरा शहर है ख़बरदार रहना, गला काटतें है बड़ी सादगी से ये इनका - [जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये...](https://bazmeshayari.com/jo-dalhauji-na-kar/): जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगे कमीशन दो तो हिंदुस्तान को नीलाम कर देंगे, - [यूँ बे दर्द बन कर ना रहा कीजिए...](https://bazmeshayari.com/yun-bedard-ban-kar/): यूँ बेदर्द बन कर ना रहा कीजिए मेरे मर्ज़ की भी तो कोई दवा कीजिए, आप मुहब्बत लिए - [घर में ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है](https://bazmeshayari.com/ghar-me-thande-chulhe/): घर में ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है बताओ कैसे लिख दूँ धूप फागुन की नशीली है - [वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं...](https://bazmeshayari.com/wo-shakhs-ki-main-jis-se/): वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं करता हँसता है मुझे देख के नफ़रत नहीं करता, पकड़ा - [वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो...](https://bazmeshayari.com/wo-dil-hi-kya-tere-milne-ki/): वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे मैं तुझ को भूल के ज़िंदा रहूँ - [उसे मना कर ग़ुरूर उस का बढ़ा न देना](https://bazmeshayari.com/use-mana-kar-gurur-us-ka/): उसे मना कर ग़ुरूर उस का बढ़ा न देना वो सामने आए भी तो उस को सदा न - [नेक लोगो में मुझे नेक गिना जाता है](https://bazmeshayari.com/nek-logo-me-mujhe-nek/): नेक लोगो में मुझे नेक गिना जाता है गुनाहगार गुनाहगार समझते है मुझे मैं तो ख़ुद बाज़ार में - [दिल सोज़ से खाली है, निगह पाक नहीं है](https://bazmeshayari.com/dil-soz-se-khaali-hai/): दिल सोज़ से खाली है, निगह पाक नहीं है फिर इसमें अजब क्या कि तू बेबाक नहीं है, - [अफ़लाक से आता है नालों का जवाब...](https://bazmeshayari.com/aflaq-se-aata-hai-naalo-ka/): अफ़लाक से आता है नालों का जवाब आख़िर करते हैं ख़िताब आख़िर उठते हैं हिजाब आख़िर, अहवाल ए - [अब भला छोड़ के घर क्या करते...](https://bazmeshayari.com/ab-bhala-chhod-ke-ghar/): अब भला छोड़ के घर क्या करते शाम के वक़्त सफ़र क्या करते, तेरी मसरूफ़ियतें जानते हैं अपने - [तू ने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद](https://bazmeshayari.com/tune-dekha-hai-kabhi/): तूने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद कितने चुपचाप से लगते हैं शजर शाम के बाद, - [हादसों की ज़द पे हैं तो मुस्कुराना छोड़ दें](https://bazmeshayari.com/haadso-ki-zad-pe-hai-to/): हादसों की ज़द पे हैं तो मुस्कुराना छोड़ दें ज़लज़लों के ख़ौफ़ से क्या घर बनाना छोड़ दें - [अनोखी वज़अ है सारे ज़माने से निराले हैं](https://bazmeshayari.com/anokhi-vazaa-hai-saare-zamane-se/): अनोखी वज़अ है सारे ज़माने से निराले हैं ये आशिक कौन सी बस्ती के या रब ! रहने - [अजब वायज़ की दींदारी है या रब !](https://bazmeshayari.com/azab-wayaz-ki-deedari-hai/): अजब वायज़ की दींदारी है या रब ! अदावत है इसे सारे जहाँ से, कोईअब तक न यह - [दरोग़ के इम्तिहाँ कदे में सदा यही...](https://bazmeshayari.com/darog-ke-imtihan-kade-me/): दरोग़ के इम्तिहाँ कदे में सदा यही कारोबार होगा जो बढ़ के ताईद ए हक़ करेगा वही सज़ावार - [मिलना न मिलना एक बहाना है और बस](https://bazmeshayari.com/milna-na-milna-ek-bahana-hai/): मिलना न मिलना एक बहाना है और बस तुम सच हो बाक़ी जो है फ़साना है और बस, - [सुख़न वरी का बहाना बनाता रहता हूँ](https://bazmeshayari.com/sukhan-vari-ka-bahana/): सुख़न वरी का बहाना बनाता रहता हूँ तेरा फ़साना तुझी को सुनाता रहता हूँ, मैं अपने आप से - [मसरूफ़ियत उसी की है फ़ुर्सत उसी...](https://bazmeshayari.com/masrufiyat-usi-ki-hai/): मसरूफ़ियत उसी की है फ़ुर्सत उसी की है इस सरज़मीन ए दिल पे हुकूमत उसी की है, मिलता - [जिस सर को ग़ुरूर आज है याँ ताजवरी...](https://bazmeshayari.com/jis-sar-ko-gurur-aaj-hai/): जिस सर को ग़ुरूर आज है याँ ताजवरी का कल उस पे यहीं शोर है फिर नौहागरी का, - [पी ली तो कुछ पता न चला वो सुरूर था](https://bazmeshayari.com/pee-li-to-kuchh-pata-na-chala/): पी ली तो कुछ पता न चला वो सुरूर था वो उस का साया था कि वही रश्क - [ये है तो सब के लिए हो ये ज़िद्द हमारी है](https://bazmeshayari.com/ye-hai-to-sab-ke-liye-ho/): ये है तो सब के लिए हो ये ज़िद्द हमारी है इस एक बात पे दुनिया से जंग - [अज़ब कर्ब में गुज़री, जहाँ जहाँ गुज़री](https://bazmeshayari.com/azab-karb-me-guzari-jahan-jahan/): अज़ब कर्ब में गुज़री, जहाँ जहाँ गुज़री अगरचे चाहने वालों के दरम्याँ गुज़री, तमाम उम्र चराग ए उम्मीद - [खंज़र से करो बात न तलवार से पूछो](https://bazmeshayari.com/khanzar-se-karo-baat-na/): खंज़र से करो बात न तलवार से पूछो मैं क़त्ल हुआ कैसे मेरे यार से पूछो, फर्ज़ अपना - [नाम लिखते है तेरा और मिटा देते है...](https://bazmeshayari.com/naam-likhte-hai-tera-aur/): नाम लिखते है तेरा और मिटा देते है यूँ इस दिल को मुहब्बत की सज़ा देते है, उम्र - [ज़ख़्म का मरहम दर्द का अपने दरमाँ...](https://bazmeshayari.com/zakhm-ka-marham-dard-ka/): ज़ख़्म का मरहम दर्द का अपने दरमाँ बेच के आए हैं हम लम्हों का सौदा कर के सदियाँ - [मुस्तक़िल महरूमियों पर भी तो दिल...](https://bazmeshayari.com/mustakil-mahrumiyon-par-bhi/): मुस्तक़िल महरूमियों पर भी तो दिल माना नहीं लाख समझाया कि इस महफ़िल में अब जाना नहीं, ख़ुद - [क्या ऐसे कम सुख़न से कोई गुफ़्तुगू करे](https://bazmeshayari.com/kya-aise-kam-sukhan-se/): क्या ऐसे कम सुख़न से कोई गुफ़्तुगू करे जो मुस्तक़िल सुकूत से दिल को लहू करे, अब तो - [धरती पर जब ख़ूँ बहता है बादल रोने...](https://bazmeshayari.com/dharti-par-jab-khoon/): धरती पर जब ख़ूँ बहता है बादल रोने लगता है देख के शहरों की वीरानी जंगल रोने लगता - [नशात ए ग़म भी मिला रंज ए शाद मानी](https://bazmeshayari.com/nashaat-e-gam-bhi-mila/): नशात ए ग़म भी मिला रंज ए शाद मानी भी मगर वो लम्हे बहुत मुख़्तसर थे फ़ानी भी, - [मशअल ए दर्द फिर एक बार जला ली](https://bazmeshayari.com/mashal-e-dard-fir-ek-baar/): मशअल ए दर्द फिर एक बार जला ली जाए जश्न हो जाए ज़रा धूम मचा ली जाए, ख़ून - [नहीं रोक सकोगे जिस्म की इन परवाजों](https://bazmeshayari.com/nahi-rok-sakogezism-ki/): नहीं रोक सकोगे जिस्म की इन परवाजों को बड़ी भूल हुई जो छेड़ दिया कई साज़ों को, कोई - [छोटी छोटी बातों पर परिवार बदलते देखे](https://bazmeshayari.com/chhoti-chhoti-baaton-par/): छोटी छोटी बातों पर परिवार बदलते देखे वक़्त ए ज़रूरत सब यार बदलते देखे, अब तो यकीन उठ - [वही फिर मुझे याद आने लगे हैं...](https://bazmeshayari.com/wahi-fir-mujhe-yaad-aane/): वही फिर मुझे याद आने लगे हैं जिन्हें भूलने में ज़माने लगे हैं, वो हैं पास और याद - [हादसों का शहर है संभल जाइए](https://bazmeshayari.com/haadso-ka-shahar-hai/): हादसों का शहर है संभल जाइए कौन कब किस डगर है संभल जाइए, नेक रस्ते पे चलते हुए - [क्यूँ ज़मीं है आज प्यासी इस तरह ?](https://bazmeshayari.com/kyun-zamin-hai-aaj-pyasi/): क्यूँ ज़मीं है आज प्यासी इस तरह ? हो रही नदियाँ सियासी इस तरह, जान की परवाह किसे - [लगा जब अक्स ए अबरू देखने दिलदार...](https://bazmeshayari.com/laga-jab-aks-e-abroo-dekhne/): लगा जब अक्स ए अबरू देखने दिलदार पानी में बहम हर मौज से चलने लगी तलवार पानी में, - [मेरे ख़ुदा मुझे वो ताब ए नय नवाई दे](https://bazmeshayari.com/mere-khuda-mujhe-wo/): मेरे ख़ुदा मुझे वो ताब ए नय नवाई दे मैं चुप रहूँ भी तो नग़्मा मेरा सुनाई दे, - [किस के नाम लिखूँ जो अलम गुज़र रहे हैं](https://bazmeshayari.com/kis-ke-naam-likhoon-jo-alam/): किस के नाम लिखूँ जो अलम गुज़र रहे हैं मेरे शहर जल रहे हैं मेरे लोग मर रहे - [मैं कैसे जियूँ गर ये दुनिया हर आन...](https://bazmeshayari.com/main-kaise-jiyoon-gar-ye-duniya/): मैं कैसे जियूँ गर ये दुनिया हर आन नई तस्वीर न हो ये आते जाते रंग न हों - [परिंदों के चोंच भर लेने से...](https://bazmeshayari.com/parindo-ke-chonch-bhar-lene-se/): परिंदों के चोंच भर लेने से कभी सागर सूखा नहीं करते, हवाओं के रुख सूखे पत्तो से अपना - [क़िस्मत का लिखा मिटा नहीं सकते...](https://bazmeshayari.com/qismat-ka-likha-mita-nahi/): क़िस्मत का लिखा मिटा नहीं सकते अनहोनी को होनी बना नहीं सकते, ज़माने में हस्ब ए आरज़ू किसी - [वही आँगन वही खिड़की वही दर...](https://bazmeshayari.com/wahi-aangan-wahi-khidki/): वही आँगन वही खिड़की वही दर याद आता है अकेला जब भी होता हूँ मुझे घर याद आता - [वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम ए ज़र...](https://bazmeshayari.com/vatan-ko-kuchh-nahi-khatra/): वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम ए ज़र है ख़तरे में हक़ीक़त में जो रहज़न है वही रहबर - [न ज़रूरत है दवा की न दुआ की दोस्तों !](https://bazmeshayari.com/naa-zarurat-hai-dawa-ki/): न ज़रूरत है दवा की न दुआ की दोस्तों ! दिल की गहराई से ज्यादा दर्द के फोड़े - [दौर ए ज़दीद में गुनाह ओ सवाब बिकते है](https://bazmeshayari.com/daur-e-zadid-me-gunaah/): दौर ए ज़दीद में गुनाह ओ सवाब बिकते है वतन में अब जुबां, क़लम ज़नाब बिकते है, पहले - [ये और बात दूर रहे मंज़िलों से हम](https://bazmeshayari.com/ye-aur-baat-door-rahe/): ये और बात दूर रहे मंज़िलों से हम बच कर चले हमेशा मगर क़ाफ़िलों से हम, होने को - [ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं](https://bazmeshayari.com/ye-sochna-galat-hai-ki/): ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बेख़बर नहीं, अब तो - [आ जाए वो मिलने तो मुझे ईद मुबारक](https://bazmeshayari.com/aa-jaaye-wo-milne-to-mujhe/): आ जाए वो मिलने तो मुझे ईद मुबारक मत आए ब हर हाल उसे ईद मुबारक, ऐसा हो - [एक तारीख़ मुक़र्रर पे तो हर माह मिले](https://bazmeshayari.com/ek-tarikh-muqarrar-pe-to/): एक तारीख़ मुक़र्रर पे तो हर माह मिले जैसे दफ़्तर में किसी शख़्स को तनख़्वाह मिले, रंग उखड़ - [हर एक हज़ार में बस पाँच सात हैं...](https://bazmeshayari.com/har-ek-hazaar-me-bas/): हर एक हज़ार में बस पाँच सात हैं हम लोग निसाब ए इश्क़ पे वाजिब ज़कात हैं हम - [खेल दोनों का चले तीन का दाना न पड़े](https://bazmeshayari.com/khel-dono-ka-chale-teen-ka/): खेल दोनों का चले तीन का दाना न पड़े सीढ़ियाँ आती रहें साँप का ख़ाना न पड़े, देख - [तू काश मिले मुझको अकेली तो बताऊँ](https://bazmeshayari.com/tu-kaash-mile-mujhko/): तू काश मिले मुझको अकेली तो बताऊँ सुलझे मेरी क़िस्मत की पहेली तो बताऊँ, आने से तेरे पहले - [रास्ते की धूल ने पैरों को ज़ख़्मी कर दिया](https://bazmeshayari.com/raaste-ki-dhool-ne-pairon-ko/): रास्ते की धूल ने पैरों को ज़ख़्मी कर दिया बहर से माही अलग करना मुझे आता नहीं, बैठ - [ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के साए में ज़िंदगी गुज़ारी है](https://bazmeshayari.com/zulf-o-rukh-ke-saaye-me/): ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के साए में ज़िंदगी गुज़ारी है धूप भी हमारी है छाँव भी हमारी है, ग़मगुसार - [और सब भूल गए हर्फ़ ए सदाक़त लिखना](https://bazmeshayari.com/aur-sab-bhool-gaye/): और सब भूल गए हर्फ़ ए सदाक़त लिखना रह गया काम हमारा ही बग़ावत लिखना, लाख कहते रहें - [अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं](https://bazmeshayari.com/apno-ne-wo-ranz-diye-hai/): अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं देख के उस बस्ती की हालत वीराने याद - [अफ़सोस तुम्हें कार के शीशे का हुआ है](https://bazmeshayari.com/afsos-tumhe-kaar-ke-shishe-ka/): अफ़सोस तुम्हें कार के शीशे का हुआ है परवाह नहीं एक माँ का जो दिल टूट गया है, - [आग है फैली हुई काली घटाओं की जगह](https://bazmeshayari.com/aag-hai-faili-hui-kaali/): आग है फैली हुई काली घटाओं की जगह बद दुआएँ हैं लबों पर अब दुआओं की जगह, इंतिख़ाब - [ये किस रश्क ए मसीहा का मकाँ है](https://bazmeshayari.com/ye-kis-rashq-e-masiha-ka/): ये किस रश्क ए मसीहा का मकाँ है ज़मीं याँ की चहारुम आसमाँ है, ख़ुदा पिन्हाँ है आलम - [वतन नसीब कहाँ अपनी क़िस्मतें होंगी](https://bazmeshayari.com/vatan-nasib-kahan-apni/): वतन नसीब कहाँ अपनी क़िस्मतें होंगी जहाँ भी जाएँगे हम साथ हिजरतें होंगी, कभी तो साहिब ए दीवार - [दिल में रखता है न पलकों पे बिठाता...](https://bazmeshayari.com/dil-me-rakhta-hai-na/): दिल में रखता है न पलकों पे बिठाता है मुझे फिर भी एक शख्स में क्या क्या नज़र - [हिज़्र के मौसम में ये बारिश का बरसना...](https://bazmeshayari.com/hizr-ke-mausam-me-ye-barish/): हिज़्र के मौसम में ये बारिश का बरसना कैसा ? एक सहरा में समन्दर का गुज़रना कैसा ? - [ज़ुल्फ़, अँगड़ाई, तबस्सुम, चाँद, आईना...](https://bazmeshayari.com/zulf-angdaai-tabassum-chaand/): ज़ुल्फ़, अँगड़ाई, तबस्सुम, चाँद, आईना, गुलाब भुखमरी के मोर्चे पर ढल गया इन सब का शबाब, पेट के - [तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है](https://bazmeshayari.com/teer-par-teer-lagaao/): तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है सीना किस का है मेरी जान जिगर किस का - [न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के...](https://bazmeshayari.com/naa-mahalon-ki-bulandi-se-2/): न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से तमद्दुन में निखार आता है घीसू के पसीने - [चाँद है ज़ेर ए क़दम सूरज खिलौना...](https://bazmeshayari.com/chaand-hai-zer-e-nazar/): चाँद है ज़ेर ए क़दम सूरज खिलौना हो गया हाँ, मगर इस दौर में क़िरदार बौना हो गया, - [क्यूँ पत्थर को दिल में बसाए बैठे हो ?](https://bazmeshayari.com/kyun-patthar-ko-dil-me/): क्यूँ पत्थर को दिल में बसाए बैठे हो ? वो अपना था ही नहीं जिसे अपना बनाए बैठे - [धड़कन धड़कन यादों की बारात...](https://bazmeshayari.com/dhadkan-dhadkan-yaadon-ki/): धड़कन धड़कन यादों की बारात अकेला कमरा मैं और मेरे ज़ख़्मी एहसासात अकेला कमरा, गए दिनों की तस्वीरों - [आज सीलिंग फैन से लटकी हुई है](https://bazmeshayari.com/aaj-sealing-fain-se-latki-hui-hai/): आज सीलिंग फैन से लटकी हुई है ये मुहब्बत किस कदर भटकी हुई है, गैरो के कंधो पर - [ढूँढ़ते क्या हो इन आँखों में कहानी मेरी](https://bazmeshayari.com/dhoondhte-kya-ho-in-aankhon-me/): ढूँढ़ते क्या हो इन आँखों में कहानी मेरी ख़ुद में गुम रहना तो आदत है पुरानी मेरी, भीड़ - [भूख के एहसास को शेर ओ सुख़न...](https://bazmeshayari.com/bhookh-ke-ehsas-ko/): भूख के एहसास को शेर ओ सुख़न तक ले चलो या अदब को मुफ़लिसों की अंजुमन तक ले - [आप कहते हैं सरापा गुलमुहर है जिंदगी](https://bazmeshayari.com/aap-kahte-hai-saraapa/): आप कहते हैं सरापा गुलमुहर है जिंदगी हम ग़रीबों की नज़र में क़हर है जिंदगी, भुखमरी की धूप - [हर शख्स को अल्लाह की रहमत नहीं...](https://bazmeshayari.com/har-shakhs-ko-allah-ki/): हर शख्स को अल्लाह की रहमत नहीं मिलती हाँ रिज्क तो मिल जाता है बरक़त नहीं मिलती, किस - [वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई...](https://bazmeshayari.com/wo-jiske-haath-me-chhale-hai/): वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई है उसी के दम से रौनक आपके बंगले में - [न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के...](https://bazmeshayari.com/naa-mahalon-ki-bulandi-se/): न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से तमद्दुन में निखार आता है घीसू के पसीने - [बज़ाहिर प्यार की दुनियाँ में जो नाकाम...](https://bazmeshayari.com/bazaahir-pyar-ki-duniyan-me/): बज़ाहिर प्यार की दुनियाँ में जो नाकाम होता है कोई रूसो कोई हिटलर कोई खय्याम होता है, ज़हर - [मुझे हयात के साँचों में ढालने वाले...](https://bazmeshayari.com/mujhe-hayat-ke-saancho-me/): मुझे हयात के साँचों में ढालने वाले कहाँ गए वो समुंदर खंगालने वाले, लुढ़क रहा हूँ ढलानों से - [सितमगरों के सितम की उड़ान कुछ...](https://bazmeshayari.com/sitamgaro-ke-sitam-ki-udaan/): सितमगरों के सितम की उड़ान कुछ कम है अभी ज़मीं के लिए आसमान कुछ कम है, जो इस - [कोई बचने का नहीं सब का पता जानती है](https://bazmeshayari.com/koi-bachne-ka-nahi-sab-ka/): कोई बचने का नहीं सब का पता जानती है किस तरफ़ आग लगाना है हवा जानती है, उजले - [हिंदू या मुस्लिम के अहसासात को मत...](https://bazmeshayari.com/hindu-ya-muslim-ke-ahsas/): हिंदू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िए अपनी कुर्सी के लिए जज़्बात को मत छेड़िए, हम में - [नूर ए नज़र, चाँद, और आफ़ताब है बच्चे](https://bazmeshayari.com/noor-e-nazar-chaand-aur/): नूर ए नज़र, चाँद, और आफ़ताब है बच्चे रौशन चेहरे लिए खुली क़िताब है बच्चे, स्कूल की यूनिफार्म - [ज़ुल्म के तल्ख़ अंधेरो के तलबगार हो तुम](https://bazmeshayari.com/zulm-ke-talkh-andhero-ke/): ज़ुल्म के तल्ख़ अंधेरो के तलबगार हो तुम ये इल्म है कि नफ़रत के मददगार हो तुम, जिसके - [मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ...](https://bazmeshayari.com/main-jise-odhta-bichhata-hoon/): मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ, एक जंगल है तेरी आंखों में मैं जहाँ - [कुछ देर का है रोना, कुछ देर की हँसी है](https://bazmeshayari.com/kuch-der-ka-hai-rona-kuch/): कुछ देर का है रोना, कुछ देर की हँसी है कहीं ठहरती नहीं इसी का नाम ज़िन्दगी है, - [पा सके न सुकूं जो जीते जी वो मर के...](https://bazmeshayari.com/paa-saken-n-sukun-jo/): पा सके न सुकूं जो जीते जी वो मर के कहाँ पाएँगे शहर के बेचैन परिंदे फिर लौट - [नहीं होती अगर बारिश तो पत्थर हो...](https://bazmeshayari.com/nahi-hoti-agar-barish-to/): नहीं होती अगर बारिश तो पत्थर हो गए होते ये सारे लहलहाते खेत बंज़र हो गए होते, तेरे - [सहर ने अंधी गली की तरफ़ नहीं देखा](https://bazmeshayari.com/sahar-ne-andhi-gali-ki-taraf/): सहर ने अंधी गली की तरफ़ नहीं देखा जिसे तलब थी उसी की तरफ़ नहीं देखा, क़लक़ था - [ये जो पल है ये पिछले पल से भी भारी है](https://bazmeshayari.com/ye-jo-pal-hai-ye-pichle-pal-se/): ये जो पल है ये पिछले पल से भी भारी है हमसे पूछो हमने ज़िन्दगी कैसे गुज़ारी है, - [हमारे दिल पे जो ज़ख़्मों का बाब लिखा है](https://bazmeshayari.com/hamare-dil-pe-jo-zakhmo-ka/): हमारे दिल पे जो ज़ख़्मों का बाब लिखा है इसी में वक़्त का सारा हिसाब लिखा है, कुछ - [एक मकाँ और बुलंदी पे बनाने न दिया](https://bazmeshayari.com/ek-maqaan-aur-bulandi-pe/): एक मकाँ और बुलंदी पे बनाने न दिया हमको परवाज़ का मौक़ा ही हवा ने न दिया, तू - [आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई](https://bazmeshayari.com/aankhe-bhar-aai-kisi-se-jo/): आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई, दिन भी - [मैंने ऐ दिल तुझे सीने से लगाया हुआ है](https://bazmeshayari.com/maine-ae-dil-tujhe-sine-se/): मैंने ऐ दिल तुझे सीने से लगाया हुआ है और तू है कि मेरी जान को आया हुआ - [शाम अपनी बेमज़ा जाती है रोज़...](https://bazmeshayari.com/shaam-apni-bemaza-jaati-hai/): शाम अपनी बेमज़ा जाती है रोज़ और सितम ये है कि आ जाती है रोज़, कोई दिन आसाँ - [सुनी है चाप बहुत वक़्त के गुज़रने की](https://bazmeshayari.com/suni-hai-chaap-bahut-waqt-ke/): सुनी है चाप बहुत वक़्त के गुज़रने की मगर ये ज़ख़्म कि हसरत है जिसके भरने की, हमारे - [अकेले रहने की सजा कबूल कर गलती...](https://bazmeshayari.com/akele-rahne-ki-saza-qubul/): अकेले रहने की सजा कबूल कर गलती तुमने की है मुझ पर यूँ ऐतबार न करने में भी - [ख़्वाब दिखाने वाले से होशियार रहो](https://bazmeshayari.com/khwab-dikhane-wale-se/): ख़्वाब दिखाने वाले से होशियार रहो जादूगर की चालो से होशियार रहो, गाफ़िल ज़रा हुए तो सर कट - [मुझको अपने बैंक की क़िताब दीजिए](https://bazmeshayari.com/mujhe-apne-bank-ki-kitab/): मुझको अपने बैंक की क़िताब दीजिए देश की तबाही का हिसाब दीजिए, गाँव गाँव ज़ख़्मी फिजाएँ हो गई - [जिसे हो ख्वाहिश ए दुनियाँ उसे...](https://bazmeshayari.com/jise-ho-khwahish-e-duniyan/): जिसे हो ख्वाहिश ए दुनियाँ उसे संसार मिल जाए मुझे तो फक़त तुम और तुम्हारा प्यार मिल जाए, - [सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको](https://bazmeshayari.com/saari-basti-me-ye-jaadoo/): सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको जो दरीचा भी खुले तू नज़र आए मुझको, सदियों का - [दुनियाँ बदल गई है, ज़माना बदल गया है](https://bazmeshayari.com/duniyan-badal-gai-hai/): दुनियाँ बदल गई है, ज़माना बदल गया है यहाँ जीने का अंदाज़ पुराना बदल गया है, दोस्त अहबाब - [अब दावत पे भी बारात पे भी टैक्स लगेगा](https://bazmeshayari.com/ab-dawat-pe-bhi-baarat-pe-bhi/): अब दावत पे भी बारात पे भी टैक्स लगेगा अब शादी की रसुमात पे भी टैक्स लगेगा, अब - [गूँगे लफ़्ज़ों का ये बेसम्त सफ़र मेरा है](https://bazmeshayari.com/gunge-lafzon-ka-ye-besamt/): गूँगे लफ़्ज़ों का ये बेसम्त सफ़र मेरा है गुफ़्तुगू उसकी है लहजे में असर मेरा है, मैं ने - [भीड़ में कोई शनासा भी नहीं छोड़ती है](https://bazmeshayari.com/bhid-me-koi-shanasa-bhi-nahi/): भीड़ में कोई शनासा भी नहीं छोड़ती है ज़िंदगी मुझको अकेला भी नहीं छोड़ती है, आफ़ियत का कोई - [इंसान को वक़्त के हिसाब से चलना पड़ता है](https://bazmeshayari.com/insan-ko-waqt-ke/): इंसान को वक़्त के हिसाब से चलना पड़ता है बाद ठोकर ही सही आख़िर संभलना पड़ता है, हमदर्द - [सरहदों पर है अपने जवानों का गम](https://bazmeshayari.com/sarhadon-par-hai-apne/): सरहदों पर है अपने जवानों का गम और बस्ती में जलते मकानों का गम, फिर से ये गंदी - [जिस तरह चढ़ता है उसी तरह उतरता है](https://bazmeshayari.com/jis-tarah-chadhta-hai/): जिस तरह चढ़ता है उसी तरह उतरता है चोटियों पर सदा के लिए कौन ठहरता है ? बहुत - [दुख और तरह के हैं दुआ और तरह की](https://bazmeshayari.com/dukh-aur-tarah-ke-hai/): दुख और तरह के हैं दुआ और तरह की और दामन ए क़ातिल की हवा और तरह की, - [ऐ वक़्त ज़रा थम जा ये कैसी रवानी है](https://bazmeshayari.com/ae-waqt-zara-tham-jaa/): ऐ वक़्त ज़रा थम जा ये कैसी रवानी है आँखों में अभी बाक़ी एक ख्वाब ए जवानी है, - [दिल भी बुझा हो शाम की परछाइयाँ भी हों](https://bazmeshayari.com/dil-bhi-bujha-ho/): दिल भी बुझा हो शाम की परछाइयाँ भी हों मर जाइये जो ऐसे में तन्हाइयाँ भी हों, आँखों - [उनसे मिलिए जो यहाँ फेर बदल वाले है](https://bazmeshayari.com/unse-miliye-jo-yahan-2/): उनसे मिलिए जो यहाँ फेर बदल वाले है हमसे मत बोलिए हम लोग गज़ल वाले है, कैसे शफ़्फ़ाफ - [नज़र फ़रेब ए क़ज़ा खा गई तो क्या होगा](https://bazmeshayari.com/nazar-fareb-e-qaza-khaa/): नज़र फ़रेब ए क़ज़ा खा गई तो क्या होगा हयात मौत से टकरा गई तो क्या होगा ? - [चाँद पर बस्तियाँ तो बसा लोगे...](https://bazmeshayari.com/chaand-par-bastiyan-to/): चाँद पर बस्तियाँ तो बसा लोगे मगर चाँदनी कहाँ से लाओगे ? सलब कर लीं समाअतें सबकी किस - [धड़कते साँस लेते रुकते चलते मैंने देखा है](https://bazmeshayari.com/dhadkate-saans-lete-rukte/): धड़कते साँस लेते रुकते चलते मैंने देखा है कोई तो है जिसे अपने मे पलते मैंने देखा है, - [आज ज़रा फुर्सत पाई थी आज उसे फिर याद किया](https://bazmeshayari.com/aaj-zara-fursat-paai-thi/): आज ज़रा फुर्सत पाई थी आज उसे फिर याद किया बंद गली के आख़िरी घर को आज फिर - [दुख दर्द के मारों से मेरा ज़िक्र न करना](https://bazmeshayari.com/dukh-dard-ke-maaron-se/): दुख दर्द के मारों से मेरा ज़िक्र न करना घर जाऊँ तो यारों से मेरा ज़िक्र न करना, - [दयार ए नूर में तीरा शबों का साथी हो](https://bazmeshayari.com/dayaar-e-noor-me-teera/): दयार ए नूर में तीरा शबों का साथी हो कोई तो हो जो मेरी वहशतों का साथी हो, - [बस्ती भी समुंदर भी बयाबाँ भी मेरा है](https://bazmeshayari.com/basti-bhi-samndar-bhi/): बस्ती भी समुंदर भी बयाबाँ भी मेरा है आँखें भी मेरी ख़्वाब ए परेशाँ भी मेरा है, जो - [अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है](https://bazmeshayari.com/apni-tasveer-ko-aankhon/): अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है एक नज़र मेरी तरफ़ भी तेरा जाता क्या है ? - [अहल ए मोहब्बत की मजबूरी बढ़ती जाती है](https://bazmeshayari.com/ahal-e-mohabbat-ki/): अहल ए मोहब्बत की मजबूरी बढ़ती जाती है मिट्टी से गुलाब की दूरी बढ़ती जाती है, मेहराबों से - [अज़ाब ये भी किसी और पर नहीं आया](https://bazmeshayari.com/azaab-ye-bhi-kisi/): अज़ाब ये भी किसी और पर नहीं आया कि एक उम्र चले और घर नहीं आया, उस एक - [अज़ाब ए वहशत ए जाँ का सिला न माँगे कोई](https://bazmeshayari.com/azaab-e-wahshat-e-jaan-ka/): अज़ाब ए वहशत ए जाँ का सिला न माँगे कोई नए सफ़र के लिए रास्ता न माँगे कोई, - [मज़लूमों के हक़ मे अब आवाज़...](https://bazmeshayari.com/mazlumo-ke-haq-me/): मज़लूमों के हक़ मे अब आवाज़ उठाये कौन ? जल रही बस्तियाँ,आह ओ सोग मनाये कौन ? कौन - [ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं](https://bazmeshayari.com/thik-hai-khud-ko/): ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं शुक्रिया मश्वरत का चलते हैं, हो रहा हूँ मैं किस तरह - [ज़ुल्म की हद ए इंतेहा को मिटाने का वक़्त है](https://bazmeshayari.com/zulm-ki-had-e-inteha-ko/): ज़ुल्म की हद ए इंतेहा को मिटाने का वक़्त है अब मज़लूमों का साथ निभाने का वक़्त है, - [कभी झूठे सहारे ग़म में रास आया...](https://bazmeshayari.com/kabhi-jhuthe-sahare-gam-me/): कभी झूठे सहारे ग़म में रास आया नहीं करते ये बादल उड़ के आते हैं मगर साया नहीं - [पैगम्बरों की राह पर चल कर न देखना](https://bazmeshayari.com/paigambaron-ki-raah-par/): पैगम्बरों की राह पर चल कर न देखना या फिर चलो तो राह के पत्थर न देखना, पढ़ते - [एक पल के लिए एक घड़ी के लिए](https://bazmeshayari.com/ek-pal-ke-liye-ek-ghadi-ke-liye/): एक पल के लिए एक घड़ी के लिए वक़्त रुकता ही नहीं किसी के लिए, रात कितनी भी - [गमों का लुत्फ़ उठाया है खुशी...](https://bazmeshayari.com/gamon-ka-lutf-uthaya-hai/): गमों का लुत्फ़ उठाया है खुशी का जाम बाँधा है तलाश ए दर्द से मंज़िल का हर एक - [आँख से टूट कर गिरी थी नींद](https://bazmeshayari.com/aankh-se-tut-kar-giri-thi/): आँख से टूट कर गिरी थी नींद वो जो मदहोश हो चुकी थी नींद, मेरी आँखों के क्यूँ - [नक़ाब चेहरों पे सजाये हुए आ जाते है](https://bazmeshayari.com/naqab-chehro-pe-sajaaye-hue/): नक़ाब चेहरों पे सजाये हुए आ जाते है अपनी करतूत छुपाये हुए आ जाते है, घर निकले कोई - [कहीं पे सूखा कहीं चारों सिम्त पानी है](https://bazmeshayari.com/kahin-pe-sukha-kahin-pe/): कहीं पे सूखा कहीं चारों सिम्त पानी है गरीब लोगों पे क़ुदरत की मेहरबानी है, हर एक शख्स - [यूँ अपनी गज़लों में न जताता कि...](https://bazmeshayari.com/yun-apni-gazalon-me-na/): यूँ अपनी गज़लों में न जताता कि मोहब्बत क्या है गर मिलते तो कर के दिखाता कि मोहब्बत - [आयत ए हिज्र पढ़ी और रिहाई पाई](https://bazmeshayari.com/ayat-e-hizr-padhi-aur/): आयत ए हिज्र पढ़ी और रिहाई पाई हमने दानिस्ता मुहब्बत में जुदाई पाई, जिस्म ओ इस्म था जो - [लाई है किस मक़ाम पे ये ज़िंदगी मुझे](https://bazmeshayari.com/laai-hai-kis-muqam-pe/): लाई है किस मक़ाम पे ये ज़िंदगी मुझे महसूस हो रही है ख़ुद अपनी कमी मुझे, देखो तुम - [ख़ुशी ने मुझको ठुकराया है दर्द ओ गम ने पाला है](https://bazmeshayari.com/khushi-ne-mujhko-thukraya/): ख़ुशी ने मुझको ठुकराया है दर्द ओ गम ने पाला है गुलो ने बे रुखी की है तो - [दरबार ए वतन में जब एक दिन सब...](https://bazmeshayari.com/darbar-e-watan-me-jab/): दरबार ए वतन में जब एक दिन सब जाने वाले जाएँगे कुछ अपनी सज़ा को पहुँचेंगे,कुछ अपनी जज़ा - [सज़ा पे छोड़ दिया, कुछ जज़ा पे छोड़ दिया](https://bazmeshayari.com/saza-pe-chhod-diya/): सज़ा पे छोड़ दिया, कुछ जज़ा पे छोड़ दिया हर एक काम को अब मैंने ख़ुदा पे छोड़ - [उसको जाते हुए देखा था पुकारा था कहाँ](https://bazmeshayari.com/usko-jaate-hue-dekha-tha/): उसको जाते हुए देखा था पुकारा था कहाँ रोकते किस तरह वो शख़्स हमारा था कहाँ, थी कहाँ - [जब भी तुझ को याद किया...](https://bazmeshayari.com/jab-bhi-tujh-ko-yaad-kiya/): जब भी तुझ को याद किया ख़ुद को ही नाशाद किया, दिल की बस्ती उजड़ी तो दर्द से - [दर्द अब वो नहीं रहें जो ऐ दिल ए नादां पहले था](https://bazmeshayari.com/dard-ab-wo-nahi-rahe-jo/): दर्द अब वो नहीं रहें जो ऐ दिल ए नादां पहले था खुले सर पर मेरे भी कभी - [देखोगे हमें रोज़ मगर बात न होगी](https://bazmeshayari.com/dekhoge-hamen-roz-magar/): देखोगे हमें रोज़ मगर बात न होगी एक शहर में रह कर भी मुलाक़ात न होगी, कहना है - [इश्क़ मैंने लिख डाला क़ौमीयत के ख़ाने में](https://bazmeshayari.com/ishq-maine-likh-daala/): इश्क़ मैंने लिख डाला क़ौमीयत के ख़ाने में और तेरा दिल लिखा शहरियत के ख़ाने में, मुझको तजरबों - [नदी में बहते थे नीलम ज़मीन धानी थी](https://bazmeshayari.com/nadee-me-bahte-the-neelam/): नदी में बहते थे नीलम ज़मीन धानी थी तुम्हारे वायदे की रंगत जो आसमानी थी, वफ़ा को दे - [माना कि यहाँ अपनी शनासाई भी कम है](https://bazmeshayari.com/maana-ki-yahan-apni-shanasaai/): माना कि यहाँ अपनी शनासाई भी कम है पर तेरे यहाँ रस्म ए पज़ीराई भी कम है, हाँ - [राहत ए वस्ल बिना हिज्र की शिद्दत के बग़ैर](https://bazmeshayari.com/rahat-e-vasl-bina-hizr-ki/): राहत ए वस्ल बिना हिज्र की शिद्दत के बग़ैर ज़िंदगी कैसे बसर होगी मोहब्बत के बग़ैर, अब के - [कोई ज़ब्त दे न जलाल दे...](https://bazmeshayari.com/koi-zabt-de-na-jalal-de/): कोई ज़ब्त दे न जलाल दे मुझे सिर्फ़ इतना कमाल दे, मुझे अपनी राह पे डाल दे कि - [मैं ख्याल हूँ किसी और का मुझे सोचता...](https://bazmeshayari.com/main-khyal-hoon-kisi-aur-ka/): मैं ख्याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है सर ए आईना मेरा अक्स है पस - [हर एक बात न क्यूँ ज़हर सी हमारी लगे](https://bazmeshayari.com/har-ek-baat-na-kyun/): हर एक बात न क्यूँ ज़हर सी हमारी लगे कि हमको दस्त ए ज़माना से ज़ख़्मकारी लगे, उदासियाँ - [ज़िन्दा है जब तक मुझे बस गुनगुनाने है](https://bazmeshayari.com/zinda-hai-jab-tak/): ज़िन्दा है जब तक मुझे बस गुनगुनाने है क्यूँकि गीत तेरे नाम के बड़े ही सुहाने है, है - [हमने उसकी आँखे पढ़ ली...](https://bazmeshayari.com/hamne-uski-aankhe-padh/): हमने उसकी आँखे पढ़ ली छुपा कोई चेहरा है शायद ! वो हर बात पे हँस देती है - [कितना बुलंद मर्तबा पाया हुसैन ने](https://bazmeshayari.com/kitna-buland-martba-paya/): कितना बुलंद मर्तबा पाया हुसैन ने राह ए ख़ुदा में घर को लुटाया हुसैन ने, कैसे बयाँ हो - [हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे](https://bazmeshayari.com/ham-taraste-hi-taraste-hi/): हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे वो फ़लाने से फ़लाने से फ़लाने से मिले, ख़ुद से - [ये मुहब्बतों के किस्से भी अज़ीब होते है](https://bazmeshayari.com/ye-muhabbaton-ke-qisse/): ये मुहब्बतों के किस्से भी अज़ीब होते है बेवफ़ा ही इसमें अक्सर अज़ीज़ होते है, चाहों में कोई - [आदम की जात होकर इल्म बिसरा रहे हो](https://bazmeshayari.com/aadam-ki-jaat-ho-kar/): आदम की जात होकर इल्म बिसरा रहे हो क्यूँ मज़लूम ओ गरीब को बेवजह सता रहे हो ? - [दूर कर देगा कभी साथ नहीं होने देगा](https://bazmeshayari.com/door-kar-dega-kabhi-saath/): दूर कर देगा कभी साथ नहीं होने देगा ये वक़्त बेदर्द मुलाक़ात नहीं होने देगा, गम की वो - [इंसानी सोच का मौसम बदलता रहता है](https://bazmeshayari.com/insani-soch-ka-mausam/): इंसानी सोच का मौसम बदलता रहता है फ़ितूरी दिमाग बेकाम भी चलता रहता है, ज़रा सी ओट ही - [आरज़ी ताक़तें तुम्हारी है पर ख़ुदा हमारा है](https://bazmeshayari.com/aarzi-taaqte-tumhari-hai/): आरज़ी ताक़तें तुम्हारी है पर ख़ुदा हमारा है अपने अक्स पर न इतराओ आईना हमारा है, तेरी रज़ा - [उम्र तमाम गुज़र जाती है आशियाँ बनाने में](https://bazmeshayari.com/umr-tamam-guzar-jati-hai/): उम्र तमाम गुज़र जाती है आशियाँ बनाने में ज़ालिम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में, और जाम टूटेंगे - [मैं सुन रहा हूँ जो दुनियाँ सुना रही है मुझे](https://bazmeshayari.com/main-sun-raha-hoon-jo/): मैं सुन रहा हूँ जो दुनियाँ सुना रही है मुझे हँसी तो अपनी ख़ामोशी पे आ रही है - [कैसी महफ़िल है ज़ालिम तेरे शहर में...](https://bazmeshayari.com/kaisi-mahfil-hai-zalim/): कैसी महफ़िल है ज़ालिम तेरे शहर में यहाँ हर कोई ही डूबा हुआ है ज़हर में, एक बच्ची - [चेहरे की हसी भी दिखावट सी हो रही है...](https://bazmeshayari.com/chehre-ki-hasi-bhi-dikhwat/): चेहरे की हसी भी दिखावट सी हो रही है असल ज़िन्दगी भी बनावट सी हो रही है, अनबन - [सच ये है कि बेकार का ही हमें गम...](https://bazmeshayari.com/sach-ye-hai-ki-bekar-ka/): सच ये है कि बेकार का ही हमें गम होता है जैसा हम चाहे दुनियाँ में वो बहुत - [अमूमन मेरी हसरत को चाहत का...](https://bazmeshayari.com/amuman-meri-hasrat-ko/): अमूमन मेरी हसरत को चाहत का नाम दे गये लोग जीश्त को इन्तेहा ए आशिकी का पैग़ाम दे - [ख़्वाबो को मेरे प्यार की ताबीर बख्श दे](https://bazmeshayari.com/khwabo-ko-mere-pyar-ki/): ख़्वाबो को मेरे प्यार की ताबीर बख्श दे दिल को मेरे इश्क़ की ज़ागीर बख्श दे, कब से - [उलझे काँटों से कि खेले गुल ए तर से...](https://bazmeshayari.com/uljhe-kaanto-se-ki-khele/): उलझे काँटों से कि खेले गुल ए तर से पहले फ़िक्र ये है कि सबा आए किधर से - [वही हुस्न ए यार में है वही लाला ज़ार में है](https://bazmeshayari.com/wahi-husn-e-yaar-me-hai/): वही हुस्न ए यार में है वही लाला ज़ार में है वो जो कैफ़ियत नशे की मय ए - [वही है वहशत वही है नफ़रत आख़िर...](https://bazmeshayari.com/wahi-hai-wahshat-wahi-hai/): वही है वहशत वही है नफ़रत आख़िर इस का क्या है सबब ? इंसाँ इंसाँ बहुत रटा है - [वही दर्द है वही बेबसी तेरे गाँव में मेरे...](https://bazmeshayari.com/wahi-dard-hai-wahi-bebasi/): वही दर्द है वही बेबसी तेरे गाँव में मेरे शहर में बे गमो की भीड़ में आदमी तेरे - [थे ख़्वाब एक हमारे भी और तुम्हारे भी](https://bazmeshayari.com/the-khwab-ek-hamare-bhi-aur/): थे ख़्वाब एक हमारे भी और तुम्हारे भी पर अपना खेल दिखाते रहे सितारे भी, ये ज़िन्दगी है - [ख़ुशी जानते हैं न ग़म जानते हैं...](https://bazmeshayari.com/khushi-jaante-hai-na-gam/): ख़ुशी जानते हैं न ग़म जानते हैं जो उनकी रज़ा हो वो हम जानते हैं, जो कुछ चार - [ये मरहले भी मोहब्बत के बाब में आए](https://bazmeshayari.com/ye-marhale-bhi-mohabbat-ke/): ये मरहले भी मोहब्बत के बाब में आए बिछड़ गए थे जो हमसे वो ख़्वाब में आए, वो - [उसे भुला के भी यादों के सिलसिले न गए](https://bazmeshayari.com/use-bhula-ke-bhi-yaado-ke/): उसे भुला के भी यादों के सिलसिले न गए दिल ए तबाह तेरे उससे राब्ते न गए, किताब - [तेरे पैकर सी कोई मूरत बना ली जाएगी](https://bazmeshayari.com/tere-paikar-si-koi/): तेरे पैकर सी कोई मूरत बना ली जाएगी दिल के बहलाने की ये सूरत निकाली जाएगी, कौन कह - [ग़म के हर एक रंग से मुझको शनासा कर](https://bazmeshayari.com/gam-ke-har-ek-rang-se/): ग़म के हर एक रंग से मुझको शनासा कर गया वो मेरा मोहसिन मुझे पत्थर से हीरा कर - [ग़म है वहीं प ग़म का सहारा गुज़र गया](https://bazmeshayari.com/gam-hai-wahi-pa-gam/): ग़म है वहीं प ग़म का सहारा गुज़र गया दरिया ठहर गया है किनारा गुज़र गया, बस ये - [दिल के बहलाने का सामान न समझा जाए](https://bazmeshayari.com/dil-ke-bahlane-ka-samaan/): दिल के बहलाने का सामान न समझा जाए मुझको अब इतना भी आसान न समझा जाए, मैं भी - [मैं एक काँच का पैकर वो शख़्स पत्थर था](https://bazmeshayari.com/main-ek-kaanch-ka-paikar-wo/): मैं एक काँच का पैकर वो शख़्स पत्थर था सो पाश पाश तो होना मेरा मुक़द्दर था, तमाम - [ख़ुद आगही का अजब रोग लग गया है](https://bazmeshayari.com/khud-aagahi-ka-azab-rog/): ख़ुद आगही का अजब रोग लग गया है मुझे कि अपनी ज़ात पे धोका तेरा हुआ है मुझे, - [सबब ए चश्म ए तर कैसे बताऊँ तुझे ?](https://bazmeshayari.com/sabab-e-chashm-e-tar-kaise/): सबब ए चश्म ए तर कैसे बताऊँ तुझे ? ज़ख़्म ए दिल ओ जाँ कैसे दिखाऊं तुझे ? - [दिल किस के तसव्वुर में जाने...](https://bazmeshayari.com/dil-kis-ke-tasavvur-me/): दिल किस के तसव्वुर में जाने रातों को परेशाँ होता है ये हुस्न ए तलब की बात नहीं - [दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब...](https://bazmeshayari.com/dil-hizr-ke-dard-se-bojhal-hai/): दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब आन मिलो तो बेहतर हो इस बात से हम को - [दिल इश्क़ में बे पायाँ सौदा हो तो ऐसा हो](https://bazmeshayari.com/dil-ishq-me-be-payaan-sauda/): दिल इश्क़ में बे पायाँ सौदा हो तो ऐसा हो दरिया हो तो ऐसा हो सहरा हो तो - [वो एक रात की गर्दिश में इतना हार गया](https://bazmeshayari.com/wo-ek-raat-ki-gardish-me/): वो एक रात की गर्दिश में इतना हार गया लिबास पहने रहा और बदन उतार गया, हसब नसब - [ख़ुद को इतना जो हवादार समझ रखा है](https://bazmeshayari.com/khud-ko-itna-jo-hawadar/): ख़ुद को इतना जो हवादार समझ रखा है क्या हमें रेत की दीवार समझ रखा है, हमने किरदार - [दर्द आसानी से कब पहलू बदल कर...](https://bazmeshayari.com/dard-aasaani-se-kab-pahlu/): दर्द आसानी से कब पहलू बदल कर निकला आँख का तिनका बहुत आँख मसल कर निकला, तेरे मेहमान - [फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था](https://bazmeshayari.com/faasle-aise-bhi-honge-ye-kabhi/): फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था, - [जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख...](https://bazmeshayari.com/jina-mushkil-hai-ki-aasaan/): जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो लोग लगते हैं परेशान ज़रा देख तो लो, फिर - [गर मयकश हूँ तो जाम का मै तलबगार हूँ](https://bazmeshayari.com/gar-maykash-hoon-to-jaam-ka/): गर मयकश हूँ तो जाम का मै तलबगार हूँ शिकस्तादिल हूँ मगर गम का खरीदार हूँ, काफिलों की - [ज़ब्त ए ग़म पर ज़वाल क्यों आया](https://bazmeshayari.com/zabt-e-gam-par-jawal-kyo/): ज़ब्त ए ग़म पर ज़वाल क्यों आया शिद्दतों में उबाल क्यों आया ? गुल से खिलवाड़ कर रही - [ये किन ख़यालों में खो रहे हो नई है...](https://bazmeshayari.com/ye-kin-khyalo-me-kho-rahe-ho/): ये किन ख़यालों में खो रहे हो नई है बुनियाद ए आशियाना चमन की तामीर इस तरह हो - [रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई](https://bazmeshayari.com/rahne-ko-sada-dahar-me-aata/): रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई, डरता हूँ - [वो दिल नवाज़ है लेकिन नज़र शनास नहीं](https://bazmeshayari.com/wo-dil-nawaz-hai-lekin/): वो दिल नवाज़ है लेकिन नज़र शनास नहीं मेरा इलाज मेरे चारागर के पास नहीं, तड़प रहे हैं - [वो इस अदा से जो आए तो क्यूँ भला न...](https://bazmeshayari.com/wo-is-ada-se-jo-aaye-to/): वो इस अदा से जो आए तो क्यूँ भला न लगे हज़ार बार मिलो फिर भी आश्ना न - [वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए](https://bazmeshayari.com/wo-sahilo-pe-gaane-wale/): वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए वो कश्तियाँ चलाने वाले क्या हुए ? वो सुब्ह आते आते - [जब भी इस शहर में कमरे से मैं बाहर...](https://bazmeshayari.com/jab-bhi-is-shahar-me-kamare-se/): जब भी इस शहर में कमरे से मैं बाहर निकला मेरे स्वागत को हर एक जेब से खंजर - [ये आरज़ू थी तुझे गुल के रूबरू करते](https://bazmeshayari.com/ye-aarzoo-thi-tujhe-gul-ke/): ये आरज़ू थी तुझे गुल के रूबरू करते हम और बुलबुल ए बेताब गुफ़्तुगू करते, पयाम्बर न मयस्सर - [कुछ भी था सच के तरफ़दार हुआ...](https://bazmeshayari.com/kuch-bhi-tha-sach-ke-tarafdaar/): कुछ भी था सच के तरफ़दार हुआ करते थे तुम कभी साहब ए किरदार हुआ करते थे, सुनते - [मुसाफ़िर भी सफ़र में इम्तिहाँ देने से...](https://bazmeshayari.com/musafir-bhi-safar-me/): मुसाफ़िर भी सफ़र में इम्तिहाँ देने से डरते हैं मोहब्बत क्या करेंगे वो जो जाँ देने से डरते - [नींदों का बोझ पलकों पे ढोना पड़ा मुझे](https://bazmeshayari.com/neendon-ka-bojh-palkon-pe/): नींदों का बोझ पलकों पे ढोना पड़ा मुझे आँखों के इल्तिमास पे सोना पड़ा मुझे, ता उम्र अपने - [सच बोलने के तौर तरीक़े नहीं रहे](https://bazmeshayari.com/sach-bolne-ke-taur-tarike/): सच बोलने के तौर तरीक़े नहीं रहे पत्थर बहुत हैं शहर में शीशे नहीं रहे, वैसे तो हम - [हर गम से मुस्कुराने का हौसला मिलता है](https://bazmeshayari.com/har-gam-se-muskurane/): हर गम से मुस्कुराने का हौसला मिलता है ये दिल ही तो है जो गिरता और संभलता है, - [एक ही धरती हम सब का घर जितना...](https://bazmeshayari.com/ek-hi-dharti-ham-sab-ka/): एक ही धरती हम सब का घर जितना तेरा उतना मेरा दुख सुख का ये जंतर मंतर जितना - [दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है](https://bazmeshayari.com/duniya-jise-kahte-hai-2/): दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है, - [वो मेरे घर नहीं आता मैं उसके घर नहीं जाता](https://bazmeshayari.com/wo-mere-ghar-nahi/): वो मेरे घर नहीं आता मैं उसके घर नहीं जाता मगर इन एहतियातों से ताअल्लुक़ मर नहीं जाता, - [जब लहजे बदल जाएँ तो वज़ाहतें कैसी ?](https://bazmeshayari.com/jab-lahje-badal-jaayen/): जब लहजे बदल जाएँ तो वज़ाहतें कैसी ? नई मयस्सर हो जाएँ तो पुरानी चाहतें कैसी ? वस्ल - [सोच के ख़ुद ही बताएं ये बताने वाले](https://bazmeshayari.com/soch-ke-khud-hi/): सोच के ख़ुद ही बताएं ये बताने वाले तूने सीखे हैं जो अंदाज़ ज़माने वाले, आधे रस्ते से - [दिल ए बेताब की मुझको हिमायत अब नहीं करनी](https://bazmeshayari.com/dil-e-betab-ki/): दिल ए बेताब की मुझको हिमायत अब नहीं करनी मुझे आज़ाद रहना हैं मुहब्बत अब नहीं करनी, गिला - [कैसे होता है मुमकिन ये गवारा करना](https://bazmeshayari.com/kaise-hota-hai-mumkin/): कैसे होता है मुमकिन ये गवारा करना दिल में बसे हुए लोगो से किनारा करना, कुछ मुहब्बत के - [मगरूर परिंदों को ये ऐलान गया है](https://bazmeshayari.com/magrur-parindon-ko-ye/): मगरूर परिंदों को ये ऐलान गया है सय्याद नशेमन का पता जान गया है, यानि जिसे दीमक लगी - [सब की कहानी एक तरफ़ है...](https://bazmeshayari.com/sabki-kahani-ek-taraf/): सबकी कहानी एक तरफ़ है मेरा क़िस्सा एक तरफ़ एक तरफ़ सैराब हैं सारे और मैं प्यासा एक - [ख़ाली हाथ ही जाना है क्या खोना क्या पाना है](https://bazmeshayari.com/khaali-hath-hi-jaana/): ख़ाली हाथ ही जाना है क्या खोना क्या पाना है चाहे जितने नाते जोड़ें एक दिन टूट ही - [ज़िन्दगी भर अज़ाब सहने को](https://bazmeshayari.com/zindagi-bhar-azaab-sahne/): ज़िन्दगी भर अज़ाब सहने को दिल मिला है उदास रहने को, एक चुप के हज़ारहा मफ़हूम और क्या - [अदाएँ हश्र जगाएँ वो इतना दिलकश है](https://bazmeshayari.com/adayen-hashr-jagayen-wo/): अदाएँ हश्र जगाएँ वो इतना दिलकश है ख्याल हर्फ़ न पाएँ वो इतना दिलकश है, बहिश्ती गूंचों से - [ये जो दीवाने से दो चार नज़र आते है](https://bazmeshayari.com/ye-jo-deewane-se/): ये जो दीवाने से दो चार नज़र आते है उनमे कुछ साहिब ए असरार नज़र आते है, तेरी - [कभी यूँ भी आ मेरी आँख में...](https://bazmeshayari.com/kabhi-yun-bhi-aa/): कभी यूँ भी आ मेरी आँख में कि मेरी नज़र को ख़बर न हो मुझे एक रात नवाज़ - [नये कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ...](https://bazmeshayari.com/naye-kapade-badal-kar/): नये कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ और बाल बनाऊँ किस के लिए वो शख्स तो शहर ही छोड़ - [लाख रहे शहरों में फिर भी अन्दर से देहाती थे](https://bazmeshayari.com/laakh-rahe-shaharon-me/): लाख रहे शहरों में फिर भी अन्दर से देहाती थे दिल के अच्छे लोग थे लेकिन थोड़े से - [कौन मुन्सफ़, कहाँ इंसाफ़, किधर का दस्तूर](https://bazmeshayari.com/kaun-munsaf-kahan-insaf/): कौन मुन्सफ़, कहाँ इंसाफ़, किधर का दस्तूर अब ये मिज़ान सजावट के सिवा कुछ भी नहीं, अदालत की - [अपनी ख़ुद्दारी तो पामाल नहीं कर सकते](https://bazmeshayari.com/apni-khuddari-to-pamaal/): अपनी ख़ुद्दारी तो पामाल नहीं कर सकते उस का नंबर है मगर काल नहीं कर सकते, सीम जाएगा - [होशियारी ये दिल ए नादान बहुत करता है](https://bazmeshayari.com/hoshiyari-ye-dil-e/): होशियारी ये दिल ए नादान बहुत करता है रंज कम सहता है पर ऐलान बहुत करता है, रात - [बारहा तुझ से कहा था मुझे अपना न बना](https://bazmeshayari.com/baaraha-tujh-se-kaha/): बारहा तुझ से कहा था मुझे अपना न बना अब मुझे छोड़ के दुनिया में तमाशा न बना, - [अब बेवजह बेसबब दिन को रात नहीं करता](https://bazmeshayari.com/ab-bewajah-besabab-din/): अब बेवजह बेसबब दिन को रात नहीं करता फ़ुर्सत मिले भी तो किसी से बात नहीं करता, वक़्त, - [याद ए माज़ी में जो आँखों को सज़ा दी जाए](https://bazmeshayari.com/yaad-e-maazi-me/): याद ए माज़ी में जो आँखों को सज़ा दी जाए उस से बेहतर है कि हर बात भूला - [इंसाफ़ से न महरूम अब कोई शख्स रहेगा](https://bazmeshayari.com/insaaf-se-na-mahrum/): इंसाफ़ से न महरूम अब कोई शख्स रहेगा दुनियाँ में जो जैसा करेगा, वो वैसा ही भरेगा, कागज़ - [ख़ुदा से वक़्त ए दुआ हम सवाल कर बैठे](https://bazmeshayari.com/khuda-se-waqt-e/): ख़ुदा से वक़्त ए दुआ हम सवाल कर बैठे वो बुत भी दिल को ज़रा अब संभाल कर - [ख़ून से लिखता है तावीज़ ए अजल काग़ज़ पर](https://bazmeshayari.com/khoon-se-likhta-hai/): ख़ून से लिखता है तावीज़ ए अजल काग़ज़ पर वक़्त करता है अजब सिफली अमल काग़ज़ पर, रंज - [कोई आहट कोई सरगोशी...](https://bazmeshayari.com/koi-aahat-koi-sargoshi/): कोई आहट कोई सरगोशी सदा कुछ भी नहीं घर में एक बेहिस ख़मोशी के सिवा कुछ भी नहीं, - [मत बुरा उसको कहो गरचे वो अच्छा भी नहीं](https://bazmeshayari.com/mat-bura-usko-kaho/): मत बुरा उसको कहो गरचे वो अच्छा भी नहीं वो न होता तो ग़ज़ल मैं कभी कहता भी - [ज़ख्म ए वाहिद ने जिसे ता उम्र रुलाया हो](https://bazmeshayari.com/zakhm-e-waahid-ne/): ज़ख्म ए वाहिद ने जिसे ता उम्र रुलाया हो हरगिज़ ना दुखाना दिल जो चोट खाया हो, जिसे - [ज़िन्दगानी के काम एक तरफ़](https://bazmeshayari.com/zindgani-ke-kaam-ek/): ज़िन्दगानी के काम एक तरफ़ अक़द का इंतज़ाम एक तरफ़, हां मुहब्बत का नाम एक तरफ़ साज़ो सामां - [रिश्तों के जब तार उलझने लगते हैं](https://bazmeshayari.com/rishton-ke-jab-taar/): रिश्तों के जब तार उलझने लगते हैं आपस में घर बार उलझने लगते हैं, माज़ी की आँखों में - [चमन में जब भी सबा को गुलाब पूछते हैं](https://bazmeshayari.com/chaman-me-jab-bhi/): चमन में जब भी सबा को गुलाब पूछते हैं तुम्हारी आँख का अहवाल ख़्वाब पूछते हैं, कहाँ कहाँ - [हरिस दिल ने ज़माना कसीर बेचा है](https://bazmeshayari.com/haris-dil-ne-zamana/): हरिस दिल ने ज़माना कसीर बेचा है किसी ने जिस्म किसी ने ज़मीर बेचा है, नहीं रही बशीरत - [असर उसको ज़रा नहीं होता](https://bazmeshayari.com/asar-usko-zara-nahi/): असर उसको ज़रा नहीं होता रंज राहत फिज़ा नहीं होता, बेवफा कहने की शिकायत है तो भी वादा - [बुलंद दर्ज़ा है दुनियाँ में माँ बाप का](https://bazmeshayari.com/buland-darza-hai-duniyan/): बुलंद दर्ज़ा है दुनियाँ में माँ बाप का इनके जैसा तो कोई और प्यारा नहीं, इतने एहसान है - [शिक़स्त ए ज़र्फ़ को पिंदार ए रिंदाना नहीं कहते](https://bazmeshayari.com/shikast-e-zarf-ko/): शिक़स्त ए ज़र्फ़ को पिंदार ए रिंदाना नहीं कहते जो मांगे से मिले हम उसको पैमाना नहीं कहते, - [मिलने का भी आख़िर कोई इम्कान बनाते](https://bazmeshayari.com/milne-ka-bhi-aakhir/): मिलने का भी आख़िर कोई इम्कान बनाते मुश्किल थी अगर कोई तो आसान बनाते, रखते कहीं खिड़की कहीं - [दिल दे कर संगदिल को...](https://bazmeshayari.com/dil-de-kar-sangdil/): दिल दे कर संगदिल को ज़िन्दगी दुश्वार नहीं करना यूँ हर किसी से अपने इश्क़ का इजहार नहीं - [सताते हो तुम मज़लूमों को सताओ](https://bazmeshayari.com/satate-ho-tum-mazlumon/): सताते हो तुम मज़लूमों को सताओ मगर ये समझ के ज़रा ज़ुल्म ढहाओ मज़ालिम का लबरेज़ जब जाम - [तक़दीर की ग़र्दिश क्या कम थी...](https://bazmeshayari.com/taqdeer-ki-gardish-kya/): तक़दीर की ग़र्दिश क्या कम थी उस पर ये क़यामत कर बैठे, बेताबी ए दिल जब हद से - [पिछले ज़ख़्मों का इज़ाला न ही...](https://bazmeshayari.com/pichle-zakhmon-ka-izala/): पिछले ज़ख़्मों का इज़ाला न ही वहशत करेगा तुझ से वाक़िफ़ हूँ मेरी जाँ तू मोहब्बत करेगा, मैं - [अज़ब रिवायत है क़ातिलों का एहतराम करो](https://bazmeshayari.com/azab-riwayat-hai-qaatilon/): अज़ब रिवायत है क़ातिलों का एहतराम करो गुनाह के बोझ से लदे काँधों को सलाम करो, पहचान गर - [दर्द की धूप ढले ग़म के ज़माने जाएँ](https://bazmeshayari.com/dard-ki-dhoop-dhale/): दर्द की धूप ढले ग़म के ज़माने जाएँ देखिए रूह से कब दाग़ पुराने जाएँ, हम को बस - [धोखे पे धोखे इस तरह खाते चले गए](https://bazmeshayari.com/dhokhe-pe-dhokhe-is/): धोखे पे धोखे इस तरह खाते चले गए हम दुश्मनों को दोस्त बनाते चले गए, हर ज़ख्म ज़िंदगी - [अपनों से कोई बात छुपाई नहीं जाती](https://bazmeshayari.com/apno-se-koi-baat/): अपनों से कोई बात छुपाई नहीं जाती ग़ैरों को कभी दिल की बताई नहीं जाती, लग जाती है - [हमारे हाफ़िज़े बेकार हो गए साहिब](https://bazmeshayari.com/hamare-haafize-bekar-ho/): हमारे हाफ़िज़े बेकार हो गए साहिब जवाब और भी दुश्वार हो गए साहिब, उसे भी शौक़ था तस्वीर - [तेरा लहजा तेरी पहचान मुबारक हो तुझे](https://bazmeshayari.com/tera-lahja-teri-pahchan/): तेरा लहजा तेरी पहचान मुबारक हो तुझे तेरी वहशत तेरा हैजान मुबारक हो तुझे, मैं मोहब्बत का पुजारी - [मुझे आरज़ू जिसकी है उसको ही ख़बर नहीं](https://bazmeshayari.com/mujhe-aarzoo-jiski-hai/): मुझे आरज़ू जिसकी है उसको ही ख़बर नहीं नज़रअंदाज़ कर दूँ ऐसी मेरी कोई नज़र नहीं, मना पाबंदियाँ - [इस शहर में कहीं पे हमारा मकाँ भी हो](https://bazmeshayari.com/is-shahar-men-kahin/): इस शहर में कहीं पे हमारा मकाँ भी हो बाज़ार है तो हम पे कभी मेहरबाँ भी हो, - [वतन से उल्फ़त है जुर्म अपना...](https://bazmeshayari.com/watan-se-ulfat-hai/): वतन से उल्फ़त है जुर्म अपना ये जुर्म ता ज़िन्दगी करेंगे है किस की गर्दन पे खून ए - [घर से निकले अगर हम बहक जाएँगे](https://bazmeshayari.com/ghar-se-nikale-agar/): घर से निकले अगर हम बहक जाएँगे वो गुलाबी कटोरे छलक जाएँगे, हमने अल्फ़ाज़ को आइना कर दिया - [बसा तो लेते नया दिल में हम मकीं लेकिन](https://bazmeshayari.com/basa-to-lete-naya/): बसा तो लेते नया दिल में हम मकीं लेकिन मिला न आप से बढ़ कर कोई हसीं लेकिन, - [मुख़्तसर बात, बात काफी है...](https://bazmeshayari.com/mukhtasar-baat-baat-kaafi/): मुख़्तसर बात, बात काफी है एक तेरा साथ, साथ काफी है, वो जो गुज़र जाए तेरे पहलू में - [सूरज से यूँ आँख मिलाना...](https://bazmeshayari.com/suraj-se-yun-aankh/): सूरज से यूँ आँख मिलाना मुश्किल क्या नामुमकिन है, दुनियाँ से इस्लाम मिटाना मुश्किल क्या नामुमकिन है, मुशरिको - [इश्क़ ने बख्शी है हमें ये सौगात मुसलसल](https://bazmeshayari.com/ishq-ne-bakhshi-hai/): इश्क़ ने बख्शी है हमें ये सौगात मुसलसल तेरा ही ज़िक्र हमेशा तेरी ही बात मुसलसल,   एक - [तअल्लुक़ तर्क करने से मोहब्बत कम...](https://bazmeshayari.com/taalluq-tark-karne-se/): तअल्लुक़ तर्क करने से मोहब्बत कम नहीं होती भड़कती है ये आतिश दिन ब दिन मद्धम नहीं होती, - [पहले जनाब कोई शिगूफ़ा उछाल दो](https://bazmeshayari.com/pahle-janab-koi-shigufa/): पहले जनाब कोई शिगूफ़ा उछाल दो फिर कर का बोझ गर्दन पर डाल दो, रिश्वत को हक़ समझ - [एक बेवा की आस लगती है](https://bazmeshayari.com/ek-beva-ki-aas/): एक बेवा की आस लगती है ज़िंदगी क्यों उदास लगती है, हर तरफ़ छाई घोर तारीकी रौशनी की - [हक़ीक़तों में बदलता सराब चुभने लगा](https://bazmeshayari.com/haqiqaton-men-badalta-saraab/): हक़ीक़तों में बदलता सराब चुभने लगा जो बन सका न हक़ीक़त वो ख़्वाब चुभने लगा, सवाल सख़्त हमारा - [ज़बाँ कुछ और कहती है नज़र...](https://bazmeshayari.com/zaban-kuch-aur-kahti/): ज़बाँ कुछ और कहती है नज़र कुछ और कहती है मगर ये ज़िंदगी की रहगुज़र कुछ और कहती - [सीनों में अगर होती कुछ प्यार की गुंजाइश](https://bazmeshayari.com/sino-men-agar-hoti/): सीनों में अगर होती कुछ प्यार की गुंजाइश हाथों में निकलती क्यूँ तलवार की गुंजाइश, पिछड़े हुए गाँव - [बादशाहों को सिखाया है क़लंदर होना](https://bazmeshayari.com/baadshahon-ko-sikhaya-hai/): बादशाहों को सिखाया है क़लंदर होना आप आसान समझते हैं मुनव्वर होना, एक आँसू भी हुकूमत के लिए - [यहाँ शोर बच्चे मचाते नहीं हैं...](https://bazmeshayari.com/yahan-shor-bachche-machaate/): यहाँ शोर बच्चे मचाते नहीं हैं परिंदे भी अब गीत गाते नहीं हैं, वफ़ा के फ़लक पर मोहब्बत - [सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद हैं](https://bazmeshayari.com/sau-men-sattar-aadmi/): सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद हैं दिल रखकर हाथ कहिए देश क्या आज़ाद है ? कोठियों - [ख़ुद्दार मेरे शहर का फाक़ो से मर गया](https://bazmeshayari.com/khuddar-mere-shahar-ka/): ख़ुद्दार मेरे शहर का फाक़ो से मर गया राशन जो आ रहा था वो अफ़सर के घर गया, - [होंठों पे उसके जुम्बिश ए इंकार भी नहीं](https://bazmeshayari.com/honthon-pe-uske-jumbish/): होंठों पे उसके जुम्बिश ए इंकार भी नहीं आँखों में कोई शोख़ी ए इक़रार भी नहीं, बस्ती में - [बिस्तर ए मर्ग पर ज़िंदगी की तलब](https://bazmeshayari.com/bistar-e-marg-par/): बिस्तर ए मर्ग पर ज़िंदगी की तलब जैसे ज़ुल्मत में हो रौशनी की तलब, कल तलक कमतरी जिन - [हर आह ग़म ए दिल की ग़म्माज़ नहीं होती](https://bazmeshayari.com/har-aah-gam-e-dil/): हर आह ग़म ए दिल की ग़म्माज़ नहीं होती और वाह मसर्रत का आग़ाज़ नहीं होती, जो रोक - [हम से दीवानों को असरी आगही डसती रही](https://bazmeshayari.com/ham-se-deewanon-ko/): हम से दीवानों को असरी आगही डसती रही खोखली तहज़ीब की फ़र्ज़ानगी डसती रही, शोला ए नफ़रत तो - [राहें धुआँ धुआँ हैं सफ़र गर्द गर्द है](https://bazmeshayari.com/raahen-dhuaan-dhuaan-hai/): राहें धुआँ धुआँ हैं सफ़र गर्द गर्द है ये मंज़िल ए मुराद तो बस दर्द दर्द है, अपने - [ग़ैरत ए इश्क़ सलामत थी अना ज़िंदा थी](https://bazmeshayari.com/gairat-e-ishq-salamat/): ग़ैरत ए इश्क़ सलामत थी अना ज़िंदा थी वो भी दिन थे कि रह ओ रस्म ए वफ़ा - [क्यूँ न फिर से दौर ए क़दीम में जाया जाए ?](https://bazmeshayari.com/kyun-na-fir-se-daur-e/): क्यूँ न फिर से दौर ए क़दीम में जाया जाए ? माँग कर आग घर का चूल्हा जलाया - [बहुत ख़राब रहा इस दौर मे](https://bazmeshayari.com/bahut-kharab-raha-is-daur-men/): बहुत ख़राब रहा इस दौर मे एक क़ौम का अच्छा होना, रास ना आया मनहूसों को क़ौम का - [धड़कनें बन के जो सीने में रहा करता था](https://bazmeshayari.com/dhadkane-ban-ke-jo/): धड़कनें बन के जो सीने में रहा करता था क्या अजब शख़्स था जो मुझ में जिया करता - [किसी झूठीं वफ़ा से दिल को बहलाना नहीं आता](https://bazmeshayari.com/kisi-jhuthin-wafa-se/): किसी झूठीं वफ़ा से दिल को बहलाना नहीं आता मुझे घर काग़ज़ी फूलों से महकाना नहीं आता, मैं - [मौसम बदल गए ज़माने बदल गए](https://bazmeshayari.com/mausam-badal-gaye-zamane/): मौसम बदल गए ज़माने बदल गए लम्हों में दोस्त बरसों पुराने बदल गए, दिन भर रहे जो मेरी - [दिल की इस दौर में क़ीमत नहीं होती शायद](https://bazmeshayari.com/dil-ki-is-daur-men/): दिल की इस दौर में क़ीमत नहीं होती शायद सब की क़िस्मत में मुहब्बत नहीं होती शायद, फ़ैसला - [सफ़र ए वफ़ा की राह में मंज़िल जफा की थी](https://bazmeshayari.com/safar-e-wafa-ki/): सफ़र ए वफ़ा की राह में मंज़िल जफा की थी कागज़ का घर बना के भी ख्वाहिश हवा - [ऐ नए साल बता तुझ में नयापन क्या है ?](https://bazmeshayari.com/ae-naye-saal-bata/): ऐ नए साल बता तुझ में नयापन क्या है ? हर तरफ़ ख़ल्क़ ने क्यों शोर मचा रखा - [भूख़ चेहरों पे लिए चाँद से प्यारे बच्चे](https://bazmeshayari.com/bhookh-chehre-pe-liye/): भूख़ चेहरों पे लिए चाँद से प्यारे बच्चे बेचते फिरते हैं गलियों में ग़ुबारे बच्चे, इन हवाओं से - [बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं](https://bazmeshayari.com/baithen-hai-chain-se/): बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं, - [आपकी याद आती रही रात भर](https://bazmeshayari.com/aapki-yaad-aati-rahi/): आपकी याद आती रही रात भर चाँदनी दिल दुखाती रही रात भर, गाह जलती हुई गाह बुझती हुई - [कश्ती हवस हवाओं के रुख़ पर उतार दे](https://bazmeshayari.com/kashti-hawas-hawaaon-ke/): कश्ती हवस हवाओं के रुख़ पर उतार दे खोए हुओं से मिल ये दलद्दर उतार दे, बे सम्त - [पहले जो ख़ुद माँ के आंचल में छुप...](https://bazmeshayari.com/pahle-jo-khud-maan/): पहले जो ख़ुद माँ के आंचल में छुप जाया करती थी आज वो ख़ुद किसी को आंचल में - [इस नये साल पे ये सदा है ख़ुदा से](https://bazmeshayari.com/is-naye-saal-pe/): इस नये साल पे ये सदा है ख़ुदा से सलामत रहे वतन हर एक बला से, न पलकों - [एक मुसलसल से इम्तेहान में हूँ](https://bazmeshayari.com/ek-musalsal-se-imtehan/): एक मुसलसल से इम्तेहान में हूँ जब से रब मैं तेरे जहाँ में हूँ, सिर्फ़ इतना सा है - [जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा..](https://bazmeshayari.com/jidhar-jaate-hai-sab/): जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता, ग़लत - [कहते हो तुम्हें हस्ब ए तमन्ना नहीं मिलता](https://bazmeshayari.com/kahte-ho-tumhe-hasb/): कहते हो तुम्हें हस्ब ए तमन्ना नहीं मिलता कम दाम लगाने से तो सौदा नहीं मिलता, वो धूप - [दुनियाँ ए अक़ीदत में अजब रस्म चली है](https://bazmeshayari.com/duniya-e-akidat-me/): दुनियाँ ए अक़ीदत में अजब रस्म चली है जो दश्त में मजनूँ था वो मरकज़ मे वली है, - [बे नियाज़ी के सिलसिले में हूँ](https://bazmeshayari.com/be-niyazi-ke-silsile/): बे नियाज़ी के सिलसिले में हूँ मैं कहाँ अब तेरे नशे में हूँ, हिज्र तेरा मुझे सताता है - [देख लेते हैं अब उस बाम को आते जाते](https://bazmeshayari.com/dekh-lete-hai-ab/): देख लेते हैं अब उस बाम को आते जाते ये भी आज़ार चला जाएगा जाते जाते, दिल के - [मिलने की तरह मुझ से वो पल भर नहीं मिलता](https://bazmeshayari.com/milne-ki-tarah-mujh/): मिलने की तरह मुझ से वो पल भर नहीं मिलता दिल उस से मिला जिस से मुक़द्दर नहीं - [वो हमसफ़र था मगर उससे हम नवाई न थी](https://bazmeshayari.com/wo-humsafar-tha-magar/): वो हमसफ़र था मगर उससे हम नवाई न थी कि धूप छांव का आलम रहा जुदाई न थी, - [कितना नादान है वो मेरे दिल ए हाल से](https://bazmeshayari.com/kitna-naadaan-hai-wo/): कितना नादान है वो मेरे दिल ए हाल से ख़ुद का दिल दुखाता है ख़ुद के सवाल से, - [तेरी आँखों ने आँखों का सिसकना भी नहीं देखा](https://bazmeshayari.com/teri-aankhon-ne-aankhon/): तेरी आँखों ने आँखों का सिसकना भी नहीं देखा मुहब्बत भी नहीं देखी, तड़पना भी नहीं देखा, नहीं - [जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो](https://bazmeshayari.com/jina-mushkil-hai-ki/): जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो हर शख़्स लगता है परेशान ज़रा देख तो लो, - [जवाँ हो ख़ुश अदा हो इस लिए तारीफ़ करता हूँ](https://bazmeshayari.com/javan-ho-khush-adaa/): जवाँ हो ख़ुश अदा हो इस लिए तारीफ़ करता हूँ हसीं हो दिलरुबा हो इस लिए तारीफ़ करता - [झगड़ना काहे का ? मेरे भाई पड़ी रहेगी](https://bazmeshayari.com/jhagadna-kaahe-ka-mere/): झगड़ना काहे का ? मेरे भाई पड़ी रहेगी ये बाप दादा की सब कमाई पड़ी रहेगी, अंधेरे कमरों - [मौत भी क्या अज़ीब हस्ती है...](https://bazmeshayari.com/maut-bhi-kya-azib/): मौत भी क्या अज़ीब हस्ती है जो ज़िंदगी के लिए तरसती है, दिल तो एक शहर है जुदाई - [पिछले बरस तुम साथ थे मेरे...](https://bazmeshayari.com/pichhle-baras-tum-saath/): पिछले बरस तुम साथ थे मेरे और दिसम्बर था महके हुए दिन रात थे मेरे और दिसम्बर था, - [ग़म ए जहाँ को शर्मसार करने वाले क्या हुए](https://bazmeshayari.com/gam-e-jahan-ko/): ग़म ए जहाँ को शर्मसार करने वाले क्या हुए वो सारी उम्र इंतिज़ार करने वाले क्या हुए ? - [हर्फ़ ए गलत न था मुझे समझा गया गलत](https://bazmeshayari.com/harf-e-galat-na-tha/): हर्फ़ ए गलत न था मुझे समझा गया गलत लिखा गया गलत कभी बोला गया गलत, मैं भी - [दिल में औरों के लिए कीना ओ कद रखते हैं](https://bazmeshayari.com/dil-me-auro-ke-liye/): दिल में औरों के लिए कीना ओ कद रखते हैं वही लोग इख़्लास के पर्दे में हसद रखते - [हमेशा साथ रहने की आदत कुछ नहीं होती](https://bazmeshayari.com/hamesha-sath-rahne-ki/): हमेशा साथ रहने की आदत कुछ नहीं होती जो लम्हा मिल गए जी लो, रियाज़त कुछ नहीं होतीं, - [तेरी जुल्फें बिखरने को घटा कह दूँ तो कैसा हो ?](https://bazmeshayari.com/teri-zulfen-bikhrane-ko/): तेरी जुल्फें बिखरने को घटा कह दूँ तो कैसा हो ?   तेरी जुल्फें बिखरने को घटा कह - [एक पल में एक सदी का मज़ा हम से पूछिए](https://bazmeshayari.com/ek-pal-men-ek/): एक पल में एक सदी का मज़ा हम से पूछिए एक पल में एक सदी का मज़ा हम - [चौंक चौंक उठती है महलों की फ़ज़ा रात गए](https://bazmeshayari.com/chauk-chauk-uthti-hai/): चौंक चौंक उठती है महलों की फ़ज़ा रात गए चौंक चौंक उठती है महलों की फ़ज़ा रात गए - [ज़माना आज नहीं डगमगा के चलने का](https://bazmeshayari.com/zamana-aaj-nahi-dagmaga/): ज़माना आज नहीं डगमगा के चलने का ज़माना आज नहीं डगमगा के चलने का सम्भल भी जा कि - [ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो](https://bazmeshayari.com/zindagi-ye-to-nahi/): ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही - [तुझ से बिछड़ के हम भी मुक़द्दर के हो गए](https://bazmeshayari.com/tujh-se-bichhad-ke/): तुझ से बिछड़ के हम भी मुक़द्दर के हो गए फिर जो भी दर मिला है उसी दर - [तुझे है मश्क़ ए सितम का मलाल वैसे ही](https://bazmeshayari.com/tujhe-hai-mashq-e-sitam/): तुझे है मश्क़ ए सितम का मलाल वैसे ही तुझे है मश्क़ ए सितम का मलाल वैसे ही - [वो लोग ही हर दौर में महबूब रहे हैं](https://bazmeshayari.com/wo-log-hi-har-daur/): वो लोग ही हर दौर में महबूब रहे हैं वो लोग ही हर दौर में महबूब रहे हैं - [मेरा ख़ामोश रह कर भी उन्हें सब कुछ सुना देना](https://bazmeshayari.com/mera-khamosh-rah-kar/): मेरा ख़ामोश रह कर भी उन्हें सब कुछ सुना देना मेरा ख़ामोश रह कर भी उन्हें सब कुछ - [ऐ मेरे हम नशीं चल कहीं और चल](https://bazmeshayari.com/ae-mere-ham-nashin/): ऐ मेरे हम नशीं चल कहीं और चल ऐ मेरे हम नशीं चल कहीं और चल इस चमन - [एक अजनबी ख़याल में ख़ुद से जुदा रहा](https://bazmeshayari.com/ek-ajnabi-khyal-me/): एक अजनबी ख़याल में ख़ुद से जुदा रहा एक अजनबी ख़याल में ख़ुद से जुदा रहा नींद आ - [आइने का मुँह भी हैरत से खुला रह जाएगा](https://bazmeshayari.com/aaeene-ka-munh-bhi/): आइने का मुँह भी हैरत से खुला रह जाएगा जो भी देखेगा तुझे वो देखता रह जाएगा, हम - [मोहब्बत के सिवा हर्फ़ ओ बयाँ से कुछ नहीं होता](https://bazmeshayari.com/mohabbat-ke-siwa-harf/): मोहब्बत के सिवा हर्फ़ ओ बयाँ से कुछ नहीं होता हवा साकिन रहे तो बादबाँ से कुछ नहीं - [जब से उनका ख्याल रखा है](https://bazmeshayari.com/jab-se-unka-khyal/): जब से उनका ख्याल रखा है दिल ने मुश्किल में डाल रखा है, उन पर दिल ये आ - [कहो तो आज दिल ए बे क़रार कैसे हो ?](https://bazmeshayari.com/kaho-to-aaj-dil/): कहो तो आज दिल ए बे क़रार कैसे हो ? शब ए अलम के सताए नज़ार कैसे हो - [भीगा हुआ है आँचल आँखों में भी नमी है](https://bazmeshayari.com/bhiga-hua-hai-aanchal/): भीगा हुआ है आँचल आँखों में भी नमी है फैला हुआ है काजल आँखों में भी नमी है, - [अपने साये से भी अक्सर डर जाते है लोग](https://bazmeshayari.com/apne-saye-se-bhi/): अपने साये से भी अक्सर डर जाते है लोग जाने अनजाने में गुनाह कर जाते है लोग, लिखी - [ज़िन्दगी ने लिया है ऐसा इम्तिहाँ मेरा](https://bazmeshayari.com/zindagi-ne-liye-hai/): ज़िन्दगी ने लिया है ऐसा इम्तिहाँ मेरा सदा ही साथ रहा है गम ए दौराँ मेरा, दिन ओ - [दुनियाँ की बुलंदी के तलबगार नहीं हैं](https://bazmeshayari.com/duniya-ki-bulandi-ke/): दुनियाँ की बुलंदी के तलबगार नहीं हैं हम अहल ए ख़िरद तेरे परस्तार नहीं हैं, बरगद की तरह - [जिस वक़्त वालिदैन ने जनाज़े उठाये होंगे](https://bazmeshayari.com/jis-waqt-validain-ne/): जिस वक़्त वालिदैन ने जनाज़े उठाये होंगे उस वक़्त कितने खून के आँसू बहाए होंगे, मुंसफ सज़ा कहाँ - [बताओ दिल की बाज़ी में भला क्या बात गहरी थी ?](https://bazmeshayari.com/bataao-dil-ki-baazi/): बताओ दिल की बाज़ी में भला क्या बात गहरी थी ? कहा, यूँ तो सभी कुछ ठीक था - [अपने अंदाज़ में औरों से जुदा लगते हो](https://bazmeshayari.com/apne-andaj-men-auro/): अपने अंदाज़ में औरों से जुदा लगते हो सब बला लगते हैं तुम रद ए बला लगते हो, - [नाम ए मुहब्बत का यही इस्तिआरा है](https://bazmeshayari.com/naam-e-muhabbat-ka/): नाम ए मुहब्बत का यही इस्तिआरा है जो नहीं है हासिल वही होता हमारा है, माज़ी में छोड़ - [कुछ इस लिए भी तह ए आसमान मारा गया](https://bazmeshayari.com/kuch-is-liye-bhi/): कुछ इस लिए भी तह ए आसमान मारा गया मैं अपने वक़्त से पहले यहाँ उतारा गया, ये - [हमें ये खौफ़ था एक दिन यहीं से टूटेंगे](https://bazmeshayari.com/hamen-ye-khauf-tha/): हमें ये खौफ़ था एक दिन यहीं से टूटेंगे हमारे ख्वाब तुम्हारी तहीं से टूटेंगे, बददुआ तो नहीं - [ये ज़हमत भी तो रफ़्ता रफ़्ता रहमत हो ही जाती है](https://bazmeshayari.com/ye-jahmat-bhi-to/): ये ज़हमत भी तो रफ़्ता रफ़्ता रहमत हो ही जाती है मुसलसल गम से गम सहने की आदत - [दूर ख्वाबों से मुहब्बत से किनारा कर के](https://bazmeshayari.com/door-khwabon-se-muhabbat/): दूर ख्वाबों से मुहब्बत से किनारा कर के जैसे गुजरेगी गुजारेंगे गुज़ारा कर के, अब तो दावा भी - [लिखतें हैं दिल का हाल सुबह ओ शाम मुसलसल](https://bazmeshayari.com/likhte-hai-dil-ka/): लिखतें हैं दिल का हाल सुबह ओ शाम मुसलसल तुम आते हो बहुत याद, सुबह ओ शाम मुसलसल, - [ज़ाब्ते और ही मिस्दाक़ पे रखे हुए हैं](https://bazmeshayari.com/zaabte-aur-hi-misdaaq/): ज़ाब्ते और ही मिस्दाक़ पे रखे हुए हैं आजकल सिदक़ ओ सफ़ा ताक़ पे रखे हुए हैं, वो - [कितनी सदियाँ ना रसी की इंतिहा में खो गईं](https://bazmeshayari.com/kitni-sadiyan-naa-rasi/): कितनी सदियाँ ना रसी की इंतिहा में खो गईं बे जहत नस्लों की आवाज़ें ख़ला में खो गईं, - [जो होगा सब ठीक होगा होने दो जो होना है](https://bazmeshayari.com/jo-hoga-sab-thik/): जो होगा सब ठीक होगा होने दो जो होना है मुँह देखे की बातें है सब किस ने - [फिर आईना ए आलम शायद कि निखर जाए](https://bazmeshayari.com/fir-aaeena-e-alam/): फिर आईना ए आलम शायद कि निखर जाए फिर अपनी नज़र शायद ताहद्द ए नज़र जाए, सहरा पे - [नसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं](https://bazmeshayari.com/nasib-aazmane-ke-din/): नसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं क़रीब उन के आने के दिन आ रहे हैं, जो दिल - [हँसी में हक़ जता कर घर जमाई छीन लेता है](https://bazmeshayari.com/hansi-me-haque-jata/): हँसी में हक़ जता कर घर जमाई छीन लेता है मेरे हिस्से की टूटी चारपाई छीन लेता है, - [दरख्तों से गिरे सूखे हुए पत्ते भी ये इक़रार करते हैं](https://bazmeshayari.com/darakhton-se-gire-sukhe/): दरख्तों से गिरे सूखे हुए पत्ते भी ये इक़रार करते हैं जिन्हें कल तक मुहब्बत थी वो अब - [ज़ख़्मों को रफ़ू कर लें दिल शाद करें फिर से](https://bazmeshayari.com/zakhmon-ko-rafoo-kar/): ज़ख़्मों को रफ़ू कर लें दिल शाद करें फिर से ख़्वाबों की कोई दुनिया आबाद करें फिर से, - [सज सँवर कर रहा करो अच्छी लगती हो](https://bazmeshayari.com/saj-sanvar-kar-raha/): सज सँवर कर रहा करो अच्छी लगती हो झुमके, बालियाँ, पाज़ेब पहना करो अच्छी लगती हो, मुस्कुराते लब - [ख़िज़ाँ रसीदा चमन में अक्सर](https://bazmeshayari.com/khijaan-rasidaa-chaman-me/): ख़िज़ाँ रसीदा चमन में अक्सर खिला खिला सा गुलाब देखा, गज़ब का हुस्न ओ शबाब देखा ज़मीन पर - [आसमान से इनायतें न तुझे मिलीं न मुझे मिलीं](https://bazmeshayari.com/aasmaan-se-inayaten-naa/): आसमान से इनायतें न तुझे मिलीं न मुझे मिलीं मुहब्बतों से राहतें न तुझे मिलीं न मुझे मिलीं, - [किस क़दर साहब ए क़िरदार समझते हैं मुझे](https://bazmeshayari.com/kis-qadar-sahab-e/): किस क़दर साहब ए क़िरदार समझते हैं मुझे मुझको था ज़ो’म मेरे यार समझते हैं मुझे, अब तो - [बार ए गम ए हयात उठाया तो रो पड़े](https://bazmeshayari.com/baar-e-gam-ehayat/): बार ए गम ए हयात उठाया तो रो पड़े जब ज़ीस्त ने मजाक उड़ाया तो रो पड़े, रहता - [बताओ कौन कहता है ? मुहब्बत बस कहानी है](https://bazmeshayari.com/bataao-kaun-kahta-hai/): बताओ कौन कहता है ? मुहब्बत बस कहानी है मुहब्बत तो सहीफ़ा है, मुहब्बत आसमानी है, मुहब्बत को - [नींद नहीं आती कितनी अकेली हो गई](https://bazmeshayari.com/neend-nahi-aati-kitni/): नींद नहीं आती कितनी अकेली हो गई रफ़ू करते करते ज़िन्दगी पहेली हो गई, ये हसरतें भी ख़्वाब - [हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो](https://bazmeshayari.com/har-ek-ghar-men/): हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो अगर न हो कहीं ऐसा तो एहतिजाज भी - [नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है](https://bazmeshayari.com/nayi-nayi-aakhen-ho/): नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है कुछ दिन शहर में घूमे लेकिन अब घर - [आज ज़रा फ़ुर्सत पाई थी...](https://bazmeshayari.com/aaj-zara-fursat-paai/): आज ज़रा फ़ुर्सत पाई थी आज उसे फिर याद किया बंद गली के आख़िरी घर को खोल के - [मुँह की बात सुने हर कोई...](https://bazmeshayari.com/munh-ki-baat-sune/): मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन आवाज़ों के बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने - [हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी](https://bazmeshayari.com/har-taraf-har-jagah/): हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी, सुब्ह से शाम तक बोझ ढोता - [जो हो एक बार वो हर बार हो ऐसा नहीं होता](https://bazmeshayari.com/jo-ho-ek-baar/): जो हो एक बार वो हर बार हो ऐसा नहीं होता हमेशा एक ही से प्यार हो ऐसा - [तुम अपने अक़ीदों के नेज़े...](https://bazmeshayari.com/tum-apne-akido-ke/): तुम अपने अक़ीदों के नेज़े हर दिल में उतारे जाते हो, हम लोग मोहब्बत वाले हैं तुम ख़ंजर - [तू ख़ुश है गर मुझ से जुदा होने पर](https://bazmeshayari.com/tu-khush-hai-gar/): तू ख़ुश है गर मुझ से जुदा होने पर कोई गिला नहीं फिर तेरे बे वफ़ा होने पर, - [बेचैन बहुत फिरना घबराए हुए रहना](https://bazmeshayari.com/bechain-bahut-firna-ghabraye/): बेचैन बहुत फिरना घबराए हुए रहना एक आग सी जज़्बों की दहकाए हुए रहना, छलकाए हुए चलना ख़ुशबू - [पर्बत तेरे पहलू में अगर खाई नहीं है](https://bazmeshayari.com/parbat-tere-pahlu-men/): पर्बत तेरे पहलू में अगर खाई नहीं है काहे की बुलंदी जहाँ गहराई नहीं है, अब कोई वहाँ - [सीधे साधे लोग थे पहले घर भी सादा होता था](https://bazmeshayari.com/sidhe-saadhe-log-the/): सीधे साधे लोग थे पहले घर भी सादा होता था कमरे कम होते थे और दालान कुशादा होता - [मशवरे पर न कहीं धूप के चलने लग जाएँ](https://bazmeshayari.com/mashware-par-na-kahin/): मशवरे पर न कहीं धूप के चलने लग जाएँ आदमी मोम बनें और पिघलने लग जाएँ, जैसे माहौल - [हर दिन है मुहब्बत का, हर रात मुहब्बत की](https://bazmeshayari.com/har-din-hai-muhabbat/): हर दिन है मुहब्बत का, हर रात मुहब्बत की हम अहल ए मुहब्बत में, हर बात मुहब्बत की, - [मुझे इल्म है तुम रास्ते से पलट जाओगे](https://bazmeshayari.com/mujhe-ilm-hai-tum/): मुझे इल्म है तुम रास्ते से पलट जाओगे फिर तुम्हारे साथ सफ़र की इब्तिदा क्या करना ? वैसे - [दिलजलों से दिल्लगी अच्छी नहीं](https://bazmeshayari.com/diljalon-se-dillagi-achchi/): दिलजलों से दिल्लगी अच्छी नहीं रोने वालों से हँसी अच्छी नहीं, मुँह बनाता है बुरा क्यूँ वक़्त ए - [मेरी तन्हाई बढ़ाते हैं चले जाते है](https://bazmeshayari.com/meri-tanhaai-badhaate-hai/): मेरी तन्हाई बढ़ाते हैं चले जाते है हँस तालाब पे आते हैं चले जाते हैं, इसलिए अब मैं - [पानी आँख में भर कर लाया जा सकता है](https://bazmeshayari.com/paani-aankh-me-bhar/): पानी आँख में भर कर लाया जा सकता है अब भी जलता शहर बचाया जा सकता है, एक - [जब से तेरा ख्याल रखा है](https://bazmeshayari.com/jab-se-tera-khyal/): जब से तेरा ख्याल रखा है दिल ने मुश्किल में डाल रखा है, आप पर दिल ये आ - [ये तमन्ना थी कि तकमील ए तमन्ना करते](https://bazmeshayari.com/ye-tamanna-thi-ki/): ये तमन्ना थी कि तकमील ए तमन्ना करते सामने तुझ को बिठा के हम तेरी पूजा करते, कुछ - [खींच कर रात की दीवार पे मारे होते](https://bazmeshayari.com/khich-kar-raat-ki/): खींच कर रात की दीवार पे मारे होते मेरे हाथों में अगर चाँद सितारे होते, यार ! क्या - [उसके नज़दीक ग़म ए तर्क ए वफ़ा](https://bazmeshayari.com/uske-najdik-gam-e/): उसके नज़दीक ग़म ए तर्क ए वफ़ा कुछ भी नहीं मुतमइन ऐसा है वो जैसे हुआ कुछ भी - [हो चराग़ ए इल्म रौशन ठीक से](https://bazmeshayari.com/ho-charag-e-ilm/): हो चराग़ ए इल्म रौशन ठीक से लोग वाक़िफ़ हों नई तकनीक से, इल्म से रौशन तो है - [मोड़ था कैसा तुझे था खोने वाला मैं](https://bazmeshayari.com/mod-tha-kaisa-tujhe/): मोड़ था कैसा तुझे था खोने वाला मैं रो ही पड़ा हूँ कभी न रोने वाला मैं, क्या - [कभी कभी कितना नुक़सान उठाना पड़ता है](https://bazmeshayari.com/kabhi-kabhi-kitna-nuksan/): कभी कभी कितना नुक़सान उठाना पड़ता है ऐरों ग़ैरों का एहसान उठाना पड़ता है, टेढ़े मेढ़े रस्तों पर - [एक रात आती है एक रात जाती है](https://bazmeshayari.com/ek-raat-aati-hai/): एक रात आती है एक रात जाती है गेसुओं के साए में किस को नींद आती है, सिलसिला - [जाग उठेंगे दर्द पुराने ज़ख़्मों की अँगनाई में](https://bazmeshayari.com/jaag-uthenge-dard-puraane/): जाग उठेंगे दर्द पुराने ज़ख़्मों की अँगनाई में दिल की चोट उभर आएगी मत निकलो पुर्वाई में, कोयल - [बा वक़्त ए शाम सूरज से हुकुमत छीन लेता है](https://bazmeshayari.com/baa-waqt-e-shaam/): बा वक़्त ए शाम सूरज से हुकुमत छीन लेता है सहर होते ही सितारों से क़यादत छीन लेता - [बहुत उदास है दिल जाने माजरा क्या है](https://bazmeshayari.com/bahut-udaas-hai-dil/): बहुत उदास है दिल जाने माजरा क्या है मेरे नसीब में गम के सिवा धरा क्या है, मैं - [सुकुन के दिन फ़रागत की रात से भी गए](https://bazmeshayari.com/sukun-ke-din-faragat/): सुकुन के दिन फ़रागत की रात से भी गए तुझे गँवा के हम भारी कायनात से भी गए, - [कोई महबूब सितमगर भी तो हो सकता है](https://bazmeshayari.com/koi-mahbub-sitamgar-bhi/): कोई महबूब सितमगर भी तो हो सकता है फूल के हाथ में खंजर भी तो हो सकता है, - [जिसके साथ अपनी माँ की दुआ होती है](https://bazmeshayari.com/jiske-saath-apni-maan/): जिसके साथ अपनी माँ की दुआ होती है उसके मुक़द्दर में जन्नत की हवा होती है, जिन्हें माँ - [फूल का शाख़ पे आना भी बुरा लगता है](https://bazmeshayari.com/phool-ka-shaakh-pe/): फूल का शाख़ पे आना भी बुरा लगता है तू नहीं है तो ज़माना भी बुरा लगता है, - [हर घड़ी चश्म ए ख़रीदार में रहने के लिए](https://bazmeshayari.com/har-ghadi-chashm-e/): हर घड़ी चश्म ए ख़रीदार में रहने के लिए कुछ हुनर चाहिए बाज़ार में रहने के लिए, मैं - [मुझपे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मेंरे साथ न चल](https://bazmeshayari.com/mujhpe-hai-saikdo-ilzam/): मुझपे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मेंरे साथ न चल तू भी हो जाएगा बदनाम मेंरे साथ न चल, तू - [परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है](https://bazmeshayari.com/paro-ko-khol-zamana/): परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है, मिला है हुस्न - [इश्क़ से जाम से बरसात से डर लगता है](https://bazmeshayari.com/ishq-se-jaam-se/): इश्क़ से जाम से बरसात से डर लगता है यार तुम क्या हो कि हर बात से डर - [सभी कहें मेरे ग़मख़्वार के अलावा भी](https://bazmeshayari.com/sabhi-kahen-mere-gamkhwar/): सभी कहें मेरे ग़मख़्वार के अलावा भी कोई तो बात करूँ यार के अलावा भी, बहुत से ऐसे - [वो दुश्मन ए जाँ जान से प्यारा भी कभी था](https://bazmeshayari.com/wo-dushman-e-jaan/): वो दुश्मन ए जाँ जान से प्यारा भी कभी था अब किस से कहें कोई हमारा भी कभी - [ये जो नंग थे ये जो नाम थे मुझे खा गए](https://bazmeshayari.com/ye-jo-nang-the/): ये जो नंग थे ये जो नाम थे मुझे खा गए ये ख़याल ए पुख़्ता जो ख़ाम थे - [पाबंदियों से अपनी निकलते वो पा न थे](https://bazmeshayari.com/pabandiyo-se-apni-nikalte/): पाबंदियों से अपनी निकलते वो पा न थे सब रास्ते खुले थे मगर हम पे वा न थे, - [इस नाज़ इस अंदाज़ से तुम हाए चलो हो](https://bazmeshayari.com/is-naaz-is-andaz/): इस नाज़ इस अंदाज़ से तुम हाए चलो हो रोज़ एक ग़ज़ल हमसे कहलवाए चलो हो, रखना है - [मुग़ालता है उरूज ओ ज़वाल थोड़ी है](https://bazmeshayari.com/mugaalta-hai-uroozo-zawal/): मुग़ालता है उरूज ओ ज़वाल थोड़ी है हमारी आँख के शीशे में बाल थोड़ी है, हमारे दिल में - [दिल ए नादान की बात थी और कुछ नहीं](https://bazmeshayari.com/dil-e-naadaan-ki/): दिल ए नादान की बात थी और कुछ नहीं मुहब्बत स्याह रात थी और कुछ भी नहीं, आसानियों - [वो दर्द वो वफ़ा वो मुहब्बत तमाम शुद](https://bazmeshayari.com/wo-dard-wo-wafa/): वो दर्द वो वफ़ा वो मुहब्बत तमाम शुद लिए दिल में तेरे क़ुर्ब की हसरत तमाम शुद, ये - [रिहा कर मुझे या सज़ा दे ऐ आदिल](https://bazmeshayari.com/riha-kar-mujhe-yaa/): रिहा कर मुझे या सज़ा दे ऐ आदिल कोई तो फ़ैसला तू सुना दे ऐ आदिल, यूँ असीरी - [जब भी तुम चाहों मुझे ज़ख्म नया देते रहो](https://bazmeshayari.com/jab-bhi-tum-chaho/): जब भी तुम चाहों मुझे ज़ख्म नया देते रहो बाद में फिर मुझे सहने की दुआ देते रहो, - [सौ बार चमन महका सौ बार बहार आई](https://bazmeshayari.com/sau-baar-chaman-mahka/): सौ बार चमन महका सौ बार बहार आई दुनिया की वही रौनक़ दिल की वही तन्हाई, एक लहज़ा - [हक़ मेहर कितना होगा बताया नहीं गया](https://bazmeshayari.com/haq-mehar-kitna-hoga/): हक़ मेहर कितना होगा बताया नहीं गया शहज़ादियों को बाम पे लाया नहीं गया, कमज़ोर सी हदीस सुना - [मुस्कुरा कर चलो खिलखिला कर चलो](https://bazmeshayari.com/muskura-kar-chalo-khilkhila/): मुस्कुरा कर चलो खिलखिला कर चलो दिल किसी का मगर ना दुखा कर चलो, जिसकी ख़ुशबू जहाँ में - [उसकी ख़ातिर रोना हँसना अच्छा लगता है](https://bazmeshayari.com/uski-khaatir-rona-hasna/): उसकी ख़ातिर रोना हँसना अच्छा लगता है जैसे धूप में बारिश होना अच्छा लगता है, ख़्वाब की कच्ची - [दामन ए सद चाक को एक बार सी लेता हूँ मैं](https://bazmeshayari.com/daman-e-sad-chaak/): दामन ए सद चाक को एक बार सी लेता हूँ मैं तुम अगर कहते हो तो कुछ रोज़ - [फ़ना के तीर हवा के परों में रखे हैं](https://bazmeshayari.com/fana-ke-teer-hawa/): फ़ना के तीर हवा के परों में रखे हैं कि हम घरों की जगह मक़बरों में रखे है, - [आँसूं भी जो मिल जाएँ तो मुस्काती हैं](https://bazmeshayari.com/aansoo-bhi-jo-mil/): आँसूं भी जो मिल जाएँ तो मुस्काती हैं बेटियाँ तो बड़ी मासूम हैं जज़्बाती हैं, ख़िदमत से उतर - [उसने कहा कि मुझसे तुम्हें कितना प्यार है ?](https://bazmeshayari.com/usne-kaha-ki-mujhse/): उसने कहा कि मुझसे तुम्हें कितना प्यार है ? मैंने कहा सितारों का भी कोई शुमार है, उसने - [मुझे यकीं है अब हमारा जहान बदलेगा](https://bazmeshayari.com/mujhe-yaqin-hai-ab/): मुझे यकीं है अब हमारा जहान बदलेगा ज़मीन बदलेगी और आसमान बदलेगा, ये खार बदलेंगे और खारज़ाद बदलेगा - [तुम सोज़ ए तमन्ना क्या जानों](https://bazmeshayari.com/tum-soz-e-tamanna/): तुम सोज़ ए तमन्ना क्या जानों तुम दर्द ए मुहब्बत क्या समझों ? तुम दिल का तड़पना क्या - [आइए आसमाँ की ओर चलें](https://bazmeshayari.com/aaiye-aasmaan-ki-or/): आइए आसमाँ की ओर चलें साथ ले कर ज़मीं का शोर चलें, चाँद उल्फ़त का इस्तिआरा है जिस - [ख़िज़ाँ में ओढ़ के क़ौल ओ...](https://bazmeshayari.com/khija-men-odh-ke/): ख़िज़ाँ में ओढ़ के क़ौल ओ क़रार का मौसम बहार ढूँढ रही है बहार का मौसम, वो मेरे - [आँखों पर पलकों का बोझ नहीं होता](https://bazmeshayari.com/aankhon-par-palko-ka/): आँखों पर पलकों का बोझ नहीं होता दर्द का रिश्ता अपनी आन नहीं खोता, बस्ती के हस्सास दिलों - [रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम](https://bazmeshayari.com/rang-pairahan-ka-khushboo/): रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम मौसम ए गुल है तुम्हारे बाम पर आने का नाम, - [मेरे ही लहू पर गुज़र औक़ात करो हो](https://bazmeshayari.com/mere-hi-lahoo-par/): मेरे ही लहू पर गुज़र औक़ात करो हो मुझ से ही अमीरों की तरह बात करो हो, दिन - [मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा](https://bazmeshayari.com/mere-junoon-ka-natija/): मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा, गिरा दिया है तो साहिल पे - [हसीं चेहरों से सूरत आश्नाई होती रहती है](https://bazmeshayari.com/hasin-chehron-se-soorat/): हसीं चेहरों से सूरत आश्नाई होती रहती है समझ लो इब्तिदाई कारवाई होती रहती है, हमारी बीवी और - [इश्क़ का नास करोगी मुझे मालूम न था](https://bazmeshayari.com/ishq-ka-naas-karogi/): इश्क़ का नास करोगी मुझे मालूम न था मेरे पल्ले ही पड़ोगी मुझे मालूम न था, एक महीने - [हो मोमिनों को हमेशा ही पयाम ए ईद मुबारक](https://bazmeshayari.com/ho-momino-ko-hamesha/): हो मोमिनों को हमेशा ही पयाम ए ईद मुबारक गगन के पार से आया है सलाम ए ईद - [हम वो बुझदिल नहीं जो यलगार से डर जाएँगे](https://bazmeshayari.com/hum-wo-bujhdil-nahin/): हम वो बुझदिल नहीं जो यलगार से डर जाएँगे तुम ने ये समझा कि हम तलवार से डर - [सियासत मुफ़ादात में खो गई है](https://bazmeshayari.com/siyasat-mufadaat-me-kho/): सियासत मुफ़ादात में खो गई है हुकुमत न जाने कहाँ सो गई है ? आवामी मसायेल इन्हें तब - [मुझ से बेहतर तो मिल गया है तुम्हें](https://bazmeshayari.com/mujhse-behtar-to-mil/): मुझ से बेहतर तो मिल गया है तुम्हें और अल्लह से क्या गिला है तुम्हें, हम इकट्ठे नहीं - [दुनिया को शानदार का मतलब नहीं पता](https://bazmeshayari.com/duniya-ko-shandar-ka/): दुनिया को शानदार का मतलब नहीं पता मतलब हमारे यार का मतलब नहीं पता, मैं ने कहा तलाश - [किस को रौशन बना रहे हो तुम](https://bazmeshayari.com/kis-ko-raushan-bana/): किस को रौशन बना रहे हो तुम इतना जो बुझते जा रहे हो तुम लोग पागल बनाए जा - [अभी तो ज़िंदा हैं कहते हो यारा क्या होगा](https://bazmeshayari.com/abhi-to-zinda-hai/): अभी तो ज़िंदा हैं कहते हो यारा क्या होगा हमारे बाद न जाने तुम्हारा क्या होगा हमारा ख़ुद - [होती है तेरे नाम से वहशत कभी कभी](https://bazmeshayari.com/hoti-hai-tere-naam/): होती है तेरे नाम से वहशत कभी कभी बरहम हुई है यूँ भी तबीअत कभी कभी, ऐ दिल - [वो दिलनवाज़ है लेकिन नज़रशनास नहीं](https://bazmeshayari.com/wo-dilnawaz-hai-lekin/): वो दिलनवाज़ है लेकिन नज़रशनास नहीं मेरा इलाज मेरे चारागर के पास नहीं, तड़प रहे हैं ज़बाँ पर - [कुछ यादगार ए शहर ए सितमगर ही ले चलें](https://bazmeshayari.com/kuch-yaadgaare-shahare-sitamgar/): कुछ यादगार ए शहर ए सितमगर ही ले चलें आए हैं उस की गली में तो पत्थर ही - [झूठ का बोलना आसान नहीं होता है](https://bazmeshayari.com/jhuth-ka-bolna-aasaan/): झूठ का बोलना आसान नहीं होता है दिल तेरे बाद परेशान नहीं होता है, सब तेरे बाद यही - [उस ने यूँ रास्ता दिया मुझको](https://bazmeshayari.com/usne-yun-raasta-diya/): उस ने यूँ रास्ता दिया मुझको रास्ते से हटा दिया मुझको दूर करने के वास्ते ख़ुद से ख़ुद - [उम्र भर सीने में एक दर्द दबाए रखा](https://bazmeshayari.com/umr-bhar-sine-me/): उम्र भर सीने में एक दर्द दबाए रखा एक बेनाम से रिश्ते को निभाए रखा, था मुझे वहम - [मैं सोज़िश ए ग़म ए दौराँ से यूँ जला ख़ामोश](https://bazmeshayari.com/main-sozish-e-gam/): मैं सोज़िश ए ग़म ए दौराँ से यूँ जला ख़ामोश कि जैसे बज़्म में जलता हो एक दिया - [फ़ासला जब मुझे एहसास ए थकन बख़्शेगा](https://bazmeshayari.com/faasla-jab-mujhe-ehsas/): फ़ासला जब मुझे एहसास ए थकन बख़्शेगा पाँव को फूल भी काँटों की चुभन बख़्शेगा, कितने सूरज इसी - [अपनी सोचें शिकस्त ओ ख़ाम न कर](https://bazmeshayari.com/apni-sochen-shikast-o/): अपनी सोचें शिकस्त ओ ख़ाम न कर चल पड़ा है तो फिर क़याम न कर, मैं भी हस्सास - [लोग बैठे हैं यहाँ हाथों में ख़ंजर ले कर](https://bazmeshayari.com/log-baithe-hain-yahan/): लोग बैठे हैं यहाँ हाथों में ख़ंजर ले कर तुम कहाँ आ गए ये शाख़ ए गुल ए - [दीवाना हूँ मैं बिखरे मोती चुनता हूँ](https://bazmeshayari.com/deewana-hoon-main-bikhre/): दीवाना हूँ मैं बिखरे मोती चुनता हूँ लम्हा लम्हा जोड़ के सदियाँ बुनता हूँ, तन्हा कमरे सूना आँगन - [तेरे जहाँ से अलग एक जहान चाहता हूँ](https://bazmeshayari.com/tere-jahan-se-alag/): तेरे जहाँ से अलग एक जहान चाहता हूँ नई ज़मीन नया आसमान चाहता हूँ, बदन की क़ैद से - [अपने ही भाई को हमसाया बनाते क्यूँ हो](https://bazmeshayari.com/apne-hi-bhai-ko/): अपने ही भाई को हमसाया बनाते क्यूँ हो अपने सहन के बीच में दीवार लगाते क्यूँ हो ? - [कुएँ जो पानी की बिन प्यास चाह रखते हैं](https://bazmeshayari.com/kuyen-jo-paani-ki/): कुएँ जो पानी की बिन प्यास चाह रखते हैं मगर नहंग भी दरिया की थाह रखते हैं, शहादत - [जब भी बैठता हूँ लिखने](https://bazmeshayari.com/jab-bhi-baithta-hoon/): जब भी बैठता हूँ लिखने कुछ लिखा जाता नहीं, एक उसके सिवा कोई मौज़ूअ मुझे याद आता नहीं, - [दूसरा फ़ैसला नहीं होता](https://bazmeshayari.com/dusra-faisla-nahi-hota/): दूसरा फ़ैसला नहीं होता इश्क़ में मशवरा नहीं होता, ख़ुद ही सौ रास्ते निकलते हैं जब कोई रास्ता - [वो बेवफ़ा है उसे बेवफ़ा कहूँ कैसे](https://bazmeshayari.com/wo-bewafa-hai-use/): वो बेवफ़ा है उसे बेवफ़ा कहूँ कैसे बुरा ज़रूर है लेकिन बुरा कहूँ कैसे ? जो कश्तियों को - [चश्म ए तर है सहाब है क्या है](https://bazmeshayari.com/chashme-tar-hai-sahaab/): चश्म ए तर है सहाब है क्या है अश्क गौहर है आब है क्या है ? मरना जीना - [ये किस ने कहा तुम कूच करो](https://bazmeshayari.com/ye-kis-ne-kaha/): ये किस ने कहा तुम कूच करो बातें न बनाओ इंशा जी ये शहर तुम्हारा अपना है इसे - [खो गया है जो उस को खोने दो](https://bazmeshayari.com/kho-gaya-hai-jo/): खो गया है जो उस को खोने दो फिर नया ख़्वाब मुझ को बोने दो, सुनों ऐ बस्तियों - [नई पोशाक पहने है पुराने ख़्वाब की हसरत](https://bazmeshayari.com/nayi-poshak-pahne-hai/): नई पोशाक पहने है पुराने ख़्वाब की हसरत मैं हँस कर टाल देती हूँ दिल ए बेताब की - [वो काश मान लेता कभी हमसफ़र मुझे](https://bazmeshayari.com/wo-kash-maan-leta/): वो काश मान लेता कभी हमसफ़र मुझे तो रास्तो के पेच का होता न डर मुझे, बेशक ये - [ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है](https://bazmeshayari.com/ye-mohabbat-jo-mohabbat/): ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है आग सीने में उसी ने तो लगाई हुई है, एक - [कभी इस से कभी उस से मिला देता है](https://bazmeshayari.com/kabhi-isse-kabhi-usse/): कभी इस से कभी उस से मिला देता है मे’यार अपना क्यूँ नज़रों से गिरा देता है ? - [वो कौन है जो मुझ पे तअस्सुफ़ नहीं करता](https://bazmeshayari.com/wo-kaun-hai-jo/): वो कौन है जो मुझ पे तअस्सुफ़ नहीं करता पर मेरा जिगर देख कि मैं उफ़्फ़ नहीं करता, - [मरज़ ए इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे](https://bazmeshayari.com/maraj-e-ishq-jise/): मरज़ ए इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे न दवा याद रहे और न दुआ याद रहे, - [अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे](https://bazmeshayari.com/ab-to-ghabra-ke/): अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे मर के भी चैन न पाया तो किधर - [कभी नज़रे मिला के कभी झुका के लूटा](https://bazmeshayari.com/kabhi-nazaren-mila-ke/): कभी नज़रे मिला के कभी झुका के लूटा कभी हँस के तो कभी मुस्कुरा के लूटा, मौज ए - [धूप सरों पर और दामन में साया है](https://bazmeshayari.com/dhoop-saro-par-aur/): धूप सरों पर और दामन में साया है सुन तो सही जो पेड़ो ने फ़रमाया है, कैसे कह - [बैर दुनिया से क़बीले से लड़ाई लेते](https://bazmeshayari.com/bair-duniya-se-kabile/): बैर दुनिया से क़बीले से लड़ाई लेते एक सच के लिए किस किस से बुराई लेते, आबले अपने - [ये बात फिर मुझे सूरज बताने आया है](https://bazmeshayari.com/ye-baat-fir-mujhe/): ये बात फिर मुझे सूरज बताने आया है अज़ल से मेरे तआ’क़ुब में मेरा साया है, बुलंद होती - [तेरा हाथ हाथ में हो अगर](https://bazmeshayari.com/tera-hath-hath-me/): तेरा हाथ, हाथ में हो अगर तो सफर ही असल ए हयात है, मेरे हर कदम पे हैं - [जाने कब किस के छलकने से हो दुनिया ग़र्क़ ए आब](https://bazmeshayari.com/jaane-kab-kis-ke/): जाने कब किस के छलकने से हो दुनिया ग़र्क़ ए आब मेरी मुट्ठी में है दरिया साग़र ओ - [ठीक है कि ये जहाँ मुद्दत से उर्यानी पे था](https://bazmeshayari.com/thik-hai-ki-ye/): ठीक है कि ये जहाँ मुद्दत से उर्यानी पे था पर किसे यूँ नाज़ कल तक चाक दामानी - [दिल मेरा रक़्साँ है जब से अक़्ल इस शोरिश में है](https://bazmeshayari.com/dil-mers-raksan-hai/): दिल मेरा रक़्साँ है जब से अक़्ल इस शोरिश में है लर्ज़िश ए पा आसमाँ या ये जहाँ - [जाने क्यूँ बर्बाद होना चाहता है](https://bazmeshayari.com/jaane-kyun-barbad-hona/): जाने क्यूँ बर्बाद होना चाहता है सूरत ए फ़रहाद होना चाहता है, ज़ेहन से आख़िर में अब थक - [मैं न कहता था कि शहरों में न जा यार मेरे](https://bazmeshayari.com/main-na-kahta-tha/): मैं न कहता था कि शहरों में न जा यार मेरे सोंधी मिट्टी ही में होती है वफ़ा - [आधुनिक युग में विकसित साहित्यिक विधा](https://bazmeshayari.com/adhunik-yug-ki-kavita/): आधुनिक युग की कविता 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध और 20वीं शताब्दी के प्रारंभ से विकसित हुई साहित्यिक विधा - [रीति काव्य विधा व इसकी विशेषताएँ](https://bazmeshayari.com/riti-kavy-madhyakalin-kaal/): रीति काव्य मध्यकालीन काल के दौरान उभरी हिन्दी साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा है, जो लगभग 16वीं से - [भक्ति कविताएँ और इसकी विशेषताएँ](https://bazmeshayari.com/bhakti-poetries-and-its/): भक्ति कविता भारतीय साहित्य में एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली विधा है जो मध्यकालीन काल में उभरी, आठवीं से - [हिंदी कविता और ग़ज़लें](https://bazmeshayari.com/hindi-kavita-aur-gazals/): हिंदी कविता और ग़ज़लें हिंदी कविता और ग़ज़लें भारत की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग - [दर्द ख़ामोश रहा टूटती आवाज़ रही](https://bazmeshayari.com/dard-khamosh-raha-tutati/): दर्द ख़ामोश रहा टूटती आवाज़ रही मेरी हर शाम तेरी याद की हमराज़ रही, शहर में जब भी - [मेरे लबों पे उसी आदमी की प्यास न हो](https://bazmeshayari.com/mere-labo-pe-usi/): मेरे लबों पे उसी आदमी की प्यास न हो जो चाहता है मेरे सामने गिलास न हो, ये - [जब मेरे होंठों पे मेरी तिश्नगी रह जाएगी](https://bazmeshayari.com/jab-mere-honthon-pe/): जब मेरे होंठों पे मेरी तिश्नगी रह जाएगी तेरी आँखों में भी थोड़ी सी नमी रह जाएगी, सरफिरा - [जो शजर बे लिबास रहते हैं](https://bazmeshayari.com/jo-shajar-be-libas/): जो शजर बे लिबास रहते हैं उन के साए उदास रहते हैं, चंद लम्हात की ख़ुशी के लिए - [ग़म इसका कुछ नहीं है कि मैं काम आ गया](https://bazmeshayari.com/gam-iska-kuch-nahi/): ग़म इसका कुछ नहीं है कि मैं काम आ गया ग़म ये है कि क़ातिलों में तेरा नाम - [हमारी वजह ए ज़वाल क्या है ? सवाल ये है](https://bazmeshayari.com/hamari-wajah-e-jawal/): हमारी वजह ए ज़वाल क्या है ? सवाल ये है हराम क्या है, हलाल क्या है ? सवाल - [बुग्ज़ ए इस्लाम में पड़े पड़े ही](https://bazmeshayari.com/bugz-e-islam-me/): बुग्ज़ ए इस्लाम में पड़े पड़े ही यहाँ कितनो के क़िरदार गिरे है, सभी मुन्सफ़ गिरे, मनसब गिरे - [कितनी मोहब्बतों से पहला सबक़ पढ़ाया](https://bazmeshayari.com/kitni-mohabbaton-se-pahla/): कितनी मोहब्बतों से पहला सबक़ पढ़ाया मैं कुछ न जानता था सब कुछ मुझे सिखाया, अनपढ़ था और - [नेक बच्चे दिल से करते हैं अदब उस्ताद का](https://bazmeshayari.com/nek-bachche-dil-se/): नेक बच्चे दिल से करते हैं अदब उस्ताद का बाप की उल्फ़त से बेहतर है ग़ज़ब उस्ताद का, - [दरियाँ का शोर मचाना और समंदर का ख़ामोश रहना](https://bazmeshayari.com/dariya-ka-shor-machana/): दरियाँ का शोर मचाना और समंदर का ख़ामोश रहना वक़्त आने पर हर एक के हुनर ए खास - [दिल के लूट जाने का इज़हार ज़रूरी तो नहीं](https://bazmeshayari.com/dil-ke-loot-jaane/): दिल के लूट जाने का इज़हार ज़रूरी तो नहीं ये तमाशा सर ए बाज़ार ज़रूरी तो नहीं, मुझे - [हमारे सब्र के दामन को तार तार न कर](https://bazmeshayari.com/hamare-sabr-ke-daman/): हमारे सब्र के दामन को तार तार न कर निगाह ए जोक तलब इतना बे क़रार न कर, - [मेरी मुहब्बत मेरे जज़्बात सिर्फ़ तुम से हैं](https://bazmeshayari.com/meri-mohabbat-mere-jazbat/): मेरी मुहब्बत मेरे जज़्बात सिर्फ़ तुम से हैं मेरे हमदम मेरी क़ायनात सिर्फ तुम से हैं, गैर महरम - [फ़लक का हर सितारा रात की आँखों का मोती है](https://bazmeshayari.com/falak-ka-har-sitara/): फ़लक का हर सितारा रात की आँखों का मोती है जिसे शबनम सहर की शोख़ किरनों में पिरोती - [सब जल गया जलते हुए ख़्वाबों के असर से](https://bazmeshayari.com/sab-jal-gaya-jalte/): सब जल गया जलते हुए ख़्वाबों के असर से उठता है धुआँ दिल से निगाहों से जिगर से, - [बेख़बर दुनिया को रहने दो ख़बर करते हो क्यूँ](https://bazmeshayari.com/bekhabar-duniya-ko-rahne/): बेख़बर दुनिया को रहने दो ख़बर करते हो क्यूँ दोस्तो मेरे दुखों को मुश्तहर करते हो क्यूँ ? - [नहीं बदलता यहाँ कुछ भी आरज़ू से फ़क़त](https://bazmeshayari.com/nahi-badalta-yahan-kuchh/): नहीं बदलता यहाँ कुछ भी आरज़ू से फ़क़त नहीं बदलता यहाँ कुछ भी जुस्तजू से फ़क़त, मुझे यक़ीन - [कभी फूलों कभी खारों से बचना](https://bazmeshayari.com/kabhi-foolo-kabhi-khaaro/): कभी फूलों कभी खारों से बचना कभी रक़ीब कभी यारों से बचना, जान बुझ कर धोखा न खा - [हमारे जैसे तुम्हे ख़राबो में मिलेंगे](https://bazmeshayari.com/hamare-jaise-tumhe-kharabo/): हमारे जैसे तुम्हे ख़राबो में मिलेंगे धुल पड़ी कहीं किताबो में मिलेंगे, ज़फागर से किये वफ़ाओ में मिलेंगे - [ये किसका कर रहा है इंतज़ार आदमी](https://bazmeshayari.com/ye-kiska-kar-raha/): ये किसका कर रहा है इंतज़ार आदमी जब ख़ुद ही ला सकता है बहार आदमी, मिलता नहीं मुफ़्त - [दर्द हो या कि रंज़ ओ गम हर हाल में मुस्कुराते चलो](https://bazmeshayari.com/dard-ho-yaa-ki/): दर्द हो या कि रंज़ ओ गम हर हाल में मुस्कुराते चलो गैरों की ख़ुशी की खातिर रस्म - [जला के मिशअल ए जाँ हम जुनूँ सिफ़ात चले](https://bazmeshayari.com/jala-ke-mishal-e/): जला के मिशअल ए जाँ हम जुनूँ सिफ़ात चले जो घर को आग लगाए हमारे साथ चले, दयार - [यारो किसी क़ातिल से कभी प्यार न माँगो](https://bazmeshayari.com/yaaro-kisi-qaatil-se/): यारो किसी क़ातिल से कभी प्यार न माँगो अपने ही गले के लिए तलवार न माँगो, गिर जाओगे - [ये दौर ए ख़िरद है दौर ए जुनूँ](https://bazmeshayari.com/ye-daur-e-khirad/): ये दौर ए ख़िरद है दौर ए जुनूँ इस दौर में जीना मुश्किल है अँगूर की मय के - [हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो](https://bazmeshayari.com/hamko-junoon-kya/): हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़्यादा चाक किए हैं हम ने अज़ीज़ो - [कभी ख़ुद कभी औरो को हटाते रहिए](https://bazmeshayari.com/kabhi-khud-kabhi-auron/): कभी ख़ुद कभी औरो को हटाते रहिए बस यूँ ही रास्तो को सहल बनाते रहिए, कही उठ जाइए - [यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं](https://bazmeshayari.com/yun-to-aapas-me/): यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं मिलने वाले कहीं उल्फ़त में जुदा होते हैं ? - [कोई हमदम न रहा कोई सहारा न रहा](https://bazmeshayari.com/koi-hamdam-na-raha/): कोई हमदम न रहा कोई सहारा न रहा हम किसी के न रहे कोई हमारा न रहा, शाम - [किताब सादा रहेगी कब तक ?](https://bazmeshayari.com/kitab-saada-rahegi-kabtak/): किताब सादा रहेगी कब तक ? कभी तो आगाज़ ए बाब होगा, जिन्होंने बस्तियाँ उजाड़ी है कभी तो - [मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा](https://bazmeshayari.com/mere-jaise-ban-jaaoge/): मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा, - [दुनिया ए तसव्वुर हम आबाद नहीं करते](https://bazmeshayari.com/duniya-e-tasavvur-ham/): दुनिया ए तसव्वुर हम आबाद नहीं करते याद आते हो तुम ख़ुद ही हम याद नहीं करते, वो - [कौन आता है बुझाने प्यास प्यासा देख कर](https://bazmeshayari.com/kaun-aata-hai-bujhaane/): कौन आता है बुझाने प्यास प्यासा देख कर घर चले जाते है सब के सब तमाशा देख कर, - [वो इश्क़ जो हम से रूठ गया...](https://bazmeshayari.com/wo-ishq-jo-ham/): वो इश्क़ जो हम से रूठ गया अब उस का हाल बताएँ क्या ? कोई मेहर नहीं कोई - [एक हम दोनों को ये हालात नहीं कर सकते](https://bazmeshayari.com/ek-hum-dono-ko/): एक हम दोनों को ये हालात नहीं कर सकते ख़ुद को वग्फ़ ए मुज़ाफ़ात नहीं कर सकते, तेरे - [लहू ने क्या तेरे ख़ंजर को दिलकशी दी है](https://bazmeshayari.com/lahoo-ne-kya-tere/): लहू ने क्या तेरे ख़ंजर को दिलकशी दी है कि हम ने ज़ख़्म भी खाए हैं दाद भी - [ये जो ज़िंदगी की किताब है](https://bazmeshayari.com/ye-jo-zindagi-ki/): ये जो ज़िंदगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब है, कहीं एक हसीन सा ख़्वाब है - [कहीं दिरहम कहीं डॉलर कहीं दीनार का झगड़ा](https://bazmeshayari.com/kahin-diraham-kahin-dollor/): कहीं दिरहम कहीं डॉलर कहीं दीनार का झगड़ा कहीं दिरहम कहीं डॉलर कहीं दीनार का झगड़ा कहीं लहँगा - [नाम से गाँधी के चिढ़ और बैर आज़ादी से है](https://bazmeshayari.com/naam-se-gaandhi-ke-chidh/): नाम से गाँधी के चिढ़ और बैर आज़ादी से है नाम से गाँधी के चिढ़ और बैर आज़ादी - [कभी ख़ामोश बैठोगे, कभी कुछ गुनगुनाओगे](https://bazmeshayari.com/kabhi-khamosh-baithoge-kabhi/): कभी ख़ामोश बैठोगे, कभी कुछ गुनगुनाओगे कभी ख़ामोश बैठोगे, कभी कुछ गुनगुनाओगे मैं उतना ही याद आऊँगा मुझे - [और क्या करता बयान ए गम तुम्हारे सामने](https://bazmeshayari.com/aur-kya-karta-bayan/): और क्या करता बयान ए गम तुम्हारे सामने मेरी आँखें हो गई पुरनम तुम्हारे सामने, हम जुदाई में - [तलाश ए जन्नत ओ दोज़ख में रायेगाँ इंसाँ](https://bazmeshayari.com/talash-e-zannat-o/): तलाश ए जन्नत ओ दोज़ख में रायेगाँ इंसाँ तलाश ए जन्नत ओ दोज़ख में रायेगाँ इंसाँ ज़मीं पे - [जब भी हँसी की गर्द में चेहरा छुपा लिया](https://bazmeshayari.com/jab-bhi-hansi-ki/): जब भी हँसी की गर्द में चेहरा छुपा लिया   जब भी हँसी की गर्द में चेहरा छुपा - [कौन है नेक ? कौन बद है यहाँ ?](https://bazmeshayari.com/kaun-hai-nek/): कौन है नेक ? कौन बद है यहाँ ? किसी के हाथों में ये सनद है कहाँ ? - [बुरी है कीजिए नफ़रत निहायत](https://bazmeshayari.com/buri-hai-kijiye-nafarat/): बुरी है कीजिए नफ़रत निहायत बुरी है कीजिए नफ़रत निहायत मिटाए दिल से सदियों की अदावत चलो हम - [दिल में जगह दूँ तुम को अपने पहले से हैं मेहमान बहुत](https://bazmeshayari.com/dil-me-jagah-doon/): दिल में जगह दूँ तुम को अपने पहले से हैं मेहमान बहुत तुम देखो कोई और ठिकाना हो - [चलो तुम को मिलाता हूँ मैं उस मेहमान से पहले](https://bazmeshayari.com/chalo-tum-ko-milata/): चलो तुम को मिलाता हूँ मैं उस मेहमान से पहले जो मेरे जिस्म में रहता था मेरी जान - [बाहर नहीं तो ख़ुद ही के अंदर तलाश कर](https://bazmeshayari.com/bahar-nahi-to-khud/): बाहर नहीं तो ख़ुद ही के अंदर तलाश कर सहरा है जिस जगह पे समुंदर तलाश कर, मुमकिन - [एक ग़म ही तो यार है अपना](https://bazmeshayari.com/ek-gam-hi-to/): एक ग़म ही तो यार है अपना दिल जो उन पर निसार है अपना, हम तो कब के - [हिज्र की शब नाला ए दिल वो सदा देने लगे](https://bazmeshayari.com/hizr-ki-shab-naala/): हिज्र की शब नाला ए दिल वो सदा देने लगे सुनने वाले रात कटने की दुआ देने लगे, - [रो रहा था मैं भरी बरसात थी](https://bazmeshayari.com/ro-raha-tha-main/): रो रहा था मैं भरी बरसात थी हाल क्या खुलता अँधेरी रात थी, मेरे नालों से है बरहम - [कहाँ तक जफ़ा हुस्न वालों की सहते](https://bazmeshayari.com/kahan-tak-zafa-husn/): कहाँ तक जफ़ा हुस्न वालों की सहते जवानी जो रहती तो फिर हम न रहते, लहू था तमन्ना - [फूलों का कुंज ए दिलकश भारत में एक बनाएँ](https://bazmeshayari.com/phoolon-ka-kunj-e/): फूलों का कुंज ए दिलकश भारत में एक बनाएँ हुब्ब ए वतन के पौधे इस में नए लगाएँ, - [मेंरी सदा है गुल ए शम् ए शाम ए आज़ादी](https://bazmeshayari.com/meri-sada-hai-gul/): मेंरी सदा है गुल ए शम् ए शाम ए आज़ादी सुना रहा हूँ दिलों को पयाम ए आज़ादी, - [नाक़ूस से ग़रज़ है न मतलब अज़ाँ से है](https://bazmeshayari.com/naqoos-se-garaz-hai/): नाक़ूस से ग़रज़ है न मतलब अज़ाँ से है मुझ को अगर है इश्क़ तो हिन्दोस्ताँ से है - [यही जगह थी यही दिन था और यही लम्हात](https://bazmeshayari.com/yahi-jagah-thi-yahi/): यही जगह थी यही दिन था और यही लम्हात सरों पे छाई थी सदियों से एक जो काली - [ये हिन्दोस्ताँ है हमारा वतन](https://bazmeshayari.com/ye-hindustan-hai-hamara/): ये हिन्दोस्ताँ है हमारा वतन मोहब्बत की आँखों का तारा वतन, हमारा वतन दिल से प्यारा वतन वो - [किसी के नाम रुत्बा और न ख़द्द ओ ख़ाल से मतलब](https://bazmeshayari.com/kisi-ke-naam-rutba/): किसी के नाम रुत्बा और न ख़द्द ओ ख़ाल से मतलब किरामन कातिबीं को ख़ल्क़ के आमाल से - [सहर जब मुस्कुराई तब कहीं तारों को नींद आई](https://bazmeshayari.com/sahar-jab-muskuraai-tab/): सहर जब मुस्कुराई तब कहीं तारों को नींद आई बहुत मुश्किल से कल शब दर्द के मारों को - [न तो उस्लूब न अंदाज़ गिराँ गुज़रा है](https://bazmeshayari.com/naa-to-usloob-na/): न तो उस्लूब न अंदाज़ गिराँ गुज़रा है उस पे मेरा फ़न ए परवाज़ गिराँ गुज़रा है, ये - [बेबसी से हाथ अपने मलने वाले हम नहीं](https://bazmeshayari.com/bebasi-se-haath-apne/): बेबसी से हाथ अपने मलने वाले हम नहीं मेहरबानी पर किसी की पलने वाले हम नहीं, रहगुज़र अपनी - [चिश्ती ने जिस ज़मीं में पैग़ाम ए हक़ सुनाया](https://bazmeshayari.com/chisti-ne-jis-zamin/): चिश्ती ने जिस ज़मीं में पैग़ाम ए हक़ सुनाया नानक ने जिस चमन में वहदत का गीत गाया, - [वो हर मक़ाम से पहले वो हर मक़ाम के बाद](https://bazmeshayari.com/wo-har-muqam-se/): वो हर मक़ाम से पहले वो हर मक़ाम के बाद सहर थी शाम से पहले सहर है शाम - [हादसे ज़ीस्त की तौक़ीर बढ़ा देते हैं](https://bazmeshayari.com/haadse-zist-ki-tauqeer/): हादसे ज़ीस्त की तौक़ीर बढ़ा देते हैं ऐ ग़म ए यार तुझे हम तो दुआ देते हैं, तेरे - [होंठों पे हँसी आँख में तारों की लड़ी है](https://bazmeshayari.com/honthon-pe-hanseen-aankh/): होंठों पे हँसी आँख में तारों की लड़ी है वहशत बड़े दिलचस्प दो राहे पे खड़ी है, दिल - [ये शीशे, ये सपने, ये रिश्ते ये धागे](https://bazmeshayari.com/ye-shishe-ye-sapne/): ये शीशे, ये सपने, ये रिश्ते ये धागे किसे क्या ख़बर है कहाँ टूट जायें ? मुहब्बत के - [वो है बहुत हसीन और फिर उर्दू बोला करती है](https://bazmeshayari.com/wo-hai-bahut-haseen/): वो है बहुत हसीन और फिर उर्दू बोला करती है मेरे घर के सामने छत पर अक्सर टहला - [आसमानों से न उतरेगा सहीफ़ा कोई](https://bazmeshayari.com/aasmaan-se-na-utarega/): आसमानों से न उतरेगा सहीफ़ा कोई ऐ ज़मीं ढूँढ ले अब अपना मसीहा कोई, फिर दर ए दिल - [दो जहाँ के हुस्न का अरमान आधा रह गया](https://bazmeshayari.com/do-jahan-ke-husn/): दो जहाँ के हुस्न का अरमान आधा रह गया इस सदी के शोर में इंसान आधा रह गया, - [कहिए ऐसी बात जो दिल में लगा दे आग सी](https://bazmeshayari.com/kahiye-aisi-baat-jo/): कहिए ऐसी बात जो दिल में लगा दे आग सी क्या भला होगा किसी का दास्तान ए तूर - [जिस ने बख़्शी है फ़ुग़ाँ उस को सुना भी न सकूँ](https://bazmeshayari.com/jis-ne-bakhshi-hai/): जिस ने बख़्शी है फ़ुग़ाँ उस को सुना भी न सकूँ कैसा नग़्मा है जिसे साज़ पे गा - [किया हम ने जो उन से कुछ ख़िताब आहिस्ता आहिस्ता](https://bazmeshayari.com/kiya-ham-ne-jo/): किया हम ने जो उन से कुछ ख़िताब आहिस्ता आहिस्ता उन्हों ने भी दिया हम को जवाब आहिस्ता - [ख़्वाबों की तरह गोया बिखर जाएँगे हम भी](https://bazmeshayari.com/khwabon-ki-tarah-goya/): ख़्वाबों की तरह गोया बिखर जाएँगे हम भी चुप चाप किसी रोज़ गुज़र जाएँगे हम भी, हम जैसे - [साया ए ज़ुल्फ़ नहीं शोला ए रुख़्सार नहीं](https://bazmeshayari.com/saya-e-zulf-nahin/): साया ए ज़ुल्फ़ नहीं शोला ए रुख़्सार नहीं क्या तेरे शहर में सरमाया ए दीदार नहीं, वक़्त पड़ - [हम अहल ए आरज़ू पे अजब वक़्त आ पड़ा](https://bazmeshayari.com/ham-ahal-e-aarzoo/): हम अहल ए आरज़ू पे अजब वक़्त आ पड़ा हर हर क़दम पे खेल नया खेलना पड़ा, अपना - [सहराओं में जा पहुँची है शहरों से निकल कर](https://bazmeshayari.com/sahraaon-me-ja-pahunchi/): सहराओं में जा पहुँची है शहरों से निकल कर अल्फ़ाज़ की ख़ुश्बू मेंरे होंठों से निकल कर, सीने - [दास्तानों में वो जादू है न तफ़सीरों में है](https://bazmeshayari.com/daastanon-me-wo-jaadu/): दास्तानों में वो जादू है न तफ़सीरों में है जो तेरी आँखों की बेआवाज़ तक़रीरों में है, राएगाँ - [फ़िक्र का सब्ज़ा मिला जज़्बात की काई मिली](https://bazmeshayari.com/fiqr-e-sabza-mila/): फ़िक्र का सब्ज़ा मिला जज़्बात की काई मिली ज़ेहन के तालाब पर क्या नक़्श आराई मिली, मुतमइन होता - [ख़ुश्बू मेंरे बदन में रची है ख़लाओं की](https://bazmeshayari.com/khushboo-mere-badan-me/): ख़ुश्बू मेंरे बदन में रची है ख़लाओं की मैं सैर कर रहा हूँ अभी तक फ़ज़ाओं की, मत - [फूलों की है तख़्लीक़ कि शोलों से बना है](https://bazmeshayari.com/phoolon-ki-hai-takhliq/): फूलों की है तख़्लीक़ कि शोलों से बना है कुंदन सा तेरा जिस्म जो ख़ुश्बू में बसा है, - [पड़ा हुआ मैं किसी आइने के घर में हूँ](https://bazmeshayari.com/pada-hua-main-kisi/): पड़ा हुआ मैं किसी आइने के घर में हूँ ये तेरा शहर है या ख़्वाब के नगर में - [यूँ बने सँवरे हुए से फूल हैं गुलज़ार में](https://bazmeshayari.com/yun-bane-sanvre-hue/): यूँ बने सँवरे हुए से फूल हैं गुलज़ार में सैर को निकली हों जैसे लड़कियाँ बाज़ार में, ये - [कर गए अश्क मेंरी आँख को जल थल क्या क्या](https://bazmeshayari.com/kar-gaye-ashk-meri/): कर गए अश्क मेंरी आँख को जल थल क्या क्या अब के बरसा है तेरी याद का बादल - [वक़्त बे वक़्त ये पोशाक मेंरी ताक में है](https://bazmeshayari.com/waqt-be-waqt-ye/): वक़्त बे वक़्त ये पोशाक मेंरी ताक में है जानता हूँ कि मेंरी ख़ाक मेंरी ताक में है, - [होंठों को फूल आँख को बादा नहीं कहा](https://bazmeshayari.com/honthon-ko-phool-aankh/): होंठों को फूल आँख को बादा नहीं कहा तुझको तेरी अदा से ज़ियादा नहीं कहा, बरता गया हूँ - [हाल ए दिल सुन के मेंरा सर ब गरेबाँ क्यूँ हैं](https://bazmeshayari.com/haal-e-dil-sun/): हाल ए दिल सुन के मेंरा सर ब गरेबाँ क्यूँ हैं जो किया आप ने अब उस पे - [जमी हूँ बर्फ़ की सूरत पिघलना चाहती हूँ मैं](https://bazmeshayari.com/zami-hoon-barf-ki/): जमी हूँ बर्फ़ की सूरत पिघलना चाहती हूँ मैं हिसार ए ज़ात से बाहर निकलना चाहती हूँ मैं, - [घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगे](https://bazmeshayari.com/ghar-se-nikalte-to/): घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगे हर तरफ़ तेज़ हवाएँ हैं बिखर जाओगे, इतना आसाँ - [जो गुल है याँ सो उस गुल-ए-रुख़्सार साथ है](https://bazmeshayari.com/jo-gul-hai-yaan/): जो गुल है याँ सो उस गुल-ए-रुख़्सार साथ है क्या गुल है वो कि जिस के ये गुलज़ार - [बाम पर आता है हमारा चाँद](https://bazmeshayari.com/baam-par-aata-hai/): बाम पर आता है हमारा चाँद आसमाँ से करे किनारा चाँद, आप ही की तलाश में साहब गर्दिशें - [पहलू में बैठ कर वो पाते क्या ?](https://bazmeshayari.com/pahlu-me-baith-kar/): पहलू में बैठ कर वो पाते क्या दिल तो था ही नहीं चुराते क्या ? हिज्र में ग़म - [तुम्हारे हाथ से कल हम भी रो लिए साहिब](https://bazmeshayari.com/tumhare-haath-se-kal/): तुम्हारे हाथ से कल हम भी रो लिए साहिब जिगर के दाग़ जो धोने थे धो लिए साहिब, - [सब ने मिलाए हाथ यहाँ तीरगी के साथ](https://bazmeshayari.com/sab-ne-milaye-haath/): सब ने मिलाए हाथ यहाँ तीरगी के साथ कितना बड़ा मज़ाक़ हुआ रौशनी के साथ, शर्तें लगाई जाती - [लहू न हो तो क़लम तर्जुमाँ नहीं होता](https://bazmeshayari.com/lahoo-na-ho-to/): लहू न हो तो क़लम तर्जुमाँ नहीं होता हमारे दौर में आँसू ज़बाँ नहीं होता, जहाँ रहेगा वहीं - [मैं आसमाँ पे बहुत देर रह नहीं सकता](https://bazmeshayari.com/main-aasmaan-pe-bahut/): मैं आसमाँ पे बहुत देर रह नहीं सकता मगर ये बात ज़मीं से तो कह नहीं सकता, किसी - [किसी के ज़ख्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेगा](https://bazmeshayari.com/kisi-ke-zakhm-par/): किसी के ज़ख्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेगा अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बांधेगा ? - [ये है तो सब के लिए हो ये ज़िद हमारी है](https://bazmeshayari.com/ye-hai-to-sab/): ये है तो सब के लिए हो ये ज़िद हमारी है इस एक बात पे दुनिया से जंग - [मेरी बाहों पे तेरी ज़ुल्फ़ जो लहराई है](https://bazmeshayari.com/meri-baahon-pe-teri/): मेरी बाहों पे तेरी ज़ुल्फ़ जो लहराई है मैं ये समझा कि बियाबाँ में बहार आई है नाम - [मिलें हम कभी तो ऐसे कि हिजाब भूल जाए](https://bazmeshayari.com/mile-ham-kabhi-to/): मिलें हम कभी तो ऐसे कि हिजाब भूल जाए मैं सवाल भूल जाऊं तू जवाब भूल जाए, तू - [संसार से भागे फिरते हो भगवान को तुम क्या पाओगे](https://bazmeshayari.com/sansar-se-bhaage-firte/): संसार से भागे फिरते हो भगवान को तुम क्या पाओगे इस लोक को भी अपना न सके उस - [तन्हाई से है सोहबत दिन रात जुदाई में](https://bazmeshayari.com/tanhaai-se-hai-sohbat/): तन्हाई से है सोहबत दिन रात जुदाई में क्या ख़ूब गुज़रती है औक़ात जुदाई में, रुख़्सत हो चला - [कमर बाँधे हुए चलने को याँ सब यार बैठे हैं](https://bazmeshayari.com/kamar-baandhe-hue-chalne/): कमर बाँधे हुए चलने को याँ सब यार बैठे हैं बहुत आगे गए बाक़ी जो हैं तय्यार बैठे - [अब इश्क़ तमाशा मुझे दिखलाए है कुछ और](https://bazmeshayari.com/ab-ishq-tamasha-mujhe/): अब इश्क़ तमाशा मुझे दिखलाए है कुछ और कहता हूँ कुछ और मुँह से निकल जाए है कुछ - [बैठे तो पास हैं पर आँख उठा सकते नहीं](https://bazmeshayari.com/baithe-to-paas-hai/): बैठे तो पास हैं पर आँख उठा सकते नहीं जी लगा है पर अभी हाथ लगा सकते नहीं, - [बरहम कभी क़ासिद से वो महबूब न होता](https://bazmeshayari.com/barhm-kabhi-qasid-se/): बरहम कभी क़ासिद से वो महबूब न होता गर नाम हमारा सर ए मक्तूब न होता, ख़ूबान ए - [मैं ने यूँ इन सर्द लबों को रखा...](https://bazmeshayari.com/main-ne-yun-in/): मैं ने यूँ इन सर्द लबों को रखा उन रुख़्सारों पर जैसे कोई भूल से रख दे फूलों - [ऐ जुनूँ तेरा अभी तक न मुक़द्दर बदला](https://bazmeshayari.com/ae-junoon-tera-abhi/): ऐ जुनूँ तेरा अभी तक न मुक़द्दर बदला शहर बदला न किसी हाथ का पत्थर बदला, ज़िंदगी बख़्श - [राहें वीरान तो उजड़े हुए कुछ घर होंगे](https://bazmeshayari.com/raahen-veeran-to-ujde/): राहें वीरान तो उजड़े हुए कुछ घर होंगे दश्त से बढ़ के मेंरे शहर के मंज़र होंगे, यूँ - [युसुफ़ न थे मगर सर ए बाज़ार आ गए](https://bazmeshayari.com/yusuf-na-the-magar/): युसुफ़ न थे मगर सर ए बाज़ार आ गए ख़ुश फहमियाँ ये थी कि ख़रीदार आ गए, आवाज़ - [एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा](https://bazmeshayari.com/ek-suraj-tha-ki/): एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा आँख हैरान है क्या शख़्स ज़माने से उठा, किस - [जुस्तुजू खोए हुओं की उम्र भर करते रहे](https://bazmeshayari.com/justazoo-khoye-huo-ki/): जुस्तुजू खोए हुओं की उम्र भर करते रहे चाँद के हमराह हर शब सफ़र करते रहे, रास्तों का - [वो जो दिल में तेरा मुक़ाम है](https://bazmeshayari.com/wo-jo-dil-me-tera-muqam-hai/): वो जो दिल में तेरा मुक़ाम है किसी और को वो देना नहीं, वो जो रिश्ता तुझ से - [दिल की दुनिया में दुनिया न आये कभी](https://bazmeshayari.com/dil-ki-dunia-me/): दिल की दुनिया में दुनिया न आये कभी मेरे मौला ये दुनिया न भाये कभी, जिस को क़ुरआँ - [लिबास तन से उतार देना, किसी को बांहों के हार देना](https://bazmeshayari.com/libas-tan-se-utaar/): लिबास तन से उतार देना, किसी को बांहों के हार देना फिर उसके जज़्बों को मार देना, अगर - [मुक़म्मल दो ही दानों पर ये तस्बीह ए मुहब्बत है](https://bazmeshayari.com/muqammal-do-hi-daano/): मुक़म्मल दो ही दानों पर ये तस्बीह ए मुहब्बत है जो आये तीसरा दाना ये डोरी टूट जाती - [तुझे पुकारा है बे इरादा](https://bazmeshayari.com/tujhe-pukaara-hai-be/): तुझे पुकारा है बे इरादा जो दिल दुखा है बहुत ज़ियादा, नदीम हो तेरा हर्फ़ ए शीरीं तो - [फिर हरीफ़ ए बहार हो बैठे](https://bazmeshayari.com/fir-harif-e-bahar/): फिर हरीफ़ ए बहार हो बैठे जाने किस किस को आज रो बैठे, थी मगर इतनी राएगाँ भी - [हर सम्त परेशाँ तिरी आमद के क़रीने](https://bazmeshayari.com/har-samt-pareshan-teri/): हर सम्त परेशाँ तिरी आमद के क़रीने धोके दिए क्या क्या हमें बाद ए सहरी ने, हर मंजिल - [सोच बदल जाती है,हालात बदल जाते हैं](https://bazmeshayari.com/socha-badal-jaati-hai/): सोच बदल जाती है,हालात बदल जाते हैं वक्त के साथ,लोगो के ख्यालात बदल जाते हैं, इस तरह चेहरे - [उजड़े हुए हड़प्पा के आसार की तरह](https://bazmeshayari.com/ujde-hue-haddapa-ke/): उजड़े हुए हड़प्पा के आसार की तरह ज़िन्दा हैं लोग वक़्त की रफ़्तार की तरह, क्या रहना ऐसे - [निगाह ए यार के बदलने में कुछ देर नहीं लगती](https://bazmeshayari.com/nigaah-e-yaar-ke/): निगाह ए यार के बदलने में कुछ देर नहीं लगती हसीं ख़्वाबों के जलने में कुछ देर नहीं - [कोई सुनता ही नहीं किस को सुनाने लग जाएँ](https://bazmeshayari.com/koi-sunta-hi-nahin/): कोई सुनता ही नहीं किस को सुनाने लग जाएँ दर्द अगर उठे तो क्या शोर मचाने लग जाएँ, - [जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते है कई](https://bazmeshayari.com/jaanta-hoon-ki-tujhe/): जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते है कई पूछना था कि तेरा ध्यान भी रखता है कोई - [मेरे उसके दरमियाँ ये राब्ता है और बस](https://bazmeshayari.com/mere-uske-darmiyan-ye/): मेरे उसके दरमियाँ ये राब्ता है और बस उम्र भर एक दूसरे को सोचना है और बस, ज़िन्दगी - [चल निकलती हैं ग़म ए यार से बातें क्या क्या](https://bazmeshayari.com/chal-nikalti-hai-gam/): चल निकलती हैं ग़म ए यार से बातें क्या क्या हम ने भी कीं दर ओ दीवार से - [ऐसा है कि सब ख़्वाब मुसलसल नहीं होते](https://bazmeshayari.com/aisa-hai-ki-sab/): ऐसा है कि सब ख़्वाब मुसलसल नहीं होते जो आज तो होते हैं मगर कल नहीं होते, अंदर - [अब तक यही सुना था कि बाज़ार बिक गए](https://bazmeshayari.com/ab-tak-yahi-suna/): अब तक यही सुना था कि बाज़ार बिक गए उनकी गली गए तो ख़रीदार बिक गए, लगने लगी - [जैसा नज़र का शौक़ था वैसा न कर सका](https://bazmeshayari.com/jaisa-nazar-ka-shauk/): जैसा नज़र का शौक़ था वैसा न कर सका शहर करिश्मा साज़ तमाशा न कर सका, दुनिया ने - [ये ज़माने की वफ़ाएं मेरे काम की नहीं](https://bazmeshayari.com/ye-zamane-ki-wafayen/): ये ज़माने की वफ़ाएं मेरे काम की नहीं मुझे उसकी वफ़ा चाहिए किसी आम की नहीं, उसकी तो - [असर उस को ज़रा नहीं होता](https://bazmeshayari.com/asar-us-ko-zara/): असर उस को ज़रा नहीं होता रंज राहत फ़ज़ा नहीं होता, बेवफ़ा कहने की शिकायत है तो भी - [वो जो हम में तुम में क़रार था...](https://bazmeshayari.com/wo-jo-ham-me/): वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो वही यानी वादा - [रह वफ़ा में कोई साहिब ए जुनूँ न मिला](https://bazmeshayari.com/rah-e-wafa-me/): , गुलों के रुख़ पे वही ताज़गी का आलम है न जाने उन को ग़म ए रोज़गार क्यूँ - [हाल में अपने मगन हो फ़िक्र ए आइंदा न हो](https://bazmeshayari.com/haal-me-apne-magan/): हाल में अपने मगन हो फ़िक्र ए आइंदा न हो ये उसी इंसान से मुमकिन है जो ज़िंदा - [कभी अपने इश्क़ पे तब्सिरे कभी तज़्किरे रुख़ ए यार के](https://bazmeshayari.com/kabhi-apne-ishq-pe/): कभी अपने इश्क़ पे तब्सिरे कभी तज़्किरे रुख़ ए यार के यूँही बीत जाएँगे ये भी दिन जो - [ऐ जुनूँ कुछ तो खुले आख़िर मैं किस मंज़िल में हूँ](https://bazmeshayari.com/ae-junoon-kuch-to/): ऐ जुनूँ कुछ तो खुले आख़िर मैं किस मंज़िल में हूँ हूँ जवार ए यार मैं या कूचा - [और कोई दम की मेहमाँ है गुज़र जाएगी रात](https://bazmeshayari.com/aur-koi-dam-kee/): और कोई दम की मेहमाँ है गुज़र जाएगी रात ढलते ढलते आप अपनी मौत मर जाएगी रात, ज़िंदगी - [तो क्या ये तय है कि अब उम्र भर नहीं मिलना](https://bazmeshayari.com/to-kya-ye-tay/): तो क्या ये तय है कि अब उम्र भर नहीं मिलना तो फिर ये उम्र भी क्यों तुम - [बता ऐ अब्र मुसावात क्यूँ नहीं करता](https://bazmeshayari.com/bata-ae-abr-musavat/): बता ऐ अब्र मुसावात क्यूँ नहीं करता हमारे गाँव में बरसात क्यूँ नहीं करता ? महाज़ ए इश्क़ - [बिछड़ कर उसका दिल लग भी गया तो क्या लगेगा](https://bazmeshayari.com/bichhad-kar-uska-dil/): बिछड़ कर उसका दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ - [पराई आग पे रोटी नहीं बनाऊँगा](https://bazmeshayari.com/parai-aag-pe-roti/): पराई आग पे रोटी नहीं बनाऊँगा मैं भीग जाऊँगा छतरी नहीं बनाऊँगा, अगर ख़ुदा ने बनाने का इख़्तियार - [देखो अभी लहू की एक धार चल रही है](https://bazmeshayari.com/dekho-abhi-lahoo-ki/): देखो अभी लहू की एक धार चल रही है बाज़ू कटे हैं फिर भी तलवार चल रही है, - [बदन और रूह में झगड़ा पड़ा है](https://bazmeshayari.com/badan-aur-rooh-me/): बदन और रूह में झगड़ा पड़ा है कि हिस्सा इश्क़ में किस का बड़ा है ? हुजूम ए - [हर गली कूचे में रोने की सदा मेरी है](https://bazmeshayari.com/har-gali-kuche-me/): हर गली कूचे में रोने की सदा मेरी है शहर में जो भी हुआ है वो ख़ता मेरी - [दिल की बात लबों पर ला कर...](https://bazmeshayari.com/dil-ki-baat-labo/): दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं हम ने सुना था इस - [अगर न रोये तो आँखों पे बोझ पड़ता है](https://bazmeshayari.com/agar-na-royen-to/): अगर न रोये तो आँखों पे बोझ पड़ता है करें जो गिर्या तो रातों पे बोझ पड़ता है, - [उस बाप से नाता तोड़ लिया जिस बाप का था बेहद प्यारा](https://bazmeshayari.com/us-baap-se-naata-tod-liya/): उस बाप से नाता तोड़ लिया जिस बाप का था बेहद प्यारा तू माल हड़प कर बैठा है - [दिल मोहब्बत में मुब्तला हो जाए](https://bazmeshayari.com/dil-mohabbat-me-mubtila-ho/): दिल मोहब्बत में मुब्तला हो जाए जो अभी तक न हो सका हो जाए, तुझ में ये ऐब - [ज़र्द मौसम के एक शजर जैसी](https://bazmeshayari.com/zard-mausam-ke-ek-sazar-jaisi/): ज़र्द मौसम के एक शजर जैसी सारी बस्ती है मेरे घर जैसी, जब बिगड़ता है वक़्त इंसाँ का - [ख़त्म है बादल की जब से साएबानी धूप में](https://bazmeshayari.com/khatm-hai-baadal-ki-jab-se/): ख़त्म है बादल की जब से साएबानी धूप में आग होती जा रही है ज़िंदगानी धूप में, चाँद - [नई पोशाक पहने है पुराने ख़्वाब की हसरत](https://bazmeshayari.com/nayi-poshaak-pahne-hai/): नई पोशाक पहने है पुराने ख़्वाब की हसरत मैं हँस कर टाल देती हूँ दिल ए बेताब की - [वो काश मान लेता कभी हमसफ़र मुझे](https://bazmeshayari.com/wo-kaash-maan-leta-kabhi-humsafar/): वो काश मान लेता कभी हमसफ़र मुझे तो रास्तो के पेच का होता न डर मुझे, बेशक ये - [चेहरा देखें तेरे होंठ और पलकें देखें](https://bazmeshayari.com/chehra-dekhen-tere-honth-2/): चेहरा देखें तेरे होंठ और पलकें देखें दिल पे आँखें रखे तेरी साँसें देखें, सुर्ख़ लबों से सब्ज़ - [एक हवेली हूँ उस का दर भी हूँ](https://bazmeshayari.com/ek-haveli-hoon-us/): एक हवेली हूँ उस का दर भी हूँ ख़ुद ही आँगन ख़ुद ही शजर भी हूँ, अपनी मस्ती - [कुछ ज़रूरत से कम किया गया है](https://bazmeshayari.com/kuch-zarurat-se-kam/): कुछ ज़रूरत से कम किया गया है तेरे जाने का ग़म किया गया है, ता क़यामत हरे भरे - [भुला दिया था जिस को एक शाम याद आ गया](https://bazmeshayari.com/bhoola-diya-tha-jis/): भुला दिया था जिस को एक शाम याद आ गया ग़ज़ाल देख कर वो ख़ुश ख़िराम याद आ - [सब की कहानी एक तरफ़ है मेरा क़िस्सा एक तरफ़](https://bazmeshayari.com/sab-ki-kahani-ek/): सब की कहानी एक तरफ़ है मेरा क़िस्सा एक तरफ़ एक तरफ़ सैराब हैं सारे और मैं प्यासा - [ज़ौक़ ए गुनाह ओ अज़्म ए पशेमाँ लिए हुए](https://bazmeshayari.com/zauq-e-gunah-o/): ज़ौक़ ए गुनाह ओ अज़्म ए पशेमाँ लिए हुए क्या क्या हुनर हैं हज़रत ए इंसाँ लिए हुए, - [जुदाई रूह को जब इश्तिआल देती है](https://bazmeshayari.com/judaai-rooh-ko-jab/): जुदाई रूह को जब इश्तिआल देती है ख़ुनुक हवा भी बदन को उबाल देती है, अगर हो वक़्त - [फ़िराक़ ओ हिज्र के लम्हे जो टल गए होते](https://bazmeshayari.com/firaq-o-hizr-ke/): फ़िराक़ ओ हिज्र के लम्हे जो टल गए होते हमारे ज़ेहन के ख़ाके बदल गए होते, वो मस्लहत - [दिल है सहरा से कुछ उदास बहुत](https://bazmeshayari.com/dil-hai-sahra-se/): दिल है सहरा से कुछ उदास बहुत घर को वीराँ करूँ तो घास बहुत, रोब पड़ जाए इस - [अब रहा क्या जो लुटाना रह गया](https://bazmeshayari.com/ab-raha-kya-jo/): अब रहा क्या जो लुटाना रह गया ज़िंदगी का एक ताना रह गया, एक तअल्लुक़ जिन से था - [एक लम्हा कि मिलें सारे ज़माने जिसमें](https://bazmeshayari.com/ek-lamha-ki-mile/): एक लम्हा कि मिलें सारे ज़माने जिसमें एक नुक्ता सभी हिकमत के ख़ज़ाने जिसमें, दायरा जिसमें समा जाएँ - [सूखी ज़मीं को याद के बादल भिगो गए](https://bazmeshayari.com/sookhi-zamin-ko-yaad/): सूखी ज़मीं को याद के बादल भिगो गए पलकों को आज बीते हुए पल भिगो गए, आँसू फ़लक - [जिसकी ख़ातिर मैने दुनिया की तरफ़ देखा न था](https://bazmeshayari.com/jiski-khatir-maine-duniya/): जिसकी ख़ातिर मैने दुनिया की तरफ़ देखा न था वो मुझे यूँ छोड़ जाएगा कभी सोचा न था, - [गुज़िश्ता रात कोई चाँद घर में उतरा था](https://bazmeshayari.com/guzishta-raat-koi-chaand/): गुज़िश्ता रात कोई चाँद घर में उतरा था वो एक ख़्वाब था या बस नज़र का धोखा था - [छा गया मेरे मुक़द्दर पे अंधेरा ऐ दोस्त](https://bazmeshayari.com/chha-gaya-mere-muqaddar/): छा गया मेरे मुक़द्दर पे अंधेरा ऐ दोस्त तू ने शानों पे जो गेसू को बिखेरा ऐ दोस्त, - [सदाक़तों को ये ज़िद है ज़बाँ तलाश करूँ](https://bazmeshayari.com/sadaqaton-ko-ye-zidd/): सदाक़तों को ये ज़िद है ज़बाँ तलाश करूँ जो शय कहीं न मिले मैं कहाँ तलाश करूँ ? - [गुलों को रंग सितारों को रौशनी के लिए](https://bazmeshayari.com/gulon-ko-rang-sitaron/): गुलों को रंग सितारों को रौशनी के लिए ख़ुदा ने हुस्न दिया तुम को दिलबरी के लिए, तुम्हारे - [कैसे सुनाऊँ ग़म की कहानी साँसों पर है बार बहुत](https://bazmeshayari.com/kaise-sunaaoon-gam-ki/): कैसे सुनाऊँ ग़म की कहानी साँसों पर है बार बहुत माज़ी कहता है कह जाओ हाल को है - [जिस्म के घरौंदे में आग शोर करती है](https://bazmeshayari.com/jism-ke-gharaunde-me/): जिस्म के घरौंदे में आग शोर करती है दिल में जब मोहब्बत की चाँदनी उतरती है, शाम के - [यहाँ जो ज़ख़्म मिलते हैं वो सिलते हैं यहीं मेरे](https://bazmeshayari.com/yahan-jo-zakhm-milte/): यहाँ जो ज़ख़्म मिलते हैं वो सिलते हैं यहीं मेरे तुम्हारे शहर के सब लोग तो दुश्मन नहीं - [अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा](https://bazmeshayari.com/agar-talaash-karoon-koi/): अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा ? तुम्हें ज़रूर कोई - [झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं](https://bazmeshayari.com/jhuki-jhuki-see-nazar/): झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं, - [कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे](https://bazmeshayari.com/kitne-aish-se-rahte/): कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे - [चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है](https://bazmeshayari.com/chupke-chupke-raat-din/): चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है, - [इतनी मुद्दत बाद मिले हो](https://bazmeshayari.com/itni-muddat-baad-mile/): इतनी मुद्दत बाद मिले हो किन सोचों में गुम फिरते हो ? इतने ख़ाइफ़ क्यूँ रहते हो ? - [ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया](https://bazmeshayari.com/ae-mohabbat-tere-anjaam/): ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यूँ आज तेरे नाम पे रोना आया, यूँ तो हर - [हम को किस के ग़म ने मारा ये कहानी फिर सही](https://bazmeshayari.com/hum-ko-kis-ke/): हम को किस के ग़म ने मारा ये कहानी फिर सही किस ने तोड़ा दिल हमारा ये कहानी - [ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल ए यार होता](https://bazmeshayari.com/ye-na-thi-humari/): ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल ए यार होता अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता, तेरे - [दिल में एक लहर सी उठी है अभी](https://bazmeshayari.com/dil-me-ek-lahar/): दिल में एक लहर सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी, कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज - [कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी](https://bazmeshayari.com/kuchh-to-hawa-bhi/): कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता - [जब से तू ने मुझे दीवाना बना रखा है](https://bazmeshayari.com/jab-se-tu-ne/): जब से तू ने मुझे दीवाना बना रखा है संग हर शख़्स ने हाथों में उठा रखा है, - [घुटन भी देख रही है मुझे हैरानी से](https://bazmeshayari.com/ghutan-bhi-dekh-rahi/): घुटन भी देख रही है मुझे हैरानी से कहीं मैं ऊब ही जाऊँ न उस जवानी से, सज़ा - [इस मिट्टी को ऐसे खेल खिलाया हम ने](https://bazmeshayari.com/is-mitti-ko-aise/): इस मिट्टी को ऐसे खेल खिलाया हम ने ख़ुद को रोज़ बिगाड़ा रोज़ बनाया हम ने, जो सोचा - [इसी लिए तो नहीं कटती रात आदमी की](https://bazmeshayari.com/isi-liye-to-nahin/): इसी लिए तो नहीं कटती रात आदमी की ख़ुदा की ज़ात से मुश्किल है ज़ात आदमी की, नए - [है सफ़र में कारवान बहर ओ बर किस के लिए](https://bazmeshayari.com/hai-safar-me-kaarwaan/): है सफ़र में कारवान बहर ओ बर किस के लिए हो रहा है एहतिमाम ए ख़ुश्क ओ तर - [निराला अजब नकचढ़ा आदमी हूँ](https://bazmeshayari.com/niraala-azab-nakchadha-aadmi/): निराला अजब नकचढ़ा आदमी हूँ जो तुक की कहो बेतुका आदमी हूँ, बड़े आदमी तो बड़े चैन से - [दे रहे हैं जिस को तोपों की सलामी आदमी](https://bazmeshayari.com/de-rahe-hain-jis/): दे रहे हैं जिस को तोपों की सलामी आदमी क्या कहूँ तुम से कि है कितना हरामी आदमी, - [ये मत पूछो कि कैसा आदमी हूँ](https://bazmeshayari.com/ye-mat-puchho-ki/): ये मत पूछो कि कैसा आदमी हूँ करोगे याद, ऐसा आदमी हूँ, मेरा नाम ओ नसब क्या पूछते - [उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा](https://bazmeshayari.com/us-ke-dushman-hai/): उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा, इतना - [राहज़न आदमी रहनुमा आदमी](https://bazmeshayari.com/raahjan-aadmi-rahnuma-aadmi/): राहज़न आदमी रहनुमा आदमी बार हा बन चुका है ख़ुदा आदमी, हाए तख़्लीक़ की कार पर्दाज़ियाँ ख़ाक सी - [कहानी ठीक बनती है नज़ारें ठीक मिलते हैं](https://bazmeshayari.com/kahani-thik-banti-hai/): कहानी ठीक बनती है नज़ारें ठीक मिलते हैं अमूमां वक़्त अच्छा हो तो सारे ठीक मिलते हैं, वजह - [अपनों को नहीं समझा अपना बेगाना समझ कर छोड़ दिया](https://bazmeshayari.com/apno-ko-nahin-samjha/): अपनों को नहीं समझा अपना बेगाना समझ कर छोड़ दिया अफ़्सोस हक़ीक़त को तुम ने अफ़्साना समझ के - [आरज़ू ,हसरत, तमन्ना, मुद्दआ कोई नहीं](https://bazmeshayari.com/aarzoo-hasrat-tamanna-muddaa/): आरज़ू ,हसरत, तमन्ना, मुद्दआ कोई नहीं जब से तुम हो मेरे दिल में दूसरा कोई नहीं, बेवफ़ाई का - [मेरे दर्द की तुझे क्या ख़बर है जिसे ख़बर कोई और है](https://bazmeshayari.com/mere-dard-ki-tujhe/): मेरे दर्द की तुझे क्या ख़बर है जिसे ख़बर कोई और है तू इलाज रहने दे चारागर मेरा - [रखते हैं दुश्मनी भी जताते हैं प्यार भी](https://bazmeshayari.com/rakhte-hain-dushmani-bhi/): रखते हैं दुश्मनी भी जताते हैं प्यार भी हैं कैसे ग़म गुसार मेरे ग़म गुसार भी, अफ़्सुर्दगी भी - [जान जब तक फ़िदा नहीं होती](https://bazmeshayari.com/jaan-jab-tak-fida/): जान जब तक फ़िदा नहीं होती पूरी रस्म ए वफ़ा नहीं होती, शीशा टूटे तो होती है आवाज़ - [बेवफ़ा से भी प्यार होता है](https://bazmeshayari.com/bewafa-se-bhi-pyar/): बेवफ़ा से भी प्यार होता है यार कुछ भी हो यार होता है, साथ उस के जो है - [दस्तूर मोहब्बत का सिखाया नहीं जाता](https://bazmeshayari.com/dastur-mohabbat-ka-sikhaya/): दस्तूर मोहब्बत का सिखाया नहीं जाता ये ऐसा सबक़ है जो पढ़ाया नहीं जाता, कमसिन हैं वो ऐसे - [मौत की सुन के ख़बर प्यार जताने आए](https://bazmeshayari.com/maut-ki-sun-ke/): मौत की सुन के ख़बर प्यार जताने आए रूठे दुनिया से जो हम यार मनाने आए, अच्छे दिन - [ये कह के आग वो दिल में लगाए जाते हैं](https://bazmeshayari.com/ye-kah-ke-aag/): ये कह के आग वो दिल में लगाए जाते हैं चराग़ ख़ुद नहीं जलते जलाए जाते हैं, अब - [हम ने फूलों को जो देखा लब ओ रुख़्सार के बाद](https://bazmeshayari.com/hum-ne-phoolon-ko/): हम ने फूलों को जो देखा लब ओ रुख़्सार के बाद फूल देखे न गए हुस्न ए रुख़ - [एक तो नैनाँ कजरारे और तिस पर डूबे काजल में](https://bazmeshayari.com/ek-to-naina-kajrare/): एक तो नैनाँ कजरारे और तिस पर डूबे काजल में बिजली की बढ़ जाए चमक कुछ और भी - [मुझे मालूम है मैं सारी दुनिया की अमानत हूँ](https://bazmeshayari.com/mujhe-malum-hai-main/): मुझे मालूम है मैं सारी दुनिया की अमानत हूँ मगर वो लम्हा जब मैं सिर्फ़ अपना हो सा - [तमाम उम्र अज़ाबों का सिलसिला तो रहा](https://bazmeshayari.com/tamam-umr-azaabon-ka/): तमाम उम्र अज़ाबों का सिलसिला तो रहा ये कम नहीं हमें जीने का हौसला तो रहा, गुज़र ही - [वो लोग ही हर दौर में महबूब रहे हैं](https://bazmeshayari.com/wo-log-hi-har/): वो लोग ही हर दौर में महबूब रहे हैं जो इश्क़ में तालिब नहीं मतलूब रहे हैं, तूफ़ान - [सुब्ह के दर्द को रातों की जलन को भूलें](https://bazmeshayari.com/subah-ke-dard-ko/): सुब्ह के दर्द को रातों की जलन को भूलें किस के घर जाएँ कि इस वादा शिकन को - [बेकसी हद से जब गुज़र जाए](https://bazmeshayari.com/bekasi-had-se-jab/): बेकसी हद से जब गुज़र जाए कोई ऐ दिल जिए की मर जाए, ज़िंदगी से कहो दुल्हन बन - [मौज ए गुल मौज ए सबा मौज ए सहर लगती है](https://bazmeshayari.com/mauj-e-gul-mauj/): मौज ए गुल मौज ए सबा मौज ए सहर लगती है सर से पा तक वो समाँ है - [मुद्दत हुई उस जान ए हया ने हमसे ये इक़रार किया](https://bazmeshayari.com/muddat-hui-us-jaan/): मुद्दत हुई उस जान ए हया ने हमसे ये इक़रार किया जितने भी बदनाम हुए हम उतना उसने - [दीदा ओ दिल में कोई हुस्न बिखरता ही रहा](https://bazmeshayari.com/dida-o-dil-me/): दीदा ओ दिल में कोई हुस्न बिखरता ही रहा लाख पर्दों में छुपा कोई सँवरता ही रहा, रौशनी - [लाख आवारा सही शहरों के फ़ुटपाथों पे हम](https://bazmeshayari.com/laakh-aawara-sahi-shahron/): लाख आवारा सही शहरों के फ़ुटपाथों पे हम लाश ये किस की लिए फिरते हैं इन हाथों पे - [आए क्या क्या याद नज़र जब पड़ती इन दालानों पर](https://bazmeshayari.com/aaye-kya-kya-yaad/): आए क्या क्या याद नज़र जब पड़ती इन दालानों पर उस का काग़ज़ चिपका देना घर के रौशनदानों - [तुम पे क्या बीत गई कुछ तो बताओ यारो](https://bazmeshayari.com/tum-pe-kya-beet/): तुम पे क्या बीत गई कुछ तो बताओ यारो मैं कोई ग़ैर नहीं हूँ कि छुपाओ यारो, इन - [हौसला खो न दिया तेरी नहीं से हम ने](https://bazmeshayari.com/hausla-kho-na-diya/): हौसला खो न दिया तेरी नहीं से हम ने कितनी शिकनों को चुना तेरी जबीं से हम ने, - [हर एक रूह में एक ग़म छुपा लगे है मुझे](https://bazmeshayari.com/har-ek-rooh-me/): हर एक रूह में एक ग़म छुपा लगे है मुझे ये ज़िंदगी तो कोई बददुआ लगे है मुझे, - [दिल को हर लम्हा बचाते रहे जज़्बात से हम](https://bazmeshayari.com/dil-ko-har-lamha/): दिल को हर लम्हा बचाते रहे जज़्बात से हम इतने मजबूर रहे हैं कभी हालात से हम, नशा - [ऐ दर्द ए इश्क़ तुझ से मुकरने लगा हूँ मैं](https://bazmeshayari.com/ae-dard-e-ishq/): ऐ दर्द ए इश्क़ तुझ से मुकरने लगा हूँ मैं मुझ को संभाल हद से गुज़रने लगा हूँ - [अच्छा है उन से कोई तक़ाज़ा किया न जाए](https://bazmeshayari.com/achcha-hai-un-se/): अच्छा है उन से कोई तक़ाज़ा किया न जाए अपनी नज़र में आप को रुस्वा किया न जाए, - [आहट सी कोई आए तो लगता है कि तुम हो](https://bazmeshayari.com/aahat-see-koi-aaye/): आहट सी कोई आए तो लगता है कि तुम हो साया कोई लहराए तो लगता है कि तुम - [अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं](https://bazmeshayari.com/ashaar-mere-yun-to-zamane/): अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं कुछ शेर फ़क़त उनको सुनाने के लिए हैं, अब ये - [हम से भागा न करो दूर ग़ज़ालों की तरह](https://bazmeshayari.com/hum-se-bhaaga-na/): हम से भागा न करो दूर ग़ज़ालों की तरह हम ने चाहा है तुम्हें चाहने वालों की तरह, - [लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से](https://bazmeshayari.com/log-kahte-hai-ki/): लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा - [सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी](https://bazmeshayari.com/sau-chaand-bhi-chamkenge/): सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी तुम आए तो इस रात की औक़ात बनेगी, उनसे यही - [नये नये वायदों का नया नया बहाव आया है](https://bazmeshayari.com/naye-naye-waado-ka/): नये नये वायदों का नया नया बहाव आया है जनता को लुभाने खातिर कुछ नया उपाय आया है - [ख़ुद से इतनी भी अदावत तो नहीं कर सकता](https://bazmeshayari.com/khud-se-itni-bhi/): ख़ुद से इतनी भी अदावत तो नहीं कर सकता अब कोई मुझ से मोहब्बत तो नहीं कर सकता, - [मायूसी की कैफ़िय्यत जब दिल पर तारी हो जाती है](https://bazmeshayari.com/mayusi-ki-kaifiyat-jab/): मायूसी की कैफ़िय्यत जब दिल पर तारी हो जाती है रफ़्ता रफ़्ता दीन ओ दुनिया से बे ज़ारी - [हम पर करेगा रहमतें परवर दिगार भी](https://bazmeshayari.com/hum-par-karega-rahmaten/): हम पर करेगा रहमतें परवर दिगार भी हालात अपने होंगे कभी साज़गार भी, तू ने भुला दी चाहतें - [सामने रह कर न होना मसअला मेरा भी है](https://bazmeshayari.com/samne-rah-kar-na/): सामने रह कर न होना मसअला मेरा भी है इस कहानी में इज़ाफ़ी तज़्किरा मेरा भी है, बे - [आहन में ढलती जाएगी इक्कीसवीं सदी](https://bazmeshayari.com/aahan-me-dhalti-jayegi/): आहन में ढलती जाएगी इक्कीसवीं सदी फिर भी ग़ज़ल सुनाएगी इक्कीसवीं सदी, बग़दाद दिल्ली मास्को लंदन के दरमियाँ - [उदास रात है कोई तो ख़्वाब दे जाओ](https://bazmeshayari.com/udaas-raat-hai-koi/): उदास रात है कोई तो ख़्वाब दे जाओ मेंरे गिलास में थोड़ी शराब दे जाओ, बहुत से और - [मेरी आँखों में तेरे प्यार का आँसू आए](https://bazmeshayari.com/mere-aankh-me-tere/): मेरी आँखों में तेरे प्यार का आँसू आए कोई ख़ुशबू मैं लगाऊँ तेरी ख़ुशबू आए, वक़्त ए रुख़्सत - [ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को सिखाएँगे](https://bazmeshayari.com/gazalon-ka-hunar-apni-ankho/): ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को सिखाएँगे रोएँगे बहुत लेकिन आँसू नहीं आएँगे, कह देना समुंदर से हम - [यूँ तो हँसते हुए लड़कों को भी ग़म होता है](https://bazmeshayari.com/yun-to-hanste-hue/): यूँ तो हँसते हुए लड़कों को भी ग़म होता है कच्ची उम्रों में मगर तजरबा कम होता है, - [हर्फ़ ए रंजिश पे कोई बात भी हो सकती है](https://bazmeshayari.com/harf-e-ranjish-pe/): हर्फ़ ए रंजिश पे कोई बात भी हो सकती है ऍन मुमकिन है, मुलाक़ात भी हो सकती है, - [दिल में जो था वो हो गया मुझ को सुना के चुप](https://bazmeshayari.com/dil-me-jo-tha/): दिल में जो था वो हो गया मुझ को सुना के चुप सुन कर हुआ हूँ उस को - [ये मेरा दिल कहाँ है अब तुम्हारी राजधानी है](https://bazmeshayari.com/ye-mera-dil-kahan/): ये मेरा दिल कहाँ है अब तुम्हारी राजधानी है मेंरे दिल पर तुम्हारे दर्द ओ ग़म की हुक्मरानी - [ये इश्क़ के सताए करेंगे लड़ाई ख़ाक](https://bazmeshayari.com/ye-ishq-ke-sataye/): ये इश्क़ के सताए करेंगे लड़ाई ख़ाक घर फूँक के किया है तमाशा उड़ाई ख़ाक, हम से जो - [तू क्या जाने रूह भी ज़ख़्मी होती है](https://bazmeshayari.com/tu-kya-jaane-rooh/): तू क्या जाने रूह भी ज़ख़्मी होती है जब लफ़्ज़ों से दहशत गर्दी होती है, आ जाता है - [जो भी मिले क़ुबूल है दें हाँ या न जवाब](https://bazmeshayari.com/jo-bhi-mile-qubul/): जो भी मिले क़ुबूल है दें हाँ या न जवाब देखें मेंरे सवाल का देंगे वो क्या जवाब, - [आँखों से मेरे ख़्वाब चुराती रही है रात](https://bazmeshayari.com/aankhon-se-mere-khwab/): आँखों से मेरे ख़्वाब चुराती रही है रात ख़ुद भी जगी है मुझको जगाती रही है रात, आँखें - [दिल भी जलाया उस ने जो मेरा जलाया ख़त](https://bazmeshayari.com/dil-bhi-jalaya-us/): दिल भी जलाया उस ने जो मेरा जलाया ख़त अफ़सोस मैं ने जा के उसी को पढ़ाया ख़त, - [सच कहने से यार ख़फ़ा हो जाते हैं](https://bazmeshayari.com/sach-kahne-se-yaar/): सच कहने से यार ख़फ़ा हो जाते हैं दिल के सब अरमान हवा हो जाते हैं, हद से - [तुम को वफ़ा से क्या मतलब है जाओ अपना काम करो](https://bazmeshayari.com/tum-ko-wafa-se/): तुम को वफ़ा से क्या मतलब है जाओ अपना काम करो दिन भर भटके आवारा से अब जा - [मेरी जैसी उस की हालत कब होगी](https://bazmeshayari.com/meri-jaisi-us-ki/): मेरी जैसी उस की हालत कब होगी उस को जाने मुझ से मोहब्बत कब होगी उस के लिए - [जाने कितनी उड़ान बाक़ी है](https://bazmeshayari.com/jaane-kitni-udaan-baaqi-hai/): जाने कितनी उड़ान बाक़ी है इस परिंदे में जान बाक़ी है, जितनी बटनी थी बट चुकी ये ज़मीं - [ये जो ज़िंदगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब है](https://bazmeshayari.com/ye-jo-zindagi-ki-kitab-hai/): ये जो ज़िंदगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब है कहीं एक हसीन सा ख़्वाब है - [अब क्या बताएँ टूटे हैं कितने कहाँ से हम](https://bazmeshayari.com/ab-kya-batayen-tute-hai-kitne-kahan-se-hum/): अब क्या बताएँ टूटे हैं कितने कहाँ से हम ख़ुद को समेटते हैं यहाँ से वहाँ से हम - [यहाँ हर शख़्स हर पल हादसा होने से डरता है](https://bazmeshayari.com/yahan-har-shakhs-har-pal-haadsa-hone-se/): यहाँ हर शख़्स हर पल हादसा होने से डरता है खिलौना है जो मिट्टी का फ़ना होने से - [ज़िंदगी तू ने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं](https://bazmeshayari.com/zindagi-tu-ne-lahoo-le-ke-diya-kuch-bhi-nahin/): ज़िंदगी तू ने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं तेरे दामन में मेरे वास्ते क्या कुछ भी - [तह ब तह है राज़ कोई आब की तहवील में](https://bazmeshayari.com/tah-ba-tah-hai-raaz-koi-aab-ki-tahweel-me/): तह ब तह है राज़ कोई आब की तहवील में ख़ामुशी यूँ ही नहीं रहती है गहरी झील - [नए सिरे से कोई सफ़र आग़ाज़ नहीं करता](https://bazmeshayari.com/naye-sire-se-koi-safar-aagaaz-nahin-karta/): नए सिरे से कोई सफ़र आग़ाज़ नहीं करता जाने क्यूँ अब दिल मेरा परवाज़ नहीं करता, कितनी बुरी - [एक अजब सी दुनिया देखा करता था](https://bazmeshayari.com/ek-azab-see-duniya-dekha-karta-tha/): एक अजब सी दुनिया देखा करता था दिन में भी मैं सपना देखा करता था, एक ख़याल आबाद - [सुल्ह की हद तक सितमगर आ गया](https://bazmeshayari.com/sulah-ki-had-tak-sitamgar-aa-gaya/): सुल्ह की हद तक सितमगर आ गया आइने की ज़द में पत्थर आ गया, आग तो सुलगी थी - [सर पटकती रही दश्त ए ग़म की हवा](https://bazmeshayari.com/sar-patakti-rahi-dasht-e-gam-ki/): सर पटकती रही दश्त ए ग़म की हवा उन की यादों के झोंके भी चलते रहे शाम से - [बस एक तेरे ख़्वाब से इंकार नहीं है](https://bazmeshayari.com/bas-ek-tere-khwab-se-inkaar-nahin-hai/): बस एक तेरे ख़्वाब से इंकार नहीं है दिल वर्ना किसी शय का तलबगार नहीं है, आँखों में - [याद करते हो मुझे सूरज निकल जाने के बाद](https://bazmeshayari.com/yaad-karte-ho-mujhe-suraj-nikal-jaane-ke-baad/): याद करते हो मुझे सूरज निकल जाने के बाद एक सितारे ने ये पूछा रात ढल जाने के - [हम को लुत्फ़ आता है अब फ़रेब खाने में](https://bazmeshayari.com/hum-ko-lutf-aata-hai-ab-fareb-khaane-me/): हम को लुत्फ़ आता है अब फ़रेब खाने में आज़माएँ लोगों को ख़ूब आज़माने में, दो घड़ी के - [हाथ पकड़ ले अब भी तेरा हो सकता हूँ मैं](https://bazmeshayari.com/haath-pakad-le-ab-bhi-tera-ho-sakta-hoon/): हाथ पकड़ ले अब भी तेरा हो सकता हूँ मैं भीड़ बहुत है इस मेले में खो सकता - [हमेशा दिल में रहता है कभी गोया नहीं जाता](https://bazmeshayari.com/humesha-dil-me-rahta-hai/): हमेशा दिल में रहता है कभी गोया नहीं जाता जिसे पाया नहीं जाता उसे खोया नहीं जाता, कुछ - [ऐसा लगता है समझदार है दुनिया सारी](https://bazmeshayari.com/aisa-lagta-hai-samjhdar-hai-duniya-saari/): ऐसा लगता है समझदार है दुनिया सारी मैं हूँ इस पार तो उस पार है दुनिया सारी, इस - [हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है](https://bazmeshayari.com/hungama-hai-kyun-barpa-thodi-see-jo/): हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है डाका तो नहीं मारा चोरी तो नहीं की - [आँखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते](https://bazmeshayari.com/aankhen-mujhe-talwo-se-wo-malne-nahi/): आँखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते अरमान मेरे दिल के निकलने नहीं देते, ख़ातिर से तेरी - [ऐ मेरी जान तुझे और बदलना होगा](https://bazmeshayari.com/ae-meri-jaan-tujhe-aur-badalna-hoga/): ऐ मेरी जान तुझे और बदलना होगा फिर मेरे साथ कड़ी धूप में चलना होगा, अपने पैरों पे - [इल्म ओ हुनर से क़ौम को रग़बत नहीं रही](https://bazmeshayari.com/ilm-o-hunar-se-qaum-ko-ragbat-nahin/): इल्म ओ हुनर से क़ौम को रग़बत नहीं रही इस पर शिकायतें कि फ़ज़ीलत नहीं रही, बदलेगा क्या - [हुज़ूर हद भी कोई होवे इंतिज़ारी की](https://bazmeshayari.com/huzur-had-bhi-koi-howe-intizari-ki/): हुज़ूर हद भी कोई होवे इंतिज़ारी की कि इंतिहा हुई जावे है बे क़रारी की, न कुछ कहो - [ग़म्ज़ा नहीं होता कि इशारा नहीं होता](https://bazmeshayari.com/gamza-nahin-hota-ki-ishara-nahin-hota/): ग़म्ज़ा नहीं होता कि इशारा नहीं होता आँख उन से जो मिलती है तो क्या क्या नहीं होता - [आह जो दिल से निकाली जाएगी](https://bazmeshayari.com/aah-jo-dil-se-nikaali-jayegi/): आह जो दिल से निकाली जाएगी क्या समझते हो कि ख़ाली जाएगी ? इस नज़ाकत पर ये शमशीर - [फिरते हैं जिस के वास्ते हम दर ब दर अभी](https://bazmeshayari.com/firte-hai-jis-ke-vaaste-hum-dar-ba-dar/): फिरते हैं जिस के वास्ते हम दर ब दर अभी क्या कीजिए नहीं है उसे कुछ ख़बर अभी, - [हम से आँखें मिलाइए तो कहें](https://bazmeshayari.com/hum-se-aankhen-milaieye-to-kahen/): हम से आँखें मिलाइए तो कहें अपना जल्वा दिखाइए तो कहें, रस्म ही है अगर तो फिर रस्मन - [दोस्ती का फ़रेब ही खाएँ](https://bazmeshayari.com/dosti-ka-fareb-hi-khaaye-aao-kagaz-ki/): दोस्ती का फ़रेब ही खाएँ आओ काग़ज़ की नाव तैराएँ, हम अगर रहरवी का अज़्म करें मंज़िलें खिंच - [आया है हर चढ़ाई के बाद एक उतार भी](https://bazmeshayari.com/aaya-hai-har-chadhaai-ke-baad-ek-uttar-bhi/): आया है हर चढ़ाई के बाद एक उतार भी पस्ती से हम कनार मिले कोहसार भी, आख़िर को - [नक़ाब ए रुख़ उठाया जा रहा है](https://bazmeshayari.com/naqab-e-rookh-uthaya-jaa-raha-hai/): नक़ाब ए रुख़ उठाया जा रहा है घटा में चाँद आया जा रहा है, ज़माने की निगाहों में - [एक उम्र गुजारी है जिसके साये में](https://bazmeshayari.com/ek-umr-guzari-hai-jiske-saaye-me/): जब से वो मुझे भुलाये जा रही है कोई बला मेरा दिल खाए जा रही है, एक उम्र - [ये दिल बे इख़्तियार ओ बे इरादा खेलता रहता है](https://bazmeshayari.com/ye-dil-be-ikhtiyar-o-be-irada-khelta-rahta-hai/): ये दिल बे इख़्तियार ओ बे इरादा खेलता रहता है ख़िरद के हुक्म पर दिल की इताअत कौन - [फ़लक पे चाँद के हाले भी सोग करते हैं](https://bazmeshayari.com/falaq-pe-chaand-ke-haale-bhi-sog-karte-hain/): फ़लक पे चाँद के हाले भी सोग करते हैं जो तू नहीं तो उजाले भी सोग करते हैं, - [दिल होश से बेगाना बेगाने को क्या कहिए](https://bazmeshayari.com/dil-hosh-se-begana-begane-ko-kya/): दिल होश से बेगाना बेगाने को क्या कहिए चुप रहना ही बेहतर है दीवाने को क्या कहिए कुछ - [मेरी आँखों के समुंदर में जलन कैसी है](https://bazmeshayari.com/meri-aankhon-ke-samndar-me-jalan-kaisi-hai/): मेरी आँखों के समुंदर में जलन कैसी है आज फिर दिल को तड़पने की लगन कैसी है ? - [कैसा मफ़्तूह सा मंज़र है कई सदियों से](https://bazmeshayari.com/kaisa-maftooh-saa-manzar-hai/): कैसा मफ़्तूह सा मंज़र है कई सदियों से मेरे क़दमों पे मेरा सर है कई सदियों से, ख़ौफ़ - [किस क़दर ज़ुल्म ढाया करते थे](https://bazmeshayari.com/kis-qadar-zulm-dhaya-karte-the/): किस क़दर ज़ुल्म ढाया करते थे ये जो तुम भूल जाया करते थे, किस का अब हाथ रख - [ज़िहानतों को कहाँ कर्ब से फ़रार मिला](https://bazmeshayari.com/zihanto-ko-kahan-karb-se-farar-mila/): ज़िहानतों को कहाँ कर्ब से फ़रार मिला जिसे निगाह मिली उस को इंतिज़ार मिला, वो कोई राह का - [मेरी तेरी दूरियाँ हैं अब इबादत के ख़िलाफ़](https://bazmeshayari.com/meri-teri-dooriyan-hai-ab-ibadat-ke-khilaf/): मेरी तेरी दूरियाँ हैं अब इबादत के ख़िलाफ़ हर तरफ़ है फ़ौज आराई मोहब्बत के ख़िलाफ़, हर्फ़ ए - [ठहरे जो कहीं आँख तमाशा नज़र आए](https://bazmeshayari.com/thahare-jo-kahin-aankh-tamasha-nazar-aaye/): ठहरे जो कहीं आँख तमाशा नज़र आए सूरज में धुआँ चाँद में सहरा नज़र आए, रफ़्तार से ताबिंदा - [तलाश कर न ज़मीं आसमान से बाहर](https://bazmeshayari.com/talash-kar-na-zamin-aasmaan-se-bahar-nahi-hai/): तलाश कर न ज़मीं आसमान से बाहर नहीं है राह कोई इस मकान से बाहर, बस एक दो - [दुआ सलाम में लिपटी ज़रूरतें माँगे](https://bazmeshayari.com/duaa-salam-me-lipti-zaruraten-maange/): दुआ सलाम में लिपटी ज़रूरतें माँगे क़दम क़दम पे ये बस्ती तिजारतें माँगे, कहाँ हर एक को आती - [हुए सब के जहाँ में एक जब अपना जहाँ और हम](https://bazmeshayari.com/hue-sab-ke-jahan-me-ek-jab-apana-jahan/): हुए सब के जहाँ में एक जब अपना जहाँ और हम मुसलसल लड़ते रहते हैं ज़मीन ओ आसमाँ - [जो कल हैरान थे उन को परेशाँ कर के छोड़ूँगा](https://bazmeshayari.com/jo-kal-hairaan-the-un-ko-pareshan-kar-ke/): जो कल हैरान थे उन को परेशाँ कर के छोड़ूँगा मैं अब आईना ए हस्ती को हैराँ कर - [शाम अपनी बेमज़ा जाती है रोज़](https://bazmeshayari.com/shaam-apni-bemaza-jaati-hai-roz/): शाम अपनी बेमज़ा जाती है रोज़ और सितम ये है कि आ जाती है रोज़, कोई दिन आसाँ - [मैं वो दरख़्त हूँ खाता है जो भी फल मेरे](https://bazmeshayari.com/main-wo-darakht-hoon-jo-bhi-fal-mere/): मैं वो दरख़्त हूँ खाता है जो भी फल मेरे ज़रूर मुझ से ये कहता है साथ चल - [पेश जो आया सर ए साहिल ए शब बतलाया](https://bazmeshayari.com/pesh-aaya-sar-e-sahil-e-shab-batlaya/): पेश जो आया सर ए साहिल ए शब बतलाया मौज ए ग़म को भी मगर मौज ए तरब - [हर नई शाम सुहानी तो नहीं होती है](https://bazmeshayari.com/har-nayi-shaam-suhani-to-nahi-hoti/): हर नई शाम सुहानी तो नहीं होती है और हर उम्र जवानी तो नहीं होती है, तुम ने - [किसी की क़ैद से आज़ाद हो के रह गए हैं](https://bazmeshayari.com/kisi-ki-qaid-se-aazad-ho-ke-rah-gaye-hai/): किसी की क़ैद से आज़ाद हो के रह गए हैं तबाह हो गए बर्बाद हो के रह गए - [सुनी है चाप बहुत वक़्त के गुज़रने की](https://bazmeshayari.com/suni-hai-chaap-bahut-waqt-ke-gujrne-kee/): सुनी है चाप बहुत वक़्त के गुज़रने की मगर ये ज़ख़्म कि हसरत है जिस के भरने की, - [घूम फिर कर इसी कूचे की तरफ़ आएँगे](https://bazmeshayari.com/ghoom-fir-kar-isi-kooche-kee-taraf/): घूम फिर कर इसी कूचे की तरफ़ आएँगे दिल से निकले भी अगर हम तो कहाँ जाएँगे ? - [किसी के हिज्र में जीना मुहाल हो गया है](https://bazmeshayari.com/kisi-ke-hizr-me-jina-muhal-ho-gaya/): किसी के हिज्र में जीना मुहाल हो गया है किसे बताएँ हमारा जो हाल हो गया है ? - [फ़ाएदा क्या है हमें और ख़सारा क्या है](https://bazmeshayari.com/fayada-kya-hai-hame-aur-khasaara-kya-hai/): फ़ाएदा क्या है हमें और ख़सारा क्या है जो भी है आप का सब कुछ है हमारा क्या - [निकल पड़े हैं सनम रात के शिवाले से](https://bazmeshayari.com/nikal-pade-hain-sanam-raat-ke/): निकल पड़े हैं सनम रात के शिवाले से कुछ आज शहर ए ग़रीबाँ में हैं उजाले से, चलो - [बचाओ दामन ए दिल ऐसे हमनशीनों से](https://bazmeshayari.com/bachaao-daaman-e-dil-aise-hamnashino-se/): बचाओ दामन ए दिल ऐसे हमनशीनों से मिला के हाथ जो डसते हैं आस्तीनों से, निगार ए वक़्त - [पी ले जो लहू दिल का वो इश्क़ की मस्ती है](https://bazmeshayari.com/pee-le-jo-lahoo-dil-ka-wo-ishq/): पी ले जो लहू दिल का वो इश्क़ की मस्ती है क्या मस्त है ये नागन अपने ही - [वो मुस्कुरा के जिधर से निकल गए होंगे](https://bazmeshayari.com/wo-muskura-ke-jidhar-se-nikal-gaye/): वो मुस्कुरा के जिधर से निकल गए होंगे निगाह ए शौक़ में आँसू मचल गए होंगे, गुज़र के - [ज़हर को मय दिल ए सद पारा को मीना न कहो](https://bazmeshayari.com/zahar-ko-may-dil-e-sad-paara-ko/): ज़हर को मय दिल ए सद पारा को मीना न कहो दौर ऐसा है कि पीने को भी - [क्या क्या लोग ख़ुशी से अपनी बिकने पर तैयार हुए](https://bazmeshayari.com/kya-kya-log-khushi-se-apni-bikne-par/): क्या क्या लोग ख़ुशी से अपनी बिकने पर तैयार हुए एक हमीं दीवाने निकले हम ही यहाँ पर - [जाने क्या देखा था मैं ने ख़्वाब में](https://bazmeshayari.com/jaane-kya-dekha-tha-main-ne-khwab-me/): जाने क्या देखा था मैं ने ख़्वाब में फँस गया फिर जिस्म के गिर्दाब में, तेरा क्या तू - [हर नई रुत में नया होता है मंज़र मेरा](https://bazmeshayari.com/har-nayi-rut-me-naya-hota-hai/): हर नई रुत में नया होता है मंज़र मेरा एक पैकर में कहाँ क़ैद है पैकर मेरा, मैं - [आहट पे कान दर पे नज़र इस तरह न थी](https://bazmeshayari.com/aahat-pe-kaan-dar-pe-nazar-is-tarah/): आहट पे कान दर पे नज़र इस तरह न थी एक एक पल की हम को ख़बर इस - [ये कामयाबियाँ इज़्ज़त ये नाम तुम से है](https://bazmeshayari.com/ye-kaamyabiyan-izzat-ye-naam-tum-se-hai/): ये कामयाबियाँ इज़्ज़त ये नाम तुम से है ऐ मेरी माँ मेरा सारा मक़ाम तुम से है, तुम्हारे - [अब कोई गुलशन न उजड़े अब वतन आज़ाद है](https://bazmeshayari.com/ab-koi-gulshan-na-ujde-ab-watan/): अब कोई गुलशन न उजड़े अब वतन आज़ाद है रूह गंगा की हिमाला का बदन आज़ाद है, खेतियाँ - [ख़त के छोटे से तराशे में नहीं आएँगे](https://bazmeshayari.com/khat-ke-chhote-se-tarashe-me-nahi/): ख़त के छोटे से तराशे में नहीं आएँगे ग़म ज़ियादा हैं लिफ़ाफ़े में नहीं आएँगे, हम न मजनूँ - [तुम्हारा हिज्र मनाया तो मैं अकेला था](https://bazmeshayari.com/tumhara-hizr-manaya-to-main/): तुम्हारा हिज्र मनाया तो मैं अकेला था जुनूँ ने हश्र उठाया तो मैं अकेला था, ये मेरी अपनी - [कह गया हूँ जो मैं रवानी में](https://bazmeshayari.com/kah-gaya-hoon-jo-main/): कह गया हूँ जो मैं रवानी में वो तो शामिल न था कहानी में, कोई लग़्ज़िश गुनाह तौबा - [अदाएँ तुम बना लेना इशारे मैं बनाऊँगा](https://bazmeshayari.com/adaayen-tum-bana-lena-ishaare-main/): अदाएँ तुम बना लेना इशारे मैं बनाऊँगा तुम्हारे फूल जज़्बों को शरारे मैं बनाऊँगा, तुम्हारा साथ शामिल है - [दिल में अब यूँ तेरे भूले हुए ग़म आते हैं](https://bazmeshayari.com/dil-me-ab-yun-tere-bhule-hue/): दिल में अब यूँ तेरे भूले हुए ग़म आते हैं जैसे बिछड़े हुए काबे में सनम आते हैं, - [तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं](https://bazmeshayari.com/tumhari-yaad-ke-jab-zakhm-bharne/): तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं, हदीस ए यार - [कब याद में तेरा साथ नहीं कब हाथ में तेरा हाथ नहीं](https://bazmeshayari.com/kab-yaad-me-tera-sath-nahin/): कब याद में तेरा साथ नहीं कब हाथ में तेरा हाथ नहीं सद शुक्र कि अपनी रातों में - [किसी और ग़म में इतनी ख़लिश ए निहाँ नहीं है](https://bazmeshayari.com/kisi-aur-gam-me-itni-khalish-e-nihan/): किसी और ग़म में इतनी ख़लिश ए निहाँ नहीं है ग़म ए दिल मेरे रफ़ीक़ो ग़म ए राएगाँ - [आँधी चली तो नक़्श ए कफ़ ए पा नहीं मिला](https://bazmeshayari.com/aandhi-chali-to-naksh-e-qaf-e-paa/): आँधी चली तो नक़्श ए कफ़ ए पा नहीं मिला दिल जिस से मिल गया वो दोबारा नहीं - [कभी झिड़की से कभी प्यार से समझाते रहे](https://bazmeshayari.com/kabhi-jhidki-se-kabhi-pyar-se/): कभी झिड़की से कभी प्यार से समझाते रहे हम गई रात पे दिल को लिए बहलाते रहे, अपने - [सीने में ख़िज़ाँ आँखों में बरसात रही है](https://bazmeshayari.com/sine-me-khizaan-aankhon-me/): सीने में ख़िज़ाँ आँखों में बरसात रही है इस इश्क़ में हर फ़स्ल की सौग़ात रही है, किस - [इस क़दर मुसलसल थीं शिद्दतें जुदाई की](https://bazmeshayari.com/is-qadar-musalsal-thi-shiddaten/): इस क़दर मुसलसल थीं शिद्दतें जुदाई की आज पहली बार उस से मैं ने बेवफ़ाई की, वर्ना अब - [ये शहर सेहर ज़दा है सदा किसी की नहीं](https://bazmeshayari.com/ye-shahar-sehar-zada-hai/): ये शहर सेहर ज़दा है सदा किसी की नहीं यहाँ ख़ुद अपने लिए भी दुआ किसी की नहीं, - [यूँ ही राह ए वफ़ा की सलीब पर दो क़दम उठाने के शुक्रिया](https://bazmeshayari.com/yun-hi-raah-e-waafa-kee-salib-par/): यूँ ही राह ए वफ़ा की सलीब पर दो क़दम उठाने के शुक्रिया बड़ा पुर खतर है ये - [अजब अपना हाल होता जो विसाल ए यार होता](https://bazmeshayari.com/azab-apna-haal-hota-jo/): अजब अपना हाल होता जो विसाल ए यार होता कभी जान सदक़े होती कभी दिल निसार होता, कोई - [आप का एतिबार कौन करे](https://bazmeshayari.com/aapka-aetibar-kaun-kare/): आप का एतिबार कौन करे रोज़ का इंतिज़ार कौन करे ज़िक्र ए मेहर ओ वफ़ा तो हम करते - [फिरे राह से वो यहाँ आते आते](https://bazmeshayari.com/fire-raah-se-wo-yahan-aate-aate/): फिरे राह से वो यहाँ आते आते अजल मर रही तू कहाँ आते आते, न जाना कि दुनिया - [ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा](https://bazmeshayari.com/le-chala-jaan-meri-ruth-ke-jana/): ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा ऐसे आने से तो बेहतर था न आना तेरा, अपने - [गली गली यूँ मोहब्बत के ख़्वाब बेचूँगा](https://bazmeshayari.com/gali-gali-yun-mohabbat-ke-khwab/): गली गली यूँ मोहब्बत के ख़्वाब बेचूँगा मैं रख के रेढ़ी पे ताज़ा गुलाब बेचूँगा, रही जो ज़िन्दगी - [नशा नशे के लिए है अज़ाब में शामिल](https://bazmeshayari.com/nasha-nashe-ke-liye-hai/): नशा नशे के लिए है अज़ाब में शामिल किसी की याद को कीजे शराब में शामिल, हर एक - [तन्हा हुए ख़राब हुए आइना हुए](https://bazmeshayari.com/tanha-hue-kharab-hue/): तन्हा हुए ख़राब हुए आइना हुए चाहा था आदमी बनें लेकिन ख़ुदा हुए, जब तक जिए बिखरते रहे - [कोई नहीं है आने वाला फिर भी कोई आने को है](https://bazmeshayari.com/koi-nahin-hai-aane-wala/): कोई नहीं है आने वाला फिर भी कोई आने को है आते जाते रात और दिन में कुछ - [किसी भी शहर में जाओ कहीं क़याम करो](https://bazmeshayari.com/kisi-bhi-shahar-me-jaao/): किसी भी शहर में जाओ कहीं क़याम करो कोई फ़ज़ा कोई मंज़र किसी के नाम करो, दुआ सलाम - [कोई किसी की तरफ़ है कोई किसी की तरफ़](https://bazmeshayari.com/koi-kisi-ki-taraf-hai-koi/): कोई किसी की तरफ़ है कोई किसी की तरफ़ कहाँ है शहर में अब कोई ज़िंदगी की तरफ़, - [चाहतें मौसमी परिंदे हैं रुत बदलते ही लौट जाते हैं](https://bazmeshayari.com/chahte-mausami-parinde-hai/): चाहतें मौसमी परिंदे हैं रुत बदलते ही लौट जाते हैं घोंसले बन के टूट जाते हैं दाग़ शाख़ों - [दुख में नीर बहा देते थे सुख में हँसने लगते थे](https://bazmeshayari.com/dukh-me-neer-baha-dete-the/): दुख में नीर बहा देते थे सुख में हँसने लगते थे सीधे सादे लोग थे लेकिन कितने अच्छे - [कुछ दिनों तो शहर सारा अजनबी सा हो गया](https://bazmeshayari.com/kuch-dino-to-shahar-sara/): कुछ दिनों तो शहर सारा अजनबी सा हो गया फिर हुआ यूँ वो किसी की मैं किसी का - [उठ के कपड़े बदल घर से बाहर निकल जो हुआ सो हुआ](https://bazmeshayari.com/uth-ke-kapde-badal-ghar-se/): उठ के कपड़े बदल घर से बाहर निकल जो हुआ सो हुआ रात के बाद दिन आज के - [ज़ीस्त उनवान तेरे होने का](https://bazmeshayari.com/zist-unwan-tere-hone-ka/): ज़ीस्त उनवान तेरे होने का दिल को ईमान तेरे होने का, मुझ को हर सम्त ले के जाता - [हम ने जिस के लिए फूलों के जहाँ छोड़े हैं](https://bazmeshayari.com/hum-ne-jis-ke-liye/): हम ने जिस के लिए फूलों के जहाँ छोड़े हैं उस ने इस दिल में फ़क़त ज़ख़्म ए - [बदन पे सूट उर्दू का गले में टाई उर्दू की](https://bazmeshayari.com/badan-pe-suit-urdu-ka/): बदन पे सूट उर्दू का गले में टाई उर्दू की उन्हें मालूम है गहराई और गीराई उर्दू की, - [एक दिन बीवी ने फ़रमाया तुम्हारी हर किताब](https://bazmeshayari.com/ek-din-bibi-ne-farmaya/): एक दिन बीवी ने फ़रमाया तुम्हारी हर किताब फ़ालतू सामान है कूड़ा है रद्दी है जनाब, आज कल - [नुक़सान हो रहा है बहुत कारोबार में](https://bazmeshayari.com/nuksan-ho-raha-hai-bahut/): नुक़सान हो रहा है बहुत कारोबार में अब्बा पड़े हैं जब से पड़ोसन के प्यार में, सौ कोशिशों - [मुझ से फिर मेरी कार तू माँगे](https://bazmeshayari.com/mujh-se-fir-meri-car/): मुझ से फिर मेरी कार तू माँगे एक या दो हज़ार तू माँगे, इस से पहले उधार तू - [सुना है रोज़ वो हम को सँवर के देखते हैं](https://bazmeshayari.com/suna-hai-roz-wo-ham-ko/): सुना है रोज़ वो हम को सँवर के देखते हैं ये बात सच है तो उन पे भी - [ग़ुस्से में बीवी ये बोली शौहर से](https://bazmeshayari.com/gusse-me-bibi-ye-boli/): ग़ुस्से में बीवी ये बोली शौहर से तुम ने तो बस ज़ुल्म मुझी पर ढाए हैं, मैं ही - [ये खटमल ये मक्खी ये मच्छर की दुनिया](https://bazmeshayari.com/ye-khatmal-ye-makkhi/): ये खटमल ये मक्खी ये मच्छर की दुनिया ये लंगूर भालू ये बंदर की दुनिया, ये कुत्तों गधों - [मेरा पड़ोसी कोई माल दार थोड़ी है](https://bazmeshayari.com/mera-padosi-koi-maal-dar-thodi/): मेरा पड़ोसी कोई माल दार थोड़ी है ये कार बैंक की है उसकी कार थोड़ी है, हर एक - [न होता दहर से जो बेनियाज़ क्या करता](https://bazmeshayari.com/na-hota-dahar-se-jo-beniyaz-kya-karta/): न होता दहर से जो बेनियाज़ क्या करता खुला था मुझ पे कुछ ऐसा ही राज़ क्या करता - [तेशा ब दस्त आ मेरे आज़र तराश दे](https://bazmeshayari.com/tesha-ba-dast-aa-mere-aazar-tarash-de/): तेशा ब दस्त आ मेरे आज़र तराश दे बेडोल है बहुत मेरा पैकर तराश दे, गर क़ुमरियों के - [शहर मेरा हुजरा ए आफ़ात है](https://bazmeshayari.com/shahar-mera-huzra-e-aafaat-hai/): शहर मेरा हुजरा ए आफ़ात है सर पे सूरज और घर में रात है, सुर्ख़ थे चेहरे बदन - [उठाओ संग कि हम में सनक बहुत है अभी](https://bazmeshayari.com/uthaao-sang-ki-hum-me-sanak-bahut-hai-abhi/): उठाओ संग कि हम में सनक बहुत है अभी हमारे गर्म लहू में नमक बहुत है अभी, उतर - [अब ज़र्द लिबादे भी नहीं ख़ुश्क शजर पर](https://bazmeshayari.com/ab-zard-libaade-bhi-nahi-khushq-shazar-par/): अब ज़र्द लिबादे भी नहीं ख़ुश्क शजर पर जिस सम्त नज़र उठती है बे रंग है मंज़र, उतरे - [मैं सोचता तो हूँ लेकिन ये बात किस से कहूँ](https://bazmeshayari.com/main-sochta-to-hoon-lekin-ye-baat-kis-se-kahoon/): मैं सोचता तो हूँ लेकिन ये बात किस से कहूँ वो आइने में जो उतरे तो मैं सँवर - [ख़्वाहिशों का इम्तिहाँ होने तो दो](https://bazmeshayari.com/khwahisho-ka-imtihan-hone-to-do/): ख़्वाहिशों का इम्तिहाँ होने तो दो फ़ासले कुछ दरमियाँ होने तो दो, मय कशी भी बा वज़ू होगी - [क्यों वो मेरा मरकज़ ए अफ़्कार था ?](https://bazmeshayari.com/kyo-wo-mera-markaz-e-afqaar-tha/): क्यों वो मेरा मरकज़ ए अफ़्कार था ? जिस के होने से मुझे इंकार था, यूँ तो मुश्किल - [या रब मेरी हयात से ग़म का असर न जाए](https://bazmeshayari.com/yaa-rab-meri-hayat-se-gam-ka-asar-na-jaaye/): या रब मेरी हयात से ग़म का असर न जाए जब तक किसी की ज़ुल्फ़ ए परेशाँ सँवर - [मुझे प्यार से तेरा देखना मुझे छुप छुपा के वो देखना](https://bazmeshayari.com/mujhe-pyar-se-tera-dekhna-mujhe-chhup-chhupa-ke-wo-dekhna/): मुझे प्यार से तेरा देखना मुझे छुप छुपा के वो देखना मेरा सोया जज़्बा उभारना तुम्हें याद हो - [ये ऐश ओ तरब के मतवाले बेकार की बातें करते हैं](https://bazmeshayari.com/ye-aish-o-tarab-ke-matwaale-bekaar-ki-baaten-karte-hain/): ये ऐश ओ तरब के मतवाले बेकार की बातें करते हैं पायल के ग़मों का इल्म नहीं झंकार - [निगाह ए नाज़ का एक वार कर के छोड़ दिया](https://bazmeshayari.com/nigaah-e-naaz-ka-ek-waar-kar-ke-chhod-diya/): निगाह ए नाज़ का एक वार कर के छोड़ दिया दिल ए हरीफ़ को बेदार कर के छोड़ - [आँखों से दूर सुब्ह के तारे चले गए](https://bazmeshayari.com/aankhon-se-door-subah-ke-taare-chale-gaye/): आँखों से दूर सुब्ह के तारे चले गए नींद आ गई तो ग़म के नज़ारे चले गए, दिल - [तक़दीर की गर्दिश क्या कम थी इस पर ये क़यामत कर बैठे](https://bazmeshayari.com/taqdeer-ki-gardish-kya-kam-thi-is-par-ye-qayamat-kar-baithe/): तक़दीर की गर्दिश क्या कम थी इस पर ये क़यामत कर बैठे बेताबी ए दिल जब हद से - [दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ](https://bazmeshayari.com/duniya-ki-riwayat-se-begaan-nahi-hoon/): दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ छेड़ो न मुझे मैं कोई दीवाना नहीं हूँ, इस कसरत ए - [मुझे दुनिया वालो शराबी न समझो](https://bazmeshayari.com/mujhe-duniya-walo-sharabi-na-samjho/): मुझे दुनिया वालो शराबी न समझो मैं पीता नहीं हूँ पिलाई गई है जहाँ बेख़ुदी में क़दम लड़खड़ाए - [अब बंद जो इस अब्र ए गुहर बार को लग जाए](https://bazmeshayari.com/ab-band-jo-is-abr-e-guhar-bar-ko-lag-jaye/): अब बंद जो इस अब्र ए गुहर बार को लग जाए कुछ धूप हमारे दर ओ दीवार को - [तल्ख़ हालात में जीने का सबब होते हैं](https://bazmeshayari.com/talkh-halaat-me-jine-ka-sabab-hote-hain/): तल्ख़ हालात में जीने का सबब होते हैं ख़त जो छुप छुप के लिखे जाएँ अजब होते हैं, - [तुम शुजाअत के कहाँ क़िस्से सुनाने लग गए](https://bazmeshayari.com/tum-shujaat-ke-kahan-qisse-sunane-lag-gaye/): तुम शुजाअत के कहाँ क़िस्से सुनाने लग गए जीतने आए थे जो दुनिया ठिकाने लग गए, उड़ रही - [वो लोग आएँ जिन्हें हौसला ज़्यादा है](https://bazmeshayari.com/wo-log-aaye-jinhen-hausla-zyada-hai/): वो लोग आएँ जिन्हें हौसला ज़्यादा है ग़ज़ल में ख़ून का मसरफ़ ज़रा ज़्यादा है, सब अपने आप - [न कोई ख़्वाब कमाया न आँख ख़ाली हुई](https://bazmeshayari.com/na-koi-khwab-kamaya-na-aankh-khaali-hui/): न कोई ख़्वाब कमाया न आँख ख़ाली हुई तुम्हारे साथ हमारी भी रात काली हुई, ख़ुदा का शुक्र - [किसी का साथ मियाँ जी सदा नहीं रहा है](https://bazmeshayari.com/kisi-ka-saath-miyan-ji-sada-nahi-raha-hai/): किसी का साथ मियाँ जी सदा नहीं रहा है मगर दिलों को अभी सब्र आ नहीं रहा है, - [कोई भी दार से ज़िंदा नहीं उतरता है](https://bazmeshayari.com/koi-bhi-daar-se-zinda-nahi-utarta-hai/): कोई भी दार से ज़िंदा नहीं उतरता है मगर जुनून हमारा नहीं उतरता है, तबाह कर दिया अहबाब - [इसी दुनिया के इसी दौर के हैं](https://bazmeshayari.com/isi-duniya-ke-isi-daur-ke-hai/): इसी दुनिया के इसी दौर के हैं हम तो दिल्ली में भी बिजनौर के हैं, आप इनआम किसी - [चाहत की लौ को मद्धम कर देता है](https://bazmeshayari.com/chahat-ki-lau-ko-madhham-kar-deta-hai/): चाहत की लौ को मद्धम कर देता है डर जाता है मिलना कम कर देता है, जल्दी अच्छे - [कहानी में छोटा सा किरदार है](https://bazmeshayari.com/kahani-me-chhota-saa-kirdar-hai/): कहानी में छोटा सा किरदार है हमारा मगर एक मेआर है, ख़ुदा तुझ को सुनने की तौफ़ीक़ दे - [सब के होते हुए लगता है कि घर ख़ाली है](https://bazmeshayari.com/sab-ke-hote-hue-lagta-hai-ki-ghar-khaali-hai/): सब के होते हुए लगता है कि घर ख़ाली है ये तकल्लुफ़ है कि जज़्बात की पामाली है, - [अगर हमारे ही दिल में ठिकाना चाहिए था](https://bazmeshayari.com/agar-humare-hi-dil-me-thikaana-chahiye-tha/): अगर हमारे ही दिल में ठिकाना चाहिए था तो फिर तुझे ज़रा पहले बताना चाहिए था, चलो हमी - [अल्फ़ाज़ नर्म हो गए लहजे बदल गए](https://bazmeshayari.com/alfaaz-narm-ho-gaye-lahze-badal-gaye/): अल्फ़ाज़ नर्म हो गए लहजे बदल गए लगता है ज़ालिमों के इरादे बदल गए, ये फ़ाएदा ज़रूर हुआ - [वफ़ादारों पे आफ़त आ रही है](https://bazmeshayari.com/wafadaaron-pe-aafat-aa-rahi-hai/): वफ़ादारों पे आफ़त आ रही है मियाँ ले लो जो क़ीमत आ रही है, मैं उस से इतने - [जुनूँ से गुज़रने को जी चाहता है](https://bazmeshayari.com/junoon-se-guzarne-ko-jee-chahta-hai/): जुनूँ से गुज़रने को जी चाहता है हँसी ज़ब्त करने को जी चाहता है, जहाँ इश्क़ में डूब - [आँख से आँख मिलाता है कोई](https://bazmeshayari.com/aankh-se-aankh-milaata-hai-koi/): आँख से आँख मिलाता है कोई दिल को खींचे लिए जाता है कोई, वाए हैरत कि भरी महफ़िल - [न मिलता ग़म तो बर्बादी के अफ़्साने कहाँ जाते](https://bazmeshayari.com/na-milta-gam-to-barbadi-ke-afsaane-kahan-jaate/): न मिलता ग़म तो बर्बादी के अफ़्साने कहाँ जाते अगर दुनिया चमन होती तो वीराने कहाँ जाते ? - [ये दुनिया है यहाँ दिल को लगाना किस को आता है](https://bazmeshayari.com/ye-duniya-hai-yahan-dil-ko-lagaana-kis-ko-aata-hai/): ये दुनिया है यहाँ दिल को लगाना किस को आता है हज़ारों प्यार करते हैं निभाना किस को - [बदले बदले मेरे ग़म ख़्वार नज़र आते हैं](https://bazmeshayari.com/badle-badle-mere-gam-khwaar-nazar-aate-hain/): बदले बदले मेरे ग़म ख़्वार नज़र आते हैं मरहले इश्क़ के दुश्वार नज़र आते हैं, कश्ती ए ग़ैरत - [कैसे कह दूँ की मुलाक़ात नहीं होती है](https://bazmeshayari.com/kaise-kah-doon-ki-mulaqaat-nahi-hoti/): कैसे कह दूँ की मुलाक़ात नहीं होती है रोज़ मिलते हैं मगर बात नहीं होती है, आप लिल्लाह - [ऐ इश्क़ ये सब दुनिया वाले बेकार की बातें करते हैं](https://bazmeshayari.com/ae-ishq-ye-sab-duniya-wale-bekaar-ki-baaten-karte-hain/): ऐ इश्क़ ये सब दुनिया वाले बेकार की बातें करते हैं पायल के ग़मों का इल्म नहीं झंकार - [आख़िरी वक़्त है आख़िरी साँस है](https://bazmeshayari.com/aakhiri-waqt-hai-aakhiri-saans-hai/): आख़िरी वक़्त है आख़िरी साँस है ज़िंदगी की है शाम आख़िरी आख़िरी संगदिल आ भी जा अब ख़ुदा - [आज फिर गर्दिश ए तक़दीर पे रोना आया](https://bazmeshayari.com/aaj-fir-gardish-e-takdeer-pe-rona-aaya/): आज फिर गर्दिश ए तक़दीर पे रोना आया दिल की बिगड़ी हुई तस्वीर पे रोना आया, इश्क़ की - [ग़म ए आशिक़ी से कह दो रह ए आम तक न पहुँचे](https://bazmeshayari.com/gam-e-ashiqui-se-kah-do-rah-e-aam-tak-na-pahunche/): ग़म ए आशिक़ी से कह दो रह ए आम तक न पहुँचे मुझे ख़ौफ़ है ये तोहमत तेरे - [ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया](https://bazmeshayari.com/ae-mohabbat-tere-anjaam-pe-rona-aaya/): ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यूँ आज तेरे नाम पे रोना आया ? यूँ तो - [मेरे हमनफ़स मेरे हमनवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे](https://bazmeshayari.com/mere-humnafas-mere-humnawa-mujhe-dost-ban-ke-daga-na-de/): मेरे हमनफ़स मेरे हमनवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे मैं हूँ दर्द ए इश्क़ से जाँ - [गुलों में रंग भरे बाद ए नौ बहार चले](https://bazmeshayari.com/gulon-me-rang-bhare-baad-e-nau-bahar-chale/): गुलों में रंग भरे बाद ए नौ बहार चले चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले, क़फ़स - [दिल ए नादाँ तुझे हुआ क्या है](https://bazmeshayari.com/dil-e-naadaan-tujhe-hua-kya-hai/): दिल ए नादाँ तुझे हुआ क्या है आख़िर इस दर्द की दवा क्या है ? हम हैं मुश्ताक़ - [सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं](https://bazmeshayari.com/suna-hai-log-use-aankh-bhar-ke-dekhte-hain/): सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं सो उस के शहर में कुछ दिन ठहर के - [कोई समझेगा क्या राज़ ए गुलशन](https://bazmeshayari.com/koi-samjhega-kya-raaj-e-gulshan/): कोई समझेगा क्या राज़ ए गुलशन जब तक उलझे न काँटों से दामन, यक ब यक सामने आ - [साक़िया तू ने मेरे ज़र्फ़ को समझा क्या है](https://bazmeshayari.com/saaqiya-tu-ne-mere-zarf-ko-samjha-kya-hai/): साक़िया तू ने मेरे ज़र्फ़ को समझा क्या है ज़हर पी लूँगा तेरे हाथ से सहबा क्या है - [दुनिया ए तसव्वुर हम आबाद नहीं करते](https://bazmeshayari.com/duniya-e-tasavvur-hum-aabaad-nahin-karte/): दुनिया ए तसव्वुर हम आबाद नहीं करते याद आते हो तुम ख़ुद ही हम याद नहीं करते, वो - [ऐसा बनना सँवरना मुबारक तुम्हें](https://bazmeshayari.com/aisa-banna-sanvarna-mubarak-tumhen/): ऐसा बनना सँवरना मुबारक तुम्हें कम से कम इतना कहना हमारा करो चाँद शरमाएगा चाँदनी रात में यूँ - [ये बहार का ज़माना ये हसीं गुलों के साए](https://bazmeshayari.com/ye-bahaar-ka-zamana-ye-hasin-gulon-ke-saaye/): ये बहार का ज़माना ये हसीं गुलों के साए मुझे डर है बाग़ बाँ को कहीं नींद आ - [राह पर उन को लगा लाए तो हैं बातों में](https://bazmeshayari.com/raah-par-un-ko-laga-laaye-to-hain-baaton-me/): राह पर उन को लगा लाए तो हैं बातों में और खुल जाएँगे दो चार मुलाक़ातों में, ये - [ग़म से कहीं नजात मिले चैन पाएँ हम](https://bazmeshayari.com/gam-se-kahin-nazaat-mile-chain-paayen-hum/): ग़म से कहीं नजात मिले चैन पाएँ हम दिल ख़ून में नहाए तो गंगा नहाएँ हम, जन्नत में - [तुम आईना ही न हर बार देखते जाओ](https://bazmeshayari.com/tum-aaeena-hi-na-har-baar-dekhte-jaao/): तुम आईना ही न हर बार देखते जाओ मेरी तरफ़ भी तो सरकार देखते जाओ, न जाओ हाल - [तुम्हारे ख़त में नया एक सलाम किस का था](https://bazmeshayari.com/tumhare-khat-me-naya-ek-salam-kis-ka-tha/): तुम्हारे ख़त में नया एक सलाम किस का था न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किस का - [एक वो दौर कि मिन्नतें करता था वफ़ा निभाने की](https://bazmeshayari.com/ek-wo-daur-ki-minnaten-karta-tha-wafa-nibhaane-ki/): एक वो दौर कि मिन्नतें करता था वफ़ा निभाने की एक ये वक़्त कि उसे आरज़ू है दामन - [खिड़कियों से झाँक कर गलियों में डर देखा किए](https://bazmeshayari.com/khidkiyon-se-jhaank-kar-galiyon-me-dar-dekha/): खिड़कियों से झाँक कर गलियों में डर देखा किए घर में बैठे रात दिन दीवार ओ दर देखा - [इरादा है किसी जंगल में जा रहूँगा मैं](https://bazmeshayari.com/iraada-hai-kisi-jungle-me-jaa-rahunga/): इरादा है किसी जंगल में जा रहूँगा मैं तुम्हारा नाम हर एक पेड़ पर लिखूँगा मैं, हर एक - [शगुन ले कर न क्यूँ घर से चला मैं](https://bazmeshayari.com/shagun-le-kar-na-kyun-ghar-se-chala-main/): शगुन ले कर न क्यूँ घर से चला मैं तुम्हारे शहर में तन्हा फिरा मैं, अकेला था किसे - [वो मेरे साथ आने पे तैयार हो गया](https://bazmeshayari.com/wo-mere-saath-aane-pe-taiyar-ho-gaya/): वो मेरे साथ आने पे तैयार हो गया सोते से हड़बड़ा के मैं बेदार हो गया, उस के - [गिरह में रिश्वत का माल रखिए](https://bazmeshayari.com/girah-me-rishwat-ka-maal-rakhiye/): गिरह में रिश्वत का माल रखिए ज़रूरतों को बहाल रखिए, बिछाए रखिए अँधेरा हर सू सितारा कोई उछाल - [थोड़ी सर्दी ज़रा सा नज़ला है](https://bazmeshayari.com/thodi-sardi-zara-saa-nazla-hai/): थोड़ी सर्दी ज़रा सा नज़ला है शायरी का मिज़ाज पतला है, सुनने वालों का कुछ क़ुसूर नहीं नया - [दुख का एहसास न मारा जाए](https://bazmeshayari.com/dukh-ka-ehsas-na-maara-jaaye/): दुख का एहसास न मारा जाए आज जी खोल के हारा जाए, इन मकानों में कोई भूत भी - [सुखाने बाल ही कोठे पे आ गए होते](https://bazmeshayari.com/sukhaane-baal-hi-kothe-pe-aa-gaye-hote/): सुखाने बाल ही कोठे पे आ गए होते इसी बहाने ज़रा मुँह दिखा गए होते, तुम्हें भी वक़्त - [सच है कि वो बुरा था हर एक से लड़ा किया](https://bazmeshayari.com/sach-hai-ki-wo-bura-tha/): सच है कि वो बुरा था हर एक से लड़ा किया लेकिन उसे ज़लील किया ये बुरा किया, - [ऐसा हुआ नहीं है पर ऐसा न हो कहीं](https://bazmeshayari.com/aisa-hua-nahin-hai-par-aisa-na-ho/): ऐसा हुआ नहीं है पर ऐसा न हो कहीं उस ने मुझे न देख के देखा न हो - [रात पड़े घर जाना है](https://bazmeshayari.com/raat-pade-ghar-jaana-hai/): रात पड़े घर जाना है सुब्ह तलक मर जाना है, जाग के पछताना है बहुत सोते में डर - [क्या कहते क्या जी में था](https://bazmeshayari.com/kya-kahte-kya-jee-me-tha/): क्या कहते क्या जी में था शोर बहुत बस्ती में था, पहली बूँद गिरी टप से फिर सब - [तीसरी आँख खुलेगी तो दिखाई देगा](https://bazmeshayari.com/teesri-aankh-khulegi-to-dikhaai-dega/): तीसरी आँख खुलेगी तो दिखाई देगा और कै दिन मेरा हमज़ाद जुदाई देगा ? वो न आएगा मगर - [अचानक तेरी याद का सिलसिला](https://bazmeshayari.com/achanak-teri-yaad-ka-silsila/): अचानक तेरी याद का सिलसिला अँधेरे की दीवार बन के गिरा, अभी कोई साया निकल आएगा ज़रा जिस्म - [रात के मुँह पर उजाला चाहिए](https://bazmeshayari.com/raat-ke-munh-par-ujaala-chahiye/): रात के मुँह पर उजाला चाहिए चोर के घर में भी ताला चाहिए, ग़म बहुत दिन मुफ़्त की - [सोचते रहते हैं अक्सर रात में](https://bazmeshayari.com/sochate-rahte-hain-aksar-raat-me/): सोचते रहते हैं अक्सर रात में डूब क्यूँ जाते हैं मंज़र रात में ? किस ने लहराई हैं - [धूप में सब रंग गहरे हो गए](https://bazmeshayari.com/dhoop-me-sab-rang-gahre-ho-gaye/): धूप में सब रंग गहरे हो गए तितलियों के पर सुनहरे हो गए, सामने दीवार पर कुछ दाग़ - [कोई मौसम हो भले लगते थे](https://bazmeshayari.com/koi-mausam-ho-bhale-lagte-the/): कोई मौसम हो भले लगते थे दिन कहाँ इतने कड़े लगते थे ? ख़ुश तो पहले भी नहीं - [दिन में परियाँ क्यूँ आती हैं ?](https://bazmeshayari.com/din-me-pariyan-kyun-aati-hai/): दिन में परियाँ क्यूँ आती हैं ऐसी घड़ियाँ क्यूँ आती हैं ? अपना घर आने से पहले इतनी - [सफ़र में सोचते रहते हैं छाँव आए कहीं](https://bazmeshayari.com/safar-me-sochte-rahte-hai-chhanv-aaye-kahin/): सफ़र में सोचते रहते हैं छाँव आए कहीं ये धूप सारा समुंदर ही पी न जाए कहीं, मैं - [कुछ तो इस दिल को सज़ा दी जाए](https://bazmeshayari.com/kuch-to-is-dil-ko-saza-dee-jaaye/): कुछ तो इस दिल को सज़ा दी जाए उस की तस्वीर हटा दी जाए, ढूँढने में भी मज़ा - [सर्दी में दिन सर्द मिला](https://bazmeshayari.com/sardi-me-din-sard-mila/): सर्दी में दिन सर्द मिला हर मौसम बेदर्द मिला, ऊँचे लम्बे पेड़ों का पत्ता पत्ता ज़र्द मिला, सोचते - [मुँह ज़बानी क़ुरआन पढ़ते थे](https://bazmeshayari.com/munh-zabani-quraan-padhte-the/): मुँह ज़बानी क़ुरआन पढ़ते थे पहले बच्चे भी कितने बूढ़े थे, एक परिंदा सुना रहा था ग़ज़ल चार - [दिन एक के बाद एक गुज़रते हुए भी देख](https://bazmeshayari.com/din-ek-ke-baad-ek-guzarte-hue-bhi-dekh/): दिन एक के बाद एक गुज़रते हुए भी देख एक दिन तू अपने आप को मरते हुए भी - [और बाज़ार से क्या ले जाऊँ ?](https://bazmeshayari.com/aur-baazar-se-kya-le-jaaoon/): और बाज़ार से क्या ले जाऊँ पहली बारिश का मज़ा ले जाऊँ कुछ तो सौग़ात दूँ घर वालों - [धूप ने गुज़ारिश की](https://bazmeshayari.com/dhoop-ne-guzarish-ki-ek-boond-barish-ki/): धूप ने गुज़ारिश की एक बूँद बारिश की, लो गले पड़े काँटे क्यूँ गुलों की ख़्वाहिश की ? - [लबों पर यूँही सी हँसी भेज दे](https://bazmeshayari.com/labon-par-yunhi-see-hansi-bhej-de/): लबों पर यूँही सी हँसी भेज दे मुझे मेरी पहली ख़ुशी भेज दे, अँधेरा है कैसे तेरा ख़त - [अच्छे दिन कब आएँगे ?](https://bazmeshayari.com/achche-din-kab-aayenge/): अच्छे दिन कब आएँगे क्या यूँ ही मर जाएँगे ? अपने आप को ख़्वाबों से कब तक हम - [नींद रातों की उड़ा देते हैं](https://bazmeshayari.com/neend-raaton-ki-uda-dete-hain/): नींद रातों की उड़ा देते हैं हम सितारों को दुआ देते हैं, रोज़ अच्छे नहीं लगते आँसू ख़ास - [है कोई बैर सा उस को मेरी तदबीर के साथ](https://bazmeshayari.com/hai-koi-bair-saa-us-ko-meri-tadbir-ke-saath/): है कोई बैर सा उस को मेरी तदबीर के साथ अब कहाँ तक कोई झगड़ा करे तक़दीर के - [एक ख़ला अंदर उतर जाने दिया](https://bazmeshayari.com/ek-khalaa-andar-utar-jaane-diya/): एक ख़ला अंदर उतर जाने दिया ख़ुद को ख़ालीपन से भर जाने दिया, जान मुड़ कर देखती थी - [ग़म को दिल का क़रार कर लिया जाए](https://bazmeshayari.com/gam-ko-dil-ka-qarar-kar-liya-jaaye/): ग़म को दिल का क़रार कर लिया जाए इस ख़िज़ाँ को बहार कर लिया जाए, फिर जुनूँ को - [अक्स मौजूद न साया मौजूद](https://bazmeshayari.com/aqs-mauzood-na-saya-mauzood-mujh-me/): अक्स मौजूद न साया मौजूद मुझ में अब कुछ नहीं मेरा मौजूद, निकल आता हूँ मैं अक्सर बाहर - [कोशिश तो है कि ज़ब्त को रुस्वा करूँ नहीं](https://bazmeshayari.com/koshish-to-hai-ki-zabt-ko-ruswa-karoon-nahin/): कोशिश तो है कि ज़ब्त को रुस्वा करूँ नहीं हँस कर मिलूँ सभी से किसी पर खुलूँ नहीं, - [कुछ इस क़दर मैं ख़िरद के असर में आ गया हूँ](https://bazmeshayari.com/kuch-is-qadar-main-khirad-ke-asar-me-aa-gaya-hoon/): कुछ इस क़दर मैं ख़िरद के असर में आ गया हूँ सिमट के सारा का सारा ही सर - [बे घरी का अपनी ये इज़हार कम कर दीजिए](https://bazmeshayari.com/be-ghari-ka-apni-ye-izhaar-kam-kar-dijiye/): बे घरी का अपनी ये इज़हार कम कर दीजिए शेर में ज़िक्र ए दर ओ दीवार कम कर - [दुनिया से जिस से आगे का सोचा नहीं गया](https://bazmeshayari.com/duniya-se-jis-se-aage-ka-socha-nahi-gaya/): दुनिया से जिस से आगे का सोचा नहीं गया हम से वहाँ पहुँच के भी ठहरा नहीं गया, - [ख़त में उभर रही है तस्वीर धीरे धीरे](https://bazmeshayari.com/khat-me-ubhar-rahi-hai-tasveer-dheere-dheere/): ख़त में उभर रही है तस्वीर धीरे धीरे गुम होती जा रही है तहरीर धीरे धीरे, एहसास तुझ - [न जिस्म साथ हमारे न जाँ हमारी तरफ़](https://bazmeshayari.com/naa-zism-saath-humare-na-jaan-humari-taraf-hai/): न जिस्म साथ हमारे न जाँ हमारी तरफ़ है कुछ भी हम में हमारा कहाँ हमारी तरफ़, खड़े - [कितनी आसानी से दुनिया की गिरह खोलता है](https://bazmeshayari.com/kitni-aasaani-se-duniya-ki-girah-kholta-hai/): कितनी आसानी से दुनिया की गिरह खोलता है मुझ में एक बच्चा बुज़ुर्गों की तरह बोलता है, क्या - [इजाज़त कम थी जीने की मगर मोहलत ज़्यादा थी](https://bazmeshayari.com/izazat-kam-thi-jine-ki-magar-mohlat-zyada/): इजाज़त कम थी जीने की मगर मोहलत ज़्यादा थी हमारे पास मरने के लिए फ़ुर्सत ज़्यादा थी, तअज्जुब - [ये कब चाहा कि मैं मशहूर हो जाऊँ](https://bazmeshayari.com/ye-kab-chaha-ki-mashahoor-ho-jaaoon/): ये कब चाहा कि मैं मशहूर हो जाऊँ बस अपने आप को मंज़ूर हो जाऊँ, नसीहत कर रही - [घर से निकले थे हौसला कर के](https://bazmeshayari.com/ghar-se-nikale-the-hausla-kar-ke/): घर से निकले थे हौसला कर के लौट आए ख़ुदा ख़ुदा कर के, दर्द ए दिल पाओगे वफ़ा - [कुछ परिंदों को तो बस दो चार दाने चाहिएँ](https://bazmeshayari.com/kuch-parindo-ko-to-bas-do-chaar-daane-chahiye/): कुछ परिंदों को तो बस दो चार दाने चाहिएँ कुछ को लेकिन आसमानों के ख़ज़ाने चाहिएँ, दोस्तों का - [किसी दिन ज़िंदगानी में करिश्मा क्यूँ नहीं होता](https://bazmeshayari.com/kisi-din-zindagaani-me-karishma-kyun-nahi-hota/): किसी दिन ज़िंदगानी में करिश्मा क्यूँ नहीं होता मैं हर दिन जाग तो जाता हूँ ज़िंदा क्यूँ नहीं - [चूर था ज़ख़्मों से दिल ज़ख़्मी जिगर भी हो गया](https://bazmeshayari.com/choor-tha-zakhmon-se-dil-zakhmi-zigar-bhi-ho-gaya/): चूर था ज़ख़्मों से दिल ज़ख़्मी जिगर भी हो गया उस को रोते थे कि सूना ये नगर - [क्या दौर था फ़ुर्सतों में बस यही काम होना](https://bazmeshayari.com/kya-daur-tha-fursaton-me-bas-yahi-kaam-hona/): क्या दौर था फ़ुर्सतों में बस यही काम होना आँखों में सूरत तेरी होंठों पर तेरा नाम होना, - [इश्क में जब नफ़ा नुक़सान का हिसाब लगाया जायेगा](https://bazmeshayari.com/ishq-me-jab-nafa-nuqsaan-ka-hisab-lagaya-jayega/): इश्क में जब नफ़ा नुक़सान का हिसाब लगाया जायेगा उस दिन सच्चे दिल टूटेंगे, ख़्वाबों को दफ़नाया जायेगा, - [जीवन मुझ से मैं जीवन से शरमाता हूँ](https://bazmeshayari.com/jivan-mujh-se-main-jivan-se-sharmata-hoon/): जीवन मुझ से मैं जीवन से शरमाता हूँ मुझ से आगे जाने वालो में आता हूँ, जिन की - [फ़ैज़ और फ़ैज़ का ग़म भूलने वाला है कहीं](https://bazmeshayari.com/faiz-aur-fazi-ka-gam-bhulne-wala-hai-kahin/): फ़ैज़ और फ़ैज़ का ग़म भूलने वाला है कहीं मौत ये तेरा सितम भूलने वाला है कहीं, हम - [आग है फैली हुई काली घटाओं की जगह](https://bazmeshayari.com/aag-hai-faili-hui-kaali-ghataao-ki-jagah/): आग है फैली हुई काली घटाओं की जगह बद दुआएँ हैं लबों पर अब दुआओं की जगह, इंतिख़ाब - [अफ़्सोस तुम्हें कार के शीशे का हुआ है](https://bazmeshayari.com/afsos-tumhen-kaar-ke-shishe-ka-hua-hai/): अफ़्सोस तुम्हें कार के शीशे का हुआ है परवाह नहीं एक माँ का जो दिल टूट गया है, - [बातें तो कुछ ऐसी हैं कि ख़ुद से भी न की जाएँ](https://bazmeshayari.com/baaten-to-kuch-aisi-hai-ki-khud-se-bhi-na-kee-jaayen/): बातें तो कुछ ऐसी हैं कि ख़ुद से भी न की जाएँ सोचा है ख़मोशी से हर एक - [उस रऊनत से वो जीते हैं कि मरना ही नहीं](https://bazmeshayari.com/us-ranaut-se-wo-jite-hain-ki-marna-hi-nahin/): उस रऊनत से वो जीते हैं कि मरना ही नहीं तख़्त पर बैठे हैं यूँ जैसे उतरना ही - [वो देखने मुझे आना तो चाहता होगा](https://bazmeshayari.com/wo-dekhne-mujhe-aana-to-chahta-hoga/): वो देखने मुझे आना तो चाहता होगा मगर ज़माने की बातों से डर गया होगा, उसे था शौक़ - [फिर कभी लौट कर न आएँगे](https://bazmeshayari.com/fir-kabhi-laut-kar-na-aayenge/): फिर कभी लौट कर न आएँगे हम तेरा शहर छोड़ जाएँगे, दूर उफ़्तादा बस्तियों में कहीं तेरी यादों - [अब तेरी ज़रूरत भी बहुत कम है मेरी जाँ](https://bazmeshayari.com/ab-teri-zarurat-bhi-bahut-kam-hai/): अब तेरी ज़रूरत भी बहुत कम है मेरी जाँ अब शौक़ का कुछ और ही आलम है मेरी - [दिल ए पुर शौक़ को पहलू में दबाए रखा](https://bazmeshayari.com/dil-e-pur-shauk-ko-pahlu-me-dabaye-rakha/): दिल ए पुर शौक़ को पहलू में दबाए रखा तुझ से भी हम ने तेरा प्यार छुपाए रखा, - [उस ने जब मेरी तरफ प्यार से देखा होगा](https://bazmeshayari.com/us-ne-jab-meri-taraf-pyar-se-dekh-hoga/): उस ने जब मेरी तरफ प्यार से देखा होगा मेरे बारे में बड़े गौर से सोचा होगा, सुबह - [समन्दर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं](https://bazmeshayari.com/samndar-me-utarta-hoon-to-aankhen-bhig-jaati-hain/): समन्दर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं तेरी आँखों को पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती - [मैं खुश नसीबी हूँ तेरी मुझे भी रास है तू](https://bazmeshayari.com/main-khush-naisbi-hoon-teri-mujhe-bhi-raas-hai-tu/): मैं खुश नसीबी हूँ तेरी मुझे भी रास है तू तेरा लिबास हूँ मैं और मेरा लिबास है - [बटे रहोगे तो अपना यूँही बहेगा लहू](https://bazmeshayari.com/bate-rahoge-to-apna-yunhi-bahega-lahoo/): बटे रहोगे तो अपना यूँही बहेगा लहू हुए न एक तो मंज़िल न बन सकेगा लहू, हो किस - [कभी तो मेहरबाँ हो कर बुला लें](https://bazmeshayari.com/kabhi-to-meharbaan-ho-kar-bula-le/): कभी तो मेहरबाँ हो कर बुला लें ये महवश हम फ़क़ीरों की दुआ लें, न जाने फिर ये - [ख़ूब आज़ादी ए सहाफ़त है](https://bazmeshayari.com/khoob-aazadi-e-sahafat-hai/): ख़ूब आज़ादी ए सहाफ़त है नज़्म लिखने पे भी क़यामत है, दावा जम्हूरियत का है हर आन ये - [झूटी ख़बरें घड़ने वाले झूटे शेर सुनाने वाले](https://bazmeshayari.com/jhuthi-khabaren-ghadne-wale-jhuthe-sher-sunane-wale/): झूटी ख़बरें घड़ने वाले झूटे शेर सुनाने वाले लोगो सब्र कि अपने किए की जल्द सज़ा हैं पाने - [ये और बात तेरी गली में न आएँ हम](https://bazmeshayari.com/ye-aur-baat-teri-gali-me-na-aaye-hum/): ये और बात तेरी गली में न आएँ हम लेकिन ये क्या कि शहर तेरा छोड़ जाएँ हम, - [वही हालात हैं फ़क़ीरों के](https://bazmeshayari.com/wahi-halaat-hain-fakiron-ke-din-fire-hain/): वही हालात हैं फ़क़ीरों के दिन फिरे हैं फ़क़त वज़ीरों के, अपना हल्क़ा है हल्क़ा ए ज़ंजीर और - [फिर दिल से आ रही है सदा उस गली में चल](https://bazmeshayari.com/fir-dil-se-aa-rahi-hai-sada-us-gali-me-chal/): फिर दिल से आ रही है सदा उस गली में चल शायद मिले ग़ज़ल का पता उस गली - [कुछ लोग ख़यालों से चले जाएँ तो सोएँ](https://bazmeshayari.com/kuch-log-khyalon-se-chale-jaayen-to-soyen/): कुछ लोग ख़यालों से चले जाएँ तो सोएँ बीते हुए दिन रात न याद आएँ तो सोएँ, चेहरे - [इस शहर ए ख़राबी में ग़म ए इश्क़ के मारे](https://bazmeshayari.com/is-shahar-e-kharabi-me-gam-e-ishq-ke-maare-zinda-hain/): इस शहर ए ख़राबी में ग़म ए इश्क़ के मारे ज़िंदा हैं यही बात बड़ी बात है प्यारे, - [दिल पर जो ज़ख़्म हैं वो दिखाएँ किसी को क्या](https://bazmeshayari.com/dil-par-jo-zakhm-hain-wo-dikhaye-kisi-ko-kya/): दिल पर जो ज़ख़्म हैं वो दिखाएँ किसी को क्या अपना शरीक ए दर्द बनाएँ किसी को क्या - [अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं](https://bazmeshayari.com/apno-ne-wo-ranj-diye-hai-begaane-yaad-aate-hain/): अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं देख के उस बस्ती की हालत वीराने याद - [वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम ए ज़र है ख़तरे में](https://bazmeshayari.com/watan-ko-kuch-nahin-khatara-nizam-e-zar-hai-khatare-me/): वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम ए ज़र है ख़तरे में हक़ीक़त में जो रहज़न है वही रहबर - [हुजूम देख के रस्ता नहीं बदलते हम](https://bazmeshayari.com/hujum-dekh-ke-rasta-nahin-badalte-hum/): हुजूम देख के रस्ता नहीं बदलते हम किसी के डर से तक़ाज़ा नहीं बदलते हम, हज़ार ज़ेर ए - [भुला भी दे उसे जो बात हो गई प्यारे](https://bazmeshayari.com/bhula-bhi-de-use-jo-baat-ho-gai-pyare/): भुला भी दे उसे जो बात हो गई प्यारे नए चराग़ जला रात हो गई प्यारे, तेरी निगाह - [और सब भूल गए हर्फ़ ए सदाक़त लिखना](https://bazmeshayari.com/aur-sab-bhool-gaye-harf-e-sadakat-likhna/): और सब भूल गए हर्फ़ ए सदाक़त लिखना रह गया काम हमारा ही बग़ावत लिखना, लाख कहते रहें - [दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है](https://bazmeshayari.com/dushmanon-ne-jo-dushmani-ki-hai/): दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है दोस्तों ने भी क्या कमी की है, ख़ामुशी पर हैं लोग ज़ेर - [शेर से शाइरी से डरते हैं](https://bazmeshayari.com/sher-se-shayari-se-darte-hain/): शेर से शाइरी से डरते हैं कम नज़र रौशनी से डरते हैं, लोग डरते हैं दुश्मनी से तेरी - [दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं](https://bazmeshayari.com/dil-ki-baat-labon-par-laa-kar-ab-tak-hum-dukh-sahte-hain/): दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं हम ने सुना था इस - [बेवफ़ा तुम को भुलाने में तकल्लुफ़ कैसा](https://bazmeshayari.com/bewafa-tum-ko-bhulaane-me-takalluf-kaisa/): बेवफ़ा तुम को भुलाने में तकल्लुफ़ कैसा आइना सच का दिखाने में तकल्लुफ़ कैसा तीरगी घर की मिटाने - [वक़्त का मारा हुआ इंसाँ रऊनत का शिकार](https://bazmeshayari.com/waqt-ka-maara-hua-insaan-raunat-ka-shikar/): वक़्त का मारा हुआ इंसाँ रऊनत का शिकार जिस की मेहनत का नतीजा अज़मत-ए-सरमाया-दार अस्ल में हिन्दोस्ताँ का - [रात कुछ तारीक भी है और कुछ रौशन भी है](https://bazmeshayari.com/raat-kuch-taarik-bhi-hai-aur-kuch-raushan-bhi/): रात कुछ तारीक भी है और कुछ रौशन भी है वक़्त के माथे पे शोख़ी भी है भोला - [दीवाली के दीप जलाएँ आ जाओ](https://bazmeshayari.com/deewali-ke-deep-jalaayen/): दीवाली के दीप जलाएँ आ जाओ रौशन रौशन गीत सुनाएँ आ जाओ गोशे गोशे में तज़ईन-ओ-ज़ेबाई साफ़ करें - [जब से आई है दीपावली](https://bazmeshayari.com/jab-se-aai-hai-deepavali/): जब से आई है दीपावली हर तरफ़ छाई है रौशनी हर जगह चाहतों के दिए शाम होते ही - [जल रहे हैं दिए मुंडेरों पर](https://bazmeshayari.com/jal-rahe-hain-diye-mundero-par/): जल रहे हैं दिए मुंडेरों पर हो रहा है करम अँधेरों पर तुम जो बन कर किरन किरन - [हो रहे हैं रात के दियों के हर सू एहतिमाम](https://bazmeshayari.com/ho-rahe-hain-raat-ke-diyon-ke-har-soo-ehtimam/): हो रहे हैं रात के दियों के हर सू एहतिमाम सुब्ह से जल्वा नुमा है आज दीवाली की - [छुप गया ख़ुर्शीद ए ताबाँ आई दीवाली की शाम](https://bazmeshayari.com/chhup-gaya-khurshid-e-taabaan-aai-deewali-ki-sham/): छुप गया ख़ुर्शीद ए ताबाँ आई दीवाली की शाम हर तरफ़ जश्न ए चराग़ाँ का है कैसा एहतिमाम - [घर की क़िस्मत जगी घर में आए सजन](https://bazmeshayari.com/ghar-ki-qismat-jagi-ghar-me-aaye-sajan/): घर की क़िस्मत जगी घर में आए सजन ऐसे महके बदन जैसे चंदन का बन आज धरती पे - [सुनो मादर-ए-हिन्द के नौ-निहालो](https://bazmeshayari.com/suno-madar-e-hind-ke-nau-nihaalo/): सुनो मादर-ए-हिन्द के नौ-निहालो सदाक़त पे गर्दन कटा लेने वालो उठो ख़्वाब-ए-ग़फ़लत मिटा लो मिटा लो कमर-बस्ता हो - [गो ख़ाक हो चुका है हिन्दोस्ताँ हमारा](https://bazmeshayari.com/go-khaaq-ho-chuka-hai-hindostaan-humara/): गो ख़ाक हो चुका है हिन्दोस्ताँ हमारा फिर भी है कुल जहाँ में पल्ला गराँ हमारा मुँह तक - [स्वराज का झंडा भारत में गड़वा दिया गाँधी बाबा ने](https://bazmeshayari.com/swaraj-ka-jhanda-bharat-me-gadwa-diya-gaandhi-baba-ne/): स्वराज का झंडा भारत में गड़वा दिया गाँधी बाबा ने दिल क़ौम-ओ-वतन के दुश्मन का दहला दिया गाँधी - [इक प्रेम पुजारी आया है चरनों में ध्यान लगाने को](https://bazmeshayari.com/ek-prem-pujaari-aaya-hai-charano-me-dhyaan-lagaane-ko/): इक प्रेम पुजारी आया है चरनों में ध्यान लगाने को भगवान तुम्हारी मूरत पर श्रधा के फूल चढ़ाने - [राम के हिज्र में इक रोज़ भरत ने ये कहा](https://bazmeshayari.com/ram-ke-hizr-me-ek-roz-bharat-ne-ye-kaha/): राम के हिज्र में इक रोज़ भरत ने ये कहा क़ल्ब-ए-मुज़्तर को शब-ओ-रोज़ नहीं चैन ज़रा दिल में - [घुट गया अँधेरे का आज दम अकेले में](https://bazmeshayari.com/ghut-gaya-andhere-ka-aaj-dam-akele-me/): घुट गया अँधेरे का आज दम अकेले में हर नज़र टहलती है रौशनी के मेले में आज ढूँढने - [एक दो ही नहीं छब्बीस दिए](https://bazmeshayari.com/ek-do-hi-nahi-chhabbis-diye/): एक दो ही नहीं छब्बीस दिए एक इक कर के जलाए मैं ने एक दिया नाम का आज़ादी - [मेरी साँसों को गीत और आत्मा को साज़ देती है](https://bazmeshayari.com/meri-saanson-ko-geet-aur-aatma-ko-saaz-deti-hai/): मेरी साँसों को गीत और आत्मा को साज़ देती है ये दीवाली है सब को जीने का अंदाज़ - [हर एक मकाँ में जला फिर दिया दिवाली का](https://bazmeshayari.com/har-ek-makaan-me-jala-fir-diya-deewali-ka/): हर एक मकाँ में जला फिर दिया दिवाली का हर एक तरफ़ को उजाला हुआ दिवाली का, सभी - [दोस्तो क्या क्या दिवाली में नशात ओ ऐश है](https://bazmeshayari.com/doston-kya-kya-deewali-me-nashaat-o-aish-hai/): दोस्तो क्या क्या दिवाली में नशात ओ ऐश है सब मुहय्या है जो इस हंगाम के शायाँ है - [कोई सिपाही नहीं बच सका निशानों से](https://bazmeshayari.com/koi-sipahi-nahi-bach-saka-nishano-se/): कोई सिपाही नहीं बच सका निशानों से गली में तीर बरसते रहे मकानों से, ये बर्बादी अचानक से - [तुम से पहले वो जो एक शख़्स यहाँ तख़्तनशीं था](https://bazmeshayari.com/tum-se-pahle-wo-jo-ek-shakhs-yahan-takhtnashin-tha/): तुम से पहले वो जो एक शख़्स यहाँ तख़्तनशीं था उस को भी अपने ख़ुदा होने पे इतना - [वो बात बात में ऐसे निशान छोड़ गया](https://bazmeshayari.com/wo-baat-baat-me-aise-nishan-chhod-gaya/): वो बात बात में ऐसे निशान छोड़ गया सुलगते दिल को चिता के समान छोड़ गया, न जाने - [मायूस ए शाम ए ग़म तुझे इस की ख़बर भी है](https://bazmeshayari.com/maayus-e-sham-e-gam-tujhe-is-kee-khabar-bhi-hai/): मायूस ए शाम ए ग़म तुझे इस की ख़बर भी है तारीकियों की आड़ में नूर ए सहर - [कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है](https://bazmeshayari.com/koi-hndu-koi-muslim-koi-isaai-hai/): कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है सब ने इंसान न बनने की क़सम खाई है, इतनी ख़ूँ - [जब तेरा हुक्म मिला, तर्क ए मुहब्बत कर दी](https://bazmeshayari.com/jab-tera-huqm-mila-tark-e-muhabbat-kar-dee/): जब तेरा हुक्म मिला, तर्क ए मुहब्बत कर दी दिल मगर इस पे वो धड़का कि क़यामत कर - [हमने सुना था फ़रिश्ते जान लेते है](https://bazmeshayari.com/humne-suna-tha-farishte-jaan-lete-hain/): हमने सुना था फ़रिश्ते जान लेते है खैर छोड़ो ! अब तो इन्सान लेते है, इश्क़ ने ऐसी - [इन्सान भूल चुका है इन्सान की क़ीमत](https://bazmeshayari.com/insan-bhool-chuka-hai-insan-kee-qeemat/): इन्सान भूल चुका है इन्सान की क़ीमत बाज़ार में बढ़ गई आज हैवान की क़ीमत, इक्तिदार में आते - [भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे](https://bazmeshayari.com/bhala-gamon-se-kahan-haar-jaane-wale-the/): भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे हम आँसुओं की तरह मुस्कुराने वाले थे, हम ही ने - [मैं दिल पे जब्र करूँगा तुझे भुला दूँगा](https://bazmeshayari.com/main-dil-pe-zabr-karunga-tujhe-bhula-dunga/): मैं दिल पे जब्र करूँगा तुझे भुला दूँगा मरूँगा ख़ुद भी तुझे भी कड़ी सज़ा दूँगा, ये तीरगी - [तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा](https://bazmeshayari.com/tum-door-ho-to-pyar-ka-mausam-na-ayega/): तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा अब के बरस बहार का मौसम न आएगा, चूमूँगा - [भड़काएँ मेरी प्यास को अक्सर तेरी आँखें](https://bazmeshayari.com/bhadkaaye-meri-pyas-ko-aksar-teri-aankhen/): भड़काएँ मेरी प्यास को अक्सर तेरी आँखें सहरा मेरा चेहरा है समुंदर तेरी आँखें, फिर कौन भला दाद - [इतनी मुद्दत बाद मिले हो](https://bazmeshayari.com/itni-muddat-baad-mile-ho/): इतनी मुद्दत बाद मिले हो किन सोचों में गुम फिरते हो ? इतने ख़ाइफ़ क्यूँ रहते हो ? - [उजड़ उजड़ के सँवरती है तेरे हिज्र की शाम](https://bazmeshayari.com/ujad-ujad-ke-sanvarti-hai-tere-hizr-kee-shaam/): उजड़ उजड़ के सँवरती है तेरे हिज्र की शाम न पूछ कैसे गुज़रती है तेरे हिज्र की शाम - [निगाह ए इल्तिफ़ात अब बदगुमाँ मालूम होती है](https://bazmeshayari.com/nigaah-e-iltifaat-ab-badgumaan-malum-hoti-hai/): निगाह ए इल्तिफ़ात अब बदगुमाँ मालूम होती है मेरी हर बात दुनिया को गिराँ मालूम होती है, तड़प - [हम तो हर ग़म को जहाँ के ग़म ए जानाँ समझे](https://bazmeshayari.com/hum-to-har-gam-ko-jahan-ke-gam-e-jaana-samjhe/): हम तो हर ग़म को जहाँ के ग़म ए जानाँ समझे जब बढ़ा नश्शा तो हम बादा ए - [अंदाज़ हू ब हू तेरी आवाज़ ए पा का था](https://bazmeshayari.com/andaaz-hoo-ba-hoo-teri-aawaz-e-paa-ka-tha/): अंदाज़ हू ब हू तेरी आवाज़ ए पा का था देखा निकल के घर से तो झोंका हवा - [तुझे खो कर भी तुझे पाऊँ जहाँ तक देखूँ](https://bazmeshayari.com/tujhe-kho-kar-bhi-tujhe-paaoon-jahan-tak-dekhoon/): तुझे खो कर भी तुझे पाऊँ जहाँ तक देखूँ हुस्न ए यज़्दाँ से तुझे हुस्न ए बुताँ तक - [फ़रेब ए हुस्न तेरा एतिबार कर लेंगे](https://bazmeshayari.com/fareb-e-husn-tera-aetibar-kar-lenge/): फ़रेब ए हुस्न तेरा एतिबार कर लेंगे इसी तरह से ख़िज़ाँ को बहार कर लेंगे, हमारा साथ अगर - [फ़ना कुछ नहीं है बक़ा कुछ नहीं है](https://bazmeshayari.com/fana-kuch-nahi-hai-baqa-kuch-nahi-hai/): फ़ना कुछ नहीं है बक़ा कुछ नहीं है फ़क़त वहम है मा सिवा कुछ नहीं है, मेरा उज़्र - [इस तरह गुम हूँ ख़यालों में कुछ एहसास नहीं](https://bazmeshayari.com/is-tarah-goom-hoon-khyaalon-me-kuch-ehsas-nahin/): इस तरह गुम हूँ ख़यालों में कुछ एहसास नहीं कौन है पास मेरे कौन मेरे पास नहीं, दर्द - [कमाँ पे चढ़ के ब शक्ल ए ख़दंग होना पड़ा](https://bazmeshayari.com/kamaan-pe-chadh-ke-ba-shakl-e-khadang-hona-pada/): कमाँ पे चढ़ के ब शक्ल ए ख़दंग होना पड़ा हरीफ़ ए अम्न से मसरूफ़ ए जंग होना - [जुदा उस जिस्म से हो कर कहीं तहलील हो जाता](https://bazmeshayari.com/juda-us-zism-se-ho-kar-kahin-tahlil-ho-jaata/): जुदा उस जिस्म से हो कर कहीं तहलील हो जाता फ़ना होते ही लाफ़ानी में मैं तब्दील हो - [अमीरों के बुरे अतवार को जो ठीक समझे है](https://bazmeshayari.com/amiron-ke-bure-atwaar-ko-jo-thik-samjhe-hain/): अमीरों के बुरे अतवार को जो ठीक समझे है मेरी हक़ बात को वो क़ाबिल ए तश्कीक समझे - [ये कहना आसान नहीं है](https://bazmeshayari.com/ye-kahna-aasaan-nahi-hai/): ये कहना आसान नहीं है दिल में कोई अरमान है, हिम्मत की तो पाई मंज़िल दुनिया का एहसान - [मोहब्बत ख़ुद ही अपनी पर्दादार ए राज़ होती है](https://bazmeshayari.com/mohabbat-khud-hi-apni-pardadar-e-raaz-hoti-hai/): मोहब्बत ख़ुद ही अपनी पर्दादार ए राज़ होती है जो दिल पर चोट लगती है वो बे आवाज़ - [तस्कीन न हो जिस में वो राज़ बदल डालो](https://bazmeshayari.com/taskeen-na-ho-jis-me-wo-raaz-badal-daalo/): तस्कीन न हो जिस में वो राज़ बदल डालो जो राज़ न रख पाए हमराज़ बदल डालो, तुम - [रहोगे हम से कब तक बेख़बर से](https://bazmeshayari.com/rahoge-hum-se-kab-tak-bekhabar-se/): रहोगे हम से कब तक बेख़बर से जुदा होती नहीं दीवार दर से, मुसाफ़िर हाल क्या अपना सुनाए - [हालात पर निगाह रुतों पर नज़र न थी](https://bazmeshayari.com/halaat-par-nigaah-ruto-par-nazar-na-thi/): हालात पर निगाह रुतों पर नज़र न थी जब तक रहे चमन में चमन की ख़बर न थी, - [इतना सैराब होने वाला था](https://bazmeshayari.com/itna-sairab-hone-wala-tha/): इतना सैराब होने वाला था मैं तह ए आब होने वाला था, तेज़ उस हुस्न की हरारत थी - [अनगिनत फूल इंतिख़ाब गुलाब](https://bazmeshayari.com/anginat-phool-intikhab-gulab/): अनगिनत फूल इंतिख़ाब गुलाब आदतें कर गया ख़राब गुलाब, वो है नाराज़ उस की चौखट पर ले के - [मेरे क़ातिल को पुकारो कि मैं जिंदा हूँ अभी](https://bazmeshayari.com/mere-qatil-ko-pukaro-ki-main-zinda-hoon-abhi/): मेरे क़ातिल को पुकारो कि मैं जिंदा हूँ अभी फिर से मक़तल को सँवारों कि मैं जिंदा हूँ - [कोई हो दर्द ए मुसलसल तो नींद आती है](https://bazmeshayari.com/koi-ho-dard-e-musalsam-to-neend-aati-hai/): कोई हो दर्द ए मुसलसल तो नींद आती है बदन में हो कोई हलचल तो नींद आती है, - [कुछ न इस काम में किफ़ायत की](https://bazmeshayari.com/kuch-na-is-kaam-me-kifayat-kee/): कुछ न इस काम में किफ़ायत की मैं ने दिल खोल कर मोहब्बत की, सस्ते दामों कहाँ मैं - [शजर में शजर सा बचा कुछ नहीं](https://bazmeshayari.com/shazar-me-shazar-sa-bacha-kuch-bhi-nahin/): शजर में शजर सा बचा कुछ नहीं हवाओं से फिर भी गिला कुछ नहीं, कहा क्या गुज़रते हुए - [फ़ैसले वो न जाने कैसे थे](https://bazmeshayari.com/faisle-wo-na-jaane-kaise-the/): फ़ैसले वो न जाने कैसे थे रात की रात घर से निकले थे, याद आते हैं अब भी - [इस बार तो ग़ुरूर ए हुनर भी निकल गया](https://bazmeshayari.com/is-baar-to-gurur-e-hunar-bhi-nikal-gaya/): इस बार तो ग़ुरूर ए हुनर भी निकल गया बच कर वो मुझ से बार ए दिगर भी - [रास्ते अपनी नज़र बदला किए](https://bazmeshayari.com/raaste-apni-nazar-badla-kiye/): रास्ते अपनी नज़र बदला किए हम तुम्हारा रास्ता देखा किए, अहल ए दिल सहरा में गुम होते रहे - [बला वो टल गई सदक़े में जिस के शहर चढ़े](https://bazmeshayari.com/balaa-wo-tal-gai-sadke-me-jis-ke-shahar-chadhe/): बला वो टल गई सदक़े में जिस के शहर चढ़े हमें डुबो के न अब कोई ख़ूनी नहर - [हर चमकती क़ुर्बत में एक फ़ासला देखूँ](https://bazmeshayari.com/har-chamakati-qurbat-me-ek-faasla-dekhoon/): हर चमकती क़ुर्बत में एक फ़ासला देखूँ कौन आने वाला है किस का रास्ता देखूँ ? शाम का - [फिर गोया हुई शाम परिंदों की ज़बानी](https://bazmeshayari.com/fir-goya-hui-shaam-parindon-ki-zabani/): फिर गोया हुई शाम परिंदों की ज़बानी आओ सुनें मिट्टी से ही मिट्टी की कहानी, वाक़िफ़ नहीं अब - [वक़्त बंजारा सिफ़त लम्हा ब लम्हा अपना](https://bazmeshayari.com/waqt-banjaara-sifat-lamha-ba-lamha-apna/): वक़्त बंजारा सिफ़त लम्हा ब लम्हा अपना किस को मालूम यहाँ कौन है कितना अपना ? जो भी - [एक रात लगती है एक सहर बनाने में](https://bazmeshayari.com/ek-raat-lagti-hai-ek-sahar-banane-me/): एक रात लगती है एक सहर बनाने में हम ने क्यों नहीं सोचा हमसफ़र बनाने में ? मंज़िलें - [अगरचे सब यहाँ सस्ता पड़ेगा](https://bazmeshayari.com/agarche-sab-yahan-sasta-padega/): अगरचे सब यहाँ सस्ता पड़ेगा तुम्हें बस इश्क़ ही महँगा पड़ेगा, मुसव्विर से उलझने की सज़ा है हमें - [छोड़ कर ऐसे गया है छोड़ने वाला मुझे](https://bazmeshayari.com/chhod-kar-aise-gaya-hai-chhodne-wala-mujhe/): छोड़ कर ऐसे गया है छोड़ने वाला मुझे दोस्तो उस ने कहीं का भी नहीं छोड़ा मुझे, बोल - [अगर जो प्यार ख़ता है तो कोई बात नहीं](https://bazmeshayari.com/agar-jo-pyar-khata-hai-to-koi-baat-nahi/): अगर जो प्यार ख़ता है तो कोई बात नहीं क़ज़ा ही उस की सज़ा है तो कोई बात - [झूठ का बोलना आसान नहीं होता है](https://bazmeshayari.com/jhooth-ka-bolna-aasaan-nahi-hota-hai/): झूठ का बोलना आसान नहीं होता है दिल तेरे बाद परेशान नहीं होता है, सब तेरे बाद यही - [आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे](https://bazmeshayari.com/aankh-par-patti-rahe-aur-aql-par-taala-rahe/): आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे अपने शाहे वक़्त का यूँ मर्तबा आला रहे, देखने - [सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद हैं](https://bazmeshayari.com/sau-me-sattar-aadmi-filhal-jab-naashaad-hain/): सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद हैं दिल रखकर हाथ कहिए देश क्या आज़ाद है ? कोठियों - [वेद में जिनका हवाला हाशिए पर भी नहीं](https://bazmeshayari.com/ved-me-jinka-hawala-haashiye-par-bhi-nahi/): वेद में जिनका हवाला हाशिए पर भी नहीं वे अभागे आस्था विश्वास लेकर क्या करें ? लोक रंजन - [भूख के एहसास को शेर ओ सुख़न तक ले चलो](https://bazmeshayari.com/bhookh-ke-ehsas-ko-sher-o-sukhan-tak-le-chalo/): भूख के एहसास को शेर ओ सुख़न तक ले चलो या अदब को मुफ़्लिसों की अंजुमन तक ले - [जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगे](https://bazmeshayari.com/jo-dalhauji-na-kar-paya-wo-ye-huqqam-kar-denge/): जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगे कमीशन दो तो हिंदुस्तान को नीलाम कर देंगे, - [जो उलझकर रह गई है फ़ाइलों के जाल में](https://bazmeshayari.com/jo-ulajh-kar-rah-gayi-hai-faailon-ke-jaal-me/): जो उलझकर रह गई है फ़ाइलों के जाल में गाँव तक वह रौशनी आएगी कितने साल में ? - [ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी](https://bazmeshayari.com/ye-amiron-se-humari-faislakun-jung-thi/): ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी फिर कहाँ से बीच में मस्जिद व मंदिर आ गए ? - [घर पे ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है](https://bazmeshayari.com/ghar-pe-thande-chulhe-par-agar-khaali-patili-hai/): घर पे ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है बताओं कैसे लिख दूँ धूप फागुन की नशीली है - [अंत्यज कोरी पासी हैं हम](https://bazmeshayari.com/antayj-kori-paasi-hai-hum/): अंत्यज कोरी पासी हैं हम क्यूँ कर भारतवासी हैं हम ? अपने को क्यूँ वेद में खोजें क्या - [वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग](https://bazmeshayari.com/vallah-kis-junoon-ke-sataye-hue-hai-log/): वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग हमसाए के लहू में नहाए हुए हैं लोग, ये तिश्नगी - [न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से](https://bazmeshayari.com/na-mahlon-ki-bulandi-se-na-lafzon-ke-nagine-se/): न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से तमद्दुन में निखार आता है ‘घीसू’ के पसीने - [ये समझते हैं खिले हैं तो फिर बिखरना है](https://bazmeshayari.com/ye-samjhte-hain-khile-hai-to-fir-bikhrana-hai/): ये समझते हैं खिले हैं तो फिर बिखरना है पर अपने ख़ून से गुलशन में रंग भरना है, - [ज़िंदगी दुश्वार है उफ़! ये गिरानी देखिए](https://bazmeshayari.com/zindagi-dushwaar-hai-uff-ye-giraani-dekhiye/): ज़िंदगी दुश्वार है उफ़! ये गिरानी देखिए और फिर नेताओं की शोला बयानी देखिए, भीख का लेकर कटोरा - [अचेतन मन में प्रज्ञा कल्पना की लौ जलाती है](https://bazmeshayari.com/achetan-man-me-pragya-kalpana-kee-lau-jalaati-hai/): अचेतन मन में प्रज्ञा कल्पना की लौ जलाती है सहज अनुभूति के स्तर में कविता जन्म पाती है - [दोस्तो! अब और क्या तौहीन होगी रीश की](https://bazmeshayari.com/doston-ab-aur-kya-tauheen-hogi-reesh-kee/): दोस्तो! अब और क्या तौहीन होगी रीश की ब्रेसरी के हुक पे ठहरी चेतना रजनीश की, योग की - [जिसके सम्मोहन में पागल, धरती है, आकाश भी है](https://bazmeshayari.com/jiske-sammohan-me-pagal-dharti-hai-aakash-bhi-hai/): जिसके सम्मोहन में पागल, धरती है, आकाश भी है एक पहेली सी से दुनिया, गल्प भी है, इतिहास - [इंद्रधनुषी रंग में महकी हुई तहरीर है](https://bazmeshayari.com/indradhanushi-rang-me-mahki-hui-tahrir-hai/): इंद्रधनुषी रंग में महकी हुई तहरीर है अमृता की शायरी एक बोलती तस्वीर है, टूटते रिश्तों की तल्ख़ी - [वामपंथी सोच का आयाम है नागार्जुन](https://bazmeshayari.com/vaampanthi-soch-ka-aayaam-hai-nagarjun/): वामपंथी सोच का आयाम है नागार्जुन ज़िंदगी में आस्था का नाम है नागार्जुन, ग्रामगंधी सर्जना, उसमें जुलाहे का - [नीलोफ़र, शबनम नहीं, अँगार की बातें करो](https://bazmeshayari.com/nilofar-shabnam-nahi-angaar-kee-baaten-karo/): नीलोफ़र, शबनम नहीं, अँगार की बातें करो वक़्त के बदले हुए मेयार की बातें करो, भाप बन सकती - [भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है](https://bazmeshayari.com/bhookhmari-kee-zad-me-hai-yaa-daar-ke-saaye-me-hai/): भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है अहले हिंदुस्तान अब तलवार के साये में - [उनका दावा मुफ़लिसी का मोर्चा सर हो गया](https://bazmeshayari.com/unka-daawa-muflisi-ka-morcha-sar-ho-gaya/): उनका दावा मुफ़लिसी का मोर्चा सर हो गया पर हक़ीक़त ये है मौसम और बदतर हो गया, बंद - [कौन जात हो भाई ?](https://bazmeshayari.com/kaun-jaat-ho-bhai-dalit-hai-saab/): कौन जात हो भाई? “दलित हैं साब!” नहीं मतलब किसमें आते हो? आपकी गाली में आते हैं गंदी - [मेरे ख़्वाबों से ओझल उस का चेहरा हो गया है](https://bazmeshayari.com/mere-khwabo-se-ojhal-us-ka-chehra-ho-gaya-hai/): मेरे ख़्वाबों से ओझल उस का चेहरा हो गया है मैं ऐसा चाहता कब था पर ऐसा हो - [बताता है मुझे आईना कैसी बे रुख़ी से](https://bazmeshayari.com/batata-hai-mujhe-aaeena-kaisi-be-rukhi-se/): बताता है मुझे आईना कैसी बे रुख़ी से कि मैं महरूम होता जा रहा हूँ रौशनी से, किसे - [शिकस्त ए ख़्वाब का हमें मलाल क्यूँ नहीं रहा](https://bazmeshayari.com/shikast-e-khwab-ka-humen-malal-kyun-nahi-raha/): शिकस्त ए ख़्वाब का हमें मलाल क्यूँ नहीं रहा बिछड़ गए तो फिर तिरा ख़याल क्यूँ नहीं रहा - [यहाँ तकरार ए साअत के सिवा क्या रह गया है](https://bazmeshayari.com/yahan-taqrar-e-saaat-ke-siwa-kya-rah-gaya-hai/): यहाँ तकरार ए साअत के सिवा क्या रह गया है मुसलसल एक हालत के सिवा क्या रह गया - [ख़्वाब में कोई मुझ को आस दिलाने बैठा था](https://bazmeshayari.com/khwab-me-koi-mujh-ko-aas-dilaane-baitha-tha/): ख़्वाब में कोई मुझ को आस दिलाने बैठा था जागा तो मैं ख़ुद अपने ही सिरहाने बैठा था, - [हमें नहीं आते ये कर्तब नए ज़माने वाले](https://bazmeshayari.com/hume-nahi-aate-ye-kartab-naye-zamane-wale/): हमें नहीं आते ये कर्तब नए ज़माने वाले हम तो सीधे लोग हैं यारो वही पुराने वाले, उन - [सभी ये पूछते रहते हैं क्या गुम हो गया है](https://bazmeshayari.com/sabhi-ye-puchte-rahte-hain-kya-gum-ho-gaya-hai/): सभी ये पूछते रहते हैं क्या गुम हो गया है बता दूँ? मुझ से ख़ुद अपना पता गुम - [अब आ भी जाओ, बहुत दिन हुए मिले हुए भी](https://bazmeshayari.com/ab-aa-bhi-jaao-bahut-din-hue-mile-hue-bhi/): अब आ भी जाओ, बहुत दिन हुए मिले हुए भी भुला ही देंगे अगर दिल में कुछ गिले - [उदास बस आदतन हूँ कुछ भी हुआ नहीं है](https://bazmeshayari.com/udaas-bas-adatan-hoon-kuch-bhi-hua-nahi-hai/): उदास बस आदतन हूँ कुछ भी हुआ नहीं है यक़ीन मानो किसी से कोई गिला नहीं है, अधेड़ - [ग़मों में कुछ कमी या कुछ इज़ाफ़ा कर रहे हैं](https://bazmeshayari.com/gamon-me-kuch-kami-yaa-kuch-iazafa-kar-rahe-hain/): ग़मों में कुछ कमी या कुछ इज़ाफ़ा कर रहे हैं समझ में कुछ नहीं आता कि हम क्या - [एक ख़्वाब नींद का था सबब, जो नहीं रहा](https://bazmeshayari.com/ek-khwab-neend-ka-tha-sabab-jo-nahi-raha/): एक ख़्वाब नींद का था सबब, जो नहीं रहा उस का क़लक़ है ऐसा कि मैं सो नहीं - [अजब है रंग ए चमन जा ब जा उदासी है](https://bazmeshayari.com/azab-hai-rang-e-chaman-jaa-ba-jaa-udasi-hai/): अजब है रंग ए चमन जा ब जा उदासी है महक उदासी है बाद ए सबा उदासी है, - [कोई मिला तो किसी और की कमी हुई है](https://bazmeshayari.com/koi-mila-to-kisi-aur-ki-kami-hui-hai/): कोई मिला तो किसी और की कमी हुई है सो दिल ने बे तलबी इख़्तियार की हुई है, - [क्या बताऊँ कि जो हंगामा बपा है मुझ में](https://bazmeshayari.com/kya-bataaoon-ki-jo-hungama-bapa-hai-mujh-me/): क्या बताऊँ कि जो हंगामा बपा है मुझ में इन दिनों कोई बहुत सख़्त ख़फ़ा है मुझ में, - [अपनी ख़बर, न उस का पता है, ये इश्क़ है](https://bazmeshayari.com/apni-khabar-na-us-ka-pata-hai-ye-ishq-hai/): अपनी ख़बर, न उस का पता है, ये इश्क़ है जो था, नहीं है, और न था, है, - [चलो तुम को मिलाता हूँ मैं उस मेहमान से पहले](https://bazmeshayari.com/chalo-tum-ko-milata-hoon-main-us-mehman-se-pahle/): चलो तुम को मिलाता हूँ मैं उस मेहमान से पहले जो मेरे जिस्म में रहता था मेरी जान - [मोहब्बत की रंगीनियाँ छोड़ आए](https://bazmeshayari.com/mohabbat-ki-ranginiyaan-chhod-aaye/): मोहब्बत की रंगीनियाँ छोड़ आए तेरे शहर में एक जहाँ छोड़ आए, पहाड़ों की वो मस्त शादाब वादी - [सर ए मिंबर वो ख़्वाबों के महल तामीर करते हैं](https://bazmeshayari.com/sar-e-mimbar-wo-khwabon-ke-mahal-taamir-karte-hain/): सर ए मिंबर वो ख़्वाबों के महल तामीर करते हैं इलाज ए ग़म नहीं करते फ़क़त तक़रीर करते - [ग़ालिब ओ यगाना से लोग भी थे जब तन्हा](https://bazmeshayari.com/gaalib-ko-yagaana-se-log-bhi-the-jab-tanha/): ग़ालिब ओ यगाना से लोग भी थे जब तन्हा हम से तय न होगी क्या मंज़िल ए अदब - [दयार ए दाग़ ओ बेख़ुद शहर ए देहली छोड़ कर तुझ को](https://bazmeshayari.com/dayaar-e-daag-o-bekhud-shahar-e-dehli-chod-kar-tujh-ko/): दयार ए दाग़ ओ बेख़ुद शहर ए देहली छोड़ कर तुझ को न था मा’लूम यूँ रोएगा दिल - [कैसे कहें कि याद ए यार रात जा चुकी बहुत](https://bazmeshayari.com/kaise-kahe-ki-yaad-e-yaar-raat-ja-chuki-bahut/): कैसे कहें कि याद ए यार रात जा चुकी बहुत रात भी अपने साथ साथ आँसू बहा चुकी - [हर गाम पर थे शम्स ओ क़मर उस दयार में](https://bazmeshayari.com/har-gaam-par-the-shams-o-qamar-us-dayaar-me/): हर गाम पर थे शम्स ओ क़मर उस दयार में कितने हसीं थे शाम ओ सहर उस दयार - [घर के ज़िंदाँ से उसे फ़ुर्सत मिले तो आए भी](https://bazmeshayari.com/ghar-ke-zinda-se-use-fursat-mile-to-aaye-bhi/): घर के ज़िंदाँ से उसे फ़ुर्सत मिले तो आए भी जाँ फ़ज़ा बातों से आ के मेरा दिल - [एक शख़्स बा ज़मीर मेरा यार मुसहफ़ी](https://bazmeshayari.com/ek-shakhs-ba-zamir-mera-yaar-musahafi/): एक शख़्स बा ज़मीर मेरा यार मुसहफ़ी मेरी तरह वफ़ा का परस्तार मुसहफ़ी, रहता था कज कुलाह अमीरों - [ग़ज़लें तो कही हैं कुछ हम ने उन से न कहा अहवाल तो क्या](https://bazmeshayari.com/gazalen-to-kahi-hain-kuch-hum-ne-un-se-na-kaha-ahwal-to-kya/): ग़ज़लें तो कही हैं कुछ हम ने उन से न कहा अहवाल तो क्या कल मिस्ल ए सितारा - [मावरा ए जहाँ से आए हैं](https://bazmeshayari.com/maawara-e-jahan-se-aaye-hain/): मावरा ए जहाँ से आए हैं आज हम ख़ुमसिताँ से आए हैं, इस क़दर बे-रुख़ी से बात न - [कितना सुकूत है रसन ओ दार की तरफ़](https://bazmeshayari.com/kitna-sukut-hai-rasan-o-daar-kee-taraf/): कितना सुकूत है रसन ओ दार की तरफ़ आता है कौन जुरअत ए इज़हार की तरफ़, दश्त ए - [लोक गीतों का नगर याद आया](https://bazmeshayari.com/lok-geeton-ka-nagar-yaad-aaya/): लोक गीतों का नगर याद आया आज परदेस में घर याद आया, जब चले आए चमन ज़ार से - [उस गली के लोगों को मुँह लगा के पछताए](https://bazmeshayari.com/us-gali-ke-logon-ko-munh-laga-ke-pachhtaaye/): उस गली के लोगों को मुँह लगा के पछताए एक दर्द की ख़ातिर कितने दर्द अपनाए, थक के - [ये उजड़े बाग़ वीराने पुराने](https://bazmeshayari.com/ye-ujde-baag-veerane-puraane/): ये उजड़े बाग़ वीराने पुराने सुनाते हैं कुछ अफ़्साने पुराने, एक आह ए सर्द बन कर रह गए - [गुलशन की फ़ज़ा धुआँ धुआँ है](https://bazmeshayari.com/gulshan-ki-faza-dhuaan-dhuaan-hai/): गुलशन की फ़ज़ा धुआँ धुआँ है कहते हैं बहार का समाँ है, बिखरी हुई पत्तियाँ हैं गुल की - [जहाँ हैं महबूस अब भी हम वो हरम सराएँ नहीं रहेंगी](https://bazmeshayari.com/jahan-hai-mahbus-ab-bhi-hum-wo-haram-saraayen-nahi-rahegi/): जहाँ हैं महबूस अब भी हम वो हरम सराएँ नहीं रहेंगी लरज़ते होंटों पे अब हमारे फ़क़त दुआएँ - [महताब सिफ़त लोग यहाँ ख़ाक बसर हैं](https://bazmeshayari.com/mahtab-sifat-log-yahan-khaaq-basar-hain/): महताब सिफ़त लोग यहाँ ख़ाक बसर हैं हम महव ए तमाशा ए सर ए राह गुज़र हैं, हसरत - [क्या क्या लोग गुज़र जाते हैं रंग बिरंगी कारों में](https://bazmeshayari.com/kya-kya-log-guzar-jaate-hain-rang-birangi-kaaro-me/): क्या क्या लोग गुज़र जाते हैं रंग बिरंगी कारों में दिल को थाम के रह जाते हैं दिल - [तेरे माथे पे जब तक बल रहा है](https://bazmeshayari.com/tere-maathe-pe-jab-tak-bal-raha-hai/): तेरे माथे पे जब तक बल रहा है उजाला आँख से ओझल रहा है, समाते क्या नज़र में - [हम ने दिल से तुझे सदा माना](https://bazmeshayari.com/hum-ne-dil-se-tujhe-sada-maana/): हम ने दिल से तुझे सदा माना तू बड़ा था तुझे बड़ा माना, मीर ओ ग़ालिब के बाद - [तू रंग है ग़ुबार हैं तेरी गली के लोग](https://bazmeshayari.com/tu-rang-hai-gubar-hai-teri-gali-ke-log/): तू रंग है ग़ुबार हैं तेरी गली के लोग तो फूल है शरार हैं तेरी गली के लोग, - [शहर वीराँ उदास हैं गलियाँ](https://bazmeshayari.com/shahar-veeraan-udas-hai-galiyan/): शहर वीराँ उदास हैं गलियाँ रहगुज़ारों से उठ रहा है धुआँ, आतिश ए ग़म में जल रहे हैं - [नज़र नज़र में लिए तेरा प्यार फिरते हैं](https://bazmeshayari.com/nazar-nazar-me-liye-tera-pyar-firte-hain/): नज़र नज़र में लिए तेरा प्यार फिरते हैं मिसाल ए मौज ए नसीम ए बहार फिरते हैं, तेरे - [बहुत रौशन है शाम ए ग़म हमारी](https://bazmeshayari.com/bahut-raushan-hai-shaam-e-gam-humari/): बहुत रौशन है शाम ए ग़म हमारी किसी की याद है हमदम हमारी, ग़लत है ला तअल्लुक़ हैं - [कम पुराना बहुत नया था फ़िराक़](https://bazmeshayari.com/kam-purana-bahut-naya-tha-firaq/): कम पुराना बहुत नया था फ़िराक़ एक अजब रम्ज़ आशना था फ़िराक़, दूर वो कब हुआ निगाहों से - [हम आवारा गाँव गाँव बस्ती बस्ती फिरने वाले](https://bazmeshayari.com/hum-awara-gaanv-gaanv-basti-basti-firne-wale/): हम आवारा गाँव गाँव बस्ती बस्ती फिरने वाले हम से प्रीत बढ़ा कर कोई मुफ़्त में क्यूँ ग़म - [यूँ वो ज़ुल्मत से रहा दस्त ओ गरेबाँ यारो](https://bazmeshayari.com/yun-wo-zulmat-se-raha-dast-o-garebaan-yaaro/): यूँ वो ज़ुल्मत से रहा दस्त ओ गरेबाँ यारो उस से लर्ज़ां थे बहुत शब के निगहबाँ यारो, - [दिल वालो क्यूँ दिल सी दौलत यूँ बे कार लुटाते हो](https://bazmeshayari.com/dil-walon-kyun-dil-see-daulat-yun-be-kar-lutate-ho/): दिल वालो क्यूँ दिल सी दौलत यूँ बे कार लुटाते हो क्यूँ इस अँधियारी बस्ती में प्यार की - [दरख़्त सूख गए रुक गए नदी नाले](https://bazmeshayari.com/darakht-sookh-gaye-rook-gaye-nadi-naale/): दरख़्त सूख गए रुक गए नदी नाले ये किस नगर को रवाना हुए हैं घर वाले ? कहानियाँ - [जब कोई कली सेहन ए गुलिस्ताँ में खिली है](https://bazmeshayari.com/jab-koi-kali-sehan-e-gulistaan-me-khili-hai/): जब कोई कली सेहन ए गुलिस्ताँ में खिली है शबनम मेरी आँखों में वहीं तैर गई है, जिस - [उस ने जब हँस के नमस्कार किया](https://bazmeshayari.com/us-ne-jab-hans-ke-namskar-kiya/): उस ने जब हँस के नमस्कार किया मुझ को इंसान से अवतार किया, दश्त ए ग़ुर्बत में दिल - [तेरी आँखों का अजब तुर्फ़ा समाँ देखा है](https://bazmeshayari.com/teri-aankhon-ka-azab-turfaa-samaan-dekha-hai/): तेरी आँखों का अजब तुर्फ़ा समाँ देखा है एक आलम तेरी जानिब निगराँ देखा है, कितने अनवार सिमट - [ये जो शब के ऐवानों में इक हलचल एक हश्र बपा है](https://bazmeshayari.com/ye-jo-shab-ke-aewano-me-ek-hulchal-hashr-bapa-hai/): ये जो शब के ऐवानों में इक हलचल एक हश्र बपा है ये जो अंधेरा सिमट रहा है - [हम ने सुना था सहन ए चमन में कैफ़ के बादल छाए हैं](https://bazmeshayari.com/hum-ne-suna-tha-sahan-e-chaman-me-kaif-ke-badal-chhaye-hain/): हम ने सुना था सहन ए चमन में कैफ़ के बादल छाए हैं हम भी गए थे जी - [ये सोच कर न माइल ए फ़रियाद हम हुए](https://bazmeshayari.com/ye-soch-kar-na-maaiel-e-fariyaad-hum-hue/): ये सोच कर न माइल ए फ़रियाद हम हुए आबाद कब हुए थे कि बर्बाद हम हुए, होता - [शेर होता है अब महीनों में](https://bazmeshayari.com/sher-hota-hai-ab-mahino-me/): शेर होता है अब महीनों में ज़िंदगी ढल गई मशीनों में, प्यार की रौशनी नहीं मिलती उन मकानों - [मीर ओ ग़ालिब बने यगाना बने](https://bazmeshayari.com/meer-o-gaalib-bane-yagaana-bane/): मीर ओ ग़ालिब बने यगाना बने आदमी ऐ ख़ुदा ख़ुदा न बने, मौत की दस्तरस में कब से - [जागने वालो ता ब सहर ख़ामोश रहो](https://bazmeshayari.com/jaagne-walo-taa-ba-sahar-khamosh-raho/): जागने वालो ता ब सहर ख़ामोश रहो कल क्या होगा किस को ख़बर ख़ामोश रहो, किस ने सहर - [बड़े बने थे जालिब साहब पिटे सड़क के बीच](https://bazmeshayari.com/bade-bane-the-jaalib-sahab-pite-sadak-ke-beech/): बड़े बने थे जालिब साहब पिटे सड़क के बीच गोली खाई लाठी खाई गिरे सड़क के बीच, कभी - [सर ही अब फोड़िए नदामत में](https://bazmeshayari.com/sar-hi-ab-fodiye-nadamat-me/): सर ही अब फोड़िए नदामत में नींद आने लगी है फ़ुर्क़त में, हैं दलीलें तेरे ख़िलाफ़ मगर सोचता - [ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं](https://bazmeshayari.com/thik-hai-khud-ko-hum-badalte-hain/): ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं शुक्रिया मश्वरत का चलते हैं, हो रहा हूँ मैं किस तरह - [दिल ने वफ़ा के नाम पर कार ए वफ़ा नहीं किया](https://bazmeshayari.com/dil-ne-wafa-ke-naam-par-kaar-e-wafa-nahi-kiya/): दिल ने वफ़ा के नाम पर कार ए वफ़ा नहीं किया ख़ुद को हलाक कर लिया ख़ुद को - [वो जो था वो कभी मिला ही नहीं](https://bazmeshayari.com/wo-jo-tha-wo-kabhi-mila-hi-nahi/): वो जो था वो कभी मिला ही नहीं सो गरेबाँ कभी सिला ही नहीं, उस से हर दम - [किस से इज़हार ए मुद्दआ कीजे](https://bazmeshayari.com/kis-se-izhaar-e-muddaa-kije/): किस से इज़हार ए मुद्दआ कीजे आप मिलते नहीं हैं क्या कीजे ? हो न पाया ये फ़ैसला - [बड़ा एहसान हम फ़रमा रहे हैं](https://bazmeshayari.com/bada-ehsan-hum-farma-rahe-hain/): बड़ा एहसान हम फ़रमा रहे हैं कि उन के ख़त उन्हें लौटा रहे हैं, नहीं तर्क ए मोहब्बत - [ज़ब्त कर के हँसी को भूल गया](https://bazmeshayari.com/zabt-kar-ke-hansi-ko-bhool-gaya/): ज़ब्त कर के हँसी को भूल गया मैं तो उस ज़ख़्म ही को भूल गया, ज़ात दर ज़ात - [चलो बाद ए बहारी जा रही है](https://bazmeshayari.com/chalo-baad-e-bahari-jaa-rahi-hai/): चलो बाद ए बहारी जा रही है पिया जी की सवारी जा रही है, शुमाल ए जावेदान ए - [कोई हालत नहीं ये हालत है](https://bazmeshayari.com/koi-haalat-nahi-ye-halat-hai/): कोई हालत नहीं ये हालत है ये तो आशोब नाक सूरत है, अंजुमन में ये मेरी ख़ामोशी बुर्दबारी - [उस के पहलू से लग के चलते हैं](https://bazmeshayari.com/us-ke-pahlu-se-lag-ke-chalte-hain/): उस के पहलू से लग के चलते हैं हम कहीं टालने से टलते हैं बंद है मय-कदों के - [सीना दहक रहा हो तो क्या चुप रहे कोई](https://bazmeshayari.com/sina-dahak-raha-ho-to-kya-chup-rahe-koi/): सीना दहक रहा हो तो क्या चुप रहे कोई क्यूँ चीख़ चीख़ कर न गला छील ले कोई - [हाल ये है कि ख़्वाहिश ए पुर्सिश ए हाल भी नहीं](https://bazmeshayari.com/haal-ye-hai-ki-khwahish-e-pursish-e-haal-bhi-nahin/): हाल ये है कि ख़्वाहिश ए पुर्सिश ए हाल भी नहीं उस का ख़याल भी नहीं अपना ख़याल - [बहुत दिल को कुशादा कर लिया क्या](https://bazmeshayari.com/bahut-dil-ko-kushaada-kar-liya-kya/): बहुत दिल को कुशादा कर लिया क्या ज़माने भर से वा’दा कर लिया क्या ? तो क्या सचमुच - [आदमी वक़्त पर गया होगा](https://bazmeshayari.com/aadmi-waqt-par-gaya-hoga/): आदमी वक़्त पर गया होगा वक़्त पहले गुज़र गया होगा, वो हमारी तरफ़ न देख के भी कोई - [एक ही मुज़्दा सुब्ह लाती है](https://bazmeshayari.com/ek-hi-muzda-subah-laati-hai/): एक ही मुज़्दा सुब्ह लाती है धूप आँगन में फैल जाती है, रंग ए मौसम है और बाद - [अभी एक शोर सा उठा है कहीं](https://bazmeshayari.com/abhi-ek-shor-saa-utha-hai-khain/): अभी एक शोर सा उठा है कहीं कोई ख़ामोश हो गया है कहीं, है कुछ ऐसा कि जैसे - [शर्मिंदगी है हम को बहुत हम मिले तुम्हें](https://bazmeshayari.com/sharmindagi-hai-hum-ko-bahut-hum-mile-tumhen/): शर्मिंदगी है हम को बहुत हम मिले तुम्हें तुम सर ब सर ख़ुशी थे मगर ग़म मिले तुम्हें, - [अपने सब यार काम कर रहे हैं](https://bazmeshayari.com/apne-sab-yaar-kaam-kar-rahe-hain/): अपने सब यार काम कर रहे हैं और हम हैं कि नाम कर रहे हैं, तेग़बाज़ी का शौक़ - [ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो](https://bazmeshayari.com/ye-gam-kya-dil-ki-adat-hai-nahi-to/): ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो, किसी के - [गाहे गाहे बस अब यही हो क्या](https://bazmeshayari.com/gaahe-gaahe-bas-ab-yahi-ho-kya/): गाहे गाहे बस अब यही हो क्या तुम से मिल कर बहुत ख़ुशी हो क्या ? मिल रही - [ज़र्रे ही सही कोह से टकरा तो गए हम](https://bazmeshayari.com/zarre-hi-sahi-koh-se-takra-to-gaye-hum/): ज़र्रे ही सही कोह से टकरा तो गए हम दिल ले के सर ए अर्सा ए ग़म आ - [न डगमगाए कभी हम वफ़ा के रस्ते में](https://bazmeshayari.com/na-dagmagaaye-kabhi-hum-wafa-ke-raste-me/): न डगमगाए कभी हम वफ़ा के रस्ते में चराग़ हम ने जलाए हवा के रस्ते में, किसे लगाए - [कौन बताए कौन सुझाए कौन से देस सिधार गए](https://bazmeshayari.com/kaun-bataye-kaun-sujhaye-kaun-se-des-sidhar-gaye/): कौन बताए कौन सुझाए कौन से देस सिधार गए उन का रस्ता तकते तकते नैन हमारे हार गए, - [दिल में एक लहर सी उठी है अभी](https://bazmeshayari.com/dil-me-ek-lahar-see-uthi-hai-abhi/): दिल में एक लहर सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी, कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज - [शाम से आँख में नमी सी है](https://bazmeshayari.com/shaam-se-aankh-me-nami-see-hai/): शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी है, दफ़्न कर दो हमें - [वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं करता](https://bazmeshayari.com/wo-shakhs-ki-main-jis-se-mohabbat-nahi-karta/): वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं करता हँसता है मुझे देख के नफ़रत नहीं करता, पकड़ा - [रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम](https://bazmeshayari.com/rang-pairahan-ka-khushboo-zulf-lahrane-ka-naam/): रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम मौसम ए गुल है तुम्हारे बाम पर आने का नाम, - [मेरे ही लहू पर गुज़र औक़ात करो हो](https://bazmeshayari.com/mere-hi-lahoo-par-guzar-auqat-karo-ho/): मेरे ही लहू पर गुज़र औक़ात करो हो मुझ से ही अमीरों की तरह बात करो हो, दिन - [मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा](https://bazmeshayari.com/mere-junoon-ka-naeeja-zarur-nikalega/): मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा, गिरा दिया है तो साहिल पे - [न सियो होंठ न ख़्वाबों में सदा दो हम को](https://bazmeshayari.com/na-siyo-honth-na-khwabon-me-sada-do-hum-ko/): न सियो होंठ न ख़्वाबों में सदा दो हम को मस्लहत का ये तक़ाज़ा है भुला दो हम - [यूँ न मिल मुझ से ख़फ़ा हो जैसे](https://bazmeshayari.com/yun-na-mil-muj-se-khafa-ho-jaise/): यूँ न मिल मुझ से ख़फ़ा हो जैसे साथ चल मौज ए सबा हो जैसे, लोग यूँ देख - [पुर्सिश ए ग़म का शुक्रिया क्या तुझे आगही नहीं](https://bazmeshayari.com/pursish-e-gam-ka-shukriya-kya-tujhe-aagahi-nahin/): पुर्सिश ए ग़म का शुक्रिया क्या तुझे आगही नहीं तेरे बग़ैर ज़िंदगी दर्द है ज़िंदगी नहीं, देख के - [ये तो नहीं कि तुम से मोहब्बत नहीं मुझे](https://bazmeshayari.com/ye-to-nahi-ki-tum-se-mohabbat-nahi-mujhe/): ये तो नहीं कि तुम से मोहब्बत नहीं मुझे इतना ज़रूर है कि शिकायत नहीं मुझे, मैं हूँ - [मेरी अना का असासा ज़रूर ख़ाक हुआ](https://bazmeshayari.com/meri-anaa-ka-asasa-zarur-khaaq-hua/): मेरी अना का असासा ज़रूर ख़ाक हुआ मगर ख़ुशी है कि तेरे हुज़ूर ख़ाक हुआ, मुझे बदन के - [बरहना शाख़ों पे कब फ़ाख़ताएँ आती हैं](https://bazmeshayari.com/barhana-shaakho-pe-kab-faakhtaayen-aati-hain/): बरहना शाख़ों पे कब फ़ाख़ताएँ आती हैं मैं वो शजर हूँ कि जिस में बलाएँ आती हैं, ये - [फ़ज़ा में छाए हुए हैं उदास सन्नाटे](https://bazmeshayari.com/faza-me-chhaaye-hue-hai-udaas-sannate/): फ़ज़ा में छाए हुए हैं उदास सन्नाटे हों जैसे ज़ुल्मत ए शब का लिबास सन्नाटे, तेरे ख़याल की - [जो तेरे देखने से निकले हैं](https://bazmeshayari.com/jo-tere-dekhne-se-nikale-hai/): जो तेरे देखने से निकले हैं वो भी दिन क्या मज़े से निकले हैं, वो कहाँ नज़्र जाँ - [जो दे रूह को सुकून वो है मेरे लिए तेरा प्यार](https://bazmeshayari.com/jo-de-rooh-ko-sukun-wo-hai-mere-liye-tera-pyar/): जो दे रूह को सुकून वो है मेरे लिए तेरा प्यार मेरे ज़ेहन ओ दिल का नूर है - [बे हिसी चेहरे की लहजे की उदासी ले गया](https://bazmeshayari.com/be-hisi-chehre-kee-lahze-kee-udasi-le-gaya/): बे हिसी चेहरे की लहजे की उदासी ले गया वो मेरे अंदर की सारी बद हवासी ले गया, - [बदन दरीदा हूँ यारो शिकस्ता पा हूँ मैं](https://bazmeshayari.com/badan-darida-hoon-yaaro-shikasta-paa-hoon-main/): बदन दरीदा हूँ यारो शिकस्ता पा हूँ मैं कि जैसे अपने बुज़ुर्गों की बददुआ हूँ मैं, वो शख़्स - [लहूलुहान परों पर उड़ान रख देना](https://bazmeshayari.com/lahuluhan-paro-par-udaan-rakh-dena/): लहूलुहान परों पर उड़ान रख देना शिकस्तगी में नया इम्तिहान रख देना, मेरे बदन पे लबों के निशान - [होंठों से लफ़्ज़ ज़ेहन से अफ़्कार छीन ले](https://bazmeshayari.com/hontho-se-lafz-zehan-se-afqaar-chheen-le/): होंठों से लफ़्ज़ ज़ेहन से अफ़्कार छीन ले मुझ से मेरा वसीला ए इज़हार छीन ले, नस्लें तबाह - [शजर तो कब का कट के गिर चुका है](https://bazmeshayari.com/shajar-to-kab-ka-kat-ke-gir-chuka-hai/): शजर तो कब का कट के गिर चुका है परिंदा शाख़ से लिपटा हुआ है, समुंदर साहिलों से - [बच्चे की ज़िद को अब तो मेरा एतिबार दे](https://bazmeshayari.com/bachche-kee-zidd-ko-ab-to-mera-aetibar-de/): बच्चे की ज़िद को अब तो मेरा एतिबार दे ऐ आसमाँ ये चाँद मेरे घर उतार दे, चोरी - [ता हद्द ए नज़र कोई भी दम साज़ नहीं है](https://bazmeshayari.com/taa-hadd-e-nazar-koi-bhi-dam-saaz-nahi-hai/): ता हद्द ए नज़र कोई भी दम साज़ नहीं है या फिर मेरी चीख़ों में ही आवाज़ नहीं - [चराग़ों से हवाएँ लड़ रही हैं](https://bazmeshayari.com/charagon-se-hawayen-lad-rahi-hain/): चराग़ों से हवाएँ लड़ रही हैं कि ख़ुद बच्चों से माएँ लड़ रही हैं, नशेमन तो उजाड़े थे - [उसे हम याद आते हैं फक़त फ़ुर्सत के लम्हों में](https://bazmeshayari.com/use-hum-yaad-aate-hai-faqat-fursat-ke-lamhon-me/): उसे हम याद आते हैं फक़त फ़ुर्सत के लम्हों में मगर ये बात भी सच है उसे फ़ुर्सत - [वो मुहब्बत भी मौसम की तरह निभाता है](https://bazmeshayari.com/wo-muhabbat-bhi-mausam-ki-tarah-nibhata-hai/): वो मुहब्बत भी मौसम की तरह निभाता है कभी बरसता है कभी बूँद बूँद को तरसाता है, पल - [दिल ग़म ए रोज़गार से निकला](https://bazmeshayari.com/dil-gam-e-rozgaar-se-nikala/): दिल ग़म ए रोज़गार से निकला किस घने ख़ारज़ार से निकला, हम-सफ़र हो गए मह ओ अंजुम मैं - [मुझ को सज़ा ए मौत का धोका दिया गया](https://bazmeshayari.com/mujh-ko-saza-e-maut-ka-dhoka-diya-gaya/): मुझ को सज़ा ए मौत का धोका दिया गया मेरा वजूद मुझ में ही दफ़ना दिया गया, बोलो - [मेज़ चेहरा किताब तन्हाई](https://bazmeshayari.com/maze-chehra-kitab-tanhaai/): मेज़ चेहरा किताब तन्हाई बन न जाए अज़ाब तन्हाई, कर रहे थे सवाल सन्नाटे दे रही थी जवाब - [सदाक़त का जो पैग़म्बर रहा है](https://bazmeshayari.com/sadaqat-ka-jo-paigambar-raha-hai/): सदाक़त का जो पैग़म्बर रहा है वो अब सच बोलने से डर रहा है, कहानी हो रही है - [होश वालों को ख़बर क्या बे ख़ुदी क्या चीज़ है](https://bazmeshayari.com/hosh-walon-ko-khabar-kya-be-khudi-kya-cheej-hai/): होश वालों को ख़बर क्या बे ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है, - [दो जवां दिलों का ग़म दूरियाँ समझती हैं](https://bazmeshayari.com/do-javan-dilon-ka-gam-dooriyan-samjhti-hain/): दो जवां दिलों का ग़म दूरियाँ समझती हैं कौन याद करता है हिचकियाँ समझती हैं, तुम तो खुद - [कोई जो रहता है रहने दो मस्लहत का शिकार](https://bazmeshayari.com/koi-jo-rahta-hai-rahne-do-maslhat-ka-shikar/): कोई जो रहता है रहने दो मस्लहत का शिकार चलो कि जश्न ए बहाराँ मनाएँगे सब यार, चलो - [किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी](https://bazmeshayari.com/kisi-ka-yun-to-hua-kaun-umr-bhar-fir-bhi/): किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी ये हुस्न ओ इश्क़ तो धोका है सब - [इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं](https://bazmeshayari.com/in-aankhon-ki-masti-ke-mastane-hazaron-hain/): इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं इन आँखों से वाबस्ता अफ़्साने हज़ारों हैं, एक तुम ही - [ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में](https://bazmeshayari.com/khushboo-jaise-log-mile-afsane-me/): ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में एक पुराना ख़त खोला अनजाने में, शाम के साए बालिश्तों से नापे - [ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के साए में ज़िंदगी गुज़ारी है](https://bazmeshayari.com/zulf-o-rukh-ke-saaye-me-zindagi-guzari-hai/): ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के साए में ज़िंदगी गुज़ारी है धूप भी हमारी है छाँव भी हमारी है, ग़म - [आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई](https://bazmeshayari.com/aankh-bhar-aayi-kisi-se-jo-mulaqaat-hui/): आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई, दिन भी - [ताक़तें तुम्हारी हैं और ख़ुदा हमारा है](https://bazmeshayari.com/taaqate-tumhari-aur-khuda-humara-hai/): ताक़तें तुम्हारी हैं और ख़ुदा हमारा है अक्स पर न इतराओ आईना हमारा है, आप की ग़ुलामी का - [गर्दिश ए साग़र सुबू के दरमियाँ](https://bazmeshayari.com/gardish-e-sagar-subu-ke-darmiyan/): गर्दिश ए साग़र सुबू के दरमियाँ ज़िंदगी है हाओ हू के दरमियाँ, ज़ख़्म और पोशाक भी रखे गए - [ये क्या रुत है अब की रुत में देखें ज़र्द गुलाब](https://bazmeshayari.com/ye-kya-rut-hai-ab-kee-rut-me-dekhe-zard-gulab/): ये क्या रुत है अब की रुत में देखें ज़र्द गुलाब चेहरे सूखे फूल ख़िज़ाँ के आँखें ज़र्द - [हिज्र के मौसम ए तन्हाई के दुख देखे](https://bazmeshayari.com/hizr-ke-mausam-e-tanhai-ke-dukh-dekhe/): हिज्र के मौसम ए तन्हाई के दुख देखे एक चेहरे के पीछे कितने दुख देखे, एक सन्नाटा पहरों - [रात दरपेश थी मुसाफ़िर को](https://bazmeshayari.com/raat-darpesh-thi-musafir-ko/): रात दरपेश थी मुसाफ़िर को नींद क्यों आ गई मुसाफ़िर को ? क्या नगर है ये दिल दिखाई - [ख़याल ओ ख़्वाब में होना सदा ए बाद में रहना](https://bazmeshayari.com/khyal-o-khwab-me-hona-sada-e-baad-me-rahna/): ख़याल ओ ख़्वाब में होना सदा ए बाद में रहना किसी की आस में जीना किसी की याद - [उजाड़ आँखों में रत जगों का अज़ाब उतरा है नीम शब को](https://bazmeshayari.com/ujaad-aankhon-me-rat-jago-ka-azaab-utra-hai/): उजाड़ आँखों में रत जगों का अज़ाब उतरा है नीम शब को जो दर्द जागा है शाम ढलते - [कोई साया अच्छे साईं धूप बहुत है](https://bazmeshayari.com/koi-sayaa-achche-saaee-dhoop-bahut-hai/): कोई साया अच्छे साईं धूप बहुत है मर जाऊँगा अच्छे साईं धूप बहुत है, साँवली रुत में ख़्वाब - [जहाँ वहम ओ गुमाँ हो जाएगा क्या](https://bazmeshayari.com/jahan-vaham-o-gumaan-ho-jayega-kya/): जहाँ वहम ओ गुमाँ हो जाएगा क्या यहाँ सब कुछ धुआँ हो जाएगा क्या ? सितारे धूल और - [वो दूर ख़्वाबों के साहिलों में अज़ाब किस के हैं ख़्वाब किस के](https://bazmeshayari.com/wo-door-khwabon-ke-sahilon-me-azaab-kis-ke-hain/): वो दूर ख़्वाबों के साहिलों में अज़ाब किस के हैं ख़्वाब किस के ये कौन जाने कि अब - [दिल को तेरे ध्यान में रखा](https://bazmeshayari.com/dil-ko-tere-dhayn-me-rakha/): दिल को तेरे ध्यान में रखा शोर सूने मकान में रखा, हर तरफ़ आइने बिछाए और एक चेहरा - [जिन्हें हम कह नहीं पाए वो बातें याद आती हैं](https://bazmeshayari.com/jinhen-hum-kah-nahi-paaye-wo-baaten-yaad-aati-hain/): जिन्हें हम कह नहीं पाए वो बातें याद आती हैं गुज़शता ना मुलाक़ातों की यादें याद आती हैं, - [गलियों की बस ख़ाक उड़ा के जाना है](https://bazmeshayari.com/galiyon-ki-bas-khaaq-uda-ke-jana-hai/): गलियों की बस ख़ाक उड़ा के जाना है हम को भी आवाज़ लगा के जाना है, रस्ते में - [वो किसी भी अक्स ए जमाल में नहीं आएगा](https://bazmeshayari.com/wo-kisi-bhi-aks-e-jamal-me-nahi-ayega/): वो किसी भी अक्स ए जमाल में नहीं आएगा वो जवाब है तो सवाल में नहीं आएगा, नहीं - [देखे हुए किसी को बहुत दिन गुज़र गए](https://bazmeshayari.com/dekhe-hue-kisi-ko-bahut-din-guzar-gaye/): देखे हुए किसी को बहुत दिन गुज़र गए इस दिल की बेबसी को बहुत दिन गुज़र गए, हर - [तेरा ख़याल बहुत देर तक नहीं रहता](https://bazmeshayari.com/tera-khyal-bahut-der-tak-nahi-rahta/): तेरा ख़याल बहुत देर तक नहीं रहता कोई मलाल बहुत देर तक नहीं रहता, उदास करती है अक्सर - [यादें पागल कर देती हैं](https://bazmeshayari.com/yaaden-pagal-kar-deti-hain/): यादें पागल कर देती हैं बातें पागल कर देती हैं, चेहरा होश उड़ा देता है आँखें पागल कर - [जब तेरे नैन मुस्कुराते हैं](https://bazmeshayari.com/jab-tere-nain-muskurate-hain/): जब तेरे नैन मुस्कुराते हैं ज़ीस्त के रंज भूल जाते हैं, क्यूँ शिकन डालते हो माथे पर भूल - [हँस के बोला करो बुलाया करो](https://bazmeshayari.com/hans-ke-bola-karo-bulaya-karo/): हँस के बोला करो बुलाया करो आप का घर है आया जाया करो, मुस्कुराहट है हुस्न का ज़ेवर - [साक़ी शराब ला कि तबीअ'त उदास है](https://bazmeshayari.com/saaqi-sharab-laa-ki-tabiyat-udas-hai/): साक़ी शराब ला कि तबीअ’त उदास है मुतरिब रुबाब उठा कि तबीअ’त उदास है, रुक रुक के साज़ - [ख़ाली है अभी जाम मैं कुछ सोच रहा हूँ](https://bazmeshayari.com/khaali-hai-abhi-jaam-main-kuch-soch-raha-hoon/): ख़ाली है अभी जाम मैं कुछ सोच रहा हूँ ऐ गर्दिश ए अय्याम मैं कुछ सोच रहा हूँ, - [आप की आँख अगर आज गुलाबी होगी](https://bazmeshayari.com/aap-ki-aankh-agar-aaj-gulabi-hogi/): आप की आँख अगर आज गुलाबी होगी मेरी सरकार बड़ी सख़्त ख़राबी होगी, मोहतसिब ने ही पढ़ा होगा - [एक पल में ज़िंदगी भर की उदासी दे गया](https://bazmeshayari.com/ek-pal-me-zindagi-bhar-ki-udasi-de-gaya/): एक पल में ज़िंदगी भर की उदासी दे गया वो जुदा होते हुए कुछ फूल बासी दे गया, - [अब वो तूफ़ाँ है न वो शोर हवाओं जैसा](https://bazmeshayari.com/ab-wo-toofaan-hai-na-wo-shor-hawaaon-jaisa/): अब वो तूफ़ाँ है न वो शोर हवाओं जैसा दिल का आलम है तेरे बाद ख़लाओं जैसा, काश - [आप की आँख से गहरा है मेरी रूह का ज़ख़्म](https://bazmeshayari.com/aap-ki-aankh-se-gahra-hai-meri-rooh-ka-zakhm/): आप की आँख से गहरा है मेरी रूह का ज़ख़्म आप क्या सोच सकेंगे मेरी तन्हाई को ? - [तेरे बदन से जो छू कर इधर भी आता है](https://bazmeshayari.com/tere-badan-se-jo-chhoo-kar-idhar-bhi-aaata-hai/): तेरे बदन से जो छू कर इधर भी आता है मिसाल ए रंग वो झोंका नज़र भी आता - [अगरचे मैं एक चटान सा आदमी रहा हूँ](https://bazmeshayari.com/agarche-main-ek-chattan-saa-aadmi-raha-hoon/): अगरचे मैं एक चटान सा आदमी रहा हूँ मगर तेरे बाद हौसला है कि जी रहा हूँ, वो - [जब से उस ने शहर को छोड़ा हर रस्ता सुनसान हुआ](https://bazmeshayari.com/jab-se-us-ne-shahar-ko-chhoda-har-rasta-sunsan-hua/): जब से उस ने शहर को छोड़ा हर रस्ता सुनसान हुआ अपना क्या है सारे शहर का एक - [कभी पहली बार स्कूल जाने में डर लगता था](https://bazmeshayari.com/kabhi-pahli-baar-school-jaane-me-dar-lagta-tha/): कभी पहली बार स्कूल जाने में डर लगता था आज अकेले ही ज़माना घूम लेते हैं, पहले फर्स्ट - [दिल में बंदों के बहुत ख़ौफ़ ए ख़ुदा था पहले](https://bazmeshayari.com/dil-me-bando-ke-bahut-khauf-e-khuda-tha-pahle/): दिल में बंदों के बहुत ख़ौफ़ ए ख़ुदा था पहले ये ज़माना कभी इतना न बुरा था पहले, - [इश्क़ गर हाथ छुड़ाए तो छुड़ाने देना](https://bazmeshayari.com/ishq-gar-hath-chhudaye-chhudane-dena/): इश्क़ गर हाथ छुड़ाए तो छुड़ाने देना कार ए वहशत पे मगर आँच न आने देना, यूँ भी - [सुख़न के शौक़ में तौहीन हर्फ़ की नहीं की](https://bazmeshayari.com/sukhan-ke-shauq-me-tauhin-harf-ki-nahi-ki/): सुख़न के शौक़ में तौहीन हर्फ़ की नहीं की कि हम ने दाद की ख़्वाहिश में शाएरी नहीं - [हर एक शक्ल में सूरत नई मलाल की है](https://bazmeshayari.com/har-ek-shakl-me-surat-nayi-malal-ki-hai/): हर एक शक्ल में सूरत नई मलाल की है हमारे चारों तरफ़ रौशनी मलाल की है, हम अपने - [चुप है आग़ाज़ में, फिर शोर ए अजल पड़ता है](https://bazmeshayari.com/chup-hai-aagaaz-me-fir-shor-e-azal-padta-hai/): चुप है आग़ाज़ में, फिर शोर ए अजल पड़ता है और कहीं बीच में इम्कान का पल पड़ता - [मेरे सिवा भी कोई गिरफ़्तार मुझ में है](https://bazmeshayari.com/mere-siwa-bhi-koi-giraftar-mujh-me-hai/): मेरे सिवा भी कोई गिरफ़्तार मुझ में है या फिर मेरा वजूद ही बेज़ार मुझ में है, मेरी - [वो चराग़ ए जाँ कि चराग़ था कहीं रहगुज़ार में बुझ गया](https://bazmeshayari.com/wo-charag-e-jaan-ki-charag-tha-kahin-rahgujar-me-bujh-gaya/): वो चराग़ ए जाँ कि चराग़ था कहीं रहगुज़ार में बुझ गया मैं जो एक शो’लानज़ाद था हवस - [मज्लिस ए ग़म, न कोई बज़्म ए तरब, क्या करते](https://bazmeshayari.com/majlis-e-gam-na-koi-bazm-e-tarab-kya-karte/): मज्लिस ए ग़म, न कोई बज़्म ए तरब, क्या करते घर ही जा सकते थे आवारा ए शब, - [सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है](https://bazmeshayari.com/sarfaroshi-ki-tamanna-ab-humare-dil-me-hai/): सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ू ए क़ातिल में है, ऐ - [वतन की सरज़मीं से इश्क़ ओ उल्फ़त हम भी रखते हैं](https://bazmeshayari.com/watan-ki-sarzamin-se-ishq-o-ulfat-hum-bhi-rakhte-hain/): वतन की सरज़मीं से इश्क़ ओ उल्फ़त हम भी रखते हैं खटकती जो रहे दिल में वो हसरत - [कठ पुतली है या जीवन है जीते जाओ सोचो मत](https://bazmeshayari.com/kath-putli-hai-yaa-jivan-hai-jite-jaao-socho-mat/): कठ पुतली है या जीवन है जीते जाओ सोचो मत सोच से ही सारी उलझन है जीते जाओ - [रात के बाद नए दिन की सहर आएगी](https://bazmeshayari.com/raat-ke-baad-naye-din-ki-sahar-ayegi/): रात के बाद नए दिन की सहर आएगी दिन नहीं बदलेगा तारीख़ बदल जाएगी, हँसते हँसते कभी थक - [मुट्ठी भर लोगों के हाथों में लाखों की तक़दीरें हैं](https://bazmeshayari.com/mutthi-bhar-logo-ke-hathon-me-laakho-ki-taqdeeren-hain/): मुट्ठी भर लोगों के हाथों में लाखों की तक़दीरें हैं जुदा जुदा हैं धर्म इलाक़े एक सी लेकिन - [मोहब्बत में वफ़ादारी से बचिए](https://bazmeshayari.com/mohabbat-me-wafadari-se-bachiye/): मोहब्बत में वफ़ादारी से बचिए जहाँ तक हो अदाकारी से बचिए, हर एक सूरत भली लगती है कुछ - [गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया](https://bazmeshayari.com/girija-me-mandiron-me-azanon-me-bat-gaya/): गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया होते ही सुब्ह आदमी ख़ानों में बट गया, इक इश्क़ - [ज़मीन दी है तो थोड़ा सा आसमान भी दे](https://bazmeshayari.com/zameen-dee-hai-to-thoda-saa-aasmaan-bhi-de/): ज़मीन दी है तो थोड़ा सा आसमान भी दे मेरे ख़ुदा मेरे होने का कुछ गुमान भी दे, - [देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ](https://bazmeshayari.com/dekha-hua-saa-kuch-hai-to-socha-hua-saa-kuch/): देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ हर वक़्त मेरे साथ है उलझा हुआ सा - [इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी](https://bazmeshayari.com/insan-me-haiwan-yahan-bhi-hai-wahan-bhi/): इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी अल्लाह निगहबान यहाँ भी है वहाँ भी, ख़ूँ ख़्वार दरिंदों - [न जाने कौन सा मंज़र नज़र में रहता है](https://bazmeshayari.com/naa-jaane-kaun-saa-manzar-nazar-me-rahta-hai/): न जाने कौन सा मंज़र नज़र में रहता है तमाम उम्र मुसाफ़िर सफ़र में रहता है, लड़ाई देखे - [कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है](https://bazmeshayari.com/koi-hindu-koi-muslim-koi-eesaai-hai/): कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है सब ने इंसान न बनने की क़सम खाई है, इतनी ख़ूँ - [हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो](https://bazmeshayari.com/har-ek-ghar-me-diya-bhi-jale-anaj-bhi-ho/): हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो अगर न हो कहीं ऐसा तो एहतिजाज भी - [कोशिश के बावजूद ये इल्ज़ाम रह गया](https://bazmeshayari.com/koshish-ke-bavjood-ye-ilzam-rah-gaya/): कोशिश के बावजूद ये इल्ज़ाम रह गया हर काम में हमेशा कोई काम रह गया, छोटी थी उम्र - [घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगे](https://bazmeshayari.com/ghar-se-nikale-to-ho-socha-bhi-kidhar-jaaoge/): घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगे हर तरफ़ तेज़ हवाएँ हैं बिखर जाओगे, इतना आसाँ - [ये कैसी कश्मकश है ज़िंदगी में](https://bazmeshayari.com/ye-kaisi-kashmakash-hai-zindagi-me/): ये कैसी कश्मकश है ज़िंदगी में किसी को ढूँडते हैं हम किसी में, जो खो जाता है मिल - [हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा](https://bazmeshayari.com/har-ghadi-khud-se-uljhna-hai-muqaddar-mera/): हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समुंदर मेरा, किस - [अश्क ए नादाँ से कहो बाद में पछताएँगे](https://bazmeshayari.com/ashk-e-naadaan-se-kaho-baad-me-pachhtayenge/): अश्क ए नादाँ से कहो बाद में पछताएँगे आप गिर कर मेरी आँखों से किधर जाएँगे ? अपने - [चलो चलके मनाया जाए उसको](https://bazmeshayari.com/chalo-chalke-manaya-jaaye-usko/): चलो चलके मनाया जाए उसको गले से फिर लगाया जाए उसको, सियासत आदमी को बाँटती है ये सच - [अक़्ल बड़ी है या फिर भालू दानिश वाले ग़ौर करें](https://bazmeshayari.com/aql-badi-hai-yaa-fir-bhaaloo-danish-wale-gaur-kare/): अक़्ल बड़ी है या फिर भालू दानिश वाले ग़ौर करें शाख़ पे बैठा है क्यों उल्लू दानिश वाले - [आदमी ही आदमी के बीच में आने लगा](https://bazmeshayari.com/aadmi-hi-aadmi-ke-beech-me-aane-laga/): आदमी ही आदमी के बीच में आने लगा फिर वही गुज़रा ज़माना ख़ुद को दुहराने लगा, एक अदना - [मुल्क की ऐसी तरक़्क़ी, आपकी बला से हो जो हो](https://bazmeshayari.com/mulq-ki-aisi-taraqqi-aapki-bala-se-ho-jo-ho/): मुल्क की ऐसी तरक़्क़ी, आपकी बला से हो जो हो क़ौम की कैसी भी पस्ती, आपकी बला से - [पहले जनाब कोई शिगूफ़ा उछाल दो](https://bazmeshayari.com/pahle-janab-koi-shigufa-uchhal-do/): पहले जनाब कोई शिगूफ़ा उछाल दो फिर कर का बोझ क़ौम की गर्दन डल डाल दो, रिश्वत को - [जितने हरामख़ोर थे क़ुर्बो जवार में](https://bazmeshayari.com/jitne-haramkhor-the-kurbo-jawar-me/): जितने हरामख़ोर थे क़ुर्बो जवार में परधान बनके आ गए अगली क़तार में, दीवार फाँदने में यूँ जिनका - [काजू भुने प्लेट में व्हिस्की गिलास में](https://bazmeshayari.com/kaajoo-bhune-plate-me-whisky-gilas-me/): काजू भुने प्लेट में व्हिस्की गिलास में उतरा है रामराज विधायक निवास में, पक्के समाजवादी हैं तस्कर हों - [तुम्हारी फ़ाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है](https://bazmeshayari.com/tumhari-faaielon-me-gaanv-ka-mausam-gulabi-hai/): तुम्हारी फ़ाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है मगर ये आँकड़ें झूठे हैं ये दावा किताबी है, उधर - [गए दिनों का सुराग़ ले कर किधर से आया किधर गया वो](https://bazmeshayari.com/gaye-dino-ka-suraag-le-kar-kidhar-se-aaya-kidhar-gaya-wo/): गए दिनों का सुराग़ ले कर किधर से आया किधर गया वो अजीब मानूस अजनबी था मुझे तो - [दयार ए दिल की रात में चराग़ सा जला गया](https://bazmeshayari.com/dayar-e-dil-kee-raat-me-charaag-saa-jal-gaya/): दयार ए दिल की रात में चराग़ सा जला गया मिला नहीं तो क्या हुआ वो शक्ल तो - [दिल में एक लहर सी उठी है अभी](https://bazmeshayari.com/dil-me-ek-lahar-see-uthi-hai-abhi-2/): दिल में एक लहर सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी, कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज - [दिल धड़कने का सबब याद आया](https://bazmeshayari.com/dil-dhadkane-ka-sabab-yaad-aaya/): दिल धड़कने का सबब याद आया वो तेरी याद थी अब याद आया, आज मुश्किल था सँभलना ऐ - [निय्यत ए शौक़ भर न जाए कहीं](https://bazmeshayari.com/niyyat-e-shauq-bhar-na-jaaye-kahin/): निय्यत ए शौक़ भर न जाए कहीं तू भी दिल से उतर न जाए कहीं, आज देखा है - [नए कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ ?](https://bazmeshayari.com/naye-kapde-badal-kar-jaaoon-kahan/): नए कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ और बाल बनाऊँ किस के लिए ? वो शख़्स तो शहर ही - [कुछ इस अदा से ग़म ए ज़िंदगी के साथ चले](https://bazmeshayari.com/kuch-is-ada-se-gam-e-zindagi-ke-saath-chale/): कुछ इस अदा से ग़म ए ज़िंदगी के साथ चले कि जैसे कोई किसी अजनबी के साथ चले, - [आराइश ए बहार का सामाँ कहाँ से आए](https://bazmeshayari.com/aaraaeesh-e-bahaar-ka-saamaan-kahan-se-aaye/): आराइश ए बहार का सामाँ कहाँ से आए या’नी जुनूँ में रोज़ गरेबाँ कहाँ से आए ? इंसाँ - [क्या क्या न सामने से ज़माने गुज़र गए](https://bazmeshayari.com/kya-kya-na-saamne-se-zamane-guzar-gaye/): क्या क्या न सामने से ज़माने गुज़र गए एक ग़म था जिस ने साथ न छोड़ा जिधर गए, - [कौन कहता है कि पी कर दूर हो जाते हैं ग़म ?](https://bazmeshayari.com/kaun-kahta-hai-ki-pee-kar-door-ho-jate-hai-gam/): कौन कहता है कि पी कर दूर हो जाते हैं ग़म ? और याद आती हैं बातें और - [वो हँस देते हैं जब महफ़िल में मेरा नाम आता है](https://bazmeshayari.com/wo-hans-dete-hai-jab-mahfil-me-mera-naam-aata-hai/): वो हँस देते हैं जब महफ़िल में मेरा नाम आता है ख़ुदा की देन है दीवानापन यूँ काम - [सुना है जब से कि तुम को भी ग़म गवारा है](https://bazmeshayari.com/suna-hai-jab-se-ki-tum-ko-bhi-gam-gavara-hai/): सुना है जब से कि तुम को भी ग़म गवारा है ख़याल अब हमें अपना नहीं तुम्हारा है, - [हम अहल ए दिल का समझिए क़रार बाक़ी है](https://bazmeshayari.com/hum-ahal-e-dil-ka-samajhiye-qarar-baaqee-hai/): हम अहल ए दिल का समझिए क़रार बाक़ी है कहीं कोई जो मोहब्बत शि’आर बाक़ी है, खुली ही - [क्या अभी कहियेगा मुझ को अपना सौदाई कि बस](https://bazmeshayari.com/kya-abhi-kahiyega-mujh-ko-apna-saudaai-ki-bas/): क्या अभी कहियेगा मुझ को अपना सौदाई कि बस और कुछ मद्द ए नज़र है अपनी रुस्वाई कि - [कल तक ये फूल रूह ए रवाँ थे बहार के](https://bazmeshayari.com/kal-tak-ye-phool-rooh-e-ravan-the-bahar-ke/): कल तक ये फूल रूह ए रवाँ थे बहार के तुम ने अभी अभी जिन्हें फेंका उतार के, - [सब को मा'लूम है ये बात कहाँ](https://bazmeshayari.com/sab-ko-malum-hai-ye-baat-kahan/): सब को मा’लूम है ये बात कहाँ दिन कहाँ काटता हूँ रात कहाँ ? इस को तक़दीर ही - [मैं हज़ार बार चाहूँ कि वो मुस्कुरा के देखे](https://bazmeshayari.com/main-hazar-baar-chahoon-ki-wo-muskura-ke-dekhe/): मैं हज़ार बार चाहूँ कि वो मुस्कुरा के देखे उसे क्या गरज़ पड़ी है जो नज़र उठा के - [नियाज़ ए इश्क़ से नाज़ ए बुताँ तक बात जा पहुँची](https://bazmeshayari.com/niyaz-e-ishq-e-naaz-e-butaan-tak-baat-ja-pahunchi/): नियाज़ ए इश्क़ से नाज़ ए बुताँ तक बात जा पहुँची ज़मीं का तज़्किरा था आसमाँ तक बात - [तरह तरह के सवालात करते रहते हैं](https://bazmeshayari.com/tarah-tarah-ke-sawalaat-karte-rahte-hain/): तरह तरह के सवालात करते रहते हैं अब अपने आप से हम बात करते रहते हैं, अता हुई - [जब से दिल में तेरे बख़्शे हुए ग़म ठहरे हैं](https://bazmeshayari.com/jab-se-dil-me-tere-bakhshe-hue-gam-thahre-hain/): जब से दिल में तेरे बख़्शे हुए ग़म ठहरे हैं महरम और भी अपने लिए हम ठहरे हैं, - [नज़र में सब की मेरी बे ख़ुदी का आलम है](https://bazmeshayari.com/nazar-me-sab-kee-meri-be-khudi-ka-aalam-hai/): नज़र में सब की मेरी बे ख़ुदी का आलम है किसे ख़बर कि बड़ी बेबसी का आलम है, - [कम मयस्सर हो जो होती है उसी की क़ीमत](https://bazmeshayari.com/kam-mayassar-ho-jo-hoti-hai-usi-kee-qeemat/): कम मयस्सर हो जो होती है उसी की क़ीमत कसरत ए ग़म ने बढ़ाई है ख़ुशी की क़ीमत, - [अपनी आँखें हैं और तुम्हारे ख़्वाब](https://bazmeshayari.com/apni-aankhen-hain-aur-tumhare-khwab/): अपनी आँखें हैं और तुम्हारे ख़्वाब कितने पुर कैफ़ हैं हमारे ख़्वाब, उन के हक़ में बड़ा सहारा - [जैसे कोई रब्त नहीं हो जैसे हों अनजाने लोग](https://bazmeshayari.com/jaise-koi-rabt-nahi-ho-jaise-ho-anjane-log/): जैसे कोई रब्त नहीं हो जैसे हों अनजाने लोग क्या से क्या हो जाते हैं अक्सर जाने पहचाने - [दिल में मेरे अरमान बहुत हैं](https://bazmeshayari.com/dil-me-mere-arman-bahut-hain/): दिल में मेरे अरमान बहुत हैं इस घर में मेहमान बहुत हैं, आप ज़माने को क्या जानें आप - [ख़ुद अपनी ज़िल्लत ओ ख़्वारी न करना](https://bazmeshayari.com/khud-apni-zillat-o-khwaree-na-karna/): ख़ुद अपनी ज़िल्लत ओ ख़्वारी न करना किसी कमज़र्फ़ से यारी न करना, अगर तुम शाद रहना चाहते - [क्या कहें ये जब्र कैसा ज़िंदगी के साथ है](https://bazmeshayari.com/kya-kahe-ye-jabr-kaisa-zindagi-ke-sath/): क्या कहें ये जब्र कैसा ज़िंदगी के साथ है हम किसी के साथ हैं और दिल किसी के - [खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें](https://bazmeshayari.com/khula-hai-jhooth-ka-bazaar-aao-sach-bole/): खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें न हो बला से ख़रीदार आओ सच बोलें, सुकूत छाया - [हाथ आँखों पे रख लेने से ख़तरा नहीं जाता](https://bazmeshayari.com/hath-ankhon-pe-rakh-lene-se-khatra-nahi-jata/): हाथ आँखों पे रख लेने से ख़तरा नहीं जाता दीवार से भौंचाल को रोका नहीं जाता, दावों की - [किस तरफ़ क़ाफ़िला जाना है कहाँ देखते हैं](https://bazmeshayari.com/kis-taraf-qaafila-jana-hai-kahan-dekhte-hai/): किस तरफ़ क़ाफ़िला जाना है कहाँ देखते हैं हम तो बस आप के पैरों के निशाँ देखते हैं, - [दिल इतना खो गया आराइशों में](https://bazmeshayari.com/dil-itna-kho-gaya-aaraaeesho-me/): दिल इतना खो गया आराइशों में तेरी ख़्वाहिश नहीं है ख़्वाहिशों में, तेरी यादें हैं और आँसू हमारे - [वो संगदिल तो फ़क़त देखने से टूट गए](https://bazmeshayari.com/wo-sangdil-to-faqat-dekhne-se-toot-gaye/): वो संगदिल तो फ़क़त देखने से टूट गए ये देखने में हमारे पसीने छूट गए, उन्हें हमारे सिवा - [करता है कोई अब भी पज़ीराई हमारी](https://bazmeshayari.com/karta-hai-koi-ab-bhi-pazeeraaee-humari/): करता है कोई अब भी पज़ीराई हमारी रुस्वाई भी लगती नहीं रुस्वाई हमारी, हम देख के दुनिया भी - [यूँ भरम अपनी अमीरी का बना रखा है](https://bazmeshayari.com/yun-bharam-apni-amiree-ka-bana-rakha-hai/): यूँ भरम अपनी अमीरी का बना रखा है घर तो ख़ाली है मगर ताला लगा रखा है, आल - [हाकिम ए शहर के अंदाज़ हैं हिंदा जैसे](https://bazmeshayari.com/haaqim-e-shahar-ke-andaz-hai-hinda-jaise/): हाकिम ए शहर के अंदाज़ हैं हिंदा जैसे हम तो हाथों में थमा देंगे कलेजा जैसे, सख़्त मुश्किल - [जनाब ए आली बिछड़ने की कोई बात नहीं](https://bazmeshayari.com/janab-e-aali-bichhadne-kee-koi-baat-nahi/): जनाब ए आली बिछड़ने की कोई बात नहीं हमारे सीने में एक दिल है पाँच सात नहीं, बहुत - [रखा नहीं था तू ने मेरा दिल सँभाल कर](https://bazmeshayari.com/rakha-nahi-tha-tu-ne-mera-dil-sambhal-kar/): रखा नहीं था तू ने मेरा दिल सँभाल कर अब कुछ न कर सकेगा लिहाज़ा मलाल कर, रक़्साँ - [तू तो तन्हा सर ए बाज़ार निकल जाता है](https://bazmeshayari.com/tu-to-tanha-sar-e-bazar-nikal-jaata-hai/): तू तो तन्हा सर ए बाज़ार निकल जाता है देखते देखते माहौल बदल जाता है, तुम ने हर - [आँख से कैसे कहूँ अब भी अंधेरा देखे](https://bazmeshayari.com/aankh-se-kaise-kahoon-ab-bhi-andhera-dekhe/): आँख से कैसे कहूँ अब भी अंधेरा देखे मुद्दतें बीत गईं धूप का जल्वा देखे, दो गिलासों में - [ज़िंदगी ऐसे चल रही है दोस्त](https://bazmeshayari.com/zindagi-aise-chal-rahi-hai-dost/): ज़िंदगी ऐसे चल रही है दोस्त जैसे मय्यत निकल रही है दोस्त, आज जाना है ग़म की महफ़िल - [वो आ के बैठे थे जिस वक़्त आशियाने में](https://bazmeshayari.com/wo-aa-ke-baithe-the-jis-waqt-aashiyaane-me/): वो आ के बैठे थे जिस वक़्त आशियाने में अमीर झाँक रहे थे ग़रीब ख़ाने में, हज़ार क़ाफ़िले - [चश्म देखूँ न मैं उस की न ही अबरू देखूँ](https://bazmeshayari.com/chashm-dekhoon-na-main-us-kee-na-hee-abroo-dekhoon/): चश्म देखूँ न मैं उस की न ही अबरू देखूँ फिर वो क्या शय है जिसे दुनिया में - [शर्मिंदगी में उम्र बसर कर रहे हैं हम](https://bazmeshayari.com/sharmindagi-me-umr-basar-kar-rahe-hai-hum/): शर्मिंदगी में उम्र बसर कर रहे हैं हम ये काम था तुम्हारा मगर कर रहे हैं हम, पीना - [हम एक रोज़ उस को भुलाने निकल गए](https://bazmeshayari.com/hum-ek-roz-us-ko-bhulaane-nikal-gaye/): हम एक रोज़ उस को भुलाने निकल गए जब आए लौट कर तो ज़माने निकल गए, एक शख़्स - [रह रह के याद आती है उस शर्मसार की](https://bazmeshayari.com/rah-rah-ke-yaad-aati-hai-us-sharmsaar-kee/): रह रह के याद आती है उस शर्मसार की बे इख़्तियारी देख मेरे इख़्तियार की, डर है कि - [दिल किसी का न हुआ एक ख़रीदार के बाद](https://bazmeshayari.com/dil-kisi-ka-na-hua-ek-kharidar-ke-baad/): दिल किसी का न हुआ एक ख़रीदार के बाद यहाँ लोग बाज़ार लगा लेते हैं बाज़ार के बाद, - [तू मुझे याद करे ऐसा तरीक़ा निकले](https://bazmeshayari.com/tu-mujhe-yaad-kare-aisa-tariqa-nikale/): तू मुझे याद करे ऐसा तरीक़ा निकले मेरी यकतरफ़ा मोहब्बत का नतीजा निकले, तेरी आँखों में दिखाई दे - [मेरी सारी ज़िंदगी को बे समर उस ने किया](https://bazmeshayari.com/meri-saari-zindagi-ko-be-samar-us-ne-kiya/): मेरी सारी ज़िंदगी को बे समर उस ने किया उम्र मेरी थी मगर उस को बसर उस ने - [पा ब गिल सब हैं रिहाई की करे तदबीर कौन](https://bazmeshayari.com/paa-ba-gil-sab-hai-rihaayee-kee-kare-tadbeer-kaun/): पा ब गिल सब हैं रिहाई की करे तदबीर कौन दस्त बस्ता शहर में खोले मेरी ज़ंजीर कौन - [बज़्म ए तकल्लुफ़ात सजाने में रह गया](https://bazmeshayari.com/bazm-e-takallufaat-sajaane-me-rah-gaya/): बज़्म ए तकल्लुफ़ात सजाने में रह गया मैं ज़िंदगी के नाज़ उठाने में रह गया, तासीर के लिए - [ये मोहब्बत का फ़साना भी बदल जाएगा](https://bazmeshayari.com/ye-mohabbat-ka-fasana-bhi-badal-jayega/): ये मोहब्बत का फ़साना भी बदल जाएगा वक़्त के साथ ज़माना भी बदल जाएगा, आज कल में कोई - [अब कहाँ दोस्त मिलें साथ निभाने वाले](https://bazmeshayari.com/ab-kahan-dost-mile-saath-nibhane-wale/): अब कहाँ दोस्त मिलें साथ निभाने वाले सब ने सीखे हैं अब आदाब ज़माने वाले, दिल जलाओ या - [एक लफ़्ज़ ए मोहब्बत का अदना ये फ़साना है](https://bazmeshayari.com/ek-lafz-e-mohabbat-ka-adna-ye-fasana-hai/): एक लफ़्ज़ ए मोहब्बत का अदना ये फ़साना है सिमटे तो दिल ए आशिक़ फैले तो ज़माना है, - [हर दम तरफ़ है वैसे मिज़ाज करख़्त का](https://bazmeshayari.com/har-dam-taraf-hai-waise-mizaz-karakht-ka-tukda/): हर दम तरफ़ है वैसे मिज़ाज करख़्त का टुकड़ा मेरा जिगर है कहो संग सख़्त का, सब्ज़ान इन - [मय ए फ़राग़त का आख़िरी दौर चल रहा था](https://bazmeshayari.com/may-e-faragat-ka-aakhiri-duar-chal-raha-tha/): मय ए फ़राग़त का आख़िरी दौर चल रहा था सुबू किनारे विसाल का चाँद ढल रहा था, वो - [सदा रहेगी यही रवानी रवाँ है पानी](https://bazmeshayari.com/sada-rahegi-yahi-rawani-ravan-hai-paani/): सदा रहेगी यही रवानी रवाँ है पानी बहाओ इस का है जावेदानी रवाँ है पानी, बहाव में बह - [जब ख़िलाफ़ ए मस्लहत जीने की नौबत आई थी](https://bazmeshayari.com/jab-khilaf-e-maslhat-jine-kee-naubat-aayee-thi/): जब ख़िलाफ़ ए मस्लहत जीने की नौबत आई थी डूब मरते डूब मरने में अगर दानाई थी, मैं - [बहार की धूप में नज़ारे हैं उस किनारे](https://bazmeshayari.com/bahar-kee-dhoop-me-nazare-hai-us-kinare/): बहार की धूप में नज़ारे हैं उस किनारे सफ़ेद पानी के सब्ज़ धारे हैं उस किनारे, वहाँ की - [दिल की बर्बादी में शामिल थी रज़ा आँखों की](https://bazmeshayari.com/dil-kee-barbadi-me-shamil-thi-raza-aankhon-kee/): दिल की बर्बादी में शामिल थी रज़ा आँखों की इस की पादाश में काम आई ज़िया आँखों की, - [उन लबों की याद आई गुल के मुस्कुराने से](https://bazmeshayari.com/un-labo-kee-yaad-aai-gul-ke-muskurane-se/): उन लबों की याद आई गुल के मुस्कुराने से ज़ख़्म ए दिल उभर आए फिर बहार आने से, - [नेकियों के ज़ुमरे में भी ये काम कर जाओ](https://bazmeshayari.com/nekiyo-ke-jumre-me-bhi-ye-kaam-kar-jaao/): नेकियों के ज़ुमरे में भी ये काम कर जाओ मुस्कुरा के थोड़ा सा मेरे ज़ख़्म भर जाओ, कितने - [किसी रांझे से इतना दूर कहाँ कोई हीर रहती है](https://bazmeshayari.com/kisi-raanjhe-se-itna-door-kahan-koi-heer-rahti-hai/): किसी रांझे से इतना दूर कहाँ कोई हीर रहती है मैं अब लाहौर रहता हूँ, वो अब कश्मीर - [ज़माने में कहीं दिल को लगाना भी ज़रूरी था](https://bazmeshayari.com/zamane-me-kahin-dil-ko-lagana-bhi-zaruri-tha/): ज़माने में कहीं दिल को लगाना भी ज़रूरी था ग़लत कुछ भी नहीं लेकिन छुपाना भी ज़रूरी था, - [दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं](https://bazmeshayari.com/dil-ke-tatar-me-yaadon-ke-ab-aahoo-bhi-nahi/): दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं आईना माँगे जो हम से वो परी रू - [हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे](https://bazmeshayari.com/hum-bichhad-ke-tum-se-baadal-kee-tarah-rote-rahe/): हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे थक गए तो ख़्वाब की दहलीज़ पर सोते - [जश्न ए ग़म हा ए दिल मनाता हूँ](https://bazmeshayari.com/jashn-e-gam-haa-e-dil-manata-hoon/): जश्न ए ग़म हा ए दिल मनाता हूँ चोट खाता हूँ मुस्कुराता हूँ, हादसों से गुज़रता जाता हूँ - [मुद्दत हुई अपनी आँखों को](https://bazmeshayari.com/muddat-hui-apni-aankhon-ko/): मुद्दत हुई अपनी आँखों को क्यों अश्क फ़िशानी याद आई ? क्या दिल ने उन्हें फिर याद किया - [पोशीदा सब की आँख से दिल की किताब रख](https://bazmeshayari.com/poshida-sab-kee-aankh-se-dil-kee-kitab-rakh/): पोशीदा सब की आँख से दिल की किताब रख मुमकिन हो गर तो ज़ख़्म के बदले गुलाब रख, - [जब भी ख़ल्वत में मेरी शम्अ जली शाम के बाद](https://bazmeshayari.com/jab-bhi-khalwat-me-meri-shama-jali-shaam-ke-baad/): जब भी ख़ल्वत में मेरी शम्अ जली शाम के बाद दिल के दरवाज़े पे दस्तक सी हुई शाम - [तड़प रहा है दिल ए बे क़रार आ जाओ](https://bazmeshayari.com/tadap-raha-hai-dil-e-be-qarar-aa-jaao/): तड़प रहा है दिल ए बे क़रार आ जाओ बस एक बार ऐ जान ए बहार आ जाओ, - [ज़िंदगी भी अजब तमाशा है](https://bazmeshayari.com/zindagi-bhi-azab-tamasha-hai/): ज़िंदगी भी अजब तमाशा है कभी आशा कभी निराशा है, जिस में करती हैं गुफ़्तुगू आँखें वो मोहब्बत - [ज़िक्र होता है उस परी वश का](https://bazmeshayari.com/zikr-hota-hai-us-pari-vash-ka/): ज़िक्र होता है उस परी वश का जब भी महफ़िल में बात होती है, उस की यादों की - [अपने घर के दर ओ दीवार को ऊँचा न करो](https://bazmeshayari.com/apne-ghar-ke-dar-o-deewar-ko-ooncha-na-karo/): अपने घर के दर ओ दीवार को ऊँचा न करो इतना गहरा मेरी आवाज़ से पर्दा न करो, - [ग़ुरूब ए शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ](https://bazmeshayari.com/gurub-e-shaam-hi-se-khud-ko-yun-mahsus-karta-hoon/): ग़ुरूब ए शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ कि जैसे एक दीया हूँ और हवा - [बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो](https://bazmeshayari.com/bichhadte-daamno-me-phool-kee-kuch-pattiyan-rakh-do/): बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो तअल्लुक़ की गिराँबारी में थोड़ी नर्मियाँ रख दो, भटक - [कभी ख़िरद से कभी दिल से दोस्ती कर ली](https://bazmeshayari.com/kabhi-khirad-se-kabhi-dil-se-dosti-kar-lee/): कभी ख़िरद से कभी दिल से दोस्ती कर ली न पूछ कैसे बसर हम ने ज़िंदगी कर ली, - [मुझे तुम शोहरतों के दरमियाँ गुमनाम लिख देना](https://bazmeshayari.com/mujhe-tum-shohraton-ke-darmiyan-gumnam-likh-dena/): मुझे तुम शोहरतों के दरमियाँ गुमनाम लिख देना जहाँ दरिया मिले बे आब मेरा नाम लिख देना, ये - [तू ने अपना जल्वा दिखाने को जो नक़ाब मुँह से उठा दिया](https://bazmeshayari.com/tu-ne-apna-jalwa-dikhaane-ko-jo-naqab-munh-se-utha-diya/): तू ने अपना जल्वा दिखाने को जो नक़ाब मुँह से उठा दिया वहीं महव ए हैरत ए बे - [मोहब्बत ही न जो समझे वो ज़ालिम प्यार क्या जाने](https://bazmeshayari.com/mohabbat-hi-na-jo-samjhe-wo-zalim-pyar-kya-jaane/): मोहब्बत ही न जो समझे वो ज़ालिम प्यार क्या जाने निकलती दिल के तारों से जो है झंकार - [ला पिला दे साक़िया पैमाना पैमाने के बा'द](https://bazmeshayari.com/laa-pila-de-saaqiya-paimana-paimane-ke-baad/): ला पिला दे साक़िया पैमाना पैमाने के बा’द बात मतलब की करूँगा होश आ जाने के बा’द, जो - [हक़ीक़त का अगर अफ़्साना बन जाए तो क्या कीजे](https://bazmeshayari.com/haqiqat-ka-agar-afsana-ban-jaaye-to-kya-kijiye/): हक़ीक़त का अगर अफ़्साना बन जाए तो क्या कीजे गले मिल कर भी वो बेगाना बन जाए तो - [मेरी आँखों को बख़्शे हैं आँसू](https://bazmeshayari.com/meri-aankhon-ko-bakhshe-hain-aansoon/): मेरी आँखों को बख़्शे हैं आँसू दिल को दाग़ ए अलम दे गए हैं, इस इनायत पे क़ुर्बान - [गुलाब आँखें शराब आँखें](https://bazmeshayari.com/gulab-aankhen-sharab-aankhen/): गुलाब आँखें शराब आँखें यही तो हैं ला जवाब आँखें, इन्हीं में उल्फ़त इन्हीं में नफ़रत सवाल आँखें - [सहर क़रीब है तारों का हाल क्या होगा](https://bazmeshayari.com/sahar-qareeb-hai-taaron-ka-haal-kya-hoga/): सहर क़रीब है तारों का हाल क्या होगा अब इंतिज़ार के मारों का हाल क्या होगा ? तेरी - [फ़स्ल ए गुल है सजा है मयख़ाना](https://bazmeshayari.com/fasl-e-gul-hai-saza-hai-maykhana/): फ़स्ल ए गुल है सजा है मयख़ाना चल मेरे दिल खुला है मयख़ाना, शाम के वक़्त बैठने के - [फिरूँ ढूँढ़ता मयकदा तौबा तौबा](https://bazmeshayari.com/firoon-dhoondhta-maykada-tauba-tauba/): फिरूँ ढूँढ़ता मयकदा तौबा तौबा मुझे आज कल इतनी फ़ुर्सत नहीं है, सलामत रहे तेरी आँखों की मस्ती - [कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही सही](https://bazmeshayari.com/kahna-galat-galat-to-chupana-sahi-sahi/): कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही सही क़ासिद कहा जो उस ने बताना सही सही, ये सुब्ह सुब्ह - [अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का](https://bazmeshayari.com/ada-se-dekh-lo-jaata-rahe-gila-dil-ka/): अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का बस एक निगाह पे ठहरा है फ़ैसला दिल का, - [बात साक़ी की न टाली जाएगी](https://bazmeshayari.com/baat-saaqi-ki-na-taali-jayegi/): बात साक़ी की न टाली जाएगी कर के तौबा तोड़ डाली जाएगी, वो सँवरते हैं मुझे इस की - [ज़माना है कि गुज़रा जा रहा है](https://bazmeshayari.com/zamana-hai-ki-guzra-ja-raha-hai/): ज़माना है कि गुज़रा जा रहा है ये दरिया है कि बहता जा रहा है, वो उट्ठे दर्द - [दिल गया दिल लगी नहीं जाती](https://bazmeshayari.com/dil-gaya-dil-lagi-nahi-jaati/): दिल गया दिल लगी नहीं जाती रोते रोते हँसी नहीं जाती, आँखें साक़ी की जब से देखी हैं - [निगाह बर्क़ नहीं चेहरा आफ़्ताब नहीं](https://bazmeshayari.com/nigaah-barq-nahi-chehra-aftab-nahi/): निगाह बर्क़ नहीं चेहरा आफ़्ताब नहीं वो आदमी है मगर देखने की ताब नहीं, गुनह गुनह न रहा - [देखा जो हुस्न ए यार तबीअत मचल गई](https://bazmeshayari.com/dekha-jo-husn-e-yaar-tabiyat-machal-gayi/): देखा जो हुस्न ए यार तबीअत मचल गई आँखों का था क़ुसूर छुरी दिल पे चल गई, हम - [बहुत रहा है कभी लुत्फ़ ए यार हम पर भी](https://bazmeshayari.com/bahut-raha-hai-kabhi-lutf-e-yaar-hum-par-bhi/): बहुत रहा है कभी लुत्फ़ ए यार हम पर भी गुज़र चुकी है ये फ़स्ल ए बहार हम - [एक बोसा दीजिए मेरा ईमान लीजिए](https://bazmeshayari.com/ek-bosa-dijiye-mera-eeman-lijiye/): एक बोसा दीजिए मेरा ईमान लीजिए गो बुत हैं आप बहर ए ख़ुदा मान लीजिए, दिल ले के - [हूँ मैं परवाना मगर शम्अ तो हो रात तो हो](https://bazmeshayari.com/hoon-main-parwana-magar-shama-to-ho-raat-to-ho/): हूँ मैं परवाना मगर शम्अ तो हो रात तो हो जान देने को हूँ मौजूद कोई बात तो - [हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना](https://bazmeshayari.com/haya-se-sar-jhuka-lena-ada-se-muskura-dena/): हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना, - [लहरा के झूम झूम के ला मुस्कुरा के ला](https://bazmeshayari.com/lahra-ke-jhoom-jhoom-ke-laa-muskura-ke-laa/): लहरा के झूम झूम के ला मुस्कुरा के ला फूलों के रस में चाँद की किरनें मिला के - [उदासी आसमाँ है दिल मेरा कितना अकेला है](https://bazmeshayari.com/udaasi-aasmaan-hai-dil-mera-kitna-akela-hai/): उदासी आसमाँ है दिल मेरा कितना अकेला है परिंदा शाम के पुल पर बहुत ख़ामोश बैठा है, मैं - [हम हैं और उन की ख़ुशी है आज कल](https://bazmeshayari.com/hum-hai-aur-un-kee-khushi-hai-aaj-kal/): हम हैं और उन की ख़ुशी है आज कल ज़िंदगी ही ज़िंदगी है आज कल, ग़म का हर - [किसे अपना बनाएँ कोई इस क़ाबिल नहीं मिलता](https://bazmeshayari.com/kise-apna-banayen-koi-is-qaabil-nahin-milta/): किसे अपना बनाएँ कोई इस क़ाबिल नहीं मिलता यहाँ पत्थर बहुत मिलते हैं लेकिन दिल नहीं मिलता, मोहब्बत - [दुई का तज़्किरा तौहीद में पाया नहीं जाता](https://bazmeshayari.com/duee-ka-tazkira-tauhid-me-paya-nahi-jaata/): दुई का तज़्किरा तौहीद में पाया नहीं जाता जहाँ मेरी रसाई है मेरा साया नहीं जाता, मेरे टूटे - [एक बिखरते आशियाँ की बात है](https://bazmeshayari.com/ek-bikharte-aashiyaan-kee-baat-hai/): एक बिखरते आशियाँ की बात है एक शिकस्ता साएबाँ की बात है, मेरे माथे के निशाँ की बात - [अब इजाज़त दे कि मैं हूँ जाँ ब लब ऐ ज़िंदगी](https://bazmeshayari.com/ab-izazat-de-ki-main-hoon-jaan-ba-lab-ae-zindagi/): अब इजाज़त दे कि मैं हूँ जाँ ब लब ऐ ज़िंदगी मौत आती है बस अब हद्द ए - [मैं ने देखा है कैसा ये सपना नया रात के इस पहर](https://bazmeshayari.com/main-ne-dekha-hai-kaisa-ye-sapna-naya-raat-ke-is-pahar/): मैं ने देखा है कैसा ये सपना नया रात के इस पहर मुझ से बिछड़ा हुआ कोई अपना - [मैं जो कहता हूँ तू कजरवी छोड़ दे](https://bazmeshayari.com/main-jo-kahta-hoon-tu-kajravee-chhod-de/): मैं जो कहता हूँ तू कजरवी छोड़ दे वो ये कहती है तू दोस्ती छोड़ दे, मैं ये - [जिसे ख़ुद से जुदा रखा नहीं है](https://bazmeshayari.com/jise-khud-se-juda-rakha-nahi-hai/): जिसे ख़ुद से जुदा रखा नहीं है वो मेरा है मगर मेरा नहीं है, जिसे खोने का मुझ - [जिस को इतना चाहा मैं ने जिस को ग़ज़ल में लिखा चाँद](https://bazmeshayari.com/jisko-itna-chaha-main-ne-jis-ko-gazal-me-likha-chaand/): जिस को इतना चाहा मैं ने जिस को ग़ज़ल में लिखा चाँद छोड़ गया है मुझ को कैसे - [सोचता हूँ मैं कि कुछ इस तरह रोना चाहिए](https://bazmeshayari.com/sochta-hoon-main-ki-kuch-is-qadar-rona-chahiye/): सोचता हूँ मैं कि कुछ इस तरह रोना चाहिए अपने अश्कों से तेरा दामन भिगोना चाहिए, ज़िंदगी की - [यूँ शहर के बाज़ार में क्या क्या नहीं मिलता](https://bazmeshayari.com/yun-shahar-ke-bazaar-me-kya-kya-nahin-milta/): यूँ शहर के बाज़ार में क्या क्या नहीं मिलता पर हुस्न में सानी कोई तेरा नहीं नहीं मिलता, - [रह गया दुनिया में वो बन कर तमाशा उम्र भर](https://bazmeshayari.com/rah-gaya-duniya-me-wo-ban-kar-tamasha-umr-bhar/): रह गया दुनिया में वो बन कर तमाशा उम्र भर जिस ने अपनी ज़िंदगी को खेल समझा उम्र - [गिरने वाली है बहुत जल्द ये सरकार हुज़ूर](https://bazmeshayari.com/girne-wali-hai-bahut-jald-ye-sarkar-huzoor/): गिरने वाली है बहुत जल्द ये सरकार हुज़ूर हाँ नज़र आते हैं ऐसे ही कुछ आसार हुज़ूर, कारवाँ - [मुसलसल मुझ पे ये तेरी इनायत मार डालेगी](https://bazmeshayari.com/musalsal-mujh-pe-ye-teri-inayat-maar-dalegi/): मुसलसल मुझ पे ये तेरी इनायत मार डालेगी कभी फ़ुर्क़त कभी इस दर्जा क़ुर्बत मार डालेगी, ग़रीब ए - [आ ही जाएगी सहर मतला ए इम्काँ तो खुला](https://bazmeshayari.com/aa-hi-jayegi-sahar-matla-e-imkaan-to-khula/): आ ही जाएगी सहर मतला ए इम्काँ तो खुला न सही बाब ए क़फ़स रौज़न ए ज़िंदाँ तो - [इस बाग़ में वो संग के क़ाबिल कहा न जाए](https://bazmeshayari.com/is-baag-me-wo-sang-ke-qaabil-kaha-na-jaaye/): इस बाग़ में वो संग के क़ाबिल कहा न जाए जब तक किसी समर को मिरा दिल कहा - [ख़ंजर की तरह बू ए समन तेज़ बहुत है](https://bazmeshayari.com/khanzar-kee-tarah-boo-e-saman-tej-bahut-hai/): ख़ंजर की तरह बू ए समन तेज़ बहुत है मौसम की हवा अब के जुनूँ ख़ेज़ बहुत है, - [चमन है मक़्तल ए नग़्मा अब और क्या कहिए](https://bazmeshayari.com/chaman-hai-maqtal-e-nagma-ab-aur-kya-kahiye/): चमन है मक़्तल ए नग़्मा अब और क्या कहिए बस एक सुकूत का आलम जिसे नवा कहिए, असीर - [ख़त्म शोर ए तूफ़ाँ था दूर थी सियाही भी](https://bazmeshayari.com/khatm-shor-e-tufaan-tha-door-thi-siyaah-bhi/): ख़त्म शोर ए तूफ़ाँ था दूर थी सियाही भी दम के दम में अफ़्साना थी मेरी तबाही भी, - [डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को](https://bazmeshayari.com/dara-ke-mauj-o-talatum-se-hum-nasheenon-ko/): डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को यही तो हैं जो डुबोया किए सफ़ीनों को, शराब - [अहल ए तूफ़ाँ आओ दिल वालों का अफ़्साना कहें](https://bazmeshayari.com/ahal-e-tufaan-aaoo-dil-walon-ka-afsana-kahen/): अहल ए तूफ़ाँ आओ दिल वालों का अफ़्साना कहें मौज को गेसू भँवर को चश्म ए जानाना कहें, - [कहीं बे ख़याल हो कर युंही छू लिया किसी ने](https://bazmeshayari.com/kahin-be-khyaal-ho-kar-yunhi-choo-liya-kisi-ne/): कहीं बे ख़याल हो कर युंही छू लिया किसी ने कई ख़्वाब देख डाले यहाँ मेरी बे ख़ुदी - [आ निकल के मैदाँ में दो रुख़ी के ख़ाने से](https://bazmeshayari.com/aa-nikal-ke-maidaan-me-do-rukhi-ke-khaane-se/): आ निकल के मैदाँ में दो रुख़ी के ख़ाने से काम चल नहीं सकता अब किसी बहाने से, - [अल्फाज़ के झूठे बंधन में](https://bazmeshayari.com/alfaz-ke-jhuthe-bandhan-me/): अल्फाज़ के झूठे बंधन में आगाज़ के गहरे परों में हर शख्स मुहब्बत करता है, हालाकिं मुहब्बत कुछ - [सू ए मक़्तल कि पए सैर ए चमन जाते हैं](https://bazmeshayari.com/soo-e-maqtal-ki-paye-sair-e-chaman-jaate-hain/): सू ए मक़्तल कि पए सैर ए चमन जाते हैं अहल ए दिल जाम ब कफ़ सर ब - [गो रात मेरी सुब्ह की महरम तो नहीं है](https://bazmeshayari.com/go-raat-meri-subah-kee-marham-to-nahin-hai/): गो रात मेरी सुब्ह की महरम तो नहीं है सूरज से तेरा रंग ए हिना कम तो नहीं - [निगाह ए साक़ी ए ना मेहरबाँ ये क्या जाने](https://bazmeshayari.com/nigaah-e-saaqi-e-na-meharbaan-ye-kya-jaane/): निगाह ए साक़ी ए ना मेहरबाँ ये क्या जाने कि टूट जाते हैं ख़ुद दिल के साथ पैमाने, - [तक़दीर का शिकवा बे मअ'नी](https://bazmeshayari.com/taqdeer-ka-shikwa-be-maanee/): तक़दीर का शिकवा बे मअ’नी जीना ही तुझे मंज़ूर नहीं, आप अपना मुक़द्दर बन न सके इतना तो - [उठाए जा उन के सितम और जिए जा](https://bazmeshayari.com/uthaye-jaa-un-ke-sitam-aur-jiye-jaa/): उठाए जा उन के सितम और जिए जा यूँ ही मुस्कुराए जा आँसू पिए जा, यही है मोहब्बत - [अब अहल ए दर्द ये जीने का एहतिमाम करें](https://bazmeshayari.com/ab-ahal-e-dard-ye-jeene-ka-ehtimam-karen/): अब अहल ए दर्द ये जीने का एहतिमाम करें उसे भुला के ग़म ए ज़िंदगी का नाम करें, - [दुश्मन की दोस्ती है अब अहल ए वतन के साथ](https://bazmeshayari.com/dushman-kee-dosti-hai-ab-ahal-e-watan-ke-saath/): दुश्मन की दोस्ती है अब अहल ए वतन के साथ है अब ख़िज़ाँ चमन में नए पैरहन के - [हमें शुऊर ए जुनूँ है कि जिस चमन में रहे](https://bazmeshayari.com/humen-shuoor-e-junoon-hai-ki-jis-chaman-me-rahen/): हमें शुऊर ए जुनूँ है कि जिस चमन में रहे निगाह बन के हसीनों की अंजुमन में रहे, - [मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है](https://bazmeshayari.com/mujh-se-kaha-jibreel-e-junoon-ne-ye-bhi-vahee-ilaahi-hai/): मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है मज़हब तो बस मज़हब ए - [रहते थे कभी जिन के दिल में हम](https://bazmeshayari.com/rahte-the-kabhi-jin-ke-dil-me-hum/): रहते थे कभी जिन के दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह, बैठे हैं उन्ही के - [मसर्रतों को ये अहल ए हवस न खो देते](https://bazmeshayari.com/masarraton-ko-ye-ahal-e-havas-na-kho-dete/): मसर्रतों को ये अहल ए हवस न खो देते जो हर ख़ुशी में तेरे ग़म को भी समो - [शाम ए ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं](https://bazmeshayari.com/shaam-e-gam-kee-qasam-aaj-gamgeen-hain/): शाम ए ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम, - [ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें](https://bazmeshayari.com/ye-ruke-ruke-se-aansoon-ye-dabi-dabi-see-aahen/): ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें यूँही कब तलक ख़ुदाया ग़म ए ज़िंदगी निबाहें, - [किसी ने भी तो न देखा निगाह भर के मुझे](https://bazmeshayari.com/kisi-ne-bhi-to-na-dekha-nigaah-bhar-ke-mujhe/): किसी ने भी तो न देखा निगाह भर के मुझे गया फिर आज का दिन भी उदास कर - [मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख़ भी बदल गए](https://bazmeshayari.com/mujhe-sahal-ho-gayi-manzilen-wo-hawa-ke-rukh-bhi-badal-gaye/): मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख़ भी बदल गए तेरा हाथ हाथ में आ गया - [आह ए जाँ सोज़ की महरूमी ए तासीर न देख](https://bazmeshayari.com/aah-e-jaan-soz-kee-mahrumi-e-taasir-na-dekh/): आह ए जाँ सोज़ की महरूमी ए तासीर न देख हो ही जाएगी कोई जीने की तदबीर न - [ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो](https://bazmeshayari.com/ae-dil-mujhe-aisi-jagah-le-chal-jahan-koi-na-ho/): ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो अपना पराया मेहरबाँ ना मेहरबाँ कोई न - [तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा](https://bazmeshayari.com/tujhe-kya-sunaaoon-main-dilruba/): तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा तेरे सामने मेरा हाल है, तेरी एक निगाह की बात है मेरी ज़िंदगी - [जला के मिशअल ए जाँ हम जुनूँ सिफ़ात चले](https://bazmeshayari.com/jala-ke-mishaal-e-jaan-hum-junoon-sifaat-chale/): जला के मिशअल ए जाँ हम जुनूँ सिफ़ात चले जो घर को आग लगाए हमारे साथ चले, दयार - [हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो](https://bazmeshayari.com/hum-ko-junoon-kya-sikhlaate-ho/): हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़्यादा, चाक किए हैं हम ने अज़ीज़ो - [जब हुआ इरफ़ाँ तो ग़म आराम ए जाँ बनता गया](https://bazmeshayari.com/jab-hua-irfaan-to-gam-aaraam-e-jaan-banta-gaya/): जब हुआ इरफ़ाँ तो ग़म आराम ए जाँ बनता गया सोज़ ए जानाँ दिल में सोज़ ए दीगराँ - [यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं](https://bazmeshayari.com/yun-to-aapas-me-bigadte-hain-khafa-hote-hain/): यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं मिलने वाले कहीं उल्फ़त में जुदा होते हैं, हैं - [हम हैं मता ए कूचा ओ बाज़ार की तरह](https://bazmeshayari.com/hum-hain-mataa-e-kucha-o-baazar-kee-tarah/): हम हैं मता ए कूचा ओ बाज़ार की तरह उठती है हर निगाह ख़रीदार की तरह, इस कू - [कोई हमदम न रहा कोई सहारा न रहा](https://bazmeshayari.com/koi-humdam-na-raha-koi-sahara-na-raha/): कोई हमदम न रहा कोई सहारा न रहा हम किसी के न रहे कोई हमारा न रहा, शाम - [हमारे बाद अब महफ़िल में अफ़्साने बयाँ होंगे](https://bazmeshayari.com/humare-baad-ab-mahfil-me-afsaane-bayaan-honge/): हमारे बाद अब महफ़िल में अफ़्साने बयाँ होंगे बहारें हम को ढूँढेंगी न जाने हम कहाँ होंगे, इसी - [मिट्टी की सुराही है](https://bazmeshayari.com/mitti-kee-suraahi-hai/): मिट्टी की सुराही है पानी की गवाही है, उश्शाक़ नहीं हम लोग पर रंग तो काही है, हर - [रस्ते में अजब आसार मिले](https://bazmeshayari.com/raste-me-azab-aasaar-mile/): रस्ते में अजब आसार मिले जूँ कोई पुराना यार मिले, जिस तरह कड़कती धूपों में दो जिस्मों को - [एक वज़ीफ़ा है किसी दर्द का दोहराया हुआ](https://bazmeshayari.com/ek-vazeefa-hai-kisi-dard-ka-dohraya-hua/): एक वज़ीफ़ा है किसी दर्द का दोहराया हुआ जिस की ज़द में है पहाड़ों का धुआँ आया हुआ, - [अदा है ख़्वाब है तस्कीन है तमाशा है](https://bazmeshayari.com/adaa-hai-khwab-hai-taskeen-hai-tamaasha-hai/): अदा है ख़्वाब है तस्कीन है तमाशा है हमारी आँख में एक शख़्स बे तहाशा है, ज़रा सी - [अब तुम को ही सावन का संदेसा नहीं बनना](https://bazmeshayari.com/ab-tum-ko-hi-savan-ka-sandesa-nahi-banana/): अब तुम को ही सावन का संदेसा नहीं बनना मुझ को भी किसी और का रस्ता नहीं बनना, - [आराइश ए ख़याल भी हो दिलकुशा भी हो](https://bazmeshayari.com/aaraaesh-e-khyal-bhi-ho-dilkusha-bhi-ho/): आराइश ए ख़याल भी हो दिलकुशा भी हो वो दर्द अब कहाँ जिसे जी चाहता भी हो, ये - [किसी कली ने भी देखा न आँख भर के मुझे](https://bazmeshayari.com/kisi-kali-ne-bhi-dekha-na-aankh-bhar-ke-mujhe/): किसी कली ने भी देखा न आँख भर के मुझे गुज़र गई जरस ए गुल उदास कर के - [तेरी ज़ुल्फ़ों के बिखरने का सबब है कोई](https://bazmeshayari.com/teri-zulfon-ke-bikharne-ka-sabab-hai-koi/): तेरी ज़ुल्फ़ों के बिखरने का सबब है कोई आँख कहती है तेरे दिल में तलब है कोई, आँच - [वो इस अदा से जो आए तो क्यूँ भला न लगे](https://bazmeshayari.com/wo-is-adaa-se-jo-aaye-to-kyun-bhala-na-lage/): वो इस अदा से जो आए तो क्यूँ भला न लगे हज़ार बार मिलो फिर भी आश्ना न - [जब रात गए तेरी याद आई सौ तरह से जी को बहलाया](https://bazmeshayari.com/jab-raat-gaye-teri-yaad-aayi-sau-tarah-se-jee-ko-bahalaya/): जब रात गए तेरी याद आई सौ तरह से जी को बहलाया कभी अपने ही दिल से बातें - [तेरे ख़याल से लो दे उठी है तन्हाई](https://bazmeshayari.com/tere-khyal-se-lau-de-uthi-hai-tanhaai/): तेरे ख़याल से लो दे उठी है तन्हाई शब ए फ़िराक़ है या तेरी जल्वा आराई, तू किस - [कौन उस राह से गुज़रता है](https://bazmeshayari.com/kaun-us-raah-se-guzarta-hai/): कौन उस राह से गुज़रता है दिल यूँही इंतिज़ार करता है, देख कर भी न देखने वाले दिल - [देख मोहब्बत का दस्तूर](https://bazmeshayari.com/dekh-mohabbat-ka-dastoor/): देख मोहब्बत का दस्तूर तू मुझ से मैं तुझ से दूर, तन्हा तन्हा फिरते हैं दिल वीराँ आँखें - [तुम आ गए हो तो क्यूँ इंतिज़ार ए शाम करें](https://bazmeshayari.com/tum-aa-gaye-ho-to-kyun-intizar-e-sham-karen/): तुम आ गए हो तो क्यूँ इंतिज़ार ए शाम करें कहो तो क्यूँ न अभी से कुछ एहतिमाम - [शहर सुनसान है किधर जाएँ](https://bazmeshayari.com/shahar-sunsan-hai-kidhar-jaayen/): शहर सुनसान है किधर जाएँ ख़ाक हो कर कहीं बिखर जाएँ रात कितनी गुज़र गई लेकिन इतनी हिम्मत - [गिरफ़्ता दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने](https://bazmeshayari.com/girafta-dil-hai-bahut-aaj-tere-deewane/): गिरफ़्ता दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने ख़ुदा करे कोई तेरे सिवा न पहचाने, मिटी मिटी सी उमीदें - [तार ए शबनम की तरह सूरत ए ख़स टूटती है](https://bazmeshayari.com/taar-e-shabnam-kee-tarah-soorat-e-khas-tutati-hai/): तार ए शबनम की तरह सूरत ए ख़स टूटती है आस बँधने नहीं पाती है कि बस टूटती - [ख़्वाब में मंज़र रह जाता है](https://bazmeshayari.com/khwab-me-manzar-rah-jaata-hai/): ख़्वाब में मंज़र रह जाता है तकिए पर सर रह जाता है, आ पड़ती है झील आँखों में - [उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर](https://bazmeshayari.com/umr-bhar-chalte-rahe-hum-waqt-kee-talwar-par/): उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर परवरिश पाई है अपने ख़ून ही की धार पर, - [कश्ती हवस हवाओं के रुख़ पर उतार दे](https://bazmeshayari.com/kashtee-havas-hawaaon-ke-rukh-par-utaar-de/): कश्ती हवस हवाओं के रुख़ पर उतार दे खोए होऊँ से मिल ये दलद्दर उतार दे, बे सम्त - [हर चौक पे भाषण हैं, हर मंच पे क़सम का शोर](https://bazmeshayari.com/har-chauk-pe-bhashan-hai-har-manch-pe-qasam-ka-shor/): हर चौक पे भाषण हैं, हर मंच पे क़सम का शोर पर रोटी की कतार में आज भी - [रक़्स करने का मिला हुक्म जो दरियाओं में](https://bazmeshayari.com/raqs-karne-ka-mila-huqm-jo-dariyaaon-me/): रक़्स करने का मिला हुक्म जो दरियाओं में हम ने ख़ुश हो के भँवर बाँध लिए पाँव में, - [जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी](https://bazmeshayari.com/jis-taraf-chahoon-pahunch-jaaoon-masafat-kaisi/): जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी मैं तो आवाज़ हूँ आवाज़ की हिजरत कैसी ? सुनने वालों - [यकुम जनवरी है नया साल है](https://bazmeshayari.com/yakum-janvari-hai-naya-saal-hai/): यकुम जनवरी है नया साल है दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है ? बचाए ख़ुदा शर की ज़द - [मैं उससे जुदा वो मुझसे जुदा](https://bazmeshayari.com/main-usse-juda-wo-mujh-se-juda/): मैं उससे जुदा वो मुझसे जुदा ये दोनों बातें एक सी हैं, आकाश में चाँद भी तारे भी - [वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग](https://bazmeshayari.com/vallah-kis-junoon-ke-sataye-hue-hai-log-2/): वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग हमसाए के लहू में नहाए हुए हैं लोग, ये तिश्नगी - [सहर ने मसर्रत का नग़्मा सुनाया](https://bazmeshayari.com/sahar-ne-masarrat-ka-nagma-sunaya/): सहर ने मसर्रत का नग़्मा सुनाया फ़ज़ा ने गुलिस्ताँ का दामन सजाया, हवाओं ने अख़्लाक़ का गीत गाया - [गुफ़्तुगू जो होती है साल ए नौ से अम्बर की](https://bazmeshayari.com/guftagoo-jo-hoti-hai-saal-e-nau-se-ambar-kee/): गुफ़्तुगू जो होती है साल ए नौ से अम्बर की गर्म होने लगती हैं सर्दियाँ दिसम्बर की, जाने - [मुबारक मुबारक नया साल सब को](https://bazmeshayari.com/mubarak-mubarak-naya-saal-sab-ko/): मुबारक मुबारक नया साल सब को न चाहा था हम ने तू हम से जुदा हो, मगर किस - [एक बरस और कट गया शारिक़](https://bazmeshayari.com/ek-baras-aur-kat-gaya-shariq/): एक बरस और कट गया शारिक़ रोज़ साँसों की जंग लड़ते हुए, सब को अपने ख़िलाफ़ करते हुए - [ऐ नए साल बता तुझ में नयापन क्या है](https://bazmeshayari.com/ae-naye-saal-bata-tujh-me-nayapan-kya-hai/): ऐ नए साल बता तुझ में नयापन क्या है हर तरफ़ ख़ल्क़ ने क्यों शोर मचा रखा है - [नहीं काम रखना कोई दिल लगी से यकुम जनवरी से](https://bazmeshayari.com/nahi-kaam-rakhna-koi-dil-lagi-se-yakum-janwari-se/): नहीं काम रखना कोई दिल लगी से यकुम जनवरी से गुज़रना नहीं अब तुम्हारी गली से यकुम जनवरी - [पिछले बरस तुम साथ थे मेरे और दिसम्बर था](https://bazmeshayari.com/pichhle-baras-tum-saath-the-mere-aur-december-tha/): पिछले बरस तुम साथ थे मेरे और दिसम्बर था महके हुए दिन रात थे मेरे और दिसम्बर था, - [नतीजा फिर वही होगा सुना है साल बदलेगा](https://bazmeshayari.com/nateeja-fir-wahi-hoga-suna-hai-saal-badlega/): नतीजा फिर वही होगा सुना है साल बदलेगा परिंदे फिर वही होंगे शिकारी जाल बदलेगा, बदलना है तो - [नासिर क्या कहता फिरता है कुछ न सुनो तो बेहतर है](https://bazmeshayari.com/naasir-kya-kahta-firta-hai-kuch-na-suno-to-behtar-hai/): नासिर क्या कहता फिरता है कुछ न सुनो तो बेहतर है दीवाना है दीवाने के मुँह न लगो - [सफ़र ए मंज़िल ए शब याद नहीं](https://bazmeshayari.com/safar-e-manzil-e-shab-yaad-nahi/): सफ़र ए मंज़िल ए शब याद नहीं लोग रुख़्सत हुए कब याद नहीं, अव्वलीं क़ुर्ब की सरशारी में - [गली गली मेरी याद बिछी है प्यारे रस्ता देख के चल](https://bazmeshayari.com/gali-gali-meri-yaad-bichhee-hai-pyare-rasta-dekh-ke-chal/): गली गली मेरी याद बिछी है प्यारे रस्ता देख के चल मुझ से इतनी वहशत है तो मेरी - [मुसलसल बेकली दिल को रही है](https://bazmeshayari.com/musalsal-bekali-dil-ko-rahi-hai/): मुसलसल बेकली दिल को रही है मगर जीने की सूरत तो रही है, मैं क्यूँ फिरता हूँ तन्हा - [फिर सावन रुत की पवन चली तुम याद आए](https://bazmeshayari.com/fir-sawan-rut-kee-pawan-chali-tum-yaad-aaye/): फिर सावन रुत की पवन चली तुम याद आए फिर पत्तों की पाज़ेब बजी तुम याद आए, फिर - [क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे](https://bazmeshayari.com/kya-zamana-tha-ki-hum-roz-mila-karte-the/): क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे रात भर चाँद के हमराह फिरा करते थे, जहाँ - [कुछ यादगार ए शहर ए सितमगर ही ले चलें](https://bazmeshayari.com/kuch-yaadgaar-e-shahar-e-sitamgar-hi-le-chale/): कुछ यादगार ए शहर ए सितमगर ही ले चलें आए हैं इस गली में तो पत्थर ही ले - [वो दिलनवाज़ है लेकिन नज़र शनास नहीं](https://bazmeshayari.com/wo-dilnawaz-hai-lekin-nazar-shanas-nahin/): वो दिलनवाज़ है लेकिन नज़र शनास नहीं मेरा इलाज मेरे चारागर के पास नहीं, तड़प रहे हैं ज़बाँ - [दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं](https://bazmeshayari.com/dil-ke-tatar-me-yaadon-ke-ab-aahoo/): दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं आईना माँगे जो हम से वो परी रू - [हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे](https://bazmeshayari.com/hum-bichhad-ke-tum-se-baadal-kee-tarah/): हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे थक गए तो ख़्वाब की दहलीज़ पर सोते - [अपने घर के दर ओ दीवार को ऊँचा न करो](https://bazmeshayari.com/apne-ghar-ke-dar-o-deewar-ko-ooncha-na/): अपने घर के दर ओ दीवार को ऊँचा न करो इतना गहरा मेरी आवाज़ से पर्दा न करो, - [ग़ुरूब ए शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ](https://bazmeshayari.com/gurub-e-shaam-hi-se-khud-ko-yun-mahsus/): ग़ुरूब ए शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ कि जैसे एक दिया हूँ और हवा - [बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो](https://bazmeshayari.com/bichhadte-daamno-me-phool-kee-kuch-pattiyan/): बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो तअल्लुक़ की गिराँबारी में थोड़ी नर्मियाँ रख दो, भटक - [कभी ख़िरद से कभी दिल से दोस्ती कर ली](https://bazmeshayari.com/kabhi-khirad-se-kabhi-dil-se-dosti-kar-lee-2/): कभी ख़िरद से कभी दिल से दोस्ती कर ली न पूछ कैसे बसर हम ने ज़िंदगी कर ली, - [मुझे तुम शोहरतों के दरमियाँ गुमनाम लिख देना](https://bazmeshayari.com/mujhe-tum-shohraton-ke-darmiyaan-gumnam-likh-dena/): मुझे तुम शोहरतों के दरमियाँ गुमनाम लिख देना जहाँ दरिया मिले बे आब मेरा नाम लिख देना, ये - [होती है तेरे नाम से वहशत कभी कभी](https://bazmeshayari.com/hoti-hai-tere-naam-se-wahshat-kabhi-kabhi/): होती है तेरे नाम से वहशत कभी कभी बरहम हुई है यूँ भी तबी’अत कभी कभी, ऐ दिल - [तेरे आने का धोका सा रहा है](https://bazmeshayari.com/tere-aane-ka-dhoka-saa-raha-hai/): तेरे आने का धोका सा रहा है दिया सा रात भर जलता रहा है, अजब है रात से - [वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए](https://bazmeshayari.com/wo-saahilo-pe-gaane-wale-kya-hue/): वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए वो कश्तियाँ चलाने वाले क्या हुए ? वो सुब्ह आते आते - [ये भी क्या शाम ए मुलाक़ात आई](https://bazmeshayari.com/ye-bhi-kya-shaam-e-mulaqaat-aayee/): ये भी क्या शाम ए मुलाक़ात आई लब पे मुश्किल से तेरी बात आई, सुब्ह से चुप हैं - [हुस्न को दिल में छुपा कर देखो](https://bazmeshayari.com/husn-ko-dil-me-chhupa-kar-dekho/): हुस्न को दिल में छुपा कर देखो ध्यान की शम्अ’ जला कर देखो, क्या ख़बर कोई दफ़ीना मिल - [ये रात तुम्हारी है चमकते रहो तारो](https://bazmeshayari.com/ye-raat-tumhari-hai-chamakate-raho-taaro/): ये रात तुम्हारी है चमकते रहो तारो वो आएँ न आएँ मगर उम्मीद न हारो, शायद किसी मंज़िल - [नए देस का रंग नया था](https://bazmeshayari.com/naye-des-ka-rang-naya-tha/): नए देस का रंग नया था धरती से आकाश मिला था, दूर के दरियाओं का सोना हरे समुंदर - [कोई और है नहीं तो नहीं मे रू ब रू कोई और है](https://bazmeshayari.com/koi-aur-hai-nahi-to-nahi-me-ru-ba-ru-koi-aur-hai/): कोई और है नहीं तो नहीं मे रू ब रू कोई और है बड़ी देर मैं तुझे देख - [ज़बाँ सुख़न को सुख़न बाँकपन को तरसेगा](https://bazmeshayari.com/zabaan-sukhan-ko-sukhan-baankpan-ko-tarsega/): ज़बाँ सुख़न को सुख़न बाँकपन को तरसेगा सुख़न कदा मेरी तर्ज़ ए सुख़न को तरसेगा, नए पियाले सही - [मुमकिन नहीं मता ए सुख़न मुझ से छीन ले](https://bazmeshayari.com/mumkin-nahi-mataa-e-sukhan-mujh-se-chheen-le/): मुमकिन नहीं मता ए सुख़न मुझ से छीन ले गो बाग़बाँ ये कुंज ए चमन मुझ से छीन - [फूल ख़ुश्बू से जुदा है अब के](https://bazmeshayari.com/phool-khushboo-se-juda-hai-ab-ke/): फूल ख़ुश्बू से जुदा है अब के यारो ये कैसी हवा है अब के ? दोस्त बिछड़े हैं - [पत्थर का वो शहर भी क्या था](https://bazmeshayari.com/patthar-ka-wo-shahar-bhi-kya-tha/): पत्थर का वो शहर भी क्या था शहर के नीचे शहर बसा था, पेड़ भी पत्थर फूल भी - [सुनाता है कोई भोली कहानी](https://bazmeshayari.com/sunaata-hai-koi-bholee-kahani/): सुनाता है कोई भोली कहानी महकते मीठे दरियाओं का पानी, यहाँ जंगल थे आबादी से पहले सुना है - [साज़ ए हस्ती की सदा ग़ौर से सुन](https://bazmeshayari.com/saaz-e-hastee-kee-sadaa-gaur-se-sun/): साज़ ए हस्ती की सदा ग़ौर से सुन क्यूँ है ये शोर बपा ग़ौर से सुन, दिन के - [ख़्वाब में रात हम ने क्या देखा](https://bazmeshayari.com/khwaab-me-raat-hum-ne-kya-dekha/): ख़्वाब में रात हम ने क्या देखा आँख खुलते ही चाँद सा देखा, कियारियाँ धूल से अटी पाईं - [बने बनाए हुए रास्तों पे जा निकले](https://bazmeshayari.com/bane-banaaye-hue-rasto-pe-jaa-nikale/): बने बनाए हुए रास्तों पे जा निकले ये हमसफ़र मेरे कितने गुरेज़ पा निकले, चले थे और किसी - [नसीब ए इश्क़ दिल ए बे क़रार भी तो नहीं](https://bazmeshayari.com/naseeb-e-ishq-dil-e-be-qarar-bhi-to-nahi/): नसीब ए इश्क़ दिल ए बे क़रार भी तो नहीं बहुत दिनों से तेरा इंतिज़ार भी तो नहीं, - [तेरी निगाह के जादू बिखरते जाते हैं](https://bazmeshayari.com/teri-nigaah-ke-jaadoo-bikharte-jaate-hain/): तेरी निगाह के जादू बिखरते जाते हैं जो ज़ख़्म दिल को मिले थे वो भरते जाते हैं, तेरे - [दफ़अ'तन दिल में किसी याद ने ली अंगड़ाई](https://bazmeshayari.com/dafaatan-dil-me-kisi-yaad-ne-lee-angdaaee/): दफ़अ’तन दिल में किसी याद ने ली अंगड़ाई इस ख़राबे में ये दीवार कहाँ से आई ? आज - [कारवाँ सुस्त राहबर ख़ामोश](https://bazmeshayari.com/kaarwaan-sust-raahbar-khamosh/): कारवाँ सुस्त राहबर ख़ामोश कैसे गुज़रेगा ये सफ़र ख़ामोश, तुझे कहना है कुछ मगर ख़ामोश देख और देख - [ये शब ये ख़याल ओ ख़्वाब तेरे](https://bazmeshayari.com/ye-shab-ye-khyaal-o-khwab-tere/): ये शब ये ख़याल ओ ख़्वाब तेरे क्या फूल खिले हैं मुँह अँधेरे, शोले में है एक रंग - [किसी का दर्द हो दिल बे क़रार अपना है](https://bazmeshayari.com/kisi-ka-dard-ho-dil-be-qarar-apna-hai/): किसी का दर्द हो दिल बे क़रार अपना है हवा कहीं की हो सीना फ़िगार अपना है, हो - [इन सहमे हुए शहरों की फ़ज़ा कुछ कहती है](https://bazmeshayari.com/in-sahme-hue-shaharon-kee-fazaa-kuch-kahti-hai/): इन सहमे हुए शहरों की फ़ज़ा कुछ कहती है कभी तुम भी सुनो ये धरती क्या कुछ कहती - [जब ज़रा तेज़ हवा होती है](https://bazmeshayari.com/jab-zara-tez-hawa-hoti-hai/): जब ज़रा तेज़ हवा होती है कैसी सुनसान फ़ज़ा होती है, हम ने देखे हैं वो सन्नाटे भी - [सर में जब इश्क़ का सौदा न रहा](https://bazmeshayari.com/sar-me-jab-ishq-ka-sauda-na-raha/): सर में जब इश्क़ का सौदा न रहा क्या कहें ज़ीस्त में क्या क्या न रहा, अब तो - [कल जिन्हें ज़िंदगी थी रास बहुत](https://bazmeshayari.com/kal-jinehn-zindagi-thee-raas-bahut/): कल जिन्हें ज़िंदगी थी रास बहुत आज देखा उन्हें उदास बहुत, रफ़्तगाँ का निशाँ नहीं मिलता एक रही - [दर्द कम होने लगा आओ कि कुछ रात कटे](https://bazmeshayari.com/dard-kam-hone-laga-aao-ki-kuch-raat-kate/): दर्द कम होने लगा आओ कि कुछ रात कटे ग़म की मीआ’द बढ़ा जाओ कि कुछ रात कटे, - [यूँ तेरे हुस्न की तस्वीर ग़ज़ल में आए](https://bazmeshayari.com/yun-tere-husn-kee-tasveer-gazal-me-aaye/): यूँ तेरे हुस्न की तस्वीर ग़ज़ल में आए जैसे बिल्क़ीस सुलेमाँ के महल में आए, जब्र से एक - [तेरे मिलने को बेकल हो गए हैं](https://bazmeshayari.com/tere-milne-ko-bekal-ho-gaye-hain/): तेरे मिलने को बेकल हो गए हैं मगर ये लोग पागल हो गए हैं, बहारें ले के आए - [कब तलक मुद्दआ कहे कोई](https://bazmeshayari.com/kab-talak-muddaa-kahe-koee/): कब तलक मुद्दआ कहे कोई न सुनो तुम तो क्या कहे कोई ? ग़ैरत ए इश्क़ को क़ुबूल - [अव्वलीं चाँद ने क्या बात सुझाई मुझ को](https://bazmeshayari.com/avvalee-chaand-ne-kya-baat-sujhaaee-mujh-ko/): अव्वलीं चाँद ने क्या बात सुझाई मुझ को याद आई तेरी अंगुश्त ए हिनाई मुझ को, सर ए - [कुछ तो एहसास ए ज़ियाँ था पहले](https://bazmeshayari.com/kuch-to-ehsas-e-ziyaan-tha-pahle/): कुछ तो एहसास ए ज़ियाँ था पहले दिल का ये हाल कहाँ था पहले, अब तो झोंके से - [याद आता है रोज़ ओ शब कोई](https://bazmeshayari.com/yaad-aata-hai-roz-o-shab-koi/): याद आता है रोज़ ओ शब कोई हम से रूठा है बे सबब कोई, लब ए जू छाँव - [गली गली आबाद थी जिन से कहाँ गए वो लोग](https://bazmeshayari.com/gali-gali-aabaad-thi-jin-se-kahan-gaye-wo-log/): गली गली आबाद थी जिन से कहाँ गए वो लोग दिल्ली अब के ऐसी उजड़ी घर घर फैला - [भला कब मैं निशाने पर नहीं आया](https://bazmeshayari.com/bhalaa-kab-main-nishaane-par-nahi-aaya/): भला कब मैं निशाने पर नहीं आया मेरे हाथों में पर पत्थर नहीं आया, मैं तौबा दोस्ती से - [बहुत पेपर पे छपने हैं तो ठप्पा काट लेते हैं](https://bazmeshayari.com/bahut-paper-pe-chhapne-hai-to-thappa-kaat-lete-hain/): बहुत पेपर पे छपने हैं तो ठप्पा काट लेते हैं पिता जी मर गए हैं तो अँगूठा काट - [बे सबब ही इधर उधर जाता](https://bazmeshayari.com/be-sabab-hee-idhar-udhar-jaata/): बे सबब ही इधर उधर जाता तुम नहीं होते तो बिखर जाता, फूल की तरह तुम अगर खिलते - [ख़ुदा के घर सड़क कोई नहीं जाती](https://bazmeshayari.com/khuda-ke-ghar-sadak-koi-nahi-jaati/): ख़ुदा के घर सड़क कोई नहीं जाती चलो पैदल वहाँ लॉरी नहीं जाती, चली जाती है हँसने और - [सब पुराने ख़याल बदलो यार](https://bazmeshayari.com/sab-puraane-khyaal-badlo-yaar/): सब पुराने ख़याल बदलो यार वक़्त बदला है साल बदलो यार, मात हर बार थोड़ी खाऊँगा वक़्त के - [कोशिशें कर लो मैं बादल नहीं होने वाला](https://bazmeshayari.com/koshishe-kar-lo-main-badal-nahi-hone-wala/): कोशिशें कर लो मैं बादल नहीं होने वाला बरसों बे वज्ह यूँ पागल नहीं होने वाला, शर्त ये - [ख़ुद को बीमार मत किया कर यार](https://bazmeshayari.com/khud-ko-bimar-mat-kiya-kar-yaar/): ख़ुद को बीमार मत किया कर यार डूब कर प्यार मत किया कर यार, जब मदद चाहे कोई - [इश्क़ से दिल को ऊबा देखा](https://bazmeshayari.com/ishq-se-dil-ko-ubaa-dekha/): इश्क़ से दिल को ऊबा देखा जिस्म का जब से सौदा देखा, भूका हम ने राजा देखा सागर - [शजर जिस पे मैं रहता हूँ उसे काटा नहीं करता](https://bazmeshayari.com/shajar-jis-pe-main-rahta-hoon-use-kaata-nahi-karta/): शजर जिस पे मैं रहता हूँ उसे काटा नहीं करता मैं आतिश मुल्क से सपने में भी धोका - [बात बच्चों की थी लड़ने को सियाने निकले](https://bazmeshayari.com/baat-bachcho-kee-thi-ladne-ko-siyaane-nikale/): बात बच्चों की थी लड़ने को सियाने निकले फिर अजब क्या है कि बच्चे भी लड़ाके निकले, ध्यान - [उल्फ़तों का ख़ुदा नहीं हूँ मैं](https://bazmeshayari.com/ulfaton-ka-khuda-nahi-hoon-main/): उल्फ़तों का ख़ुदा नहीं हूँ मैं रंज ओ ग़म से जुदा नहीं हूँ मैं, एक अर्सा हुआ गए - [दर्द से दिल ने वास्ता रखा](https://bazmeshayari.com/dard-se-dil-ne-vaasta-rakha/): दर्द से दिल ने वास्ता रखा वक़्त बदलेगा हौसला रखा, रो दिए मेरे हाल पे पंछी चुगने जब - [दिल में है क्या अज़ाब कहे तो पता चले](https://bazmeshayari.com/dil-me-hai-kya-azaab-kahe-to-pata-chale/): दिल में है क्या अज़ाब कहे तो पता चले दीवार ख़ामोशी की ढहे तो पता चले, सब कुछ - [क्या है ऊँचाई मोहब्बत की बताते जाओ](https://bazmeshayari.com/kya-hai-unchaaee-mohabbat-kee-batate-jaao/): क्या है ऊँचाई मोहब्बत की बताते जाओ पंछियों उड़ के यूँ ही ख़्वाब दिखाते जाओ, पेड़ पत्थर का - [काश मैं तुझ सा बेवफ़ा होता](https://bazmeshayari.com/kaash-main-tujh-saa-bewafa-hota/): काश मैं तुझ सा बेवफ़ा होता फिर मुझे तुझ से क्या गिला होता ? इश्क़ होता है क्या - [इस जादा ए उश्शाक़ की तक़दीर अजब है](https://bazmeshayari.com/is-jaada-e-ushshaaq-kee-taqdeer-azab-hai/): इस जादा ए उश्शाक़ की तक़दीर अजब है मुट्ठी में जहाँ पाँव में ज़ंजीर अजब है, बे वक़अत - [गले से देर तलक लग के रोएँ अब्र ओ सहाब](https://bazmeshayari.com/gale-se-der-talak-lag-ke-royen-abr-o-sahaab/): गले से देर तलक लग के रोएँ अब्र ओ सहाब हटा दिए हैं ज़मान ओ मकाँ के हम - [दस्त ए मुनइम मेरी मेहनत का ख़रीदार सही](https://bazmeshayari.com/dast-e-munaeem-meri-mehnat-ka-kharidar-sahi/): दस्त ए मुनइम मेरी मेहनत का ख़रीदार सही कोई दिन और मैं रुस्वा सर ए बाज़ार सही, फिर - [सिखाएँ दस्त ए तलब को अदा ए बेबाकी](https://bazmeshayari.com/sikhaayen-dast-e-talab-ko-adaa-e-babakee/): सिखाएँ दस्त ए तलब को अदा ए बेबाकी पयाम ए ज़ेर लबी को सला ए आम करें, ग़ुलाम - [वो जिस पे तुम्हें शम ए सर ए रह का गुमाँ है](https://bazmeshayari.com/wo-jis-pe-tumhen-sham-e-sar-e-rah-ka-gumaan-hai/): वो जिस पे तुम्हें शम ए सर ए रह का गुमाँ है वो शो’ला ए आवारा हमारी ही - [आबला पा कोई गुज़रा था जो पिछले सन में](https://bazmeshayari.com/aabla-paa-koi-guzaara-tha-jo-pichhle-san-me/): आबला पा कोई गुज़रा था जो पिछले सन में सुर्ख़ काँटों की बहार आई है अब के बन - [जुनून ए दिल न सिर्फ़ इतना कि एक गुल पैरहन तक है](https://bazmeshayari.com/junun-e-dil-na-sirf-itna-ki-ek-gul-pairahan-tak-hai/): जुनून ए दिल न सिर्फ़ इतना कि एक गुल पैरहन तक है क़द ओ गेसू से अपना सिलसिला - [हों जो सारे दस्त ओ पा हैं ख़ूँ मैं नहलाए हुए](https://bazmeshayari.com/ho-jo-saare-dast-o-paa-hain-khoon-me-nahlaaye-hue/): हों जो सारे दस्त ओ पा हैं ख़ूँ मैं नहलाए हुए हम भी हैं ऐ दिल बहाराँ की - [जिस दम ये सुना है सुब्ह ए वतन महबूस फ़ज़ा ए ज़िंदाँ में](https://bazmeshayari.com/jis-dam-ye-suna-hai-subh-e-watan-mahbus-fazaa-e-zindaan-me/): जिस दम ये सुना है सुब्ह ए वतन महबूस फ़ज़ा ए ज़िंदाँ में जैसे कि सबा ऐ हम - [मेरे पीछे ये तो मुहाल है कि ज़माना गर्म ए सफ़र न हो](https://bazmeshayari.com/mere-pichhe-ye-to-muhaal-hai-ki-zamana-garm-e-safar-na-ho/): मेरे पीछे ये तो मुहाल है कि ज़माना गर्म ए सफ़र न हो कि नहीं मेरा कोई नक़्श - [दस्त ए पुर ख़ूँ को कफ़ ए दस्त ए निगाराँ समझे](https://bazmeshayari.com/dast-e-pur-khoon-ko-kaf-e-dast-e-nigaaraan-samjhe/): दस्त ए पुर ख़ूँ को कफ़ ए दस्त ए निगाराँ समझे क़त्ल गह थी जिसे हम महफ़िल ए - [मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है](https://bazmeshayari.com/mujh-se-kaha-zibreel-e-junoon-ne-ye-bhi-vahee-e-ilaahi-hai/): मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है मज़हब तो बस मज़हब ए - [ब नाम ए कूचा ए दिलदार गुल बरसे कि संग आए](https://bazmeshayari.com/ba-naam-e-koocha-e-dildar-gul-barse-ki-sang-aaye/): ब नाम ए कूचा ए दिलदार गुल बरसे कि संग आए हँसा है चाक ए पैराहन न क्यूँ - [जल्वा ए गुल का सबब दीदा ए तर है कि नहीं](https://bazmeshayari.com/jalwa-e-gul-ka-sabab-deedaa-e-tar-hai-ki-nahi/): जल्वा ए गुल का सबब दीदा ए तर है कि नहीं मेरी आहों से बहाराँ की सहर है - [अदा ए तूल ए सुख़न क्या वो इख़्तियार करे](https://bazmeshayari.com/adaa-e-tool-e-sukhan-kya-wo-ikhtiyaar-kare/): अदा ए तूल ए सुख़न क्या वो इख़्तियार करे जो अर्ज़ ए हाल ब तर्ज़ ए निगाह ए - [वो तो गया ये दीदा ए ख़ूँ बार देखिए](https://bazmeshayari.com/wo-to-gaya-ye-deeda-e-khoon-baar-dekhiye/): वो तो गया ये दीदा ए ख़ूँ बार देखिए दामन पे रंग ए पैरहन ए यार देखिए, दिखला - [डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को](https://bazmeshayari.com/dara-ke-mauj-o-talatum-se-hum-nasheeno/): डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को यही तो हैं जो डुबोया किए सफ़ीनों को, जमाल - [सब्ज़ हिकायत सुर्ख़ कहानी](https://bazmeshayari.com/sabz-hiqayat-surkh-kahani/): सब्ज़ हिकायत सुर्ख़ कहानी तेरे आँचल की मेहमानी, सहज सहज उस हुस्न का चलना उस पे अंधी शब - [कहानियों ने ज़रा खींच कर बदन अपने](https://bazmeshayari.com/kahaniyon-ne-zara-kheench-kar-badan-apne/): कहानियों ने ज़रा खींच कर बदन अपने हरम सरा से बुलाया हमें वतन अपने, खुले गले की क़मीसें - [कँवल जो वो कनार ए आबजू न हो](https://bazmeshayari.com/kanval-jo-wo-kanaar-e-aabjoo-na-ho/): कँवल जो वो कनार ए आबजू न हो किसी भी अप्सरा से गुफ़्तुगू न हो, क़ज़ा हुआ है - [दिल यार का तख़्त हुआ ही नहीं](https://bazmeshayari.com/dil-yaar-ka-takht-hua-hi-nahin/): दिल यार का तख़्त हुआ ही नहीं जीवन ख़ुश बख़्त हुआ ही नहीं, इसे तोड़ना भी तो नर्मी - [सिसकियों हिचकियों आहों की फ़रावानी में](https://bazmeshayari.com/siskiyon-hichkiyon-aahon-kee-farawani-me/): सिसकियों हिचकियों आहों की फ़रावानी में उलझनें कितनी हैं इस इश्क़ की आसानी में, ये तेरे बालों का - [ये तेरे हुस्न का आवेज़ा जो महताब नहीं](https://bazmeshayari.com/ye-tere-husn-ka-aaveza-jo-mahtab-nahin/): ये तेरे हुस्न का आवेज़ा जो महताब नहीं का’बा ए इश्क़ नहीं रौज़ा ए यक ख़्वाब नहीं, एक - [सर को आवाज़ से वहशत ही सही](https://bazmeshayari.com/sar-ko-aawaz-se-wahshat-hi-sahi/): सर को आवाज़ से वहशत ही सही और वहशत में अज़िय्यत ही सही, ख़ाक ज़ादी तेरे उश्शाक़ बहुत - [लहू रगों में सँभाला नहीं गया मुझ से](https://bazmeshayari.com/lahoo-rago-me-sambhaala-nahi-gaya-mujh-se/): लहू रगों में सँभाला नहीं गया मुझ से किसी दिशा में उछाला नहीं गया मुझ से, सुडौल बाँहों - [लहू में रंग ए सुख़न उस का भर के देखते हैं](https://bazmeshayari.com/lahoo-me-rang-e-sukhan-us-ka-bhar-ke-dekhte-hain/): लहू में रंग ए सुख़न उस का भर के देखते हैं चराग़ बाम से जिस को उतर के - [ख्याल था कि तुझे पा के ख़ुद को ढूँढेंगे ](https://bazmeshayari.com/khyaal-tha-ki-tujhe-paa-ke-khud-ko-dhoondhenge/): ख्याल था कि तुझे पा के ख़ुद को ढूँढेंगे तू मिल गया है तो ख़ुद अपनी ज़ात से - [आख़िर ग़म ए जानाँ को ऐ दिल बढ़ कर ग़म ए दौराँ होना था](https://bazmeshayari.com/aakhir-gam-e-jaanaan-ko-ae-dil-badh-kar-gam-e-dauraan-hona-tha/): आख़िर ग़म ए जानाँ को ऐ दिल बढ़ कर ग़म ए दौराँ होना था इस क़तरे को बनना - [जो समझाते भी आ कर वाइज़ ए बरहम तो क्या करते](https://bazmeshayari.com/jo-samjhaate-bhi-aa-kar-vaaieez-e-barham-to-kya-karte/): जो समझाते भी आ कर वाइज़ ए बरहम तो क्या करते हम इस दुनिया के आगे उस जहाँ - [शिगाफ़ ए ख़ाना ए दिल से ही रौशनी आई](https://bazmeshayari.com/shigaaf-e-khana-e-dil-se-hi-raushni-aayi/): शिगाफ़ ए ख़ाना ए दिल से ही रौशनी आई उसे तो आना था हर हाल में चली आई, - [जब शहर ए दिल में पड़ गए उस ज़र बदन के पाँव](https://bazmeshayari.com/jab-shahar-e-dil-me-pad-gaye-us-zar-badan-ke-paanv/): जब शहर ए दिल में पड़ गए उस ज़र बदन के पाँव पड़ते नहीं ज़मीन पे अब इस - [है ख़ुशी से किस तरह ग़म का ख़सारा देखिए](https://bazmeshayari.com/hai-khushi-se-kis-tarah-gam-ka-khasaara-dekhiye/): है ख़ुशी से किस तरह ग़म का ख़सारा देखिए आसमान ए यास पर उगता सितारा देखिए, आप गर - [जंगलों में जो ख़ुदा तितलियाँ महफ़ूज़ रखे](https://bazmeshayari.com/jungalon-me-jo-khuda-titliyan-mahfooz-rakhe/): जंगलों में जो ख़ुदा तितलियाँ महफ़ूज़ रखे तो ज़माने में वही लड़कियाँ महफ़ूज़ रखे, मैं ने एक फ़स्ल - [क्या अंधेरा है क्या उजाला है](https://bazmeshayari.com/kya-andhera-hai-kya-ujala-hai/): क्या अंधेरा है क्या उजाला है ये नज़रिये का बस हवाला है, रंग बस एक ही है दुनिया - [सूरज उस के घर की कोई खिड़की है](https://bazmeshayari.com/sooraj-us-ke-ghar-kee-koi-khidaki-hai/): सूरज उस के घर की कोई खिड़की है सुब्ह खुले तो शाम को बँद हो जाती है, नस्ल - [हम ने कब चाहा कि वो शख़्स हमारा हो जाए](https://bazmeshayari.com/hum-ne-kab-chaha-ki-wo-shakhs-humara-ho-jaaye/): हम ने कब चाहा कि वो शख़्स हमारा हो जाए इतना दिख जाए कि आँखों का गुज़ारा हो - [एक छोटा सा ख़्वाब था जो पूरा नहीं हुआ](https://bazmeshayari.com/ek-chhota-saa-khwab-tha-jo-poora-nahin-hua/): एक छोटा सा ख़्वाब था जो पूरा नहीं हुआ वो शख्स मेरा हो कर भी मेरा नहीं हुआ, - [दार ओ रसन पे हर कोई मंसूर तो नहीं](https://bazmeshayari.com/daar-o-rasan-pe-har-koi-mansoor-to-nahin/): दार ओ रसन पे हर कोई मंसूर तो नहीं झुलसे हुए पहाड़ सभी तूर तो नहीं, ईसा नफ़स - [भटकता हूँ मगर खोया नहीं हूँ](https://bazmeshayari.com/bhatakta-hoon-magar-khoya-nahi-hoon/): भटकता हूँ मगर खोया नहीं हूँ बनाई राह पे चलता नहीं हूँ, मुझे रंगने की कोशिश मत करो - [वस्ल की आख़िरी मंज़िल है फ़ना हो जाना](https://bazmeshayari.com/vasl-kee-aakhiri-manzil-hai-fana-ho-jaana/): वस्ल की आख़िरी मंज़िल है फ़ना हो जाना तुझ से मिल कर तेरे बंदे का ख़ुदा हो जाना, - [अपना तुम्हें बनाना था कह कर बना लिया](https://bazmeshayari.com/apna-tumhen-banana-tha-kah-kar-bana-liya/): अपना तुम्हें बनाना था कह कर बना लिया तर्ज़ ए वफ़ा का एक नया दफ़्तर बना लिया, दुनिया - [मुझे यक़ीं है कोई रास्ता तो निकलेगा](https://bazmeshayari.com/mujhe-yaqeen-hai-koi-raasta-to-nikalega/): मुझे यक़ीं है कोई रास्ता तो निकलेगा अगर जो कुछ नहीं निकला ख़ुदा तो निकलेगा, मैं रेगज़ारों में - [रस्सी तो जल गई मगर ऐंठन नहीं गई](https://bazmeshayari.com/rassi-to-jal-gayi-magar-aiethan-nahi-gayi/): रस्सी तो जल गई मगर ऐंठन नहीं गई चाहत तुम्हारी यूँ दम ए कुश्तन नहीं गई, तुम चाहते - [बढ़ कर किसी से हाथ मिलाने नहीं गए](https://bazmeshayari.com/badh-kar-kisi-se-haath-milaane-nahi-gaye/): बढ़ कर किसी से हाथ मिलाने नहीं गए तेवर वही हैं अब भी पुराने नहीं गए, दालान अपनी - [चुना था उन की मोहब्बत ने आज़मा के मुझे](https://bazmeshayari.com/chuna-tha-un-kee-mohabbat-ne-aazmaa-ke-mujhe/): चुना था उन की मोहब्बत ने आज़मा के मुझे सुपुर्द ए ख़ाक किया आदमी बना के मुझे, मैं - [शमअ से ये कह रही है ख़ाक ए परवाना अभी](https://bazmeshayari.com/shama-se-ye-kah-rahi-hai-khaaq-e-parwana-abhi/): शमअ से ये कह रही है ख़ाक ए परवाना अभी रात आख़िर हो गई बाक़ी है अफ़्साना अभी, - [मोहब्बत में शब ए तारीक ए हिज्राँ कौन देखेगा ?](https://bazmeshayari.com/mohabbat-me-shab-e-tareeq-e-hizraan-kaun-dekhega/): मोहब्बत में शब ए तारीक ए हिज्राँ कौन देखेगा हमीं देखेंगे ये ख़्वाब ए परेशाँ कौन देखेगा ? - [मोहब्बत एहतिमाम ए दार भी है](https://bazmeshayari.com/mohabbat-ehtimam-e-daar-bhi-hai/): मोहब्बत एहतिमाम ए दार भी है मोहब्बत मिस्र का बाज़ार भी है, मोहब्बत मुस्तक़िल आज़ार भी है ये - [रुख़ हर एक तीर ए नज़र का है मेरे दिल की तरफ़](https://bazmeshayari.com/rukh-har-ek-teer-e-nazar-ka-hai-mere-dil-kee-taraf/): रुख़ हर एक तीर ए नज़र का है मेरे दिल की तरफ़ आने वाले आ रहे हैं अपनी - [हज़ार रंज हो दिल लाख दर्द मंद रहे](https://bazmeshayari.com/hazar-ranj-ho-dil-laakh-dard-mand-rahe/): हज़ार रंज हो दिल लाख दर्द मंद रहे ख़याल पस्त न हो हौसला बुलंद रहे, ग़म ए फ़िराक़ - 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